06/04/2025
"प्रकृति कोई जादू नहीं करती, वह नियमों से चलती है।"
हम जब किसी झरने को गिरते देखते हैं, या आकाश में बिजली चमकती है, तो हमें लगता है मानो कोई अदृश्य शक्ति ये सब कर रही हो। लेकिन हकीकत ये है कि प्रकृति हर क्षण विज्ञान के नियमों का पालन कर रही होती है।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण, मैक्सवेल का विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत, आइंस्टीन का सापेक्षता का नियम — ये सब प्रकृति की भाषा हैं।
जो लोग कहते हैं कि "ये सब भगवान की मर्जी है", उन्हें शायद यह समझना चाहिए कि ईश्वर अगर है, तो वह विज्ञान के नियमों में छुपा हुआ है — कणों की गति में, समय के प्रवाह में, और ऊर्जा के संरक्षण में।
प्रकृति रहस्यमयी है, लेकिन समझ से परे नहीं।
ज़रूरत है एक जिज्ञासु दृष्टिकोण की — जो हर पेड़, हर तारे, हर कण से सवाल करे: "तुम ऐसे क्यों हो?"
और शायद, यही जिज्ञासा हमें एक दिन ब्रह्मांड के गूढ़तम रहस्यों तक पहुंचा दे।
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