25/10/2023
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है
सब्र रुख़्सत हो रहा है इज़्तिराब आने को है
क़ब्र पर किस शान से वो बे-नक़ाब आने को है
आफ़्ताब-ए-सुब्ह-ए-महशर हम-रिकाब आने को है
हाए कैसी कशमकश है यास भी है आस भी
दम निकल जाने को है ख़त का जवाब आने को है
ख़त के पुर्ज़े नामा-बर की लाश के हमराह हैं
किस ढिटाई से मिरे ख़त का जवाब आने को है
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है।।।
Musafir..