18/10/2024
पंजाब में दलितों को जमीन एलॉट की गई, जिस पर असेंबली में चौधरी छोटूराम की स्पीच।
राजस्व मंत्री (माननीय चौधरी सर छोटू राम) (उर्दू): महोदय, मैं एक संक्षिप्त भाषण देना चाहता हूँ जिसमें मैं कुछ माननीय सदस्यों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विचार करना चाहता हूँ। सबसे पहले मैं अपने द्वारा की गई टिप्पणियों पर विचार करूँगा।
माननीय मित्र सरदार गोपाल सिंह खालसा ने कहा कि स्वर्गीय सर सिकंदर हयात खान की मृत्यु के बाद अनुसूचित जातियों के लाभ के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया गया। मैं स्वर्गीय सर सिकंदर हयात खान के शासनकाल के दौरान और उसके बाद पंजाब सरकार ने इन लोगों के लिए क्या किया है, इसका विस्तृत विवरण देने का प्रस्ताव नहीं रखता। मुझे खुशी है कि मेरे माननीय मित्र ने स्वीकार किया कि स्वर्गीय सर सिकंदर के शासनकाल के दौरान अनुसूचित जातियों के लिए कुछ ठोस किया गया था। यदि उनका ध्यान एक पुस्तिका की ओर नहीं गया है, जिसकी एक प्रति मेरे हाथ में है, तो मैं उसे उन्हें भेंट करना चाहूंगा। इस पुस्तिका को पढ़ने पर उन्हें पता चलेगा कि 1940 से पहले उनके वर्ग के लिए कितना कुछ किया गया था। तब से लेकर अब तक उनके बीच लगभग 3,000 एकड़ जमीन वितरित की जा चुकी है। इसके अलावा, 1,000 एकड़ जमीन आपराधिक जनजातियों के सदस्यों के बीच वितरित की गई, जिनमें से पचहत्तर प्रतिशत उनके वर्ग के लोग हैं। मेरे माननीय मित्र ने शिकायत की है कि अनुसूचित जातियों के किसी भी सदस्य को एग्जेक्युटिव शपंक्ति में नियुक्त नहीं किया गया है। क्या मैं उन्हें यह बताने की स्वतंत्रता ले सकता हूं कि पिछले दो-तीन वर्षों से कार्यकारी पदों पर किसी हिंदू, मुसलमान, सिख या ईसाई की भर्ती नहीं हुई है? ये सभी पद उन लोगों के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं जो सेना में भर्ती हो चुके हैं। अब मैं बताऊंगा कि सरकार ने अतीत में अनुसूचित जातियों के लिए क्या किया है। यूनियनिस्ट सरकार के निर्णय के अनुसार उप-न्यायाधीश के पदों में से एक पद अनुसूचित जातियों में से किसी एक सज्जन की नियुक्ति से भरा गया था। यह पद उनके लिए आरक्षित था। सिंचाई विभाग में मुंशी और जिलेदार के पदों के लिए अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के लिए रिक्तियां आरक्षित थीं। ऐसा ही एक उम्मीदवार श्री इस्माइल परवेज़, उप रजिस्ट्रार और सहकारी समितियों के कार्यालय के माध्यम से मिला। उन्हें जिलेदार के रूप में नियुक्त किया गया। कुछ सप्ताह पहले ही उसी पद के लिए एक और का चयन किया गया था। अनुसूचित जातियों के एक सदस्य को उम्र की शर्त माफ करके मुंशी नियुक्त किया गया। गुड़गांव से एक को नायब तहसीलदार, रोहतक से एक को आबकारी उपनिरीक्षक तथा अंबाला से एक को गिरदावर नियुक्त किया गया।
(PLAD, वॉल्यूम। XXII, 10 मार्च, 1944, पृ. 488-494)
इस स्पीच को सिविल एंड मिलिट्री गजट अखबार ने दिनांक 11 मार्च, 1944, शनिवार, पृष्ठ 4 पर प्रकाशित किया था। जिसकी कटिंग फोटो में देख सकते हैं।
यूनियनिस्ट सरकार ने पंजाब में हर वर्ग के उत्थान के बहुत काम किया था, इसीलिए आज पंजाब और उससे अलग हुए सूबे तरक्की पर है। पर अफसोस ये है कि उनको कभी भी पूरी तरह से पढ़ाया ही नहीं गया। और आज जो ये गैप आया है यह सिर्फ उसी एक तरफा प्रचार का नतीजा है। यह तो खूब प्रचार किया जाता है कि चौधरी छोटूराम ने जमींदारों के लिए बहुत कुछ किया परंतु उससे आगे का कुछ नहीं बताया जाता कि उन्होंने मजलूम मजदूर तबके के लिए क्या कुछ किया, क्योंकि उन्होंने भी सिर्फ इतना ही सुना पढ़ा है। कभी किसी ने शोध करने की कोशिश ही नहीं की गई। हमने इसी उद्देश्य से 2015 में यूनियनिस्ट मिशन और सर छोटूराम वॉलंटियर कॉर्प्स की बुनियाद रखी थी कि उनकी नीतियों और कार्यों को आमजन तक पहुंचाएं। यह भी बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि "सर छोटूराम वॉलंटियर कॉर्प्स" संगठन चौधरी छोटूराम जी के समय का ही संगठन था। बीच में यूनियनिस्ट मिशन और सर छोटूराम वॉलंटियर कॉर्प्स की गतिविधियों को किन्हीं कारणों से विराम दे दिया जाता था, जिसको अब सुचारू रूप से शुरू किया जा रहा है।
आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख,
घर अँधेरा देख तू आकाश के तारे न देख,
वे सहारे भी नहीं अब जंग लड़नी है तुझे,
कट चुके जो हाथ उन हाथों में तलवारें न देख
–यूनियनिस्ट राकेश सिंह सांगवान