Stories By Ms
I'm Manjeet Singh.
हमारी ज्यादातर चिंताएं व्यर्थ की है ।
यह कहनी इस बात को भली भांति समझती है । की कैसे हम व्यर्थ की चिंताओं में डूबे रहने है । किंतु उनमें चिंतित होने वाली कोई बात ही नहीं होती ।
यह मनुष्य की प्रकृति है की वह हमेशा ही समस्याओं को बढ़ा- चढ़ा कर देखता है । चाहे समस्या उतनी बड़ी न हो। ओर जब हम उन समस्याओं के बारे जरूरत से ज्यादा सोचते है तो उससे मानसिक बीमारियो का भी सामना करना पड़ सकता है । ओर यह सोच मानसिक से कब शारीरिक हो जाती है पता ही नही चलता ।
इसलिए जरूरत है की व्यर्थ की समस्या/ चिंता से बचने की और वास्तविक समस्यायों के निवारण के बारे सोचने की न की मात्र चिंता के खोए रहने की ।
कर्म लौट कर जरूर आता है।
11/01/2023
सिद्धार्थ कैसे बने महात्मा बुद्ध।। महात्मा बुद्ध के जीवन का संक्षिप्त वर्णन ।। सिद्धार्थ कैसे बने महात्मा बुद्ध ।। महात्मा बुद्ध के जीवन का संक्षिप्त वर्णन।।
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