29/04/2016
रायपुर. बुलंद हौसलों के सामने कोई भी मुश्किल
नहीं टिक पाती। कैसा भी सपना या लक्ष्य क्यों
न हो, उसको हासिल करने में शारीरिक बाधा भी
आड़े नहीं आती। जज्बे और अथक परिश्रम से
राजधानी की दामिनी सेन ने कुछ ऐसा ही कर
दिखाया है, जो अच्छे-अच्छे नहीं कर पाते।
पैरों से बनाई पेंटिंग
दामिनी ने अपनी किस्मत अपने पैरों से लिखकर
बड़ा मुकाम हासिल किया है। रायपुर बिरगांव के
बंजारी माता स्कूल में 11वीं की छात्रा दामिनी
सेन का बचपन से ही दोनों हाथ नहीं हैं। उसे पढऩे-
लिखने के साथ चित्रकारी की ऐसी धुन सवार हुई
कि पहले तो पैरों की उंगलियों के बीच पेंट ब्रश
फंसाकर कीर्तिमान हासिल किया। फिर उसने
अपने साथियों के साथ मिलकर हजारों लोगों को
मोटीवेशन देकर दूसरा विश्व रिकार्ड बना दिया
है।
दामिनी के नाम दो विश्व रिकॉर्ड
हाथ नहीं होने के बाद भी कुदरत से लड़कर उसने एक
घंटे में 38 चित्र अपने पैरों से बना कर विश्व
कीर्तिमान हासिल किया है। अब उसकी प्रेरणा से
हजारों लोगों को प्रेरित कर एक और विश्व
रिकार्ड भी बनाया है। उसने साथ पढऩे वाले 10
साथियों के साथ मिलकर दामिनी मोटीवेशन ग्रुप
की शुरुआत की है।
जिसने 10 दिनों में 104 स्कूल कॉलेजों में जाकर
छात्र-छात्राओं को प्रेरित किया। इस तरह महज
17 साल की उम्र में दो विश्व रिकार्ड हासिल कर
लिया है। दामिनी सेन ने अपने पैरों से एक घंटे में 38
पेंटिंग बनाकर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया है। इस मजबूत
हौसले के सामने हर कोई कमजोर लगता है।
मां के साथ ने दी ताकत
बचपन से दामिनी की मां माधुरी ने ही उसे पैरों से
लिखना सिखाया था। पिता प्रेमदान ने भी
उसकी प्रतिभा को डूबने नहीं दिया, लेकिन
परिवार के लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि
उसकी बेटी अक्षमता को दरकिनार करके इतनी कम
उम्र में पूरे विश्व में नाम रौशन करेगी। माता-पिता
के चलते दामिनी न सिर्फ पैरों से लिख लेती है,
बल्कि पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी, कुकिंग जैसे ढेरों काम
में वो उस्ताद है। एक बेटी होने का कर्तव्य भी ये
बखूबी निभाती है। मां से सीखकर अब दामिनी
खाना भी बनाती है।
ये है विश्व रिकार्ड
विश्व रिकार्ड बनाने के लिए दामिनी ने एक पेंटिंग
को बनाने के लिए दो मिनट से भी कम का समय
लिया। उसके सामने एक घंटे में 30 पेंटिंग बनाने का
लक्ष्य दिया गया था। पैरों की उंगलियों में ब्रश
पकड़ कर उसने 38 पेंटिंग बनाकर सभी को चौंका
दिया।
इसके बाद उसकी उतकृष्ट प्रतिभा को देख कर स्कूल
के शिक्षकों ने दामिनी मोटीवेशन ग्रुप बनाया,
जिसमें दामिनी समेत 10 अन्य छात्रों ने 100
स्कूलों और 2 यूनिर्वसिटी व दो कॉलेजों में
मोटीवेशन क्लास ली। यह काम सिर्फ 10 दिन में
कर दिखाया। जिससे गोल्ड बुक ऑफ विश्व
रिकार्ड में उनका नाम दर्ज किया गया है।
आईएएस बनने का सपना
दामिनी ने पहले ही 10वीं में अपने पैरों से लिख कर
अपनी काबिलियत का परिचय देते हुए परीक्षा में
80 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए। जिसके बाद उसे
माध्यमिक शिक्षा मंडल से विशेष छात्रा का नाम
दिया गया था। दामिनी के पिता प्रेमलाल सेन
एक स्कूल में प्यून हैं। कठिन परिस्थितियों में खुद को
साबित करने वाली दामिनी का सपना आईएएस
ऑफिसर बनना है।