Mohammad Iqbal

Mohammad Iqbal

Share

accounts page, Computer programme MS office,Web design & tally prime, General knowledge Extra takecare weak students

20/11/2025

#खाने के आदाब #

20/11/2025

इस्लाम में खाने के आदाब (हदीस की रौशनी में)

“इस्लाम एक मुकम्मल ज़िंदगी का निज़ाम है—यहाँ तक कि खाने के भी आदाब सिखाए गए हैं।
सुन्नत के तरीके अपनाकर हर निवाला इबादत बन सकता है।

खाना शुरू बिस्मिल्लाह से… और खत्म अल्हम्दुलिल्लाह से!”






1. खाना शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना

रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“जब तुम में से कोई खाना खाए, तो बिस्मिल्लाह कहे। अगर शुरू में भूल जाए तो कहे:
بِسْمِ اللَّهِ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ”
(तिर्मिज़ी)

2. दाहिने हाथ से खाना

नबी ﷺ का फ़रमान:
“दाहिने हाथ से खाओ और दाहिने हाथ से पियो।”
(सहीह मुस्लिम)

3. अपने सामने की चीज़ से खाना

रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“बच्चे! अल्लाह का नाम लो, दाहिने हाथ से खाओ और अपने सामने से खाओ।”
(सहीह बुखारी)

4. खाने में सादगी और नफ़ासत

नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“आदम की औलाद सिर्फ़ कुछ निवालों पर क़ायम रह सकती है… पेट का एक तिहाई खाना, एक तिहाई पानी और एक तिहाई साँस के लिए होना चाहिए।”
(तिर्मिज़ी)

5. खाने में बेकार की बातों से बचना

खाने के वक़्त शांति और शुक्र के साथ खाना सुन्नत है।

6. दो लोगों का खाना तीन के लिए और तीन लोगों का खाना चार के लिए काफ़ी है

रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“दो लोगों का खाना तीन के लिए काफी है और तीन लोगों का खाना चार के लिए काफी है।”
(सहीह बुखारी)

7. खाना खत्म होने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहना

नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“जो व्यक्ति खाना खाकर कहे:
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا
अल्लाह उसके पिछले गुनाह माफ़ कर देता है।”
(तिर्मिज़ी)

8. खाने में नफ़ासत और शुक्रगुज़ारी

इस्लाम में खाने को गिराना, बर्बाद करना या उसके बारे में शिकायत करना मना है।
खाना मिले तो अल्लाह का शुक्र अदा करना सुन्नत है।

दोस्तों आपको मेरी जानकारी पसन्द आई हो तो आप मुझे Please 🥺 Like comment Share follow अवश्य करें धन्यवाद जी आप सभी को

19/11/2025

"इस्लाम में मां-बाप की ख़िदमत इबादत है। उनकी इज़्ज़त, मोहब्बत और फरमाँबरदारी जन्नत का रास्ता है। अल्लाह हम सब को अपने वालिदैन के हक़ सही तरह अदा करने की तौफ़ीक़ दे।"

#IslamicQuotes #ParentsInIslam #WalidainKeHaq #MaaBaapKiKhidmat #IslamicTeachings #QuranHadees

इस्लाम में मां-बाप के हक़

1. मां-बाप की आज्ञा मानना (इत्ते'आत)

अल्लाह ने क़ुरान में अपनी इबादत के तुरंत बाद मां-बाप की आज्ञा मानने का हुक्म दिया है।
"और माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो" — (कुरान 17:23)

2. नरमी से बात करना

क़ुरान कहता है:
"उनसे नरमी और आदर से बात करो"
यानी उनकी बात काटना, ऊँची आवाज़ में बोलना, ताना देना — सब मना है।

3. उनकी सेवा करना (ख़िदमत)

जब मां-बाप बूढ़े हो जाएं तो उनकी सेवा करना बहुत बड़ी नेकी है।

रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“जन्नत मां के कदमों के नीचे है।”
यानी मां की सेवा जन्नत का रास्ता है।

4. उनकी दुआ लेना

मां-बाप की दुआ क़ुबूल होती है और उनकी बददुआ बहुत ख़तरनाक होती है।

5. उनके लिए दुआ करना

कुरान में यह दुआ सिखाई गई है:
"ऐ मेरे रब! उनके साथ रहम का व्यवहार कर, जैसे उन्होंने बचपन में मेरी परवरिश की।"

6. उनको दुख न देना

हदीस:
"अल्लाह की रज़ा माता-पिता की रज़ा में है और अल्लाह की नाराज़गी माता-पिता की नाराज़गी में है।"

7. उनका खर्च चलाना (अगर जरूरत हो)

अगर मां-बाप कमज़ोर हों या कमाने में सक्षम न हों, तो बेटों पर उनका खर्च उठाना फ़र्ज़ है।

8. उनके सामने “उफ़” तक न कहना

कुरान कहता है:
“उन्हें ‘उफ़’ तक न कहो।”
यानी किसी भी तरह की नाफरमानी या तकलीफ देना मना है।

9. मरने के बाद भी उनकी इज्ज़त व हक़ जारी

उनकी क़ब्र की ज़ियारत

उनकी तरफ़ से सदक़ा देना

उनके दोस्तों और रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार करना

उनकी छोड़ी हुई अमानतें, कर्ज़ अदा करना

10. उनकी हर जायज़ बात मानना

हर ऐसी बात जो शरीअत के खिलाफ न हो, उसे मानना वाजिब है।

दोस्तों इस्लाम में मां के कदमों के नीचे जन्नत बताया है जिसने बुढ़ापे में मां बाप की खिदमत का मौका मिला वो बड़ा खुशकिस्मत है।

दोस्तों आपको मेरी जानकारी पसन्द आई हो तो आप मुझे Please 🥺 Like comment Share follow अवश्य करें धन्यवाद जी आप सभी लोगों को 19/11/2025

"इस्लाम में मां-बाप की ख़िदमत इबादत है। उनकी इज़्ज़त, मोहब्बत और फरमाँबरदारी जन्नत का रास्ता है। अल्लाह हम सब को अपने वालिदैन के हक़ सही तरह अदा करने की तौफ़ीक़ दे।" #IslamicQuotes #ParentsInIslam #WalidainKeHaq #MaaBaapKiKhidmat #IslamicTeachings #QuranHadees इस्लाम में मां-बाप के हक़ 1. मां-बाप की आज्ञा मानना (इत्ते'आत) अल्लाह ने क़ुरान में अपनी इबादत के तुरंत बाद मां-बाप की आज्ञा मानने का हुक्म दिया है। "और माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो" — (कुरान 17:23) 2. नरमी से बात करना क़ुरान कहता है: "उनसे नरमी और आदर से बात करो" यानी उनकी बात काटना, ऊँची आवाज़ में बोलना, ताना देना — सब मना है। 3. उनकी सेवा करना (ख़िदमत) जब मां-बाप बूढ़े हो जाएं तो उनकी सेवा करना बहुत बड़ी नेकी है। रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “जन्नत मां के कदमों के नीचे है।” यानी मां की सेवा जन्नत का रास्ता है। 4. उनकी दुआ लेना मां-बाप की दुआ क़ुबूल होती है और उनकी बददुआ बहुत ख़तरनाक होती है। 5. उनके लिए दुआ करना कुरान में यह दुआ सिखाई गई है: "ऐ मेरे रब! उनके साथ रहम का व्यवहार कर, जैसे उन्होंने बचपन में मेरी परवरिश की।" 6. उनको दुख न देना हदीस: "अल्लाह की रज़ा माता-पिता की रज़ा में है और अल्लाह की नाराज़गी माता-पिता की नाराज़गी में है।" 7. उनका खर्च चलाना (अगर जरूरत हो) अगर मां-बाप कमज़ोर हों या कमाने में सक्षम न हों, तो बेटों पर उनका खर्च उठाना फ़र्ज़ है। 8. उनके सामने “उफ़” तक न कहना कुरान कहता है: “उन्हें ‘उफ़’ तक न कहो।” यानी किसी भी तरह की नाफरमानी या तकलीफ देना मना है। 9. मरने के बाद भी उनकी इज्ज़त व हक़ जारी उनकी क़ब्र की ज़ियारत उनकी तरफ़ से सदक़ा देना उनके दोस्तों और रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार करना उनकी छोड़ी हुई अमानतें, कर्ज़ अदा करना 10. उनकी हर जायज़ बात मानना हर ऐसी बात जो शरीअत के खिलाफ न हो, उसे मानना वाजिब है। दोस्तों इस्लाम में मां के कदमों के नीचे जन्नत बताया है जिसने बुढ़ापे में मां बाप की खिदमत का मौका मिला वो बड़ा खुशकिस्मत है। दोस्तों आपको मेरी जानकारी पसन्द आई हो तो आप मुझे Please 🥺 Like comment Share follow अवश्य करें धन्यवाद जी आप सभी लोगों को

19/11/2025

"इस्लाम में मां-बाप की ख़िदमत इबादत है। उनकी इज़्ज़त, मोहब्बत और फरमाँबरदारी जन्नत का रास्ता है।

19/11/2025

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sandeep Kulria, Ravi Ravi, Shivam Keer

Want your school to be the top-listed School/college in Sharjah?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Website

Address


Sharjah