21/12/2016
हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (Haryana Staff Selection Commission) में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों पोस्ट के लिए लोगो से आवेदन लिया और कुछ दिनों के बाद मुख्य सचिव हरियाणा सरकार द्वारा आवेदन की अंतिम तिथी को बदलकर 31 दिसम्बर 2014 कर दिया गया (आर्डर की कॉपी साथ संगलित है) और जिस format में आवेदन माँगा गया था उसे सभी सूचनाये भरनी जरुरी थी, और 24 मार्च 2015 को हरियाणा के मुख्य सचिव द्वारा notification निकला गया जिसमे श्री भारत भूषण सुपुत्र श्री सतपाल निवासी कुरुक्षेत्र को चेयरमैन और नीलम अवास्ती निवासी पंचकुला को सदस्य, देवेंदर सिंह निवासी महेंद्रगढ़ को सदस्य, अमर नाथ सौदा निवासी करनाल को सदस्य, भोपाल सिंह निवासी यमुनानगर को सदस्य और विजय पाल सिंह निवासी जींद को सदस्य के तौर पर रखा गया।
अगर हम प्रोफाइल के हिसाब से बात करे तो भारत भूषण जी ने बीजेपी से पेहोवा विधानसभा से टिकट चाह रहे थे और बीजेपी सरकार ने उन्हें चुनाव के बाद हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग का चेयरमैन बना दिया।
अब अगर हम बात करे अयानिमताओ की तो हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की किसी भी पद के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथी 31 दिसम्बर 2014 थी और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन श्री भारत भूषण जी के आवेदन पर लिखी तारिख जोकि फॉर्म भरने की तारिख है वो 23 फ़रवरी 2015 है जिससे पता चलता है की भारत भूषण जी ने अंतिम तिथी के बाद आवेदन किया था और नीलम अवास्ती के फॉर्म पर यह तारिख 19 जनवरी 2015 है इसका मतलब ये है की ये दोनों फॉर्म अंतिम तिथी के बाद आये थे और जिन्हें स्वीकार कर लिया गया।
इसके अतिरिक्त अमर नाथ सौदा जी ने तारिख की जगह को खाली छोड़ा, जिससे इनके फॉर्म को अधुरा मान कर रिजेक्ट किया जाना चाहिये था लेकिन इससे भी स्वीकार कर लिया गया और इनकी अचीवमेंट है की इन्होने 5 साल जिला न्यायालय में प्रक्टिस की है।
इसी तरह भोपाल सिंह जी ने अपने आवेदन पर अपना फ़ोटो नहीं लगाया जिससे इनके फॉर्म को अधुरा मान कर रिजेक्ट किया जाना चाहिये था लेकिन इससे भी स्वीकार कर लिया गया।
कुल मिला कर 6 चुने गए लोगो में से केवल 2 आवेदन सही थे और उनका भी मोजूद दस्तावेजो के ये अंदाजा लगाना मुश्किल है की कही इन बचे दो आवेदनों को भी तो बैक तारीख में एंट्री करा कर तो 31 दिसम्बर के बाद तो नहीं लिया गया।
कमीशन में जयादातर लोग बीजेपी पार्टी के है और जब बीजेपी सरकार को अपने ही लोग गलत तरीके से लगाने थे तो बीजेपी सरकार ने जनता को बेवकूफ बना आवेदन क्यों लिए ?
कमीशन में लास्ट तारिख के बाद आवेदन क्यों स्वीकार किये गए ?
कमीशन में आये आवेदन पर गलत तारीख लिखने और तारिख न लिखने वाले आवेदन को क्यों रद्द नहीं किया गया ?
क्योकि कमीशन में लगभग 67 % मेम्बर जब गलत तरीके से भर्ती हुए है तो क्या उन्होंने सभी भर्तिया गलत तरीके से नहीं की होंगी ?
क्योकि कमीशन बनने से अब तक सारी भर्तिया इन गलत लोगो के रहते हुई है तो क्या इनकी प्रॉपर्टी की जाचं नहीं होगी ?
क्योकि नियुक्ति मुख्य सचिव हरियाणा सरकार के द्वारा की गई है जोकि CM हरियाणा के नीचे काम करते है तो क्या ये गड़बडिया खट्टर जी द्वारा ही करवाई गई है ?