08/04/2026
With heavy heart sharing this shocking and saddening news with all Maharishi Family members that very dear to all of us and respected Prof. Pramod Verma Ji, Vice Chancellor of Maharishi Mahesh Yogi Vedic Vishwavidyalaya has taken heavenly abode last night due to cardiac arrest. He was a great scientist, a great educator and visionary, a kind hearted humble happy soul and very much dedicated to his work. We met few days back and he has shared many effective plans for the development of the university and for the development of the Brahmsthan area around the university campus to uplift the life of villagers. He successfully got installed automatic whether station in campus for the benefit of farmers and citizens. I feel a great personal loss to me and great loss to Maharishi Organisation loosing Prof. Verma. I pray Bhagwan Shri Vishnu Ji to bless him providing place in his Vishnu Loka and give enough strength to all his family members to take his sudden demise as course of Nature. We will always cherish his sweet memories and will always cherish his unparalleled contribution to our organisation. I with all members of Maharishi Family are with the family with full sympathy. Om Shanti Shanti Shantihi.
अत्यंत भारी मन से महर्षि परिवार के सभी सदस्यों के साथ यह दुखद समाचार साझा कर रहे हैं कि हम सभी के प्रिय और आदरणीय महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर प्रमोद वर्मा जी का कल रात हृदयाघात के कारण स्वर्गवासी हो गए। वे एक महान वैज्ञानिक, महान शिक्षाविद और दूरदर्शी व्यक्ति थे, एक दयालु, विनम्र और प्रसन्न आत्मा थे और अपने कार्य के प्रति अत्यंत समर्पित थे। कुछ दिन पहले ही हमारी भेंट हुई थी और उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास और विश्वविद्यालय परिसर के आसपास ब्रह्मस्थान क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रभावी योजनाएँ साझा की थीं, जिनका उद्देश्य ग्रामीणों और जनसामान्य के जीवन स्तर को ऊपर उठाना था। उन्होंने किसानों और नागरिकों के लाभ के लिए परिसर में स्वचालित मौसम स्टेशन सफलतापूर्वक स्थापित करवाया था। प्रोफेसर वर्मा को खोने से हमें और महर्षि संस्थान को बहुत बड़ी व्यक्तिगत हानि हुई है। हम भगवान श्री विष्णु जी के श्री चरणों में प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें अपने विष्णु लोक में स्थान दें और उनके परिवार को इस आकस्मिक प्रयाण को प्रकृति की नियति मानकर स्वीकार करने की शक्ति प्रदान करें। इस दुःख की घड़ी में हम परिवार के साथ पूर्ण संवेदना के साथ उपस्थित हैं। हम उनकी मधुर स्मृतियों को सदा संजोकर रखेंगे और हमारे संगठन में उनके अतुलनीय योगदान को हमेशा याद रखेंगे। ॐ शांति शांति शांति
19/03/2026
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, ब्रह्मस्थान करौंदी कटनी में
सतत भूजल उपयोग के लिए जल प्रबंधन विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश चंद्र जी के कर कमलों द्वारा स्वचालित मौसम स्टेशन का लोकार्पण भी किया गया।
इस संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय तथा इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हाइड्रोलॉजिस्ट के भारतीय राष्ट्रीय चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गुरु पूजन से हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत उद्बोधन में कुलपति प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन वैश्विक चुनौती बन गया है। ऐसे में वैदिक ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने बताया कि भारतीय वैदिक साहित्य में जल को जीवन का मूल तत्व माना गया है। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलगुरु तथा वरिष्ठ जल वैज्ञानिकों का सम्मान किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलाधिपति वेद विद्या मार्तण्ड ब्रह्मचारी गिरीश चंद्र वर्मा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैदिक ग्रंथों में जल संरक्षण और उसके शुद्ध उपयोग के अनेक निर्देश मिलते हैं, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रो. ए.डी. सावंत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. ए.के. सिन्हा ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर विभिन्न जल वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया तथा शोध पत्र संकलन (स्मारिका), विश्वविद्यालय की आंतरिक त्रैमासिक पत्रिका “महर्षि वैदिक स्वर”, महर्षि विद्या मंदिर की वार्षिक ज्ञान पत्रिका एवं डॉ. रवि चौरे (सह प्राध्यापक, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय) द्वारा लिखित जल विषयक पुस्तक “जल चौपाल” का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. जे.पी. शुक्ला ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
19/03/2026
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
चैत्र नवरात्रि महापर्व की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं
जय गुरुदेव, जय महर्षि
ब्रह्मचारी गिरीश
19/03/2026
वैदिक नववर्ष, विक्रम संवत 2083, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च 2026 (गुरुवार) गुड़ी पड़वा एवं उगादी की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनायें
यह नवीन संवत्सर आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं आनंद लेकर आये।
जय गुरुदेव, जय महर्षि
महर्षि संस्थान भारत विजयन्तेतराम्
ब्रह्मचारी गिरीश
18/03/2026
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, ब्रह्मस्थान करौंदी कटनी में ‘Water Management’ पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के अवसर पर ब्रह्मचारी गिरीश चंद्र वर्मा जी ने कहा — भारतीय संस्कृति में जल को ‘आपः’ कहकर देवतुल्य माना गया है।
18/03/2026
वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से संभव होगा प्रभावी जल संरक्षण: ब्रह्मचारी गिरीश चंद्र वर्मा|
17/03/2026
जल संरक्षण के लिए सभी को मिल जुलकर करने होंगे प्रयास
(संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने रखी अपनी राय वैदिक मूल्यों को अपनाने पर फोकस)
वॉटर मैनेजमेंट फॉर सस्टेनेबल ग्राउंड वॉटर यूज, ए जर्नी फ्राम वैदिक एज टू मॉडर्न एज विषय पर महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय ब्रह्मस्थान करौंदी में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश चंद्र वर्मा द्वारा स्वचालित मौसम स्टेशन का लोकार्पण भी किया गया। इन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वैदिक ग्रंथों में जल संरक्षण और उसके शुद्ध उपयोग के अनेक निर्देश मिलते हैं, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज वैदिक मूल्यों को अपनाए तो जल संकट जैसी समस्याओं का समाधान संभव है।
इस संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय तथा इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हाइड्रो जियोलॉजिस्ट के भारतीय राष्ट्रीय चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा, प्रो. बी.एस. चौधरी, विशिष्ट अतिथि प्रो. एडी सावंत ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। अध्यक्षता कर रहे प्रो. एके सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण केवल वैज्ञानिकों या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके प्रति जागरूक होना होगा। कार्यक्रम के अंत में प्रो. जे.पी. शुक्ला ने आभार प्रदर्शन किया।