03/12/2016
न्यायालय की लड़ाई हमेशा ईगो त्याग कर लड़नी चाहिए। हालाँकि पैरवी ऐसी होनी चाहिए जैसे आपकी नौकरी का अंतिम दिन हो, ठीक वैसे ही जैसे कहते हैं कि जियो ऐसे जैसे आपके जीवन का अंतिम दिन हो। मैं आशावादी या निराशावादी होने के स्थान पर व्यवहारवादी होना पसन्द करता हूँ। कहने को मैं इस आदेश में भी सकारात्मकता खोज सकता हूँ लेकिन मैं जबर्दस्ती का आशावादी होने के स्थान पर वास्तविकता का व्यवहारवादी होना पसन्द करूँगा। व्यवहारिक होना, आशावाद और निराशावाद का संतुलित मिश्रण है।
टीईटी में 121 (80.67%) नम्बर पाकर भी मैं अकादमिक से हुए अपने चयन को बचाने हेतु समस्त प्रयास करने के विश्वास रखता हूँ न कि चुपचाप खाली बैठ कर, सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने का इंतजार करूँ। यहाँ लड़ाई ईगो की नहीं है, लड़ाई सही और गलत की भी नहीं है। लड़ाई नौकरी बचाने की है। हालाँकि नौकरी टीईटी मेरिट से या टीईटी वेटेज से भी मिल जाएगी, लेकिन क्या हम मेहनत और इंतजार के बाद पाई नौकरी को छोड़कर दुबारा चयन होने में लगने वाले समय को ऐसे ही खाली झेलने को तैयार हैं?
यदि बात करूँ आशावादी होने की तो एक सकारत्मकता अभी भी है और हमेशा रहेगी कि यदि पूर्णतया पात्र होकर भी अकादमिक भर्ती वाले बाहर हुए तो क्या पात्रता पूर्ण न करने वाले शिक्षा मित्र बचेंगे? केवल एक 9बी को फॉलो न करने से अवैध घोषित होने वाले बाहर होंगे और पूरे सर्विस रूल को न फॉलो करने वाले 72,825 चयनित नौकरी करेंगे? नहीं। कदापि नहीं। यदि 15वां और 16वां संशोधन रद्द किया है तब यह भी कहा है कि 15वां संशोधन रद्द होने का अर्थ यह नहीं हो गया कि 12वां संशोधन बहाल हो जाएगा। लेकिन मैं इस तरह की सोच रखना, कायरता समझता हूँ। यह सोच ऐसी हो गई कि हम अपनी हार से दुखी नहीं हैं बल्कि यह सोच कर खुश हैं कि चलो हम तो हारे लेकिन हमारा पड़ोसी भी हारा।
यदि बात करूँ राजनीतिक सन्दर्भ में, यह भी सत्य है कि अब मायावती सरकार भी आ जाए तब भी 100% टीईटी मेरिट नहीं बनाएगी, लेकिन क्या अकादमिक वाले अपने आपको ठगे जाने के बाद भी सपा सरकार के साथ रहना पसंद करेंगे? अकादमिक से चयन पाए लोग न चाहते हुए भी समाजवादी पार्टी को वोट करेंगे, यह ही राजनीति है, पहले आदमी ने लाभ पाने के लिए वोट दिया, अब नुकसान बचाने के लिए वोट देंगे।
अंत में यह कहूंगा, बिना अंत तक लड़े हार मानना कायरता है। नौकरी बड़ी मशक्कत और इंतजार से पाई है, यूँ खाली बैठ कर उसको जाते देखना मुझे गंवारा नहीं। साथ ही यह भी कहता हूँ, अगर अंत में डूबे भी तब बहुतों को साथ लेकर जाएंगे और फिर दोबारा शान से नौकरी में आएँगे।
हरि ॐ।।
- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)
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