07/07/2020
राजस्थान के सरकारी स्कूलों की सच्चाई को बयान करती एक लघु कहानी --
एक सरकारी स्कूल का हैड़मास्टर व एक अध्यापक जून की तपती दोपहर में मेरे घर का दरवाजा खटखटाते हैं |
मैंने दरवाजा खोला और प्रणाम किया | और बोला -
"आओ बैठोे ,साहब "
आज इतनी धूप में कैसे आना हुआ, साहब ?
हैड़मास्टर जी बोले - आप तो जानते,आजकल तो सरकार ने नौकरी करना बडा़ मुश्किल कर रखा है ,स्कूल में बच्चों का नामांकन बढाने का लक्ष्य दे रखा है | इसलिए घर- घर जाकर सम्पर्क करना पड़ रहा है | पता नहीं आजकल तो लोगों की मानसिकता कैसी हो गई है,कि सरकारी स्कूल में योग्य अध्यापक होते हुए भी निजी स्कूलो में पढा़ते है, निशुल्क शिक्षा, निशुल्क पोशाक व पुस्तक साथ में दोपहर में पौष्टिक भोजन भी दिया जाता है, और आप ने तो समाचार पत्रों में पढा़ होगा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकारी स्कूलों की बदहाली को सुधारने के लिए सरकार को ऐसा निर्देश दिया है, कि ऐसा कानून बनाए जिससे सभी जनप्रतिनिधियों व सरकारी कर्मचारियों को अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ाना अनिवार्य किया जाए |
अत: आप से विनती हैं ,कि आप हमारी बात पर अमल करेगे व बच्चे का दाखिला राजकीय विद्यालय में करवाएगे |
मैं बोला - हैड़मास्टर साहब! आप मेरे तीन सवालों का जवाब यदि सन्तुष्टि पूर्ण देते हैं, तो मैं आपकी बात पर विचार कर सकता हूं |
पहला तथ्य आप ने कहा सरकारी स्कूलों के योग्य शिक्षक होते हैं, तो मैं बता देना चाहता हूँ RPSC द्वारा आयोजित विगत शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के रिज़ल्ट जिसके आधार पर आप स्वंय निर्णय करेंगे कि सरकारी अध्यापक कितने योग्य है ?
उदाहरण (1) - तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा 2006 (उच्च प्राथमिक)
एस.टी.(टीएसपी) सामान्य = -8.00/200 अंक (ऋणात्मक)में चयनित
एस.टी.(टीएसपी)महिला =
-09.33/200अंक (ऋणात्मक)में चयनित
उदाहरण (2)- तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा 2006 (प्राथमिक)
एस.टी.( सामान्य) = 48.00/200(24.00%)अंक में चयनित
एस.टी. (महिला)=16.00/200(08.00%)अंक में चयनित
एस.टी.(टीएसपी)सामान्य =04.00/200(02.00%)अंक में चयनित
एस.टी.(टीएसपी)महिला = 01.33/200(0.66%)अंक पर चयनित
उदाहरण (3)- द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा 2011(गणित)
एस.सी.(महिला) = 111.48/500 (22.29% )अंक पर चयनित
एस.टी. (महिला) = 57.90/500(11.58%)अंक पर चयनित
उदाहरण (4)- प्रधानाध्यापक (स्कूल शिक्षा) 2012 भर्ती परीक्षा
एस.टी. (महिला) = 193.21/600 (32.20%)अंक पर चयनित
उदाहरण (5)-और सबसे नवीनतम परिणाम बता रहा हूँ -
व्याख्याता (भौतिक) स्कूल शिक्षा 2015 (परिणाम घोषित -12 जून 2017)
एस.टी.(सामान्य)= 50.76/450अंक (11.28%)अंक पर चयनित
एस. टी. (महिला)=16.47/450(3.66%)पर चयनित
उदाहरणों की सूची बहुत लम्बी हैं,लेकिन बात के मर्म को समझने के लिए पर्याप्त है |
(अधिक जानकारी के लिए आरपीएससी की साइट का अवलोकन कर सकते हैं )
जो अध्यापक स्वंय न्यूनतम उत्तीर्णांक (33%) अंक नही ला सके,वे बच्चों को कैसी शिक्षा देगे ये तो आप भी कल्पना कर सकते हैं ?
और सुनो रोचक तथ्य तो यह है, कि इन्ही भर्ती परीक्षाओं में सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार 60% से अधिक अंक लाकर चयनित नहीं हो पाए उन्होने ही निजी स्कूल खोल लिए या निजी विद्यालयों में पढा़ने लग गए हैं |जिसका परिणाम सबके सामने है!
अब आप स्वंय निर्णय करे योग्य कौन ?
दूसरा तथ्य आपका था,दोपहर का पौष्टिक भोजन -
तो इस पर भी मैं अपने दो शब्द कह देता हूँ, हैड़मास्टर साहब ! आप भूल गए इसी पौष्टिक भोजन ने बिहार के सारण जिले में जुलाई 2013 को 24 बच्चों को मौत की सुला दिया व 30 से अधिक बच्चें बीमार हो गए थे !
दैनिक समाचारो पत्रों में मिड़ डे मील की विवादग्रस्त खबरें छपना आम बात है |
आप स्वंय हिसाब लगा कर हमे बता सकते हैं कि सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालय तक प्रतिछात्र = 04.13 रू. व उच्च प्राथमिक के लिए प्रतिछात्र = 06.18 रू. का भुगतान किया जाता है | जिसमें खरीद,परिवहन व पकाना (रसोइया का वेतन व ईंधन) समस्त खर्चे इसी में शामिल हैं |
इससे हर सामान्य आदमी आंकलन कर सकता है कि चार रूपए व छ: रूपए में पौष्टिक भोजन मिल सकता है क्या ?
सच पूछो तो मिड़ डे मील ने शिक्षा में भ्रष्टाचार फैलाया है |
एक अध्यापक जिसे पढा़ने का वेतन मिलता हैं वह मिड़ डे मील का हिसाब लगाने में व्यस्त रहता है ,बच्चों का पढाई पर कम और खाने पर ज्यादा ध्यान रहता है |
तीसरा तथ्य आप ने कहा की इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि, सभी जनप्रतिनिधि व लोकसेवक अपने बच्चो को सरकारी स्कूलों पढा़ए,ऐसी नीति बनाई जाए अब आप मुझे बताए किसी मंत्री, सांसद या विधायक का बच्चा किसी सरकारी विद्यालय में पढ़ रहा है ?चलो छोडो़ यह बड़े स्तर की बात है, हम छोटे स्तर की बात करते है |
"आप के विद्यालय में कितने कर्मचारी कार्यरत है "?
हैड़मास्टर साहब - तेरह कर्मचारी
मैने कहा - तेरह कर्मचारियों में से किस - किस कर्मचारी के बच्चे सरकारी विद्यालय में पढ़ रहे हैं ?
हैड़मास्टर जी - मेरी जानकारी में तो मेरी स्कूल के किसी भी कर्मचारी का बच्चा सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ता हैं |
मैने कहा - आप क्यो नहीं पढा़ते सरकारी स्कूलों में बताओ ?
हैड़मास्टर जी - आप सब जानते हैं,साहब ! अब बताना क्या बाकी रह गया है |
मैने कहा - साहब ! मैं अपने बच्चो का दाखिला आप के स्कूल में करवाने के लिए तैयार हूँ ,लेकिन एक शर्त है कि आप सभी अध्यापकगण अपने बच्चो का भी एड़मिशन इसी सरकारी स्कूल में करवाए ?
प्रधानाध्यापक व साथी अध्यापक निरूत्तर थे,और जाने की इजाजत मांगी |
दोनों अध्यापक वार्तालाप करते हुए जा रहें हैं,कि मात्र तीन मुद्दो में तो सारी पोल खुल गई बाकी तो रह ही गए - अध्यापकों की कमी, कर्मचारीयों का देर से आना व जल्दी चले जाना, पढाने में रूचि नही लेना,मोबाइल में समय बिताना,कम्युटर शिक्षा,पार्ट टाइम जोब,घर पर ट्यूशन का ध्यान, शुद्ध पानी, बिजली व पंखे, कक्षा कक्षों की कमी इत्यादि !
जन हित में जारी