चाहतो के सिलसिले ओर बेखुदी ज़रा ज़रा ,
वो मुख़्तासीर सी ख्वाहिशे ओर आशिक़ी ज़रा
ज़रा..
ये दूरिया नज़दीकिया सब कहने सुनने की
बात हैं ,
हैं लफ़्ज़ों में भी फासले ओर बंदगी ज़रा
ज़रा..
किस अदा से मांग लूँ के मिल जाये मेरी खुशियाँ
मुझे ,
एक दुआ मुन्तज़िर - ए - लब और लफ्ज़ ज़रा ज़रा..
कांच के ये ख्वाब हैं पलके खुली तो कुछ
नहीं ,
बड़ी हसरते हैं जीने की और ज़िन्दगी ज़रा
ज़रा
"**Råâb $ê $öhnä £é$hQ hè**".
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♫ •*•.¸¸�� ωєℓ¢σмє тσ συя ραgє...•*•.¸¸�� PLz joiN My PaGe
10/31/2021
फूल का सबाब क्या,
हुस्न-ए-माहताब क्या,
आप तो बस आप हैं
आपका जवाब क्या,
जुल्फों से खेले महकी हवाये
उफ ये जवानी उफ ये अदाएं
सुर्ख लबो के सामने शोक-ए- गुलाब क्या,
आप तो बस आप हैं
आपका जवाब क्या,
आंखों में तौबा कितना नशा हैं
मैं क्या ये मौसम भी बहका हुआ हैं
ऐसी ये मस्तिया लाएगी कोई शराब क्या,,,,,
आप तो बस आप हैं
आपका जवाब क्या..............
जो तेरे गुलाबी लब मेरे लबों को छू जायें,
मेरी रूह का मिलन तेरी रूह से हो जाये,
ज़माने की साज़िशों से बेपरवाह हो जायें,
मेरे ख्वाब कुछ देर तेरी बाहों में सो जायें,
मिटा कर फ़ासले हम प्यार में खो जायें,
आ कुछ पल के लिये एक-दूजे के हो जायें।.....
~~~~~वीर~~~~~~
07/16/2020
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