Scam
Scanner study
हमारा कंटेन्ट ही हमारी पहचान यह एक चैनल नही है यह एक परिवार है आपकी सफलता मेरी जीत ।
08/06/2023
इतने तो पद ही नहीं थे जितने कोचिंग वाले बता देते है कि हमारे इतने हुए हमारे इतने हुए
2 कोचिंग वाले आज 1 ही पेज पर न्यूज आयी हैं देख कर हैरानी हुई सैम स्टूडेंट को दोनों कोचिंग मे दिखा दिया है 1 कोचीन bale बोल रही हैं हमसे पढाई की दूसरा बोल रहा हैं हमारे से पढाई की
क्या फंडा है ये
कुछ किस्म जो T से शुरु होती है
T 59 सरसों
T 9 उड़द
T 27 तारा मीरा
T 36 सरसों
T 151 सरसों
T 10 टमाटर
TN 1 धान
T 141 धान
T 3 धान
07/09/2023
बलात्कार की जननी
आज 18 वर्ष की आयु विवाह के लिए वालिग मानी जाती है। पर भारत का रूढ़ि वादी वर्ग 12 वर्ष की सहवास आयु पर ही अडिग था।
1860 में यह आयु 10 वर्ष थी। इसके 30 साल बाद 1891 में यह आयु 12 वर्ष की गयी। 34 साल तक इसमें कोई परिवर्तन नहीं होने दिया गया। इसके बाद 1922 में तब की केंद्रीय विधान सभा में 13 वर्ष का बिल लाया गया। पर धर्म के ठेकेदारों के भारी विरोध के कारण वह पास ही नहीं हुआ।
1924 में हरी सिंह गौड़ ने बिल पेश किया। वह सहवास की आयु 14 वर्ष चाहते थे। इस बिल का सबसे ज्यादा विरोध मदन मोहन मालवीय ने किया था, जिसके लिए 'चाँद' पत्रिका ने उनपर लानत भेजी थी। अंत में सिलेक्ट कमेटी ने 13 वर्ष पर सहमति दी और इस तरह 1925 में 34 वर्ष बाद 13 वर्ष की सहवास आयु का बिल पास हुआ था।
6 से 12 वर्ष की उम्र की बच्ची सेक्स का विरोध नहीं कर सकती थी उस स्थिति में तो और भी नहीं , जब उसके दिमाग में यह भरा जाता है कि पति उसका भगवान और मालिक है। पर ऐसी बच्चियों के साथ सेक्स करने के बाद उनकी शारीरिक हालत क्या होती थी, इसका रोंगटे खड़ा कर देने वाला वर्णन Katherine Mayo ने अपनी किताब "Mother India" में किया है कि किस तरह जांघ की हड्डी खिसक जाती थी, मांस लटक जाता था और कुछ तो अपाहिज तक हो जाती थीं। 6 और 7 वर्ष की पत्नियों में कई तो विवाह के तीन दिन बाद ही तड़प तड़प कर मर जाती थीं। स्त्रियों के लिए इतनी महान थी संस्कृति.
ये किसी की भावनाओ को ठेश पहुचाने के लिये नहीं है जो सत्य है वही है
पेज को लाइक फॉलो करना न भूलें 🙏
Democracy today
आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े किए तो पुरे देश में हंगामा मच गया, वही कमलेश राजपूत ने उदयपुर की 8 वर्षीय आदिवासी बेटी के साथ बलात्कार करके 10 टुकड़े कर दिए पर सबके मुँह दही जम गया है। आखिर इस देश में न्याय के लिए इतना भेदभाव क्यों?
जातिवादी कीड़ों अब चुप क्यों हो?
यदि यही दरिंदा मुस्लिम होता तो सारे संगठन सड़कों पर उतर जातें,
शर्म करो रे जाहिलों
04/02/2023
सावधान हो जाओ
04/02/2023
मेघवाल ने किया नाम रोशन
04/02/2023
समझ तो गए होंगे
Sc-st महापंचायत जयपुर 2 अप्रैल 2023
03/29/2023
*सम्राट अशोक जयन्ती महोत्सव*
चैत्र शुक्लपक्ष अष्टमी, 29 मार्च 2023
(अशोकष्टमी)
सम्राट अशोक एक महान योद्धा, राजनीति निष्णात शासक और दार्शनिक बौद्ध सम्राट थे। विश्व में जितने भी सम्राट हुए, अशोक उनमें से अधुनातम थे। भारत के ज्ञात इतिहास में अशोक के जोड़ का मानववादी , धम्मप्रिय और प्रजापालक कोई दूसरा सम्राट नहीं हुआ। अशोक के सम्बंध में उनके द्वारा खुदवाए अनेक शिलालेखों और स्तंभलेखों से पुष्ट और प्रामाणिक जानकारी मिलती है। उनका पत्थर किताब विश्व का लिखित एक अद्भुत पुरातात्विक अभिलेख है जो हजारों साल से सुरक्षित है।
सम्राट अशोक का जन्म चैत्र शुक्लपक्ष अष्टमी को तदनुसार ईसा पूर्व 304 में हुआ था । वे 40 वर्ष बिना तलवार के धम्म के सहारे शासन करने के बाद 72 वर्ष की आयु में ईसा पूर्व 232 में परिनिर्वृत हुए थे।
उनके शासन की कुछ विशेषतायें:-
1. सम्राट अशोक की सैन्य विजय उच्चकोटि की थी।
2. उन्होंने लॉ ऑफ पीटी यानि दया के धर्म की नीति को अपनाया।
3. अशोक ने अपने विशाल साम्राज्य के सभी भौतिक बैभवों को प्रजाहित में उपयोग किया।
4. उन्होंने अपने शासन में पूर्ण रूप से संवैधानिक और न्यायिक नैतिकता का अनुश
Click here to claim your Sponsored Listing.