Darpan - दर्पण

Darpan - दर्पण my thinking

13/07/2020

कलहान्तानि हम्र्याणि कुवाक्यानां च सौहृदम् |
कुराजान्तानि राष्ट्राणि कुकर्मांन्तम् यशो नॄणाम् ||

झगडों से परिवार टूट जाते है | गलत शब्द के प्रयोग करने से दोस्ती टूट जाती है । बुरे शासकों के कारण राष्ट्र का नाश होता है| बुरे काम करने से यश दूर भागता है।

आनंदी_जीवन_हेतू_अध्यात्म

21/03/2020

धर्मधारा
साधको, जिसप्रकार आज देशमें lockdown हुआ है या हो रहा है, वह आपातकालकी पूर्व सूचना है एवं यह जनवरी २०२४ तक अनके बार होगा एवं कहीं भी हो सकता है; इसलिए अगले दो-तीन माह हेतु अति आवश्यक राशन अपने घरमें अबसे रखा करें, अपने घरके छत या गमलोंमें तरकारी लगाना सीखें । आजकल इस सम्बन्धमें बहुत सारा 'विडियो' अंतर्जालपर उपलब्ध है । 'बैंक'के पैसोंपर अधिक भरोसा न करें वह कभी 'भी बिना मूल्यके कागदके टुकडे बन जाएंगे । इसलिए खाने पीनेकी व्यवस्था आपात स्थितिमें कैसे हो सकता है, यह सब सीख कर लें ।
बिजली न रहनेपर नित्य उपयोगका जल कैसे उपलब्ध हो पायेगा, यह भी विचार करके रखें । अर्थात यदि नगरपालिकासे जलकी पाइपलाइन आयी है तो वह भिन्न प्रकारकी आपदाओं जो नैसर्गिक एवं मानव निर्मित दोनों ही हो सकते हैं, उनके कारण बाधित हो सकती है और बिजली न रहने पर 'मोटर' नहीं चलेगी । इसका भी ध्यान रखें ।
यह सब 'कोरोना' समान कहीं भी होंगे या यूं कहें सर्वत्र होंगे; इसलिए समय रहते पूर्वसिद्धता करें ।
जो भी साधक महानगर या विदेशमें रहते हैं उन्हें छः माह या एक दो वर्षके लिए अपना घर छोडना पड सकता है; इसलिये भारतके सुदूर गांव अर्थात महानगरसे ४० किलोमीटर दूर हो ऐसे स्थानपर अपनी रहनेकी व्यवस्था करके रखें । इस संदेशको गंभीरतासे लें । आजसे एक विपत्ति टलेगी तो दूसरी आ जायेगी इसलिए साधनाको प्रधानता दें | यह सब मैं इसलिए बता रही हूं कि आगे संचार तंत्र भी समय-समयपर एवं स्थान-स्थानपर बाधित रहेगा । - (पू.) तनुजा ठाकुर

20/03/2020
30/01/2020
12/08/2019

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३. अनुकूल कालमें साधना आरम्भ करें !*
अनेक साधकोंके घर जब उनके सदस्योंके कष्टमें बहुत वृद्धि होने लगती है, तब उनसे वे क्या साधना करवा सकते हैं ?, यह पूछते हैं । ध्यान रहे, जैसे आग लगनेपर कुंआ नहीं खोदा जाता है, उसीप्रकार कष्टके तीव्र होनेपर साधना आरम्भ करना अत्यधिक कठिन होता है; इसलिए जब काल अनुकूल हो तभी साधना आरम्भ करें या अपने परिजनोंसे करवाएं ! जैसे कबीरदासजीने कहा है –
दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ।।
अर्थात सुखमें साधना करनेसे दुःखकी तीव्रता बहुत घट जाती है और आनेवाले आपातकालमें सभीको कष्ट होगा ही, मात्र साधनाकी छतरी उस तापसे आपका रक्षण करनेका सामर्थ्य रखेगी ! - *तनुजा ठाकुर*
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Vicenza

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