04/06/2022
Open लेटर टू जॉनी डेप -
डियर ,
आपको God/ भगवान जिसको भी आप मानते उसका धन्यवाद करना चाहिए कि आप भारत देश में पैदा नहीं हुए। सोचो यदि आप भारत में पैदा होते तो किसी भी तरह का मानहानि करने लायक न बचते। विवाह में जैसे ही समस्या शुरू हुई होती आप पर 498ए की FIR होती और आप परिवार सहित बेल/जमानत लेने के लिए संघर्ष करते। और यदि आप के केस में 498ए के साथ एनल सेक्स यानी 377 लगा होता तो आपकी जमानत मिलने के चांस और कम हो जाते। तुम वकील के कहने से सेक्शन 9 या तलाक फाइल करते। फिर HMA 24 में पैसे देना शुरू कर चुके होते। तुम समझ ही न पाते कि यह जीवन में चल क्या रहा है।
हो सकता है कि तुम्हारे पिता और भाई, बहू यानी एम्बर हर्ड पर बुरी नजर रखने और रेप करने के आरोप लग जाते। क्या है कि वकील लोग बताते कि इससे FIR में और ताकत आती है। उसके बाद तुम कहीं के ना रहते ! तुम्हारा पूरा परिवार कहीं मुंह छुपाए वकील के दरवाजों पर भटकता और तुम्हारे अपने लोग तुमसे नज़र चुराने लगते। तुम्हारे अपने प्रिय जन दबी या खुली ज़बान में कहते कुछ तो किया ही होगा, लड़की इतना झूठ क्यों बोलेगी।
डियर जॉनी, तुमको बच्चे से अलग किया जाता और उसको रोज बताया जाता कि कैसे उसका पिता एक dead beat father है। वो बाप जो अपने बच्चे से मुंह फेर लेता है, बच्चे को कहानियां सुनाई जाती कि कैसे केवल मां महान होती है। अगर तुम्हारी बेटी होती तो फिर यह आरोप लगता कि foetus की जांच करवा कर, भ्रूण हत्या की कोशिश की गई थी। या फिर तुमने शराब पीकर अपनी ही बच्ची को सेक्सुअल अब्यूज किया। पोक्सो केस लगने के बाद तुमको जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता था। थोड़े हिम्मती होते तो केस लड़ते वरना आत्महत्या करके हर साल बढ़ती विवाहित पुरुषों की आत्महत्या में तुम्हारा नाम होता और किसी को कोई असर न पड़ता।
डियर जॉनी ! बहुत भाग्यशाली हो कि उस देश में पैदा हुए जहां केस 6 हफ्ते में खतम हुआ। यहां 6 हफ्ते में जज कौन होगा इसका निर्णय नहीं हो पाता। जब तक तुम जमानत का इंतजाम कर रहे होते तुम्हारी पत्नी घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ता का केस कर देती। तुम समझ ही न पाते कि चल क्या रहा है। इन केस पर निर्णय आता, उससे पहले जज ऑर्डर पास कर देता है कि अंतरिम राहत के तौर कर लड़की को कुछ पैसे देना शुरू कर दो।
सोचो झूठे आरोप तुम झेलते और पैसे भी देते। यह सब लड़ते लड़ते तुमको कम से कम आठ साल लग जाते। उसके बाद पैसे देकर जज साहब खुद सेटल करवाते केस क्योंकि कल ही जज साहब ने कहा जहां सेटल होता हो कर लो।
तुम और तुम्हारे परिवार की जमा पूंजी( कहीं कहीं जमीन) खतम हो जाती। तुम लोगों के पास हिम्मत ही न बचती कि मानहानि के केस कर सको। मां बाप कहते बेटा सब भूल जाओ आगे की सोचो। तुम इतनी निराशा, कुंठा, हताशा लेकर किसी तरह जीते और देखने वाले कहते यह तो "क्रैक"हो चुका है। तुम इस अपराध बोध में जीते कि तुम्हारे कारण पूरे परिवार ने कष्ट पाया। क्या पता कोई बहन भी होती जिसको ससुराल में सुनाया जाता कि तुम्हारे भाई के कारण उनके बेटे यानी तुम्हारे जीजा को अदालत का मुंह देखना पड़ा।
इसलिए डियर जॉनी तुम बच गए क्योंकि तुम भारत में पैदा नहीं हुए !