21/03/2020
ये चित्र 'कोरोना वायरस' की है जिसे कंप्यूटर की सहायता से तैयार किया गया है। इस तस्वीर में हमें इसका आकार काफी बड़ा दिख रहा है, लेकिन इसका वास्तविक आकार 0.06-0.014 माइक्रोन है, मतलब ये कि सुई के नोक पर भी ये हजारों की संख्या में आराम से आ सकते हैं। अब हमें इस बात को अच्छी तरह से समझना होगा कि हमारी लड़ाई आखिर है किससे? जरा सोचिए एक ऐसा विषाणु जिसे हम नंगी आंखों से भी नही देख सकते हैं उसने धरती के लगभग हर देश को अपने चपेट में ले लिया है, लाखों की संख्या में लोग संक्रमित हुए हैं, और हजारों की संख्या में लोग काल के गाल में समा गए हैं। आज ऐसे समय मे जबकि दुनिया काफी विकसित हो चुकी है फिर भी इतने बड़े स्तर पर इस वायरस ने तबाही मचाई, सोचिये यही वायरस आज से मात्र 100 साल पहले आया होता तो क्या मंजर होता? इस वायरस पर काबू पा लेने के बाद विश्व के सभी देशों को मिलकर सबसे पहला काम इस तरह के वायरस से निपटने के लिए काफी बड़े स्तर पर कार्य योजना बनानी होगी, क्योंकि हम सभी इस वायरस के द्वारा मचाई गयी तबाही की विभीषिका देख चुके हैं, और क्या पता भविष्य के गर्भ में इससे भी ज्यादा संक्रामक और शक्तिशाली वायरस छुपे हों। हर पहलुओं पर विचार करके हमे इसके लिए तैयार रहना होगा। आज अगर इंसानी जीवन को किसी चीज से सबसे ज्यादा खतरा है तो वो यही है, और इस तरह के खतरों से निपटना मात्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, नागरिकों की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि ये लड़ाई दो देशों के बीच नहीं है ये लड़ाई एक "अतिसूक्ष्म जीव और इंसानी जीवन के अस्तित्व के बीच" की है और इसके लिए मात्र सरकार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।