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माँ विशालाक्षी ज्योतिष परामर्श केन्?

26/11/2024

शुभ रात्रि

Photos from anmolupaadhyaay's post 20/10/2024

शुभ प्रभात जय विश्वनाथ हर हर महादेव

Photos from anmolupaadhyaay's post 19/08/2024

समस्त देशवासियों को श्रावणी उपाकर्म,रक्षाबन्धन एवं संस्कृत दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें ll

Photos from anmolupaadhyaay's post 21/09/2023

सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
जय विश्वनाथ हर हर महादेव
#माँविशालाक्षीज्योतिषपरामर्शकेन्द्रवाराणसी
#अनमोलचन्द्रउपाध्याय

Photos from anmolupaadhyaay's post 15/01/2023

समस्त देशवासियों को मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।।
#अनमोलचन्द्रउपाध्याय
#माँविशालाक्षीज्योतिषपरामर्शकेन्द्रवाराणसी
#काशीहिन्दूविश्वविद्यालय

15/11/2022
Photos from anmolupaadhyaay's post 22/10/2022

विश्व के समस्त सनातनियों
को धनत्रयोदशी की अनंत
शुभकामनाएं💐

दीपावली सिर्फ बाहरी उजाले का पर्व
नहीं बल्कि आतंरिक प्रकाश को जगाने
का भी पर्व है।

इसका शुभारंभ हो जाता है
कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
से जिसे कि धनत्रयोदशी और
धनतेरस भी कहते हैं।

आयुर्वेद और अमरता के वरदायी
देव भगवान धन्वन्तरि इस उत्सव
के अधिष्ठाता देव हैं।

उनके नाम की शुरुआत में धन
शब्द होने से यह पर्व केवल धन
को समर्पित रह गया है।

संस्कृत भाषा में एक सूक्ति है;-

शरीर माद्यं खलु धर्म साधनम्।

अर्थात शरीर ही सभी प्रकार
के धर्म करने का माध्यम है।

इसी बात को और अधिक विस्तार
तरीके से समझाते हुए यह भी कहा
गया है कि यदि धन चला गया तो
समझिए कि कुछ नहीं गया,
यदि स्वास्थ्य चला गया तो समझिए
कि आधा धन चला गया,लेकिन अगर
धर्म और चरित्र चला गया तो समझिए
सबकुछ चला गया।

यानी कि भारतीय मनीषा सृष्टि
के निर्माण के साथ ही मनुष्य
जीवन के लिए उन्नत तरीकों
और विचारों को बहुत पहले
ही स्थापित कर चुकी थी।

समय-समय पर इन्हीं भाव विचारों
को स्मरण कराने और समाज में
इनकी स्थापना बनाए रखने के
लिए त्योहारों-पर्वों की परंपरा
विकसित की गई।

इन्हीं परंपराओं का सबसे बड़ा
केंद्र है #पुण्य_भूमि_भारत💐

💐 #दीपावली_प्रकाश_का_पर्व💐

क्या है धनतेरस;-

दीपोत्सव पर्व सिर्फ बाहरी उजाले का
पर्व नहीं,बल्कि आतंरिक प्रकाश को
जगाने का पर्व है।

भारतीय समाज विडंबनाओं
में जी रहा है।

पिछले कुछ 20 सालों में भारतीय
समाज की विडंबना रही है कि हम
तेजी से बाजार की जकड़ में आए हैं।

ऐसे में धनतेरस के शुभलक्षणों का पर्व
केवल धन-संपत्ति को समर्पित पर्व रह
गया है।

इसके साथ ही विभिन्न आभूषण
निर्माता कंपनियां लुभावने विज्ञापनों
के जरिए यह।दिखाने की प्रयास
करती हैं कि धनतेरस।का अर्थ
केवल उनके ब्रांड का आभूषण
उत्पाद खरीदना ही है।

जबकि धनतेरस का महत्व
इससे कहीं अधिक का है।

💐 #सागरमंथन_से_निकले
💐 #भगवान_धन्वन्तरि💐;-

वस्तुतः पौराणिक मान्यताओं के
आधार पर समुद्र मंथन से अमृत
कलश लेकर निकले भगवान
धन्वन्तरि ने अमरता की विद्या
से आयुर्वेद को पुनर्जीवन प्रदान
किया और #देवताओं_के_वैद्य
कहलाए।

भगवान विष्णु का अवतार माने
जाने की वजह से उनकी गणना
अवतारी व्यक्तित्वों में भी होती है।

उन्होंने आरोग्य के महत्व को
परिभाषित किया और इस तरह
की जीवन शैली का निर्माण किया
जिससे जन्म से लेकर मृत्यु तक
मनुष्य निरोगी काया के साथ रह
सकता है।

यही आरोग्य का धन
सबसे बड़ा धन है।

💐 #आरोग्य_का_लीजिए_लाभ💐;-

कार्तिक त्रयोदशी के दिन समुद्र
से उत्पन्न होने के कारण इसी दिन
धनतेरस का उत्सव मनाया जाता है।

इस उत्सव का प्रथम
उद्देश्य़ आरोग्य लाभ ही है।

धन्वन्तरि विद्या के अनुसार ऋतु
के अनुसार भोजन,शाक,रस आदि
ग्रहण करना चाहिए।

व्यायाम करना चाहिए और सर्वाधिक
आवश्यक बात समय पर सोना और
जागना,यही सबसे बड़ा धन है।

💐 #धर्म_और_चरित्र_है
💐 #सबसे_बड़ा_धन💐;-

इसके बाद सबसे बड़ा
धन है धर्म।

धर्म का अर्थ है धारण
करने योग्य तत्व।

मनुस्मृति में धर्म की व्य़ाख्या
करते हुए इसके दस लक्षण
बताए गए हैं।

महाराज मनु ने लिखा;-

धृति क्षमादमोस्तेयं शौचमिन्द्रिय
निग्रहः धीर्विद्या सत्यं क्रोधो दशकं
धर्म लक्षणम्।

अर्थात धैर्य,क्षमा,चोरी न करना,
शुचिता बनाए रखना,इन्द्रियों पर
नियंत्रण,जुटा-जुटा कर धन न रखना
विद्या लेना,सत्य बोलना,क्रोध न करना
और चरित्र धर्म के लक्षण हैं।

इनमें से अगर आप किसी एक से
भी चूके तो आप धर्म से विमुख हो
गए।

यह हानि धर्म धन की
हानि कहलाती है।

एक श्लोक में लिखा गया है;-

अधमाः धनमिच्छन्ति
धनं मानं च मध्यमाः !
उत्तमाः मानमिच्छन्ति
मानो हि महताम् धनम् !!

जो निम्न श्रेणी के लोग होते हैं,
उन्हें सिर्फ धन की इच्छा होती है।

मध्यम श्रेणी के लोग मान
और धन दोनों चाहते हैं।

लेकिन उत्तम श्रेणी के लोग
सम्मान ही चाहते हैं।

सम्मान ही सबसे बड़ा धन है।

यह बेहद सरल सी बात है कि जो
व्यक्ति रोगी न हो,उत्तम चरित्र वाला
हो,खुले विचारों का हो और विद्वान
हो और फिर धनवान भी हो तो
उसका मान-सम्मान का धन
अपने आप बढ़ता है।

💐 #भौतिक_धन_भी
💐 #महत्वपू्र्ण_है💐;-

ऐसा नहीं है कि धन
का महत्व है नहीं।

भौतिक धन का भी
सबसे अधिक महत्व है।

लेकिन धन्वन्तरि विद्या के अनुसार
केवल नीतिगत और धर्मार्थ अर्जित
किया गया धन ही पवित्र है।

छल प्रपंच से धनार्जन पाप है।

जीवन के चार उद्देश्य
धर्म-अर्थ-काम और
मोक्ष बताए गए हैं।

इसमें (अर्थ) धन का उपार्जन
आवश्यक क्रिया है।

आचार्य विष्णु शर्मा ने
पंचतंत्र में लिखा है;-

अशनादिन्द्रियाणीव स्युः
कार्याण्यखिलान्यपि।
एतस्मात्कारणाद्वित्तं
सर्वसाधनमुच्यते।।

भोजन का जो संबंध इंद्रियों के पोषण
से है वही संबंध धन का समस्त कार्यों
के संपादन से भी है।

इसलिए धन को सभी उद्येश्यों की
प्राप्ति अथवा कर्मों को पूरा करने
का साधन कहा गया है।

धनतेरस के महत्वपूर्ण अवसर को
सिर्फ सोना-चांदी खरीदने में खर्च
मत कर दीजिए।

बल्कि इसे आरोग्य की ओर बढ़ने
बढ़ाने का अवसर बनाइए।

सोने-चांदी और पीतल-लौह आदि जैसे
खनिज और धातुएं हमें वनस्पतियों के
सेवन से ही मिलती हैं।

शरीर को इनकी भी आवश्यकता है।
💐 #साभार_संकलित💐

भगवान धन्वंतरि समस्त चराचर
प्राणियों एवं सकल विश्व को आरोग्य,
सुख शांति एवं समृद्धि प्रदान करें💐

जयति पुण्य सनातन संस्कृति💐
जयति पुण्य भूमि भारत💐
जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रं💐

सदा सर्वदासुमंगल💐
ॐ नमो नारायणाय💐
जयलक्ष्मीभवानी💐
जयश्रीराम💐

Photos from anmolupaadhyaay's post 09/10/2022

महर्षि वाल्मीकि जयन्ती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।।

Photos from anmolupaadhyaay's post 05/10/2022

समस्त देशवासियों को विजयादशमी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें ll
ll जय विश्वनाथ जय माँ विशालाक्षी ll
शुभ प्रभात

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