Tesla Coaching Classes

Tesla Coaching Classes

Share

Siddharth S Tiwari 28 years Teaching Experience at St John's and Sunbeam group.

ICSE Physics, Chemistry & Mathematics
CBSE Physics, Chemistry & Mathematics
Pre-Foundation

22/12/2023

"मुझे आप में एक मित्र मिल गया है जो मेरे परिश्रम को सहानुभूतिपूर्वक देखता है। ...मैं पहले से ही आधा भूखा मनुष्य हूँ। अपने मस्तिष्क को सुरक्षित रखने के लिए मैं भोजन चाहता हूँ और यह मेरा पहला विचार है। आपका कोई भी सहानुभूतिपूर्ण पत्र मुझे यहाँ प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति प्राप्त करने में सहायक होगा।"

- रामानुजन द्वारा हार्डी को लिखे गये १९१३ के एक पत्र का अंश

श्रीनिवास रामानुजन अय्यंगार

एक भारतीय जो गणित के अप्रतिम साधक थे। उन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है।

उन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला, तथापि उन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने गणित के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रयोग किये थे जो आज भी उपयोगिता और मौलिकता की दृष्टि से यत्र सर्वत्र प्रासंगिक हैं।जब उनकी गणितीय अन्तर्दृष्टि अधिकांश गणितज्ञों के समुदाय को दिखाई देने लगी, तब उन्होंने आंग्ल गणितज्ञ जी.एच्. हार्डी से भागीदारी कर ली।

उन्होंने पुराने प्रचलित प्रमेयों का पुनः अन्वेषण किया जिससे उसमे कुछ बदलाव करके नया प्रमेय बन सके।

श्रीनिवास रामानुजन के भौतिक देह की आयु तो अधिक नहीं मिल पायी तथापि अपने लघु जीवन- काल में उन्होंने लगभग ३९०० के आस-पास प्रमेयों का संकलन किया। इनमें से अधिकांश प्रमेय सही सिद्ध किये जा चुके है और उनके अधिकांश प्रमेयों पर गणितज्ञों के मध्य मंथन आज भी चल रहा है।
उनके एकाधिक परिणाम यथा रामानुजन प्राइम और रामानुजन थीटा बहुत प्रसिद्ध है।

श्रीनिवास रामानुजन का प्रारंभिक जीवन

श्रीनिवास रामानुजन का जन्म २२ दिसम्बर १८८७ को भारत के दक्षिणी भूभाग में स्थित कोयंबटूर के ईरोड, मद्रास (अभी का तमिलनाडु) नाम के गाँव में पारंपरिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास अय्यंगर जनपद की ही एक साड़ी के व्यापारिक प्रतिष्ठान में लिपिक थे। उनकी माता; कोमलतम्मल एक गृहिणी थीं और साथ ही स्थानीय मन्दिर में ईश्वर की भक्ति-सार का गायन किया करती थीं।

वे अपने परिवार के साथ कुम्भकोणम् गाँव में सारंगपाणी स्ट्रीट के पास अपने पुरातन घर में रहते थे। उनका पारिवारिक घर आज एक संग्रहालय है। जब रामानुजन डेढ़ (१.५) वर्ष के थे तभी उनकी माता ने एक और पुत्र सद्गोपन को जन्म दिया, जिसका बाद में तीन माह के भीतर ही देहान्त हो गया।

दिसम्बर १८८९ में, रामानुजन चेचक से रुग्ण हो गये। (इसी रुग्णता से विगत एक वर्ष के अन्तराल में सहस्त्रों लोग काल कवलित हो गये थे।)

रामानुजन शीघ्र ही इस रुग्णता से ठीक हो गये थे। इसके बाद वे अपने माता के साथ मद्रास (चेन्नई) के पास के गाँव काँचीपुरम् में माता-पिता के घर में रहने चले गये थे।

नवम्बर १८९१ और पुनः १८९४ में उनकी माता ने दो और शिशुओं को जन्म दिया, परन्तु उन दोनों शिशुओं की बाल्यकाल में ही मृत्यु हो गयी।

१ अक्टूबर १८९२ को श्रीनिवास रामानुजन को स्थानिक विद्यालय में प्रवेश मिला। मार्च १८९४ में उन्हें तमिल माध्यम के विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया।

उनके नाना जो कांचीपुरम के न्यायालय में वैतनिक सेवा दे रहे थे अचानक सेवा भार से पदच्युत कर दिये गये।तब रामानुजन और उनकी माता कुम्भकोणम गाँव पुनः आ गये और रामानुजन को कँगयां प्राथमिक विद्यालय में डाला गया। जब उनके दादा का निधन हुआ तो रामानुजन को उनके नाना के पास भेज दिया गया, जो बाद में मद्रास में रहने लगे थे।

रामानुजन को मद्रास में विद्यालय जाना पसन्द नही था अतः वे अधिकांशतः विद्यालय से अनुपस्थित रहते थे। उनके परिवार ने रामानुजन के लिये एक पहरेदार भी रखा था जिससे रामानुजन प्रतिदिन विद्यालय जा सके और इस तरह ६ माह के भीतर ही रामानुजन कुम्भकोणम प्रत्यागत हो गये।

जब अधिकांश समय रामानुजन के पिता काम में व्यस्त रहते थे, तब उनकी माँ उनकी बहुत अच्छे से देखभाल करती थी। रामानुजन को अपनी माता से प्रबल लगाव था। अपनी माँ से रामानुजन ने प्राचीन परम्पराओं और पुराणों के बारे में सीखा था। उन्होंने बहुत से धार्मिक भजनों को गाना भी सीख लिया था ताकि वे आसानी से मन्दिर में जब अवसर मिले, गायन कर सकें। ब्राह्मण होने के कारण यह सब उनके परिवार का ही एक भाग था।

कँगयां प्राइमरी स्कूल में रामानुजन एक मेधावी छात्र थे। मात्र १० वर्ष की आयु से पहले, नवंबर १८९७ में उन्होंने अंग्रेजी, तमिल, भूगोल और गणित की प्राइमरी परीक्षा उत्तीर्ण की और पूरे जनपद में उनका प्रथम स्थान आया। उसी वर्ष, रामानुजन नगर की उच्च माध्यमिक विद्यालय में गये जहाँ प्रथम बार उन्होंने गणित का विधिवत अभ्यास किया।

११ वर्ष की आयु से ही श्रीनिवास रामानुजन अपने ही घर पर भाड़ा पर रह रहे दो विद्यार्थियों से गणित का अभ्यास करना शुरू किया था। बाद में उन्होंने एस.एल. लोनी द्वारा लिखित एडवांस ट्रिग्नोमेट्री का अभ्यास किया। १३ वर्ष की अल्पायु में ही वे उस पुस्तक के मर्मज्ञ बन चुके थे और उन्होंने स्वयं अनेक प्रमेयों की खोज की।

१४ वर्ष की आयु में उन्हें अपने योगदान के लिये मेरिट सर्टिफिकेट भी दिया गया और साथ ही अपनी विद्यालयीय शिक्षा पूरी करने के लिए अनेक अकादमिक पुरस्कार भी दिये गये और सांभर तंत्र के विद्यालय में उन्हें १२०० विद्यार्थियों और ३५ शिक्षकों के साथ प्रवेश दिया गया।

गणित की परीक्षा उन्होंने दिए गए समय से आधे समय में ही पूरी कर ली थी। और उनके उत्तरों से ऐसा लग रहा था जैसे रेखागणित और अनन्त श्रृंखला (Infinite Series) से उनका घरेलू सम्बन्ध हो।

रामानुजन ने १९०२ में घनाकार समीकरणों को आसानी से हल करने की युक्ति भी बतायी और बाद में क्वार्टीक (Quartic) को हल करने की अपनी विधि बनाने में लग गए। उसी साल उन्होंने जाना की क्विन्टिक (Quintic) को रेडिकल्स (Radicals) की सहायता से हल नहीं किया जा सकता।

सन् १९०५ में श्रीनिवास रामानुजन मद्रास विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित हुये परन्तु गणित को छोड़कर शेष सभी विषयों में वे अनुत्तीर्ण हो गए। कुछ समय बाद १९०६ एवं १९०७ में रामानुजन ने फिर से बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी और अनुत्तीर्ण हो गए। रामानुजन १२वीं में दो बार अनुत्तीर्ण हुये थे और इससे पहले उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। जिस राजकीय महाविद्यालय में पढ़ते हुये वे दो बार अनुत्तीर्ण हुये, कालान्तर में उस महाविद्यालय का नाम बदल कर उनके नाम पर ही रखा गया।

श्रीनिवास रामानुजन जब मैट्रिक कक्षा में पढ़ रहे थे उसी समय उन्हें स्थानीय महाविद्यालय के पुस्तकालय से गणित का एक ग्रन्थ मिला, ‘ए सिनोप्सिस आफ एलीमेंट्री रिजल्ट्स इन प्योर एंड एप्लाइड मैथमेटिक्स (A Synopsis of Elementary Results in Pure and Applied Mathematics)’ लेखक थे ‘जार्ज एस. कार्र (George Shoobridge Carr)।’ रामानुजन ने जार्ज एस. कार्र की गणित के परिणामों पर लिखी पुस्तक पढ़ी और इस पुस्तक से प्रभावित होकर स्वयं ही गणित पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया। इस पुस्तक में उच्च गणित के कुल ५००० सूत्र दिये गये थे जिन्हें रामानुजन ने केवल १६ साल की आयु में पूरी तरह आत्मसात कर लिया था।

१९०४ में हायर सेकेंडरी स्कूल से जब रामानुजन उत्तीर्ण हुये तो गणित में उनके अतुलनीय योगदान के लिये विद्यालय के हेडमास्टर कृष्णास्वामी अय्यर द्वारा उन्हें के.रंगनाथ राव पुरस्कार दिया गया जिसमें रामानुजन को एक होनहार और बुद्धिमान विद्यार्थी बताया गया था। उन्होंने उस समय परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किया था। इसे देखते हुए गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज, कुम्बकोणम में अध्ययन के लिये उन्हें शिष्यवृत्ति दी गयी। किन्तु गणित में एकांगी रूचि होने के कारण से रामानुजन अन्य विषयों पर ध्यान नहीं दे पाते थे। १९०५ में वे घर से भाग गए थे, और विशाखापत्तनम के निकट राजमुंदरी के एक घर में १ महीने तक रहे और उसके बाद मद्रास के महाविद्यालय में पढ़ने लगे। बाद में उन्होंने वह महाविद्यालय सत्रावधि पूर्ण होने से पूर्व ही छोड़ दिया।

विद्यालय छोड़ने के बाद का पाँच वर्षों का समय इनके लिए बहुत हताशा भरा था। भारत इस समय परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा था। चारो ओर भयंकर विपन्नता थी। ऐसे समय में रामानुजन के पास न कोई ऐसा कार्य था जो अर्थ दे सके और न ही किसी संस्थान अथवा प्रोफ़ेसर के साथ कार्य करने का अवसर। मात्र ईश्वर पर अटूट विश्वास और गणित के प्रति अगाध श्रद्धा समर्पण ने उन्हें कर्तव्य मार्ग पर चलने के लिए सदैव प्रेरित किया।

श्रीनिवास रामानुजन के ७ तथ्य:

१) श्रीनिवास रामानुजन विद्यालय में बहुधा एकाकी ही रहते थे, उनके सहयोगी उन्हें कभी समझ नही पाये थे। रामानुजन विपन्न कुटुम्ब से सम्बन्ध रखते थे और अपने गणित के परिणाम को सिद्ध करने के लिये वे कागज़ के स्थान पर कलमपट्टी का उपयोग करते थे जिसे मिटा कर पुनः प्रयोग किया जा सके। शुद्ध गणित में उन्हें किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं प्राप्त था।

२) गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज में पढ़ने के लिये उन्हें अपनी शिष्यवृत्ति खोनी पड़ी थी और गणित में अपने लगाव से अन्य दुसरे विषयों में वे अनुत्तीर्ण हुये थे।

३) रामानुजन ने कभी कोई कॉलेज डिग्री प्राप्त नहीं की। तथापि उन्होंने गणित के अनेकानेक प्रमेयों को लिखा। कदाचित उनमें से कुछ को वे सिद्ध नही कर पाये।

४) इंग्लैंड में हुये जातिवादी व्यवहार के वे साक्षी बने थे।

५) उनकी उपलब्धियों को देखते हुए १७२९ अंक हार्डी-रामानुजन अंक के नाम से जाना जाता है।

६) २०१४ में उनके जीवन पर आधारीत तमिल और अंग्रेजी भाषा में फ़िल्म ‘रामानुजन’ बनाई गयी थी।

७) रॉबर्ट कनीगेल ने रामानुजन और हार्डी के गणितीय सम्बन्धों को रेखांकित करते हुये The Man who Knew Infinity नामक एक पुस्तक की रचना १९९१ में की थी जिसे दो सहस्त्र पन्द्रह ईसवी में इसी नाम की एक उल्लेखनीय फ़िल्म भी बनाई गई है।

श्रीनिवास रामानुजन के प्रमुख कार्य
रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी गणितज्ञों के लिये चुनौती और प्रेरणा पूर्ण गहन अंतर्दृष्टि देते आये हैं। एक बहुत ही सामान्य परिवार में जन्म ले कर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित करने की अपनी इस यात्रा में उन्होंने भारत को अपूर्व गौरव प्रदान किया। हार्डी के साथ रामानुजन ने विभाजन फंक्शन P(n) का अभ्यास किया था। उन्होंने शून्य और अनन्त को हमेशा ध्यान में रखा और उनके अन्तर्सम्बन्धों को समझाने के लिए गणित के सूत्रों का सहारा लिया। वे अपनी विख्यात खोज गोलीय विधि (Circle Method) के लिए भी विश्व विश्रुत हैं।

रामानुजन ने रीमैन श्रृंखला, अण्डाकार इंटीग्रल्स, हाइपर जियोमेट्रिक श्रृंखला और ज़ेटा फ़ंक्शन के कार्यात्मक समीकरणों पर काम किया । रामानुजन ने स्वतंत्र रूप से हाइपर जियोमेट्रिक श्रृंखला पर गॉस , कुमेर और अन्य के परिणामों की खोज की । हाइपर जियोमेट्रिक श्रृंखला के आंशिक योगों और उत्पादों पर रामानुजन के स्वयं के काम से इस विषय में बड़ा विकास हुआ है। शायद उनका सबसे प्रसिद्ध काम पूर्णांक के विभाजन की संख्या पी ( एन ) पर था।मैकमोहन ने के (K)मूल्य की तालिकाएँ तैयार की थीं पी(एन)।छोटी संख्या के लिए एन , और रामानुजन ने इस संख्यात्मक डेटा का उपयोग कुछ उल्लेखनीय गुणों का अनुमान लगाने के लिए किया, जिनमें से कुछ को उन्होंने अण्डाकार कार्यों का उपयोग करके सिद्ध किया। अन्य रामानुजन की मृत्यु के बाद ही सिद्ध हुए।

हार्डी के साथ एक संयुक्त पेपर में , रामानुजन ने इसके लिए एक एसिम्प्टोटिक फॉर्मूला दिया पी ( एन )। इसमें ऐसी उल्लेखनीय संपत्ति थी कि यह इसका सही मूल्य बताता प्रतीत होता था पी ( एन ), और यह बाद में Rademacher द्वारा सिद्ध किया गया ।

रामानुजन ने प्रमेयों से भरी कई अप्रकाशित नोटबुकें छोड़ीं जिनका गणितज्ञों ने अध्ययन करना जारी रखा है। १९१८ से १९५१ तक बर्मिंघम में शुद्ध गणित के मेसन प्रोफेसर जी एन वाटसन ने रामानुजन द्वारा बताए गये सामान्य शीर्षक प्रमेय के तहत १४ पेपर प्रकाशित किए और कुल मिलाकर उन्होंने लगभग ३० पेपर प्रकाशित किए जो रामानुजन के काम से प्रेरित थे। हार्डी ने वॉटसन को बड़ी संख्या में रामानुजन की पांडुलिपियाँ दीं , जो उनके पास थीं, दोनों १९१४ से पहले लिखी गई थीं और कुछ रामानुजन की मृत्यु से पहले भारत में उनके अंतिम वर्ष में लिखी गई थीं।

नमक्कल की महालक्ष्मी: रामानुजन के कार्य की उत्तरदायी देवी नामगिरी देवी
रामानुजन अक्सर कहा करते थे, "मेरे लिए किसी समीकरण का तब तक कोई अर्थ नहीं है, जब तक कि वह ईश्वर के विचार का प्रतिनिधित्व न करता हो।"
प्राचीन भारतीय गणितज्ञों की तरह, रामानुजन ने केवल अपने कार्यों के परिणामों और सारांशों को नोट किया; वह जिन सूत्रों के साथ आये, उनके लिए कोई प्रमाण तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सीधे तौर पर अपने काम का श्रेय नमक्कल की कुल देवी महालक्ष्मी की दिव्य कृपा को दिया, जिनसे वे प्रेरणा लेते थे। गणितज्ञ ने कहा कि उन्होंने देवी के पुरुष साथी नरसिम्हा का स्वप्न देखा था, जो रक्त की बूंदों से दर्शाया गया है, जिसके बाद, जटिल गणितीय कार्य उनकी ऑंखों के सामने उद्भाषित होते हैं।
विश्व की गणितीय थाती श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर उनका स्मरण हृदय को आह्लादित कर रहा है!
~सिद्धार्थः

03/11/2021

!! Happy Deepawali !!

Photos from Tesla Coaching Classes's post 13/07/2020

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि।।(२/३८)

Photos from Tesla Coaching Classes's post 11/07/2020

We are proud of your achievements in the gloomy era of COVID-19😊
You are far bigger than what is visible externally!!
Congratulations!

18/03/2020

CLASSES will remain suspended as per the order of District Magistrate.

Photos from Tesla Coaching Classes's post 09/03/2020
07/03/2020

TESLA COACHING CLASSES
ICSE (Science paper-1) Physics March 13, 2020
Scoring passing marks in ICSE Science paper- 1(Physics) is not difficult. But scoring 1 pointer (90+) requires proper strategy and a befitting approach. Based on my experience, I put forward the following last minutes CALL UP for the same:
1.Mechanics are generally considered difficult by the students.
(i)Force, Work,Energy and power,Machines
Torque and simple numerical problems based on principle of moment should be practiced,clearly minding the basics involved.
Uniform circular motion, centripetal and centrifugal forces are highly probable facets.No numericals will be there.
Centre of gravity (correct definition) and its position in different bodies should be matted in the mind.
(ii) Work, Energy and Power
The chapter is interesting and involves numericals as well as theoretical conceptual problems.
Kinetic energy, Potential energy and law of conservation of energy should be enquired into.(Simple basic numericals).
Transformations of energy and devices where the given transformation is applicable must be riveted in the mind.
(iii)Machines
Single fixed and movable pulleys (diagram,MA,VR and Efficiency in Ideal and Practical cases, Applications and reason for applications)
Archimedean and Block & Tackle system of pulleys (diagram up to 4 pulleys at most,IMA, AMA, VR and Ideal and Actual Efficiency).
Why is the efficiency of a machine never 100%?

2. Optics will fetch very good marks if tackled appropriately.
(i) Refraction of Light
Diagrams related to refraction through glass slab, multiple images in a thick glass plate, prism, total internal reflection are highly advocated.
(ii) Lenses chapter is easy and highly scoring.
Images formed by spherical lenses (7 diagrams)
Arrows should be marked on each ray; before, during and after the refraction (no arrow no marks).
Numericals on Lens formula, Linear magnification and power of the lens.
(iii)Dispersion of Light
Diagram related to dispersion of light.
Cause of dispersion.
Electromagnetic Radiations (Range of wavelengths in Å as well as in nm ,Methods of detection and uses ).
Scattering of light (definition, relationship with λ, colour of sky, traffic signals, Redshift and blueshift).
3. Sound involves very fundamental questions.
Conditions of Echo.
Numericals of Echo.
Uses of Echo.
Free, Damped and forced vibrations as well as resonance(definitions, conditions and applications).
Characteristics of musical sound.
Noise pollution (source, Effect and Control).
4. Calorimetry ~ 10 marks can be expected.
Principle of method of mixtures (numericals).
Problems related to Q=mcΔθ and Q=mL
Heating as well as cooling curves.
Precautions while finding out Specific heat capacity, Specific Latent heat capacity of melting of ice and of steam.
Theoretical problems on thermal capacity, specific heat capacity of water and specific latent heat of ice and steam.
5. Modern Physics Highly scoring chapter(~10 to 12 marks)
Properties of ∝ , β and radiation.
Uses of Radioisotopes.
Background Radiations.
Harmful effect of Radioactivity.
Safety measures for Radioactive hazards.
Nuclear Reaction- chain Reaction
Nuclear Fusion- Energy generation in sun.
Numericals involving Fission and Fusion reactions
(E=mc2,1 amu=931MeV).

6.Current Electricity
Ohm’s Law (statement, Ohmic and Non Ohmic conductors; graphs).
Series and parallel combinations (Characteristics and related numericals).
Current drawn from battery.
Power rating of electric appliances.
Electric Fuse (overloading and short circuiting).
Switches, sockets, stair case wiring.
Ring system of wiring.

7. Magnetic Effect of Electric Current
Conclusions of Oersted’s Experiment.
SNOW rule, Right Hand Thumb rule.
Magnetic field in a current carrying solenoid(Right Hand Grip Rule).
Lorentz Force (Fleming’s left hand rule, DC Motor: construction,principle, working, ways to increase the speed of rotation of the coil).
Electromagnetic Induction(Lenz’s law, Fleming’s Right hand rule).
AC Generator(construction,principle, working, ways to increase the induced current)
Transformers (Step up and Step down)
Advantage of AC over DC.

~Siddharth S Tiwari for TESLA COACHING CLASSES

01/03/2020
Photos from Tesla Coaching Classes's post 01/03/2020

SERVING WITH MASTERY & DEDICATION

01/03/2020

ALL ARE WELCOME

Want your school to be the top-listed School/college in Varanasi?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Address

Varanasi
221010

Opening Hours

Monday 12pm - 7pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm
Sunday 9am - 5pm