31/07/2026
अवसरवादी, विघटनवादी, और संशोधनवादी लोगों को मिट्टी में गाड़ दो।
मार्क्सवाद- लेनिनवाद- माओवाद जिंदाबाद।।
क्रांतिकारी साथियों को लाल सलाम।।
Without revolutionary theory,
there can be no revolutionary movement.
इन लाइनों को लागू करते हुए हम पाते है कि भारत में भी बिना क्रांतिकारी विचार के क्रांतिकारी आंदोलन नहीं होगा। जो भी आंदोलन आज के समय में हो रहे है सभी कानूनवादी और अर्थवादी आंदोलन हैं। क्योंकि क्रांतिकारी विचारों को लगातार दबाया जा रहा है। और जनता के बीच फैलाने से रोका जा रहा हैं। आज के समय में मार्क्सवाद, लेनिनवाद और माओवाद ही सबसे क्रांतिकारी विचारधारा है जो क्रांतिकारी आंदोलन या नवजनवादी क्रांति को संभव करेगा। कुछ लोग है जो इस क्रांतिकारी विचार को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। ये अवसरवादी,संशोधनवादी और विघटनवादी लोग है। जो जनता के बीच में विचारधारा के प्रति भ्रम और उलझन पैदा करके फैला रहे है। इनकी लिस्ट लंबी है जो इस गद्दारी में शामिल है। जिसमें सीमा आजाद और विश्वविजय भी शामिल हो गए है। लेकिन इनके खिलाफ लड़ने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जैसे कॉमरेड माओ ने बताया है कि,
जहाँ कोई संशोधनवादी मिलता है वहां उसके खिलाफ लड़ने वाले मार्क्सवादी - लेनिनवादी जरूर मिलेंगे।
सीमा आजाद (दस्तक पत्रिका संपादक) और विश्वविजय (सीमा के पति) है दोनों ही आज अवसरवादी , विघटनवादी और संशोधनवादी बन चुके है। आज जरूरत इन जैसे लोगों को जनता के सामने एक्पोज करने की। ताकि समाज इनके चंगुल में न फंसे। काफी सारे लोग क्रांतिकारी नकाब पहनकर जनता के बीच जाते है ये लोग भी ऐसे ही है।आपने आपको सबसे बड़ा क्रांतिकारी कहने से थकते नहीं है। लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। इनका मानना है कि आज के हिंदुत्व फासीवादी दौर में बस खुले रूप से ही काम करना चाहिए।जबकि खुले और भूमिगत कामकाज के बारे में बहस तो कॉमरेड लेनिन ने 1905 में विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए ही सुलझा दी थी। लेकिन ये मूर्ख लोग है कि आज तक नहीं समझ पाए है।
किसी भी आंदोलन को देखिये, सरकार आंदोलन को नेतृत्व देने वालों को या तो गिरफ्तार कर लेती है ओर जेल में ही मार देती है या खुले रूप में एनकाउंटर कर देती है। कॉमरेड स्टेन स्वामी,कॉमरेड पाण्डु नरोट या ऐसे ही बहुत से उदाहरण है जो जेलों में मारे गए है। एनकाउंटर की तो लिस्ट ही लंबी है। आदिवासी इलाकों में देखो जरा नजर दौड़ा कर। किसी भी आदिवासी पर नक्सली होने के शक में एनकाउंटर कर दिया जाता है। किसी विचारधारा को मानना या उसे लागू करना मौत के बराबर कब से हो गया। भारत वैसे तो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है लेकिन किसी विचारधार से इतना डरता है कि बिना पुख्ता सबूतों के बस शक की बिनाह पर जनता को मौत के घाट उतार दिया जाता हैं। इन हालातों में इन गद्दारो का कहना है कि ओपन रहकर काम करना चाहिए। ये गद्दार वेणु गोपाल की ही लाइन है। वेणु गोपाल ही इनके दादा है जिनके कदमो पर ये दोनों चल रहे है।
दूसरी तरफ ये लोग दस्तक पत्रिका में क्रांति के बड़े गद्दार कोबाड गाँधी को लिखने के लिए जगह दे रहे है। जो पूरी तरफ सरकार के लिए काम करता है। जो जनता के बीच में उत्तर आधुनिकतावादी विचारों का प्रचार प्रसार कर रहा है। ये लोग मिलकर पत्रिका के माध्यम से जनांदोलनों को कानूनवाद अर्थवाद में धकेलने का काम कर रहे है। सोशल मीडिया पर ये लोग मिलकर अब ग्रुप तैयार कर रहे हैं। ये पूरा मेन्शेविक ग्रुप तैयार हो रहा है जैसा 1903 में , रूस सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (RSDLP) के दूसरे कांग्रेस सम्मेलन के दौरान हुआ था। लेनिन ने उस समय भी एक कठोर, अनुशासित और पूरी तरह भूमिगत (अंडरग्राउंड) पार्टी पर जोर दिया था , जिसके सदस्य पेशेवर क्रांतिकारी होंगे।
सीमा आजाद ने जनवादी पत्रकार रोहित शर्मा ( समरभूमि न्यूज चैनल) के ऊपर मानहानि का केस कर दिया। सीमा जी ऐसे लोगों की आवाज को रोक नहीं सकते । आम समाज में एक कहावत है ,जब किसी इंसान को दबाना होता है तो उसे कोर्ट/कचेहरी में उलझा दो। यही काम सीमा और विश्वविजय कर रहे है। खुद तो कुछ करते नहीं, दूसरों को करने देंगे नहीं। ये इनका उसूल है। सरकार की तरह तुम लोग जनवादी आवाजों को दबाने का प्रयास कर रहे हो, जिसमें आप नाकाम रहेंगे। क्योंकि विचारों को मारा या दबाया नहीं जा सकता। किसी कवि ने लिखा है कि
मैं तो घास हूँ,
आपके हर किये धरे पर उग आऊँगा।
हम आपके सोशल मीडिया पर किए सवालों का जवाब देना चाहते हैं
1. सीमा जी आपको कोई विच हंट नहीं कर रहा। आपको तो कोई माओवादी बता ही नहीं रहा। बल्कि आपको बताया जा रहा है कि आप गद्दार है । स्टेट आपको गिरफ्तार नहीं करेगा।
2. दूसरी बात ये है कि सरकार कभी ऐसे जिम्मेदारी लेकर स्टेटमेंट नहीं निकलता। फर्क है सीमा जी। सरकार जनता को जागरूक नहीं करती आप जैसे लोगों से। कन्फ्यूज मत होये।
दस्तक मैगजीन के पाठक हम लोग भी थे लेकिन जब से इनकी विचारधारा का पता लगा है। तभी हम लोगों ने इनकी पत्रिका का भी बहिष्कार कर दिया है। हमारी न्यायपसंद जनता,बुद्धिजीवी और सभी मित्र संगठनों से अपील है कि ऐसी विचारधारा के खिलाफ आपको भी बोलना चाहिए। और ऐसे लोगों को कोई भी आर्थिक मदद न करें क्योंकि ये लोग जनता के नाम पर पैसा लेकर आरामदायक जिंदगी जीते है। ऐसे लोगों से सबको सवाल पूछने चाहिए कि आपका जमीर मर गया हैं क्या ? अगर जिंदा है तो अपनी गलतियों के लिए माफी मांगे सोशल मीडिया पर जनता से। और एक राय है आपको , कि खुद के बचाव में लोगो को एकत्रित करना छोड़ दे। अब सब जानते है कि आप क्या है, और कौन है।