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CREATE A NATION ON ECONOMIC , POLITICAL AND SOCIAL EQUALITY.

अवसरवादी, विघटनवादी, और संशोधनवादी लोगों को मिट्टी में गाड़ दो।मार्क्सवाद- लेनिनवाद- माओवाद जिंदाबाद।।क्रांतिकारी साथियो...
31/07/2026

अवसरवादी, विघटनवादी, और संशोधनवादी लोगों को मिट्टी में गाड़ दो।
मार्क्सवाद- लेनिनवाद- माओवाद जिंदाबाद।।
क्रांतिकारी साथियों को लाल सलाम।।

Without revolutionary theory,
there can be no revolutionary movement.

इन लाइनों को लागू करते हुए हम पाते है कि भारत में भी बिना क्रांतिकारी विचार के क्रांतिकारी आंदोलन नहीं होगा। जो भी आंदोलन आज के समय में हो रहे है सभी कानूनवादी और अर्थवादी आंदोलन हैं। क्योंकि क्रांतिकारी विचारों को लगातार दबाया जा रहा है। और जनता के बीच फैलाने से रोका जा रहा हैं। आज के समय में मार्क्सवाद, लेनिनवाद और माओवाद ही सबसे क्रांतिकारी विचारधारा है जो क्रांतिकारी आंदोलन या नवजनवादी क्रांति को संभव करेगा। कुछ लोग है जो इस क्रांतिकारी विचार को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। ये अवसरवादी,संशोधनवादी और विघटनवादी लोग है। जो जनता के बीच में विचारधारा के प्रति भ्रम और उलझन पैदा करके फैला रहे है। इनकी लिस्ट लंबी है जो इस गद्दारी में शामिल है। जिसमें सीमा आजाद और विश्वविजय भी शामिल हो गए है। लेकिन इनके खिलाफ लड़ने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जैसे कॉमरेड माओ ने बताया है कि,
जहाँ कोई संशोधनवादी मिलता है वहां उसके खिलाफ लड़ने वाले मार्क्सवादी - लेनिनवादी जरूर मिलेंगे।

सीमा आजाद (दस्तक पत्रिका संपादक) और विश्वविजय (सीमा के पति) है दोनों ही आज अवसरवादी , विघटनवादी और संशोधनवादी बन चुके है। आज जरूरत इन जैसे लोगों को जनता के सामने एक्पोज करने की। ताकि समाज इनके चंगुल में न फंसे। काफी सारे लोग क्रांतिकारी नकाब पहनकर जनता के बीच जाते है ये लोग भी ऐसे ही है।आपने आपको सबसे बड़ा क्रांतिकारी कहने से थकते नहीं है। लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। इनका मानना है कि आज के हिंदुत्व फासीवादी दौर में बस खुले रूप से ही काम करना चाहिए।जबकि खुले और भूमिगत कामकाज के बारे में बहस तो कॉमरेड लेनिन ने 1905 में विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए ही सुलझा दी थी। लेकिन ये मूर्ख लोग है कि आज तक नहीं समझ पाए है।
किसी भी आंदोलन को देखिये, सरकार आंदोलन को नेतृत्व देने वालों को या तो गिरफ्तार कर लेती है ओर जेल में ही मार देती है या खुले रूप में एनकाउंटर कर देती है। कॉमरेड स्टेन स्वामी,कॉमरेड पाण्डु नरोट या ऐसे ही बहुत से उदाहरण है जो जेलों में मारे गए है। एनकाउंटर की तो लिस्ट ही लंबी है। आदिवासी इलाकों में देखो जरा नजर दौड़ा कर। किसी भी आदिवासी पर नक्सली होने के शक में एनकाउंटर कर दिया जाता है। किसी विचारधारा को मानना या उसे लागू करना मौत के बराबर कब से हो गया। भारत वैसे तो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है लेकिन किसी विचारधार से इतना डरता है कि बिना पुख्ता सबूतों के बस शक की बिनाह पर जनता को मौत के घाट उतार दिया जाता हैं। इन हालातों में इन गद्दारो का कहना है कि ओपन रहकर काम करना चाहिए। ये गद्दार वेणु गोपाल की ही लाइन है। वेणु गोपाल ही इनके दादा है जिनके कदमो पर ये दोनों चल रहे है।
दूसरी तरफ ये लोग दस्तक पत्रिका में क्रांति के बड़े गद्दार कोबाड गाँधी को लिखने के लिए जगह दे रहे है। जो पूरी तरफ सरकार के लिए काम करता है। जो जनता के बीच में उत्तर आधुनिकतावादी विचारों का प्रचार प्रसार कर रहा है। ये लोग मिलकर पत्रिका के माध्यम से जनांदोलनों को कानूनवाद अर्थवाद में धकेलने का काम कर रहे है। सोशल मीडिया पर ये लोग मिलकर अब ग्रुप तैयार कर रहे हैं। ये पूरा मेन्शेविक ग्रुप तैयार हो रहा है जैसा 1903 में , रूस सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (RSDLP) के दूसरे कांग्रेस सम्मेलन के दौरान हुआ था। लेनिन ने उस समय भी एक कठोर, अनुशासित और पूरी तरह भूमिगत (अंडरग्राउंड) पार्टी पर जोर दिया था , जिसके सदस्य पेशेवर क्रांतिकारी होंगे।

सीमा आजाद ने जनवादी पत्रकार रोहित शर्मा ( समरभूमि न्यूज चैनल) के ऊपर मानहानि का केस कर दिया। सीमा जी ऐसे लोगों की आवाज को रोक नहीं सकते । आम समाज में एक कहावत है ,जब किसी इंसान को दबाना होता है तो उसे कोर्ट/कचेहरी में उलझा दो। यही काम सीमा और विश्वविजय कर रहे है। खुद तो कुछ करते नहीं, दूसरों को करने देंगे नहीं। ये इनका उसूल है। सरकार की तरह तुम लोग जनवादी आवाजों को दबाने का प्रयास कर रहे हो, जिसमें आप नाकाम रहेंगे। क्योंकि विचारों को मारा या दबाया नहीं जा सकता। किसी कवि ने लिखा है कि
मैं तो घास हूँ,
आपके हर किये धरे पर उग आऊँगा।

हम आपके सोशल मीडिया पर किए सवालों का जवाब देना चाहते हैं
1. सीमा जी आपको कोई विच हंट नहीं कर रहा। आपको तो कोई माओवादी बता ही नहीं रहा। बल्कि आपको बताया जा रहा है कि आप गद्दार है । स्टेट आपको गिरफ्तार नहीं करेगा।
2. दूसरी बात ये है कि सरकार कभी ऐसे जिम्मेदारी लेकर स्टेटमेंट नहीं निकलता। फर्क है सीमा जी। सरकार जनता को जागरूक नहीं करती आप जैसे लोगों से। कन्फ्यूज मत होये।

दस्तक मैगजीन के पाठक हम लोग भी थे लेकिन जब से इनकी विचारधारा का पता लगा है। तभी हम लोगों ने इनकी पत्रिका का भी बहिष्कार कर दिया है। हमारी न्यायपसंद जनता,बुद्धिजीवी और सभी मित्र संगठनों से अपील है कि ऐसी विचारधारा के खिलाफ आपको भी बोलना चाहिए। और ऐसे लोगों को कोई भी आर्थिक मदद न करें क्योंकि ये लोग जनता के नाम पर पैसा लेकर आरामदायक जिंदगी जीते है। ऐसे लोगों से सबको सवाल पूछने चाहिए कि आपका जमीर मर गया हैं क्या ? अगर जिंदा है तो अपनी गलतियों के लिए माफी मांगे सोशल मीडिया पर जनता से। और एक राय है आपको , कि खुद के बचाव में लोगो को एकत्रित करना छोड़ दे। अब सब जानते है कि आप क्या है, और कौन है।

छात्र एकता मंच, कॉमरेड मिसिर बेसरा, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो सदस्य थे, को...
30/07/2026

छात्र एकता मंच, कॉमरेड मिसिर बेसरा, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो सदस्य थे, को झारखंड में दलाल नौकरशाह भारतीय राज्य द्वारा गिरफ्तार किये जाने का विरोध करता है।

कॉमरेड मिसिर बेसरा को मंगलवार की रात, 10 बजे से 11 बजे के बीच, धनबाद और गिरिडीह के बीच के सीमावर्ती क्षेत्र में गिरफ्तार किया गया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे, इस क्षेत्र को माओवादियों से मुक्त कराने हेतु एक बड़ी सफलता बताया। वास्तव में, राज्य तो माओवाद को समाप्त करके अपने विदेशी मालिकों को यहाँ के प्राकृतिक संसाधन बेचना चाहता है।

‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए संदेश में, अमित शाह ने कहा कि “सीआरपीएफ एवं झारखंड पुलिस के संयुक्त प्रयासों से इस क्षेत्र को नक्सलियों से मुक्त करने के प्रयासों में बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस प्रक्रिया में 1 करोड़ रुपये का इनामी नक्सली ‘अनल उर्फ पतिराम मंझी’ एवं 15 अन्य नक्सली मारे गए।” राज्य अपने ही लोगों को मार रहा है, और इसका जश्न भी मना रहा है। भारत में वास्तव में एक गैर-घोषित युद्ध चल रहा है।

गृह मंत्री ने कहा कि माओवाद को दशकों तक भय और आतंक के पर्याय के रूप में देखा गया है। सच तो यह है कि लुटेरा वर्ग माओवाद से डरता है। उसने आगे कहा, "मैं शेष नक्सलवादियों से अपील करता हूं कि वे उस विचारधारा को त्याग दें जो हिंसा, आतंक और हथियारों से जुड़ी है, और विकास और विश्वास की मुख्यधारा में शामिल हों।" यह शोषक वर्ग, जिसके पास पुलिस, अर्धसैनिक बल, जेल, संसद, गोदी मीडिया और अमेरिका और इज़राइल से आयातित हथियारों जैसे सभी जनता विरोधी साधन हैं, लोगों से गांधीवादी तरीके से अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने की मांग कर रहा हैं। वे जिस विकास की बात कर रहे हैं, वह दलाल घरेलू कंपनियों और साम्राज्यवादी हितों में विकास है।

झारखंड में देश के कुल खनिज संसाधनों में से 40% संसाधन मौजूद हैं। यहाँ भारत के कुल कोयला भंडारों में से 27.3%, लौह अयस्क में 26%, तांबा अयस्क में 18.5% संसाधन हैं। इसके अलावा, यहाँ यूरेनियम, माइका, बॉक्साइट, ग्रेनाइट, चूनापत्थर, चाँदी, ग्रेफाइट, मैग्नेटाइट एवं डोलोमाइट जैसे खनिज भी पाए जाते हैं। यहाँ पत्थर, चूनापत्थर एवं रेत की भी बड़ी मात्रा मौजूद है।

इतनी अधिक मात्रा में खनिज संसाधन होने के बावजूद, एवं 20वीं शताब्दी के पहले दशक से ही यहाँ खनन कार्य चल रहा होने के बावजूद, झारखंड अभी भी देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक है।

राज्य इन खनिजों को अपने नियंत्रण में लेने, या कहें कि, हड़पने और फिर उन्हें बेच देने के लिए हर प्रयास करता हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को, एक बाधा के रूप में देखा जाता है, जिन्हें धोखा देकर या दबाव डालकर, बड़े खनन कंपनियों के लिए रास्ता बनाया जाता है। उन्हें बेदखल कर दास बना दिया जाता है या पलायन करने के लिए मजबूर किया जाता है। महिलाओं का बलात्कार किया जाता है। कई सारे गाँव में आग लगा दी जाती है।

यह औपनिवेशिक नीति से विकसित हुआ है। औपनिवेशिक नीति के कई पुराने उद्देश्यों के अलावा, वित्तीय पूंजी, कच्चे माल के स्रोतों के लिए संघर्ष और पूंजी के निर्यात भी इसमें शामिल है। इसलिए, औपनिवेशिक और अर्ध-औपनिवेशिक क्षेत्रों के संसाधन और सस्ती श्रम शक्ति, जमींदारों और दलाल नौकरशाही पूंजीपतियों के सहयोग से, साम्राज्यवाद द्वारा लूटे जा रहे हैं। शक्तिशाली देशों द्वारा, छोटे या कमजोर राष्ट्रों के शोषण – ये सभी, साम्राज्यवाद की विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जिन्हें परजीवी या क्षीण हो रहे पूंजीवाद के रूप में लेनिन द्वारा परिभाषित किया गया है। साम्राज्यवाद अपने ही विनाश का मार्ग बनायेगा और शोषित और दबे हुए लोगों द्वारा पराजित किया जाएगा।

अमित शाह, कम्युनिस्टों से अपनी विचारधारा को त्यागने का आग्रह कर रहा हैं। राज्य, मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद से डरता है क्योंकि ये विचारधारा सर्वाहारा के हाथों में मजदूर किसान का राज बनाने हेतु एक हथियार हैं। यह मनोवैज्ञानिक युद्ध, “सूरजकुंड योजना” का ही हिस्सा है। इस योजना के तहत राज्य, “बंदूक एवं कलम धारण करने वाले नक्सलियों” को खत्म करना चाहता है ताकि संसाधनों पर आसानी से नियंत्रण किया जा सके।

राज्य ने नोएडा और मानेसर में वेतन वृद्धि के लिए प्रदर्शन कर रहे मजदूरों गिरफ्तार किया, दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल कर देशभर में उन्हें गिरफ्तार किया और मध्य प्रदेश में केन बेटवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी किसानों पर लाठीचार्ज कर उनको अगवा कर लिया। अब कॉमरेड मिसिर बेसरा के गिरफ्तार करके, राज्य इस जीत का जश्न मना रहा हैं। अंत में तो उन ही लोगों की जीत होगी है जो सामंतवाद, दलाल नौकरशाह पुँजीवाद और साम्राज्यवाद को समाप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इस बात को लेकर गंभीर चिंताएं हैं कि कॉमरेड मिसिर बेसरा को गैर-कानूनी तरीके से मार डाला जा सकता है। हम मिसिर बेसरा की तुरंत एवं बिना किसी शर्त के रिहाई की मांग करते हैं।

क्रांतिकारियों पर किये जा रहे अत्याचारों को तुरंत बंद करो और जनता विरोधी NIA को रद्द करो।

छात्र एकता मंच सभी लोकतांत्रिक एवं प्रगतिशील ताकतों से अपील करता है कि वे इस गिरफ्तारी का विरोध करें, एवं सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग करें।
कॉमरेड मिश्र बिसरा को रिहा करो।।

29/07/2026

हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संघर्ष मंच ने आज 29 जुलाई को विरोध प्रदर्शन और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के लिए मार्च कर रहे हैं। ये प्रदर्शन बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में किया जा रहा है जिसमें मुख्य मांग है
1. एग्री डिस्कॉम को वापिस लिया जाए।
2. गुरुग्राम व नूँह जिले में निजी कंपनियों को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को रद्द करे।
3. स्मार्ट मीटर प्रणाली पर रोक लगे।
छात्र एकता मंच सभी मांगो का समर्थन करता है और निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों के साथ खड़ा है।

दोस्तों,                     बीबीसी ने अलग अलग मिडिया रिपोर्ट्स से उजागर किया है कि साल 2021 से लेकर 2026 के बीच कम से क...
28/07/2026

दोस्तों,
बीबीसी ने अलग अलग मिडिया रिपोर्ट्स से उजागर किया है कि साल 2021 से लेकर 2026 के बीच कम से कम 50 परीक्षाओं में पेपर लीक हुए है। इनमें राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएँ,लोक सेवा आयोग, पुलिस भर्ती,शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाएं शामिल है। जिसके खिलाफ काफी समय से आंदोलन चल रहा था। जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा लेकर छात्रों ने एक जीत को हासिल किया था। लेकिन ये जीत अधूरी है जब तक पूरी शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं हो जाती है।
इस आंदोलन में नौजवान बिना डरे सरकार की लाठियों , वाटर केनन और गोलियों के सामने डटे हुए हैं। बिहार में अभी भी छात्र सत्ता के दमन का सामना कर रहे हैं। हम सभी छात्रों के साथ खड़े है और इस ब्राह्मणीय हिंदुत्व फासीवादी सरकार की निंदा करते है। जो लगातार छात्रों पर बर्बरता करने पर तुली हुई है। भाजपा सरकार यही तरीका अपनाती है हर आंदोलन और आंदोलनकारियों के प्रति। आंदोलन को बदनाम करो, दमन करो, फिर भी ना माने तो मांगे मानने का झूठ दिखावा करो। फिर चुपके से वहीं नीति ,कानून लागू करो जिसके खिलाफ आंदोलन था। किसान आंदोलन में भी यही हुआ। अभी छात्र आंदोलन में भी यही कर रहे है। जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ तब ये मांग भी मानी गई थी कि किसी भी आंदोलनकारी पर कोई भी केस या गिरफ्तारी नहीं होगी। लेकिन बिहार में हजारों छात्र विभिन्न केसों में जेल में कैद है। उनके लिए आवाज उठाने वाले छात्रों पर AK- 47 से गोलियां मारी जा रही है। भाजपा सरकार अपनी गलतियों को छिपाने के लिए छात्रों को गोलियों का निशाना बना रही है। हमें दोबारा बड़ा छात्र आंदोलन करके इस पूरे सिस्टम के खिलाफ मोर्चा लेना पड़ेगा। तभी हम शिक्षा व्यवस्था को बचा पाएंगे। क्योंकि इन्होंने तो पूरा जुगाड़ बिठा रखा है शिक्षा व्यवस्था को तबाह करने का। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसका ही उदाहरण हैं।
साथियों इस बर्बर दमन के खिलाफ एकजुट होए।
आओ इस सिस्टम को सुधारने में अपना योगदान दे।

# # पेपर लीक का एक जवाब,
इंकलाब जिंदाबाद।। # #

*We came to know that other student  Activists associated with bsCEM and  FACAM members are also missing for the last on...
17/07/2025

*We came to know that other student Activists associated with bsCEM and FACAM members are also missing for the last one week. After knowing that comrade Samrat Singh and Gurkirat Kaur were picked up by Delhi police, now it is being strongly anticipated that all activists have been illegally detained by Delhi police.*

1. Etmam Ul Haque (FACAM) Member
2. Baadal (FACAM) Member
3. Gaurang Student Activist (BSCEM)
4. Gaurav Students Activist (BSCEM
5. Vallika Varshi ( NAZARIYA MAGAZINE)
6. Samrat Singh Social Activist and Psychologist

We Demand that concerned authority/officer should immediatly provide wherabouts of all Activists immediately !!

हमारे बहुत ही संघर्षशील साथी साइकोलॉजिस्ट सम्राट सिंह यमुनानगर जो पिछले 20 सालों से समाज के बीच में रहकर दलितों, पिछड़ों...
13/07/2025

हमारे बहुत ही संघर्षशील साथी साइकोलॉजिस्ट सम्राट सिंह यमुनानगर जो पिछले 20 सालों से समाज के बीच में रहकर दलितों, पिछड़ों ,मुस्लिम,किसान ,मजदूरों व हर वर्ग की आवाज उठा रहे हैं और समाज के हर आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले साथी को #कल शाम 7 बजे उनके घर से दिल्ली पुलिस प्रशासन की टीम ने बिना किसी नोटिस दिए ओर न कोई केस या FIR के बारे में बताया गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तार कर लिया है,सत्ता की तानाशाही के खिलाफ बोलने वालों को सरकार गिरफ्तार करके आम जनता की आवाज दबाना चाहती हे ...
#छात्र एकता मंच दिल्ली पुलिस प्रशासन और सत्ता का कड़े शब्दों में विरोध करता है अगर दिल्ली प्रशासन साथी को नहीं छोड़ती तो पूरे हरियाणा में आंदोलन किए जाएंगे...
Release Samrat Singh immediately!!
👉जारीकर्ता: छात्र एकता मंच (हरियाणा)

14/05/2025

छात्र #एकता #मंच
भारतीय जनता पर शासक वर्ग की पार्टियों द्वारा थोपे गए युद्ध के चलते भारत की कम्युनिस्ट पार्टी CPI (Maoist) द्वारा पत्र जारी कर Ceasefire (युद्धविराम) कर शांति वार्ता की अपील की गई है।

जिसमें मध्य भारत में लगाए जा रहे मिल्ट्री कैंपों को हटाने , नए कैंप स्थापित ना करने ,गांव के लोगों को फर्जी मुठभेड़ों में हत्या न करने का आहवान कर शांतिवार्ता के लिए परिस्थितियाँ बनाने का अनुरोध किया गया है।

साथ ही जनवादी क्रांतिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनता से युद्धविराम व शांतिवार्ता का समर्थन कर शासक वर्ग की पार्टियों के खिलाफ संघर्ष करें।

साथियों..
आप को पता होगा भारत देश के अंदर ही आदिवासियों और क्रांतिकारियों की अपने ही देश में हत्या करना बंद करो। आदिवासियों और क्रांतिकारियों की को लगातार जूठे कैश लगाकर उन्हें मारा जा रहा है।
मध्य भारत व देश के अनेक हिस्सों में लगभग चार दशक से अपनी ही जनता के खिलाफ भारत सरकार ने युद्ध छेड़ा हुआ है।

जिसमें एक तरफ जनता और भारतीय क्रांति का नेतृत्व करती हुई कम्यूनिस्ट पार्टी (C.P.I (Maoist) है।
वहीं दूसरी तरफ शासक वर्ग का नेतृत्व करती हुई ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी सरकारें हैं।

जहाँ जनता व उनकी पार्टी CPI (Maoist) जल - जंगल - जमीन - आत्मसम्मान को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है वहीं सरकार आदिवासियों को उजाड़कर, उनके गांव जलाकर , झूठी मुठभेड़ों में हत्या कर जल - जंगल - जमीन को बड़े दलाल पूंजीपतियों व सम्राज्यवादी मालिकों की झोली में भर देना चाहती है।

यह सभी भारतीय सेना के कैंप लगाकर हथियारों के माध्यम से लम्पट गुंडों को भर्ती कर (DRG के नाम पर) किया जा रहा है।
इस युद्ध में सरकार अपने मालिकों के मुनाफे को सुनिश्चित करने के लिए लगातार निहत्थे आदिवासियों और उनके साथ संघर्ष कर रहे माओवादियों को तरह - तरह की फर्जी मुठभेड़ों में हत्या कर रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में शुरू किए गए असंवैधानिक ऑपरेशन समाधान - प्रहार व ऑपरेशन कगार के दौरान अब तक बीते एक साल में 400 से अधिक भारतीय जनता की हत्या कर चुकी है।

युद्ध जोकि शासक वर्ग की पार्टियों द्वारा आम जनता पर थोपा गया है। इसके खिलाफ लिखने, आवाज उठाने व जनवादी अधिकारों के लिए लड़ने वाले हजारों सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमें जेलों में बंद किया जा रहा है। आलम यह है कि जनवादी संगठनों जैसे मूलवासी बचाओ मंच (MBM) को भी शासक वर्ग की पार्टियां बैन कर रही हैं।

छात्र एकता मंच सभी जनवादी संगठनों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनता से अपील करता है।
कि सभी लोग शोषणकारी सरकार के विरुद्ध फर्जी मुठभेड़ों के विरुद्ध और भारत कि कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) द्वारा आहवान युद्धविराम एवं शांतिवार्ता के लिए पूरे जोर से अपनी आवाज उठाओ और इस शोषणकारी सरकार पर पुरजोर से दबाव बनाए।

(Maoist) द्वारा शांतिवार्ता के आहवान का समर्थन करो!
•
#बस्तर व देश के अन्य हिस्सों में सरकार द्वारा थोपे गए युद्ध का विरोध करो।

• #ऑपरेशन समाधान - प्रहार को खत्म करो।
(Maoist) द्वारा शांतिवार्ता के आहवान का समर्थन करो।

#बस्तर व देश के अन्य हिस्सों में सरकार द्वारा थोपे गए युद्ध का विरोध करो।
#इंकलाब जिंदाबाद!
#साम्राज्यवाद मुर्दाबाद !

 #सभी  #साथी  #जरूर पढ़ें।सभी साथियों को हमारा क्रांतिकारी सलाम! ब्राह्मणवादी संशोधनवादी महिला विरोधी मानसिकता के खिलाफ ...
29/04/2025

#सभी #साथी #जरूर पढ़ें।
सभी साथियों को हमारा क्रांतिकारी सलाम!
ब्राह्मणवादी संशोधनवादी महिला विरोधी
मानसिकता के खिलाफ संघर्ष तेज करो।
साथियों, छात्र एकता मंच के सामने एक गंभीर मामला आया है।
जिसमें (मजदूर अधिकार संगठन) ने बताया गया कि सुमित देवडू संगठन में कार्यरत रहते समय संगठन के नेतृत्व के खिलाफ जाकर संगठन तोड़ने , महिला विरोधी गतिविधियों और उपभोक्तावादी गतिविधियों में शामिल पाया गया है।
जिसके कारण सुमित को संगठन ने निकाल दिया गया है।
हम मजदूर अधिकार संगठन द्वारा की गई इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं और इस तरह से मजदूर, किसान,महिला विरोधी मानसिकता का वाले सुमित देवडू का विरोध करते हैं
और मजदूर अधिकार संगठन के फैसले का समर्थन करते हैं।
सुमित जैसे तत्वों के द्वारा की गई जाने वाली इस प्रकार की कार्रवाई महिला विरोधी,जन विरोधी मानसिकता के खिलाफ आप सभी से आवाज उठाने की अपील करते हैं। ऐसे लोग समाज में कुरीतियां फैलाने के अलावा और कुछ नहीं करते इन्हें जनता के दुखों और तकलीफों से कुछ लेना देना नहीं होता ऐसे लोग समाज के साथ धोखा ही करते है।
साथ में जनता के शोषण को बढ़ाने में राज्य की मदद करते है।
साथियों हम आपको बता देना चाहते हैं कि *सुमित देवुडु (सोनीपत) कुछ साल पहले छात्र एकता मंच का सदस्य भी रहा है जो बाद में पढ़ाई पूरी होने के बाद मजदूर अधिकार संगठन में काम करने चला गया था ।
अत: मजदूर अधिकार संगठन द्वारा की गई जांच पड़ताल और कार्रवाई के आधार पर छात्र एकता मंच की कार्यकारिके कमेटी ने इस मामला पर यह निर्णय लिया है
की छात्र एकता मंच से (सुमित देवडू,सोनीपत) औपचारिक रूप से निकाल दिया जाए है और इस बारे में सभी संगठन सदस्यों व सभी हमदर्दों से संगठन अपील करता है और सूचित करता है कि सुमित देवडू जैसे मजदूर, किसान विरोधी,महिला विरोधी मानसिकता के लोगों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दें एक बार हम फिर से मजदूर अधिकार संगठन का समर्थन करते हैं।
और सुमित देवडू सोनीपत जैसी तत्वों को बहिष्कार करते हैं।
संशोधन वाद के खिलाफ संघर्ष तेज करो!
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!
इंकलाब जिंदाबाद!
छात्र एकता मंच ( हरियाणा )

Press release

अवसरवादी - विघटनवादी - संसोधनवादी, महिला विरोधी सुमित देवडू का बहिष्कार करो!
संगठन की क्रांतिकारी विचारधारा मार्क्सवाद को ठोस व्यवहार में लागू करते हुए जुझारू मजदूर आंदोलन का निर्माण करो!
साथियों, आज शासक वर्ग मजदूर आंदोलन समेत दुनिया के हर जनहितैषी आंदोलन को खत्म करने के लिए शारीरिक व मानसिक युद्ध छेड़े हुए हैं. एक तरफ जनता के आंदोलन को पुलिस-फ़ौज के माध्यम से खत्म करने की कोशिश की जा रही है वही दूसरी तरफ जनता में व जनता के हितों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं में अविश्वास की भावना पैदा करने के लिए लगातार मीडिया के माध्यम से लगातार मार्क्सवाद विरोधी प्रचार किया जा रहा है. मार्क्सवाद को गलत साबित करने के लिए शिक्षण संस्थानों में अनेक शोध करवा रहा है. शासक वर्ग ये साबित करने में लगा हुआ है कि मार्क्सवाद फेल हो चुका है व पूंजीवाद जनवाद ही एकमात्र ऐसी विचारधारा है जो दुनिया पर राज करेगी.जो कार्यकर्ता शासक वर्ग के इस प्रोपगेंडा का शिकार नही होते उन्हें खरीदने के लिए बड़े-बड़े इनाम घोषित कर रहा है.लेकिन हमें नही भूलना चाहिए कि शासक वर्ग हमे कमजोर करने के लिए हमारे अंदर मौजूद सर्वहारा विरोधी ( जो निजी संपत्ति को बचाए रखना चाहता है ) भावनाओं का भी सहारा लेता है. जिसके कारण अनेक निम्न-पूंजीवादी सोच रखने वाले कार्यकर्ता शासक वर्ग की भावनाओं का शिकार हो जाते हैं.वे अपने आप को दिखाते को शोषित वर्ग के पक्ष में है लेकिन हकीकत में वे शासक वर्ग की भावनाओं द्वारा द्वारा चलाए जाते हैं.ये सब समाज मे आज से शुरू नही हुआ है बल्कि हजारों साल से हो रहा है. जब 1905 में रूस में बुर्जुआ जनवादी क्रांति असफल हुई तो बोल्शेविक पार्टी में भी शासक वर्ग की विचारधारा की सेवा करने वाले अनेक संसोधनवादी सामने आए.जिन्होंने न सिर्फ शासक वर्ग की विचारधारा की सेवा की बल्कि बोल्शेविक पार्टी में अनेकों बार तोड़-फोड़ करने की कोशिश की. जिसमे वे एक समय के लिए तो सफल हुए लेकिन अंत मे उन्हें हार का ही मुँह देखना पड़ा व सर्वहारा वर्ग का नेतृत्व करने वाली पार्टी को जीत मिली. कार्यकताओं के पतित होने से क्रांति के ज्वार में ठहराव तो आ सकता है लेकिन वैज्ञानिक साम्यवाद को आने से नही रोका जा सकता. साम्यवाद की जीत तय है इस हकीकत को कोई नही बदल सकता.
हमारे इलाके में भी शोषित वर्ग से गद्दारी करने वाला एक कार्यकर्ता सुमित देवडू हैं. जिसका राजनीतिक पतन व जनताविरोधी चरित्र इस प्रकार है -
अवसरवादी-विघटनवादी-संसोधनवादी सुमित राजनीतिक रूप से पतित कैसे है.
1 दर्शनशास्त्र के रूप में- सुमित का दर्शनशास्त्र हेगल और फायरबाग का दर्शनशास्त्र है जिसके अनुसार हर चीज के दो पहलू है लेकिन प्रधान पहलू कोनसा है ये पता नही होता है ( हीगेल का सिद्धांत ). अपनी विघटनकारी जरूरत के हिसाब से प्रधान पहलू को गौण ओर गौण पहलू को प्रधान पहलू बनाते हैं. इसके साथ ही परिस्थितियों के अनुसार कार्य करने की जीवनशैली अपनाते हैं.यह फायरबाख के सिद्धांत के अनुसार परिस्थितियों का गुलाम होना है. विघटनकारी ओर संसोधनवादी सिद्धान्तों का प्रयोग मार्क्सवाद का नकाब ओढ़ कर करते हैं. इसलिए यह दर्शनशास्त्र में संसोधनवाद है.
2. राजनीतिक अर्थशास्त्र - सुमित मजदूरों को आर्थिक संघर्ष तक ही सीमित रखते हैं. मजदूर के राजनीतिक संघर्ष ( राजनीतिक सत्ता पाने की भावना, मजदूरों की शिक्षा-दीक्षा ) पर ध्यान न देना.
3. समाजवाद- सुमित ओर सुमित जैसे तत्वों का समाजवाद सामंती समाजवाद है. जिस प्रकार बड़ा सामन्त छोटे सामन्त पर दया का हाथ रखता है उसी प्रकार ये लोग भी जनसगठन की जरूरत को न समझते हुए भाईचारे को ही केंद्र में रखते हैं. जनसंगठन में एक -दूसरे का साथ देते हुए एक -दूसरे की गलतियां छुपाते है.कामरेड माओ के शब्दों में ये मालूम होते भी सम्बन्धित वयक्ति स्पष्ट रूप से गलत है लेकिन वो पुरानी जान पहचान का है, एक ही इलाके का है, स्कूल दोस्त हैं, घनिष्ठ मित्र हैं, पिरीज़न है या पहले मातहत रह चुका है इसलिए उससे सिद्धांत के आधार पर तर्क न करना बल्कि शांति व मित्रा बनांए रखने के लिए मामले को घिसटते देना या फिर मामले को ऊपरी तौर पर छु देना . उसका पूरी तरह से समाधान न करना जिसे की अच्छे संबंध बने रहे. नतीजे के तौर पर संगठन तथा संबंधित व्यक्ति दोनों को नुकसान पहुचना है. इसका शानदार उदाहरण सुमित ओर सुमित जैसे तत्वों का उदारतावादी - अवसरवादी- विघटनकारी स्वरूप है.
इतना ही नही सुमित अनेक महिला विरोधी यौन मामलों में लिप्त था जो उसने संगठन समेत अपनी पत्नी से छुपाए रखा, आइए सुमित के महिला विरोधी चरित्र के बारे में बताते है. 1. जनसंगठन की महिला साथी के साथ रेप करने की कोशिश करना
2. एक साथी की जीवनसाथी के साथ अतिरिक्त विवाह संबंध में जाना
3. वेश्यावृत्ति में संलिप्त होना
4. एक महिला साथी के साथ अनैतिक रूप से लैंगिक बातचीत में जाना
5.एक साथी की बहन के साथ संबंधों में जाना ( शादी का झूठा वादा करते हुए )
6. चलती ट्रेन में एक किन्नर के साथ लैंगिक संबंध बनाना
7. पुरुषों से अनैतिक रूप से लैंगिक सम्बधों में जाना
8. पेशेवर महिला साथी को कॅरियर बनाने के प्रोत्साहित करना 9. पेशेवर महिला साथी में बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना 10. एक महिला साथी के साथ संबंध में जाने के लिए अपने चार एकड़ जमीन की शेखी बघारना ( लोभ देना ) 11.इन सभी महिला विरोधी घटनाओं को करते समय अपनी पत्नी को धोखा देना व उसे आज तक भी अपने बारे में न बताना.
कुल मिलाकर आज लगता सुमित का संगठन में आने का एक ही मकसद लगता हैं कि महिला साथियों व पुरुषों को अपनी भोग-विलास की वस्तु समझते हुए उनका शोषण व उत्पीड़न करना. जब उसे ये पता चला है कि अब उसके मंसूबे पूरे होने वाले नही है तो उसने अपने अवसरवादी-विघटनवादी तरीके से संगठन को तोड़ने की कोशिश की.
सुमित द्वारा संगठन में तोड़-फोड़ करने व सांठनिक नियमों को ताक पर रखने की कुछ झलके -
1. उचित कमेटी में अपनी बातों को न रखते हुए मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ दुष्प्रचार करना.
2.नेतृत्व से बदला लेने की बात करना
3.संगठन से निकाले गए जनविरोधी तत्व के साथ एकता स्थापित करने के लिए संगठन विरोधी की गई मीटिंग में सक्रिय भागेदारी लेना
4.रेप के मामले में दुरुस्तीकरण अभियान में शामिल न होते हुए मौजूदा साथी ( जिसे दुरुस्तीकरण अभियान चलाना ) को नेतृत्व का भगत बताना
5.रेप के मामले मे दुरुस्तीकरण अभियान में शामिल न होने पर कारण बताओ नोटिस का आज तक जवाब न देना
6. पेशेवर साथियों को कॅरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना, सांगठनिक नियमो की अवहेलना करना
7.महिला विरोधी तत्व के खिलाफ की कारवाई को जनता में गलत बताना
8.संगठन में फैसला लेने के सांगठनिक नियम जनवादी केन्द्रीयता का उल्लंघन करते हुए नेतृत्व को तानाशाह बताना
9.संगठन के विशेष बैठक में नेतृत्व के खिलाफ ग्रुप बनाने की कोशिश करना
10.साजिश करके संगठन की उच्च कमेटी में अपने मनपसंद लोगों को भेजना
11.संगठन के विशेष बैठक में लिए गए केंद्रीय कार्यभार की अवहेलना करते हुए कार्यकर्ता में केंद्रीय कार्यभार के खिलाफ प्रचार करना
जनता से अपील -विश्व दृष्टिकोण और हमारी सैद्धांतिक समझ के मुताबिक मार्क्सवाद हमारा मार्गदर्शक है. यह सिद्धांत हमारे व्यवहार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है. मार्क्सवाद संसार में सबसे वैज्ञानिक सिद्धांत साबित हुआ है. हमें इसे हमारे देश के ठोस हालात में लागू करना होगा और क्रांति को सफल बनाना होगा. वर्ग संघर्ष का मार्क्सवाद सिद्धांत में प्राथमिक स्थान होगा. इसी तरह प्रत्येक देश में खास समस्या के लिए इस सिद्धांत को लागू करना है. मार्क्सवादी सिद्धांत को विकसित करने के लिए हमे समाज मे मौजूद सभी संशोधनवादियों के खिलाफ संघर्ष करना होगा. ताकि हम समाज मे मौजूद मार्क्सवाद का चोला ओढ़कर बैठे संशोधनवादियों का पर्दाफाश कर सकें. हमारे इलाके में मौजूद अवसरवादी-विघटनकारी-संसोधनवादी सुमित देवडू मार्क्सवाद का चोला ओढ़कर अपनी भोग-विलास को पूरा किया है. मजदूर अधिकार संगठन सुमित के महिला विरोधी, जनता विरोधी, क्रांति विरोधी व संगठन विरोधी व्यवहार के कारण हमारा संगठन सुमित देवडू को संगठन से बर्खास्त करता है और जनता से अपील करता है कि सुमित से अपने सभी प्रकार के दोस्ताना संबंधों को तोड़ दे.
जारीकर्ता-मजदूर अधिकार संगठन
संपर्क सूत्र-9053887470

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विषयः डॉ आम्बेडकर के सपनों का भारत और मौजूदा समय की चुनौतियाँ स्थानः MDU एक्टिविटी सेंटर, रोहतक
(छात्र एकता मचं)

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