16/07/2026
क्या 'मिर्ज़ापुर' वाले देसी क्राइम ड्रामा से बोरियत होने लगी है?
हो रही है, पर मिर्ज़ापुर से नहीं, उसके सस्ते कॉपी-पेस्ट से।
यही तो इस पूरे heartland crime फॉर्मूला का विरोधाभास है। शुरू में जब #मिर्ज़ापुर, #पाताल_लोक, #गैंग्स_ऑफ_वासेपुर आए तो वो फ्रेश लगा - चमकीले #बॉलीवुड से दूर, एक कच्ची, देसी दुनिया।
पर अब हर दूसरा शो वही कर रहा है - यूपी-बिहार का बैकग्राउंड, हर दूसरे शब्द में गाली, #बंदूक, नेता-पुलिस-माफिया का वही त्रिकोण। तो बोरियत कहानी से नहीं, कहानी कहने के आलसी तरीके से हो रही है। लोग अब #सोशल_मीडिया पर भी यही कह रहे हैं कि छोटे शहरों की कहानी का मतलब सिर्फ क्राइम ही क्यों?
और फिर भी, व्यूअरशिप देखो तो कुछ और ही कहानी है। मिर्ज़ापुर सीजन 4 का इंतज़ार अभी भी सबसे ज़्यादा है। रिपोर्ट्स के हिसाब से वो late 2025 से mid 2026 के बीच आने वाला है, प्राइम वीडियो पर ही। सीजन 3 के एंड में गुड्डू #पंडित ने आखिर गद्दी ले ली है, पर सवाल वही है - क्या वो टिक पाएगा? और कलीन भैया जिंदा हैं या नहीं, ये सबसे बड़ा सस्पेंस है।
तो असल टेस्ट 2026 में है। अगर शो सिर्फ गाली और गोली पर टिका रहा तो थकेगा, पर अगर कैरेक्टर में गहराई लाया - जैसे पाताल लोक 2 ने किया, जहाँ वायलेंस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं था - तो लोग फिर खिंचे चले आएंगे।
बोरियत फॉर्मूले से है, मिर्ज़ापुर जैसे दमदार किरदारों से नहीं।
तुम्हें क्या लगता है - तुम मिर्ज़ापुर को उसके किरदारों के लिए देखते हो, या बस उस रॉ वायलेंस के लिए?
Daren Follweiler