03/06/2020
मैं इलाहाबाद (प्रयाग राज) में पिछले दो साल से मजदूरी करने जा रहा था। इस वर्ष दीपावली में अपने परिवार के साथ गया था। वहां ईंट-भट्ठा में काम करता था। लॉकडाउन के कारण वहीं फंस गया। प्रयागराज में एक बार बच्ची को चक्कर आया तो डॉक्टर के यहां दिखवाया। पीलिया की जांच भी कराई लेकिन वैसा कुछ नहीं बताया। वहां सब नार्मल बताया और कहा धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। फिर वहां से किसी तरह एक निजी बस से घर आने की व्यवस्था बनी तो मैं 28 मई को मेरी दोनों बेटी, एक बेटा और पत्नी को लेकर चल दिया। 29 मई को बिलासपुर पहुंचा तो बड़ी बेटी जो कि 9 साल की है उसकी तबीयत थोड़ी खराब लगी। उसके मुंह से लार निकल रही थी, जिससे खून आ रहा था। वहां तहसीलदार साहब थे तो उन्होंने पुलिस वालों से कहकर ऑटो करवाया और मैं अपनी बेटी को लेकर सिम्स पहुंच गया। मेरी 4 साल की बेटी, 2 साल का बेटा और 27 साल की पत्नी को सीधे मेरे गांव डगनिया भेज दिया गया। 29 मई की सुबह जब मैं सिम्स पहुंचा तो पहले बेटी को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया। भर्ती होने से पहले बच्ची की हालत बहुत खराब नहीं थी, वह खा पी रही थी और बोल भी रही थी, लेकिन भर्ती करने के बाद हालत बिगड़ गई। तो डॉक्टर कहने लगे कि इसकी जान को खतरा है। खून की कमी थी तो एक यूनिट खून भी चढ़ाया। वहीं कोरोना जांच के लिए सैंपल भी लिया गया। फिर हमें जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया। यहां उसकी हालत इतनी बिगड़ गई की खाना-पीना भी छोड़ दिया। बोल भी नहीं पा रही थी। सिम्स के डॉक्टरों ने मेरी बेटी की जान का हवाला देकर मुझसे तीन बार अगूंठा लगवा लिया। मैंने पूछा भी क्या लिखा है तो बोले, हालत बिगड़ रही है इसलिए डॉक्टरों के ऊपर कुछ न आए इसलिए आपके हस्ताक्षर जरूरी हैं। बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही थी और मैं पूरी तरह परेशान था, मैंने कहा कि अगर आप लोग कुछ नहीं कर पा रहे है तो मैं बच्ची को किसी निजी अस्पताल ले जाऊंगा। जैसे ही मैंने ये कहा तो उन्होंने कहा यहां हस्ताक्षर कर दो। मैं अनपढ़ आदमी हूं। पढ़ा लिखा हूं नहीं, मुझे पता नहीं उन्होंने कागज में क्या लिख रहा था, जबकि मैं हस्ताक्षर भी नहीं कर पाता, मुझे अपनी बेटी की जान बचाने की लगी थी तो मैंने उनके कागज पर अंगूठा लगा दिया और 30 मई को बच्ची को वैन से लेकर निजी अस्पताल की ओर निकला ही था कि गांधी चौक के पास उसकी मौत हो गई। मेरे साथ बच्ची के नाना और मेरा भाई था। फिर शव को गांव लेकर आए तब तक शाम हाे गई थी। फिर 31 मई को सुबह उसे अपने खेत में दफनाया। अभी मैं एक बेटी, एक बेटा और पत्नी के साथ डगनिया क्वारेंटाइन सेंटर में हूं। सिम्स में मुझे बार-बार मेरी बेटी की जान को खतरा होने की बात कही जा रही थी। मैं बुरी तरह डरा था, मुझे डरा-डरा कर अगूंठा लगवाया गया। अब चाहे डॉक्टर ये कह दें कि मैं अपनी मर्जी से लेकर आया हूं। अगर मेरी बेटी को आराम होता तो क्याें दूसरे अस्पताल ले जाता। उसे पहले से कोई बीमारी नहीं थी। मुझे लगा कि पीलिया है लेकिन पहले जांच कराई थी तो पीलिया भी नहीं निकला था। अब बच्ची की मौत कैसे हो गई ये तो मुझे नहीं मालूम।
जैसा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर राजू शर्मा को 9 साल की मृतक बच्ची के पिता ने बताया
मासूम सहित एक ही परिवार के तीन कोरोना पॉजिटिव मिले
बिलासपुर | जिले में एक ही परिवार के चार लोगों को कोरोना हो गया है। मंगलवार को 30 वर्षीय पिता और उनके तीन साल के बेटे के साथ 23 साल के युवक की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जबकि आठ महीने का बच्चा पहले ही एम्स में कोरोना से जंग लड़ रहा है। बिल्हा में मिले तीनों मरीजों को मिलाकर अब तक जिले में 61 पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। इनमें छह ठीक भी हो चुके हैं। जानकार बता रहे हैं कि 30 वर्षीय युवक की बहन के संपर्क में आने से चारों लोगों को संक्रमण हुआ है। युवक की बहन 18 मई को आगरा से लौटी थी और 24 मई को 19 वर्षीय महिला और उसकी चार माह की बच्ची की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके ठीक छह दिन बाद आठ महीने की बच्चे को कोरोना की पुष्टि हुई। और अब तीन और लोग इस घर में पॉजिटिव पाए गए।
वे अपनी मर्जी से बच्ची को लेकर गए
सिम्स की पीआरओ व कोरोना ओपीडी की नोडल अधिकारी डॉ. आरती पांडेय का इस मामले में कहना है कि 29 मई को जब उसके पिता बच्ची को लेकर आए थे तो वह होश में थी, लेकिन सुस्त थी। हमने उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया- जब उसकी हालत बिगड़ती गई तो पता चला कि उसे ब्लड की कमी है। खून की उल्टी भी की थी। फिर भी स्थित में सुधार नहीं हुआ तो हमने सलाह दी कि बच्ची को रायपुर एम्स रेफर कर देते हैं लेकिन पिता ने जाने से मना किया और कहा कि हम अपने डॉक्टर को दिखवाएंगे। आप हमें जाने दीजिए। फिर मैंने उनसे एक कागज में लिखवाया कि आप अपनी मर्जी से मरीज को ले जा रहे हैं। इसके बाद वे कहां गए मुझे पता नहीं, हमने इसकी जानकारी पुलिस को भी दे दी थी। बच्ची को ब्लड कैंसर होने की संभावना है लेकिन पक्का नहीं कह सकती कि उसकी मौत ब्लड कैंसर से हुई या फिर कोरोना से। ये नहीं बता पाऊंगी।
पिता अनपढ़, फिर किसने लिखी चिट्ठी?
कोरोना आेपीडी की नोडल अधिकारी डा. अारती पांडेय ने मोबाइल में एक चिट्ठी दिखाई जिसमें लिखा था कि मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर है ये जानते हुए भी मैं अपनी इच्छा से मरीज को लेकर घर जा रहा हूं। रास्ते में या फिर और कहीं मरीज को कुछ होता है तो सिम्स प्रबंधन और प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। जबकि मृतक के पिता खुद कह रहे हैं कि मैं लिख नहीं पाता। हस्ताक्षर नहीं कर पाता, अगूंठा लगाता हूं। सवाल ये है कि फिर यह चिट्ठी किसने लगी?
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ये है डगनिया क्वारेंटाइन सेंटर। यहीं रुका है मृतक बच्ची का पूरा परिवार।
source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/news/father-said-the-baby-was-fine-only-after-coming-to-sims-condition-deteriorated-127368321.html http://palonlineclasses.blogspot.com/2020/06/blog-post_56.html