25/08/2024
समाज में हर तरह के लोग रहते हैं। अलग -अलग कार्य करते हैं एक शब्द है से*क्स (s*x) जो कभी कामुकता से भर देता है तो कभी शर्मसार करता है।
से*क्स ग़लत नहीं है, ग़लत होता तो दुनिया बनती ही नहीं, तुम और हम पैदा होते ही नहीं। फिर ग़लत क्या है? आगे पढ़ो पता चलेगा
1⃣ माँ की योनि से पैदा हुआ शख्स स्त्री की योनि के लिये इतना उत्साहित क्यूँ रहता है?
2⃣माँ की स्त्री से दूध पीकर बड़ा हुआ शख्स स्त्री के स्तन को ग़लत नज़र से क्यूँ देखता है?
3⃣ जन्म लेने के बाद माँ प्रथम बार चूमती है बच्चे को, ये मर्द जात सारे मैं भी औरतों के लब चूमने के लिये क्यूँ इतने बेक़रार होते हैं?
बात रही औरत की तो ग़लत तुम भी हो सारी नहीं पर कामुकता/हवस तो तुम में भी है। सारे मर्द भी ग़लत नहीं हैं कितने सही हैं तुमको पता है। मर्द जात होकर भी मैं मर्द जात को ही ज्यादा ग़लत कहूंगा।
जहाँ प्रेम है समझ आता है। बाक़ी जगह पर क्या बोलोगे इसे नज़र तुम्हारी गंदी है।
एक दिन अपने मन के कटघरे में ख़ुद को खड़ा करके,
ख़ुद ही वक़ील और जज बन कर पूछना कई सवाल
जवाब मिलेगा तुमको और शायद तुम ख़ुद को ग़लत पाओगे।
बिना किसी झिझक के कहता हूँ इसमें मैं भी शामिल हूँ।
मैं ख़ुद ग़लत हूँ। पर मुझसे झगड़ा किए बगैर,मेरे चरित्र पर सवाल उठाये बगैर,तुमलोग अपने बारे में सोचो
अगर ग़लत पाओगे तो चुप रहना खामोश और अपने अंतर्मन को शुद्ध करने का प्रयास करना।
बदलाव चाहते हो न, तो ख़ुद की सोच से शुरू करो बदलो ख़ुद को दुनिया बदल जाएगी।
दुर्भाग्यवश कहना पड़ा बलात्कार होते थे, होते हैं, होते रहेंगे
मैं इसकी गारंटी तो नहीं ले सकता मगर तुम बदलोगे तो अवश्य ये हैवानियत रुक जाएगी।
वर्ना नाम व वारदात की जगह बदलते रहेंगे बस पीड़िता कभी दामिनी, कभी प्रियंका तो कभी मोमिता कोई भी हो सकती है।
कभी चाचा भाई पिता दोस्त बॉयफ्रेंड कोई अजनबी बलात्कारी हो सकते हैं।
ईश्वर से कामना कीजिये पीड़िता आपके परिवार की बेटी न हो
और बलात्कारी आपके परिवार का बेटा।
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