क्या आप जानते हैं कि मोमिन की मुसीबतें सिर्फ़ तकलीफ़ नहीं बल्कि अल्लाह की रहमत भी हो सकती हैं?
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"मोमिन को जो भी थकान, बीमारी, चिंता या तकलीफ पहुँचती है, अल्लाह उसके बदले उसके गुनाह माफ़ कर देता है।"
(सहीह बुख़ारी: 5641 | सहीह मुस्लिम: 2573)
याद रखिए:
हर मुसिबत के पीछे अल्लाह की हिकमत होती है।
सब्र कीजिए, दुआ कीजिए, क्योंकि हर कठिनाई के साथ आसानी है। #
🤲 ऐ अल्लाह! हमें हर मुसीबत में सब्र अता फरमा। आमीन।
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हज सिर्फ एक सफर नहीं…
यह अल्लाह की तरफ लौटने और खुद को बदलने का सबसे बड़ा मौका है।
इस वीडियो में जानिए:
👉 हज हमें क्या सिखाता है
👉 क्यों हज के बाद इंसान गुनाहों से पाक हो जाता है
👉 हज में सब बराबर क्यों होते हैं
📖 कुरआन (सूरह आले इमरान 3:97) में हज की फर्जियत बताई गई है
📜 हदीस के मुताबिक, सच्चे दिल से हज करने वाला ऐसे लौटता है जैसे आज ही पैदा हुआ हो
💖 हज हमें सब्र, तक़वा और अल्लाह से गहरा रिश्ता सिखाता है
🤲 दुआ:
ऐ अल्लाह! हमें भी हज और उमरा की सआदत नसीब फरमा। आमीन
🌙 9 ज़िल हिज्जा (यौम-ए-अरफ़ा) का रोज़ा इस्लाम में बहुत बड़ी फज़ीलत रखता है।
हदीस के मुताबिक, इस एक दिन के रोज़े से पिछले 1 साल और आने वाले 1 साल के गुनाह माफ हो जाते हैं।
📖 रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“मुझे उम्मीद है कि यौम-ए-अरफ़ा का रोज़ा पिछले और अगले साल के गुनाहों का कफ्फारा बन जाएगा।”
(सहीह मुस्लिम)
👉 यह मौका साल में सिर्फ एक बार आता है
👉 इसे कभी मिस मत करें
🤲 अल्लाह हम सबको इस रोज़े की तौफीक अता फरमाए — आमीन
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ईद-उल-अज़हा सिर्फ एक त्योहार नहीं…
👉 ये अल्लाह की राह में कुर्बानी, सब्र और सच्ची मोहब्बत का पैगाम है।
हज़रत इब्राहीम (अ.स.) और हज़रत इस्माईल (अ.स.) की ये कहानी हमें सिखाती है कि:
✔️ अल्लाह की बात हर हाल में माननी है
✔️ अपनी सबसे प्यारी चीज़ भी अल्लाह के लिए छोड़ सकते हैं
✔️ असली कुर्बानी दिल की होती है (तक़वा)
📖 कुरआन:
“अल्लाह तक न उनका गोश्त पहुँचता है, न खून… बल्कि तुम्हारा तक़वा पहुँचता है”
(सूरह अल-हज 22:37)
🤲 दुआ:
ऐ अल्लाह! हमें सच्ची इताअत, सब्र और इख़लास अता फरमा और हमारी कुर्बानी को कबूल फरमा। आमीन।
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🌙 ईद-उल-अज़हा सिर्फ कुर्बानी का दिन नहीं… बल्कि अल्लाह की बड़ाई और शुक्र का दिन है।
क्या आप जानते हैं?
👉 इन मुबारक दिनों में तकबीर पढ़ना क्यों इतना जरूरी है?
📖 अल्लाह कुरआन में फरमाता है:
"और अल्लाह की बड़ाई बयान करो इस बात पर कि उसने तुम्हें हिदायत दी"
(सूरह अल-बक़रह 2:185)
💫 तकबीर के अल्फाज़:
Allahu Akbar, Allahu Akbar
La ilaha illallah, wallahu Akbar
Allahu Akbar wa lillahil hamd
✨ तकबीर पढ़ने से:
✔ दिल में अल्लाह की अज़मत पैदा होती है
✔ ईमान मजबूत होता है
✔ और इंसान अल्लाह से जुड़ जाता है
🤲 रसूलुल्लाह ﷺ भी इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा तकबीर पढ़ते थे।
🌟 याद रखो:
ईद की असली खुशी कपड़ों में नहीं…
👉 बल्कि अल्लाह की याद में है।
📌 इस ईद अपने घरों, मस्जिदों और दिलों को
तकबीर से रोशन करें 🤍
🤲 दुआ:
ऐ अल्लाह! हमें अपना सच्चा ज़िक्र करने वाला बना दे। आमीन।
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