GRD Rahul

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स्वतंत्र पत्रकार || अपराध और समाज से जुड़ी सिर्फ प्रमाणित खबरें

24/05/2026

UP के गोंडा में सरयू नदी किनारे अंतिम संस्कार के दौरान नोएडा निवासी दीपक वर्मा (30) को मगरमच्छ ने पानी में खींच लिया। 24 घंटे बाद शव बरामद हुआ।

दीपक 6 साल पहले डीहा गांव की रेखा से लव मैरिज कर ससुराल आया था। अब परिवार ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने जानबूझकर उसे मगरमच्छों वाले खतरनाक एरिया में भेजा।

पोस्टमॉर्टम में शरीर पर मगरमच्छ के गहरे निशान मिले हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पूरे केस में सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह सिर्फ हादसा था, या लव मैरिज की दुश्मनी में रची गई साजिश?

24/05/2026

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भखारा थाना क्षेत्र से एक बेहद हैरान करने वाला और फिल्मी अंदाज का मामला सामने आया है। यहाँ ग्राम भेंड्रा में रहने वाला 30 वर्षीय किसान यादराम साहू दो पत्नियों के आपसी झगड़े से इस कदर परेशान हुआ कि शनिवार (23 मई 2026) को शराब के नशे में धुत होकर गांव में ही स्थित एक हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन के टावर पर चढ़ गया। युवक को टावर पर इतनी ऊंचाई पर बैठा देख पूरे गांव में हड़कंप मच गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
2019 में पहली शादी, 2022 में अफेयर के बाद दूसरी शादी
खेती-किसानी करने वाले यादराम साहू की पहली शादी साल 2019 में हुई थी। इसके बाद उसका एक अन्य लड़की से प्रेम प्रसंग (अफेयर) शुरू हो गया, जिसके चलते उसने साल 2022 में उस लड़की से दूसरी शादी कर ली। शुरुआत में यादराम अपनी दोनों पत्नियों को एक ही घर में साथ रखता था, लेकिन कुछ समय बाद दोनों सौतनों के बीच रोज-रोज झगड़े होने लगे। रोज की कलह से तंग आकर दूसरी पत्नी घर छोड़कर अलग रहने चली गई थी।
ट्रैक्टर से पहुँचा टावर के पास, शराब के नशे में की खुदकुशी की कोशिश
यादराम चाहता था कि उसकी दोनों पत्नियां आपसी मतभेद भुलाकर एक ही छत के नीचे खुशी-खुशी साथ रहें, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं थीं। शनिवार को इसी बात को लेकर घर में फिर से बड़ा विवाद हुआ। इसके बाद गुस्से और नशे में धुत यादराम अपना ट्रैक्टर चलाकर राधा स्वामी सत्संग आश्रम के पास पहुँचा और वहां लगे हाईटेंशन टावर पर करीब 50 फीट ऊपर चढ़कर बैठ गया।
मोबाइल साथ ले गया था ऊपर, फोन पर पुलिस को दी धमकी
टावर पर चढ़ने के बाद यादराम अपने साथ ले गए मोबाइल फोन से परिजनों और ग्रामीणों को कॉल करने लगा। उसने पुलिस से फोन पर बात करते हुए साफ कह दिया कि उसकी दोनों पत्नियां जब तक एक साथ एक ही घर में रहने की लिखित गारंटी नहीं देंगी, वह नीचे नहीं आएगा। पुलिस पेट्रोलिंग टीम (डायल-112) ने मौके पर पहुँचकर सूझबूझ से काम लिया और माइक के जरिए उसे समझाने की कोशिश की।
शर्तों के साथ नीचे उतरा युवक, ग्रामीणों ने वीडियो किया वायरल
काफी देर की समझाइश और कड़ी मशक्कत के बाद यादराम इस शर्त पर नीचे उतरने को तैयार हुआ कि नीचे कोई भी उसका वीडियो नहीं बनाएगा और पुलिस माइक पर नहीं बोलेगी। हालांकि, जब वह नीचे उतर रहा था, तब तक कई ग्रामीणों ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। 1 घंटे की सांसें रोक देने वाली इस घटना के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।
सीएसपी का बयान: युवक को पिता और पंचायत के सुपुर्द किया
सीएसपी अभिषेक चतुर्वेदी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हाई वोल्टेज लाइन के टावर पर युवक के चढ़ने की सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची थी। युवक शराब पीने का आदी है और पारिवारिक कलह से अवसाद में था। सुरक्षित नीचे उतारे जाने के बाद यादराम साहू को उसके पिता और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों के सुपुर्द कर दिया गया है। साथ ही, परिवार को इस घरेलू विवाद को सुलझाने के लिए मैरिज काउंसलिंग (परामर्श) लेने की सलाह दी गई है।

24/05/2026

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के पनकी थाना क्षेत्र से जालसाजी और पुलिसिया लापरवाही का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दो बेटों का पेट पालने के लिए ई-रिक्शा चलाने वाली एक 45 वर्षीय जुझारू महिला अर्चना मिश्रा को आयकर विभाग ने 16 करोड़ रुपए का टैक्स नोटिस भेजा है। जब पीड़िता ने इस नोटिस की पड़ताल की, तो पता चला कि लोन दिलाने का झांसा देकर कुछ ठगों ने उनके पहचान पत्रों (दस्तावेजों) का दुरुपयोग किया, एक्सिस बैंक में फर्जी खाता खुलवाया और 'AM उद्योग' नाम की फर्जी फर्म बनाकर कुल 16 करोड़ रुपए का काला लेनदेन (13 करोड़ की खरीद-फरोख्त और 3 करोड़ का अन्य ट्रांजैक्शन) कर डाला।
पति से तलाक और कैंसर से जंग, बच्चों के लिए चलाया ई-रिक्शा
रतनपुर चौकी के रामगंगा इन्क्लेव की रहने वाली अर्चना मिश्रा की कहानी संघर्षों से भरी है। साल 2017 में पति के उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने तलाक ले लिया था और अपने दो बेटों (उज्जवल और उत्कर्ष) के साथ रहने लगीं। अलग होने के एक साल बाद ही उन्हें बच्चेदानी का कैंसर डिटेक्ट हुआ। बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच बच्चों को काबिल बनाने के लिए उन्होंने शहर में ई-रिक्शा चलाना शुरू किया। वह कानपुर की पहली महिला ई-रिक्शा चालक थीं, जिन्हें इस हिम्मत के लिए तत्कालीन डीएम ब्रह्मदेव तिवारी ने बकायदा पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया था।
लोन दिलाने के बहाने जालसाजों ने बिछाया जाल
मई 2025 में पैसों का इंतजाम कर अर्चना ने अपना ऑपरेशन कराया। गंभीर आर्थिक तंगी के चलते उनकी मुलाकात अजय गुप्ता नाम के शख्स से हुई। अजय ने अपने मामा संजीव गुप्ता की पहुंच का हवाला देते हुए लोन पास कराने का झांसा दिया और अर्चना का आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लिए। इसके बाद आरोपी उन्हें बिरहाना रोड स्थित एक्सिस बैंक ले गए और वहां उनका एक खाता खुलवा दिया। दो महीने तक जब लोन नहीं मिला और अर्चना ने अपने दस्तावेज वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें डांटकर भगा दिया।
सूरत नौकरी करने गईं, तो पीछे से आ गया करोड़ों का नोटिस
बीमारी के कारण रिक्शा चलाना बंद कर अर्चना अपने रिश्तेदारों की मदद से सूरत (गुजरात) की एक टेक्सटाइल कंपनी में नौकरी करने चली गईं। 11 मार्च 2026 को उन्हें पहली बार जीएसटी विभाग से नोटिस मिला, जिसे वह कम पढ़ी-लिखी होने के कारण समझ नहीं पाईं। जब वह 10 मई को कानपुर लौटीं, तो 11 मई को उन्हें इनकम टैक्स का 16 करोड़ का दूसरा नोटिस मिला। तब जाकर खुलासा हुआ कि आरोपियों ने उनके नाम पर 'AM उद्योग' नाम की फर्म बनाकर करोड़ों रुपए का अवैध वित्तीय साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
चौकी इंचार्ज ने आरोपियों से साठगांठ कर पीड़िता को ही ठगा!
न्याय के लिए जब अर्चना रतनपुर चौकी पहुँचीं, तो वहां के तत्कालीन चौकी प्रभारी आशुतोष दीक्षित ने आरोपियों को पकड़ने का झांसा देकर पीड़िता से सादे कागज पर लिखवा लिया कि— "मैं कोई कार्रवाई नहीं चाहती हूँ, कोर्ट से मामला देखूँगी।" जब पीड़िता को अपनी इस गलती का अहसास हुआ, तो वह 22 मई को सीधे पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुँचीं।
कमिश्नर का बड़ा एक्शन: चौकी इंचार्ज लाइन हाजिर, आरोपियों पर मुकदमा
सहायक पुलिस अधीक्षक अमरनाथ ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर के आदेश पर लापरवाही बरतने वाले रतनपुर चौकी प्रभारी आशुतोष दीक्षित को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर (सस्पेंड) कर दिया गया है। वहीं, पनकी इंस्पेक्टर ने महिला की तहरीर पर मुख्य आरोपी अजय गुप्ता और संजीव गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

24/05/2026

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक सामूहिक आत्महत्या का मामला सामने आया है। यहाँ एक ही मकान के कमरे से पति, पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों की लाशें मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। शेयर ट्रेडिंग करने वाले गोविंद साहू (45) और उनकी पत्नी चंचल साहू (40) की लाशें जहाँ फंदे से लटकी मिलीं, वहीं उनकी 13 साल की बेटी दृष्टि और 11 साल के बेटे यशांत के शव बिस्तर पर पड़े मिले। मौके से बरामद सुसाइड नोट ने इस खूनी खेल के पीछे की जो कहानी बयां की है, उसे सुनकर पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए।

सुसाइड नोट में खौफनाक सच: मां ने खुद दी बच्चों को दर्दनाक मौत

कमरे से पुलिस को दो सुसाइड नोट मिले हैं। मृतका चंचल साहू द्वारा लिखे गए नोट के मुताबिक, उसकी शादीशुदा जिंदगी पूरी तरह नरक बन चुकी थी। वारदात वाले दिन चंचल ने पहले अपने दोनों मासूम बच्चों को जबरन शराब पिलाई, उसके बाद उन्हें नींद का इंजेक्शन दे दिया। सुसाइड नोट में दिल दहला देने वाली बात लिखी है कि जब बच्चों की मौत कन्फर्म (पक्की) नहीं हुई, तो मां ने खुद रस्सी से गला घोंटकर अपने ही बच्चों को हमेशा के लिए सुला दिया।

पति के अफेयर और शराब की लत से परेशान थी पत्नी

चंचल और गोविंद ने सालों पहले परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर लव मैरिज (प्रेम विवाह) किया था। चंचल ने लिखा है कि शादी के कुछ साल बाद से ही वह खुश नहीं थी। पति गोविंद शराब का आदी था और चंचल ने उस पर दूसरी लड़कियों के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (अवैध संबंध) का आरोप भी लगाया है। वारदात की रात भी दोनों के बीच भारी विवाद हुआ था, क्योंकि चंचल के गाल पर थप्पड़ के निशान मिले हैं। सुसाइड नोट के मुताबिक, पति को भी अत्यधिक शराब पिलाई गई, जिसके बाद पहले गोविंद फंदे पर झूला और फिर चंचल ने भी सुसाइड कर लिया। नोट में दोनों की लिखावट होने के कारण पुलिस इसे संयुक्त सुसाइड मान रही है।
केपीएस नेहरू नगर में पढ़ते थे बच्चे, सदमे में संयुक्त परिवार
मृतक गोविंद साहू शेयर ट्रेडिंग का काम करता था और उसका भिलाई के प्रियदर्शनीय परिसर में ऑफिस है। उसके दो बच्चे दृष्टि (9वीं कक्षा) और यशांत (6ठी कक्षा) नेहरू नगर के प्रतिष्ठित केपीएस (KPS) स्कूल में पढ़ते थे। गोविंद के भाई दुर्ग के आर्य नगर में एक साथ संयुक्त परिवार में रहते हैं, जहाँ एक ही चूल्हे पर सबका खाना बनता था। गोविंद 8 दिन पहले ही बालाजी के दर्शन करके लौटा था, जिसके बाद उसके बाकी दो भाई परिवार सहित पूरी घूमने गए थे। शुक्रवार रात जब वे लौटकर आए, तो घर में यह खौफनाक मंजर देखकर पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
एएसपी सुखनंदन राठौर का बयान: हर एंगल से जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही मोहन नगर थाना पुलिस और एएसपी (ASP) सिटी सुखनंदन राठौर भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। एएसपी ने बताया कि घर के अंदर से शराब की बोतलें, सुसाइड नोट और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए हैं। मोबाइल की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की अंतिम और असली वजह साफ हो पाएगी।

पत्रकार की कलम से: शक, नशा और बिखरते रिश्तों की खूनी हकीकत

दुर्ग की यह घटना समाज के भीतर खोखले होते जा रहे पारिवारिक ढांचों और मानसिक तनाव का एक डरावना उदाहरण है। माता-पिता के आपसी विवाद, शक और नशे की लत की कीमत उन दो मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, जिनका कोई कसूर नहीं था। एक मां का इस हद तक क्रूर हो जाना कि वह अपने बच्चों को तड़पा-तड़पा कर मार डाले, यह दर्शाता है कि मानसिक अवसाद इंसान को किस हद तक अंधा बना देता है।

एक हंसते-खेलते परिवार के इस खौफनाक अंत और बच्चों की दर्दनाक हत्या पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए अपने विचार जरूर साझा करें।
***deCase

24/05/2026

राजस्थान के डीग जिले की पहाड़ी थाना पुलिस, डीएसटी (DST) और महाराष्ट्र पुलिस ने एक साझा और बड़े जॉइंट ऑपरेशन में हाईवे पर करोड़ों की चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग के मास्टरमाइंड हजरुद्दीन (26) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डीग के पहाड़ी थाना क्षेत्र के खोल्ललाका का रहने वाला है। हजरुद्दीन की गैंग इतनी शातिर है कि वह कंटेनर के पिछले हिस्से के सील तालों को छुए बिना, आगे के केबिन की बॉडी को काटकर अंदर घुसती थी और करोड़ों का माल पार कर देती थी। पुलिस ने आरोपी के पास से 5 करोड़ 72 लाख रुपए के चोरी गए मोटोरोला कंपनी के लैपटॉप और टैबलेट में से 4 करोड़ 14 लाख रुपए का माल बरामद कर लिया है।
कंटेनर ड्राइवर था मास्टरमाइंड, ऐसे बनाता था शिकार
पहाड़ी थाना के SHO योगेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी हजरुद्दीन खुद पेशे से कंटेनर ड्राइवर है। ड्राइवर होने के नाते उसका देश भर के विभिन्न राज्यों के ट्रक और कंटेनर ड्राइवरों से गहरा संपर्क था। वह अपनी दोस्ती का फायदा उठाकर यह पता लगा लेता था कि कौन सा ड्राइवर किस नामी कंपनी के महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान (लैपटॉप, मोबाइल, टैबलेट, सीसीटीवी कैमरे) लेकर हाईवे से गुजर रहा है। जैसे ही उसे पुख्ता इनपुट मिलता, वह अपनी गैंग के साथ मिलकर कंटेनर को टारगेट करता था।
नागपुर में 5.72 करोड़ और अजमेर में 60 लाख की बड़ी वारदातें
आरोपी पर अब तक दो बड़े राज्यों में करोड़ों की चोरी के संगीन मामले दर्ज हैं:
पहला मामला (नागपुर, महाराष्ट्र): 3 मई 2026 को नागपुर में एक कंटेनर से मोटोरोला कंपनी के करोड़ों के टैबलेट और लैपटॉप चोरी हुए थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने 20 मई को हजरुद्दीन को डीग से गिरफ्तार किया और मिनी ट्रक भरकर 464 पीस लैपटॉप/टैबलेट जब्त किए, हालांकि 176 पीस अब भी मिसिंग हैं।
दूसला मामला (अजमेर, राजस्थान): 16 फरवरी 2025 को भिवंडी से नोएडा जा रहे ब्लू डार्ट कंपनी के कंटेनर से करीब 60 लाख रुपए के महंगे सीसीटीवी कैमरे (जिनमें कई कैमरों की कीमत 2-2 लाख रुपए प्रति पीस थी) चुराए गए थे। इस मामले में मुख्य ड्राइवर मुस्तकीन पहले ही पकड़ा जा चुका था, जबकि हजरुद्दीन एक साल से फरार था।
जीपीएस (GPS) से खुली पोल, केबिन के अंदर से कटा था लोहा
अजमेर मामले में कंटेनर मालिक बलवान सिंह (निवासी गुरुग्राम) ने जब गाड़ी का जीपीएस चेक किया, तो उसकी लोकेशन अजमेर के श्रीनगर थाना इलाके में मिली। जब ट्रक को नोएडा ले जाकर चेक किया गया, तो बाहर के ताले बिल्कुल सुरक्षित थे, लेकिन केबिन के अंदर का लोहा कटा हुआ था और अंदर से करीब 200 सीसीटीवी कैमरे गायब थे। पूछताछ में हजरुद्दीन ने कुबूला कि अजमेर से चुराए गए 60 लाख के सीसीटीवी कैमरे उसने दिल्ली के चोर बाजार में थोक (बल्क) के भाव बेच दिए थे, जिसका माल पुलिस आज तक बरामद नहीं कर पाई है।

पत्रकार की कलम से: ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी में 'इनसाइडर थ्रेट' का बड़ा खतरा
डीग और नागपुर पुलिस की यह कामयाबी सराहनीय है, लेकिन यह केस लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल (चेतावनी) है। जब आपके अपने ही सिस्टम के लोग (ड्राइवर्स) चोरों और डकैतों के मुखबिर बन जाएं, तो जीपीएस और डिजिटल लॉक भी धरे के धरे रह जाते हैं। चलती गाड़ियों में केबिन काटकर करोड़ों की चोरी करना बिना स्थानीय साठगांठ और इनसाइडर इनफॉर्मेशन के मुमकिन नहीं है। पुलिस को अब दिल्ली के उस 'चोर बाजार' के रिसीवर्स पर भी शिकंजा कसना होगा, जो इन चोरों के असली फाइनेंसर हैं।
हाईवे पर केबिन काटकर होने वाली इस हाईटेक चोरी और दिल्ली के चोर बाजार के इस नेटवर्क पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर लिखें।

24/05/2026

हरियाणा के गुरुग्राम में आत्महत्या करने वाले बेगूसराय के 30 वर्षीय रामपुकार यादव का 8 पन्नों का सुसाइड नोट सामने आया है। इस नोट में रामपुकार ने अपनी मौत से पहले 3 साल तक झेले गए उस 'नरक' का जिक्र किया है, जिसने उसे अंदर से पूरी तरह खोखला कर दिया था। नोट में कंपनी के भीतर के अधिकारियों की लापरवाही और सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार की घिनौनी करतूतों का सिलसिलेवार ब्योरा है, जो किसी भी न्यायप्रिय इंसान को झकझोर कर रख देगा।
नशे की हालत में बनाए शारीरिक संबंध, फिर शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल
सुसाइड नोट के मुताबिक, रामपुकार और कंपनी का सुपरवाइजर देवेंद्र एक ही कमरे में रहते थे। रामपुकार शराब नहीं पीता था, लेकिन एक दिन देवेंद्र ने उसे कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पिला दी। जब रामपुकार बेसुध हो गया, तो देवेंद्र ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। अगले दिन विरोध करने पर देवेंद्र ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और फरवरी 2022 से जुलाई 2023 तक लगातार उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता रहा।
'हरियाणा पुलिस' की धमकी देकर कैश की वसूली
जुलाई 2023 में देवेंद्र पालम (दिल्ली) शिफ्ट हो गया, लेकिन उसकी प्रताड़ना बंद नहीं हुई। वह रामपुकार से पैसों की डिमांड करने लगा। जब रामपुकार ने मना किया, तो देवेंद्र ने धमकी दी कि— "मेरे अंकल हरियाणा पुलिस में हैं, उनसे बोलकर तुम्हारी थाने में ले जाकर बुरी तरह पिटाई करवा दूँगा।" इस डर से रामपुकार उसे 10 से 15 हजार रुपए कैश देने लगा। देवेंद्र जानबूझकर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से बचता था ताकि कोई डिजिटल सबूत न रहे और जब भी रामपुकार अपने पैसे वापस मांगता, उसे पीटने की धमकी दी जाती।
पहले 'लड़की' की मांग, फिर कहा- 'गांव से अपनी पत्नी को बुला लो'
रामपुकार ने लिखा कि कुछ समय बाद देवेंद्र एक लड़की के साथ घूमने लगा, लेकिन जब वह लड़की भाग गई, तो उसने रामपुकार पर अपने लिए लड़की की व्यवस्था करने का दबाव बनाया। गांव में अपना मकान बनवा रहे रामपुकार ने जब लाचारी जताई, तो देवेंद्र उसे भद्दी गालियां देने लगा। कुछ महीनों बाद उसने रामपुकार से कहा कि वह 'हाउसकीपिंग' में काम करने वाली लड़की से उसकी बात करवाए। जब रामपुकार ने फिर मना किया, तो क्रूरता की हद पार करते हुए देवेंद्र ने कहा— "तो फिर तुम गांव से अपनी ही पत्नी को मेरे पास बुला लो।"
मैनेजर से लेकर HR तक सब रहे नाकाम, किसी ने नहीं दिया साथ
नोट में कंपनी प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर हुई है:
मैनेजर की लापरवाही: रामपुकार ने जब पहली बार मैनेजर से डिपार्टमेंट बदलने की गुहार लगाई और सच बताया, तो मैनेजर ने कहा— "मैं देवेंद्र को समझा दूँगा, तुम काम करो।" लेकिन कुछ महीने बाद प्रताड़ना फिर शुरू हो गई।
एडमिन और HR की संवेदनहीनता: जब देवेंद्र ने रामपुकार की पत्नी को बुलाने का दबाव डाला, तो रामपुकार ने एडमिन पंकज मिश्रा को बताया। एडमिन ने उसे दोबारा मैनेजर के पास भेज दिया। इसके बाद रामपुकार थक-हारकर कंपनी के एचआर (HR) विभाग के पास भी गया, लेकिन एचआर ने भी कोई कड़ा एक्शन लेने के बजाय कह दिया— "मैनेजर से बात करो और इस मामले को यहीं खत्म करो।"
'बिहारी' कहकर जलील करने का घिनौना सिलसिला
रामपुकार ने लिखा कि देवेंद्र उसे लगातार 'बिहारी' कहकर नीचा दिखाता था। वह कहता था— "हम हरियाणा वालों का बिहार इंटरनेशनल ससुराल है। तुम्हारे यहां की बिहारन 80 हजार में बिक जाती है, जबकि हमारे हरियाणा में भैंस की शुरुआत ही 1 लाख 30 हजार से होती है।" इस प्रताड़ना से तंग आकर रामपुकार कुछ दिन के लिए गांव भी भागा, लेकिन लौटने पर प्रताड़ना और बढ़ गई।
आखिरी शब्द: "नितिन सर, साढ़े तीन साल सामना किया, पर अब टूट गया"
सुसाइड नोट के अंत में रामपुकार ने लिखा— "आई एम सॉरी नितिन सर, आप कहते थे कि अगर कोई परेशान करे तो भागो मत, सामना करो। लगभग साढ़े तीन साल तक मैंने देवेंद्र का सामना किया, लेकिन जब बात मेरी वाइफ पर पहुँच गई तो मैं अंदर से टूट गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, इसलिए मैं सुसाइड करने जा रहा हूँ। इसके लिए सिर्फ देवेंद्र ही जिम्मेदार होगा।"

पत्रकार की कलम से: क्या कंपनी का मैनेजमेंट भी है इस मौत का हिस्सेदार?
रामपुकार का यह सुसाइड नोट यह साबित करने के लिए काफी है कि वह सिस्टम से हार गया था। कानूनन, किसी भी संस्थान में आंतरिक प्रताड़ना (Internal Harassment) की शिकायत पर तुरंत 'विशाखा गाइडलाइंस' या इंटरनल कंप्लेंट कमेटी के तहत एक्शन लेना अनिवार्य होता है। लेकिन यहाँ मैनेजर और एचआर ने पीड़ित को न्याय देने के बजाय 'मामला रफा-दफा' करने को कहा। देवेंद्र के साथ-साथ क्या वे अधिकारी भी इस खुदकुशी के उतने ही जिम्मेदार नहीं हैं, जिन्होंने समय रहते कदम नहीं उठाया?
इस दर्दनाक दास्तान और कंपनी प्रबंधन के रवैये पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में आरोपी सुपरवाइजर देवेंद्र और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाते हुए अपने विचार साझा करें।
***deCase ***deNoteReveal

23/05/2026

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बेहद दर्दनाक, रहस्यमयी और दिल को दहला देने वाला डबल सुसाइड (Double Su***de) का मामला सामने आया है। यहाँ एक नवविवाहित जोड़े की मौत ने दो परिवारों की खुशियों को ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया। हुरावली लिंक रोड पर मायके में रह रही 23 वर्षीय दुल्हन मेघा उर्फ ज्योति ने बुधवार को फांसी लगाकर जान दे दी थी। इस आत्मघाती कदम के ठीक दो दिन बाद, शुक्रवार की सुबह पिंटो पार्क स्थित ससुराल में उसके 26 वर्षीय पति सिद्धार्थ कांदिल की लाश भी बाथरूम में फंदे से लटकी मिली।
धूमधाम से हुई थी अरेंज मैरिज, 25 दिनों में सिर्फ 5 दिन रहे साथ
मुरार पुलिस के मुताबिक, पिंटो पार्क कुंज विहार कॉलोनी (फेस-1) के रहने वाले और पेशे से ठेकेदार सिद्धार्थ कांदिल की शादी बीते 25 अप्रैल 2026 को मेघा के साथ बेहद धूमधाम से हुई थी। दोनों की अरेंज मैरिज थी और मेघा के पिता गुरुवीर सिंह ने बेटी की शादी में अपनी हैसियत से बढ़कर खर्च किया था। शादी के अगले दिन 26 अप्रैल को मेघा अपने ससुराल पहुँची, लेकिन महज 5 दिन बाद ही 1 मई को वह अपने मायके लौट आई थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि इन 5 दिनों के भीतर दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ जो बात मौत तक पहुँच गई।
मायके के कमरे में मां को फंदे पर लटकी मिली बेटी
घटनाक्रम के मुताबिक, 20 मई की सुबह मेघा के पिता किसी रिश्तेदार के यहां शोकसभा (गमी) में गए हुए थे। घर पर मेघा और उसकी मां गीता मौजूद थीं। सुबह करीब 11 बजे मां जब दूसरी मंजिल पर बने कमरे में पहुँचीं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मेघा दुपट्टे के फंदे से जंगले पर लटकी हुई थी। सूचना पर पहुँची मुरार पुलिस ने उसी दिन शव का पोस्टमॉर्टम कराया, लेकिन कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ।
पत्नी की मौत के सदमे में पति ने बाथरूम के जंगले से लगाई फांसी
पत्नी की अचानक हुई मौत के बाद से सिद्धार्थ गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में चला गया था। शुक्रवार (22 मई) की सुबह करीब 8 बजे जब सिद्धार्थ के पिता परमाल सिंह ने उसे कमरे में नहीं देखा, तो ढूंढना शुरू किया। घर का बाथरूम अंदर से बंद था। अनहोनी की आशंका होने पर भतीजे श्यामवीर को बुलाया गया और जब दरवाजा तोड़ा गया, तो भीतर सिद्धार्थ का शव साफी के फंदे के सहारे जंगले से लटका हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही गोला का मंदिर थाना पुलिस मौके पर पहुँची।
फॉरेंसिक टीम ने सीज किए घटनास्थल, मोबाइल उगलेंगे सच
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने दोनों घटनास्थलों (मुरार और गोला का मंदिर) का बारीकी से निरीक्षण किया है और दोनों ही कमरों को फिलहाल सीज कर दिया गया है। पुलिस ने दोनों मृतकों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। साइबर सेल की मदद से दोनों के कॉल डिटेल्स (CDR), वॉट्सऐप चैट और डिलीट किए गए डिजिटल रिकॉर्ड्स को रिकवर किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि मौत से पहले दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी या वे आखिरी बार किसके संपर्क में थे।
थाना प्रभारी का बयान: आपसी विवाद की आ रही बात, जांच जारी
गोला का मंदिर थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि प्राथमिक जांच में पति-पत्नी के बीच किसी गंभीर आपसी विवाद की बात सामने आ रही है। पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही है कि कहीं मोबाइल में कोई वीडियो, ऑडियो या डिजिटल सुसाइड नोट तो नहीं छिपा है। फिलहाल दोनों परिवारों के लोग गहरे सदमे में हैं और पुलिस जल्द ही उनके बयान दर्ज कर मामले की तह तक पहुँचेगी।

पत्रकार की कलम से: बिखरते रिश्तों की अनकही और दर्दनाक दास्तान
ग्वालियर का यह डबल सुसाइड केस इस बात का गवाह है कि कभी-कभी बंद कमरों के भीतर की कड़वाहट इतनी गहरी हो जाती है कि हंसते-मुस्कुराते चेहरों के पीछे छिपा दर्द किसी को दिखाई नहीं देता। शादी के महज 25 दिनों के भीतर ऐसा क्या विवाद हुआ कि एक हंसते-खेलते जोड़े ने जिंदगी की जंग इतनी जल्दी हार दी? समाज और परिवारों को अब यह सोचना होगा कि आखिर संवाद की कमी और मानसिक तनाव हमारे युवाओं को किस दिशा में धकेल रहे हैं।
शादी के तुरंत बाद हुए इस दर्दनाक हादसे और रहस्यमयी मौत पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए विचार जरूर साझा करें।
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23/05/2026

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के अतरौली थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ नरोईया गांव में शुक्रवार की शाम मामूली बात पर दो सगे भाइयों के बीच ऐसा विवाद हुआ कि बड़े भाई ने गुस्से में आकर अपनी ही बाइक को आग के हवाले कर दिया। इस बात से नाराज और आक्रोशित 18 साल के छोटे भाई ने दुकान में रखा पेट्रोल अपने ऊपर छिड़का और धू-धू कर जलती बाइक के बीच कूद गया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने जब तक आग बुझाई, तब तक युवक बुरी तरह झुलस चुका था और अस्पताल पहुँचते-पहुँचते उसकी सांसें थम गईं।
पिता गए थे तीर्थ यात्रा, दोनों भाई संभाल रहे थे दुकान
जानकारी के मुताबिक, नरोईया गांव के रहने वाले गंगाराम की गांव के पास पुलिया पर ही परचून और मिठाई की दुकान है। उनके चार बेटों में सबसे छोटा 18 वर्षीय निखिल था। दो बेटे साजन और विकास बेंगलुरु में काम करते हैं, जबकि सबसे बड़ा बेटा शेरू (30) और निखिल मिलकर गांव की दुकान संभालते थे। दुकान पर बोतलों में पेट्रोल बेचने का काम भी होता था। पिता गंगाराम 20 मई को तीर्थ यात्रा पर पूर्णागिरी गए हुए थे और दोनों भाई घर पर अकेले थे।
नशे में बाइक ले जाने की जिद और भाई का इनकार
शुक्रवार शाम करीब 4 बजे निखिल दुकान पर बैठा था, तभी बड़ा भाई शेरू घर से स्प्लेंडर बाइक लेकर दुकान पर पहुँचा। शेरू अत्यधिक नशे की हालत में था और जबरन बाइक लेकर पुवायां जाने की जिद करने लगा। निखिल ने उसे नशे में धुत देखा तो गाड़ी देने से साफ मना कर दिया और कहा कि पापा ने नशे में गाड़ी छूने से मना किया है। बस इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई।
बड़े भाई ने लगाई आग, छोटे ने खुद को लपटों के हवाले किया
जब निखिल किसी कीमत पर बाइक की चाबी देने को राजी नहीं हुआ, तो शेरू ने गुस्से में आकर दुकान में रखा पेट्रोल बाइक पर उड़ेल दिया और उसमें आग लगा दी। बाइक को जलता देख निखिल बाल्टी में पानी लेकर आग बुझाने दौड़ा, लेकिन शेरू ने उसे रोक दिया और दोनों के बीच हाथापाई होने लगी। इस दौरान गुस्से में निखिल ने शेरू के सिर पर बाल्टी से वार कर दिया। इसके बाद तैश में आकर निखिल दुकान से पेट्रोल की दो बोतलें उठा लाया, उन्हें अपने ऊपर छिड़का और जलती हुई बाइक के ऊपर जाकर खड़ा हो गया। देखते ही देखते वह जिंदा मशाल बन गया।
अस्पताल ले गया वही बड़ा भाई, पर नहीं बच सकी जान
वहां मौजूद ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद आग बुझाई और गंभीर रूप से झुलसे निखिल को अतरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि आग लगाने के बाद जब छोटा भाई जल गया, तो होश में आया बड़ा भाई शेरू ही उसे लहूलुहान और झुलसी हालत में अस्पताल लेकर भागा था, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद निखिल को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए हैं।
थानेदार का बयान: तहरीर मिलते ही होगी कानूनी कार्रवाई
अतरौली के थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आग से झुलसे युवक को उसका बड़ा भाई ही अस्पताल लेकर आया था, जहां उसकी मौत हो गई। चूंकि पिता तीर्थ यात्रा पर हैं और परिवार गहरे सदमे में है, इसलिए अभी तक परिजनों की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायती पत्र (तहरीर) नहीं दी गई है। शिकायत मिलते ही मामले में आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पत्रकार की कलम से: अनियंत्रित गुस्से और नशे का जानलेवा कॉकटेल
हरदोई की यह घटना रूह कँपा देने वाली है और यह सिखाती है कि कैसे पल भर का गुस्सा और नशा हंसते-खेलते परिवार को श्मशान बना सकता है। महज एक बाइक को बचाने की जिद में बड़े भाई ने विवेक खो दिया और छोटे भाई ने आत्मसम्मान या गुस्से की अति में आकर आत्मघाती कदम उठा लिया। कानून अपनी कार्रवाई करेगा, लेकिन जो पिता तीर्थ यात्रा पर पुण्य कमाने गए थे, उनके लौटने पर घर में बेटे की लाश का मिलना किसी कयामत से कम नहीं होगा।
क्षणिक गुस्से और नशे की इस लत के कारण उजड़े परिवार पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अपने विचार जरूर लिखें।

23/05/2026

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के झंगहा थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद और रहस्यमयी घटना सामने आई है। यहाँ अपने दोस्तों के साथ राप्ती नदी में नहाने गए 16 वर्षीय छात्र अंश मौर्या की नदी में डूबने से मौत हो गई। शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने करीब 6 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद अंश का शव नदी से बरामद किया। अंश की मौत के बाद उसकी मां ने उसके दोस्तों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं, जिसके बाद पुलिस ने सभी 5 दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
स्कूल टॉपर था अंश, ननिहाल में रहकर कर रहा था पढ़ाई
मूल रूप से रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के महेवा के रहने वाले राम प्रवेश मौर्या पंजाब में टाइल्स के ठेकेदार (कांट्रैक्टर) हैं। उनकी पत्नी प्रतिमा मौर्या अपने दो बेटों अंश और अरुष के साथ झंगहा के रामनगर (अपने मायके) में रहकर बच्चों को पढ़ाती हैं। बड़ा बेटा अंश झंगहा के आदित्य पब्लिक स्कूल में 11वीं का छात्र था और बेहद होनहार था। उसने 10वीं की परीक्षा में 91% अंक लाकर पूरे स्कूल में टॉप किया था।
गुरुवार दोपहर दोस्तों के साथ निकला, शाम को आई डूबने की खबर
मां प्रतिमा ने बताया कि गुरुवार दोपहर को अंश के 5 दोस्त घर आए थे और वह उनके साथ बाहर निकला था। शाम करीब 3 बजे अचानक अंश के दोस्तों ने परिजनों को मोबाइल पर सूचना दी कि अंश राप्ती नदी में डूब गया है। यह खबर सुनते ही मां और परिवार के लोग रोते-बिलखते नदी किनारे पहुँचे, लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि वहां अंश के कपड़े और चप्पल तो पड़े थे, पर उसका एक भी दोस्त मौके पर मौजूद नहीं था। सभी दोस्त सूचना देकर वहां से फरार हो चुके थे।
SDRF और NDRF का 24 घंटे चला सर्च ऑपरेशन
परिजनों की सूचना पर तत्काल झंगहा थाना पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुँची। गुरुवार देर शाम तक नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन अंधेरा होने के कारण सर्च ऑपरेशन रोकना पड़ा। शुक्रवार सुबह 7 बजे से स्थानीय पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) ने दोबारा खोजबीन शुरू की और करीब 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर 1:30 बजे अंश की डेडबॉडी को नदी से बाहर निकाला जा सका। शव देखते ही मां प्रतिमा गश खाकर गिर गईं।
दोस्तों के बयानों ने बढ़ाया शक, पुलिस के सामने खुली पोल
मां के हत्या के आरोपों के बाद पुलिस ने अंश के पांचों दोस्तों को उनके घरों से उठा लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोस्त सही-सही जवाब नहीं दे पा रहे हैं और उनके बयानों में भारी विरोधाभास है। दोस्तों ने पुलिस को बताया कि— "अंश कपड़े पहनकर ही नदी के गहरे पानी में उतरा था और डूबने लगा, हमने बचाने की कोशिश की पर वह डूब गया।" जबकि पुलिस को अंश के कपड़े और चप्पल नदी किनारे झाड़ियों से बरामद हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अंश कपड़े उतारकर पानी में गया था, तो दोस्तों ने झूठ क्यों बोला?

पत्रकार की कलम से: दोस्ती के पीछे छिपा ईर्ष्या का खौफनाक चेहरा?
गोरखपुर की यह घटना झकझोर देने वाली है। एक मां का यह रोना कि 'मेरा बेटा पढ़ने में तेज था, इसलिए उसके दोस्तों ने उसे मार डाला', समाज में बच्चों के भीतर पनप रही खतरनाक ईर्ष्या (Jealousy) की ओर इशारा करता है। अगर यह केवल एक हादसा था, तो दोस्त अंश को डूबता छोड़कर भागे क्यों? उन्होंने गांव वालों या पास के लोगों को तुरंत आवाज क्यों नहीं दी? कपड़ों को लेकर झूठ क्यों बोला गया? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस की कड़ाई से पूछताछ और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।
इस होनहार छात्र की संदिग्ध मौत और पीड़ित मां के आरोपों पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दें और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करें।

23/05/2026

हरियाणा के फरीदाबाद (तिगांव थाना क्षेत्र) से एक दिल दहला देने वाला और रूह कंपा देने वाला मर्डर केस सामने आया है। यहाँ राजस्थान के भिवाड़ी के रहने वाले 21 वर्षीय वॉलीबॉल खिलाड़ी मोनू गुर्जर की लड़की के परिजनों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। प्रेम प्रसंग और पारिवारिक प्रतिष्ठा के नाम पर युवक को तीन दिनों तक खेतों में बने एक घर (ट्यूबवेल) पर बंधक बनाकर रखा गया और उसे ऐसा खौफनाक टॉर्चर दिया गया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखकर डॉक्टरों के भी होश उड़ गए।
8 महीने पहले शुरू हुई थी लव स्टोरी, रिश्ते में भाई-बहन होने से था विरोध
मृतक मोनू (21) राजस्थान के भिवाड़ी के सैदपुर गांव का रहने वाला था। वह कबड्डी और वॉलीबॉल का बेहतरीन खिलाड़ी था और स्टेट लेवल पर कई मेडल जीत चुका था। करीब 8 महीने पहले उसकी दोस्ती फरीदाबाद की रहने वाली एक नाबालिग लड़की से हुई, जो सैदपुर में अपने मामा के घर आती थी। दोनों का घर पास होने के कारण वे करीब आ गए। चूंकि लड़की के मामा का घर मोनू के ही गांव में था, इसलिए रिश्ते में दोनों भाई-बहन लगते थे। यही वजह थी कि लड़की का परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था।
लड़की के गायब होने पर दर्ज कराया था केस, जांच के लिए निकला था मोनू
अप्रैल महीने में लड़की बिना बताए घर से चली गई थी। लड़की के परिवार ने मोनू पर बहला-फुसलाकर भगाने का आरोप लगाते हुए तिगांव थाने में FIR नंबर- 51 (अपहरण का केस) दर्ज करा दिया। हालांकि, लड़की दो दिन बाद ही दिल्ली के लालकिले से बरामद हो गई थी। 17 मई को सुबह करीब 10:30 बजे मोनू अपनी बाइक लेकर इसी पुलिस केस की जांच में शामिल होने और अपनी बेगुनाही साबित करने तिगांव थाने के लिए निकला था।
रास्ते से किडनैप कर ट्यूबवेल पर 3 दिन तक किया टॉर्चर
मोनू के चाचा नरेंद्र के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे मोनू जैसे ही फरीदाबाद सीमा में दाखिल हुआ, लड़की के पिता और उसके रिश्तेदारों ने उसे रास्ते से ही किडनैप कर लिया। आरोपी उसे खेतों में बने एक गुप्त ठिकाने पर ले गए, जहाँ तीन दिनों तक उसे जंजीरों से बांधकर लाठी-डंडों से बर्बरतापूर्वक पीटा गया। 20 मई को जब मोनू पूरी तरह अधमरा हो गया और आरोपियों को लगा कि वह मर जाएगा, तो उन्होंने उसे गांव की सड़क पर फेंक दिया और खुद ही शातिरपने से पुलिस को सूचना दी कि 'लड़की को भगाने वाला लड़का मिल गया है।'
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाला खुलासा
गंभीर हालत में पुलिस ने मोनू को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि लगातार और भीषण पिटाई के कारण मोनू के सिर और नाक की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं। छाती पर भारी प्रहार के कारण उसकी पसलियां टूटकर फेफड़ों के अंदर घुस गई थीं, जिससे उसकी सांसें थम गईं। उसके हाथ और पैरों पर भी धारदार हथियारों और लाठियों के गहरे घाव मिले हैं।
3 महिलाओं सहित 15 पर हत्या का केस, पुलिस की जांच जारी
फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता यशपाल और तिगांव थाना प्रभारी रंधीर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि मोनू के परिजनों की शिकायत पर 3 महिलाओं सहित कुल 15 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या (IPC 302) और किडनैपिंग की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 मुख्य आरोपियों को राउंडअप (हिरासत में) कर लिया है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

पत्रकार की कलम से: झूठी शान के नाम पर कब तक दी जाएगी आहुति?
फरीदाबाद की यह घटना ऑनर किलिंग के नाम पर समाज में पनप रही उस वहशी मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ अपनों की कथित 'शान' के लिए किसी दूसरे के घर का चिराग बुझा देना मामूली बात समझी जाती है। 21 साल का एक होनहार खिलाड़ी, जो अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था और दो छोटे भाइयों का सहारा था, उसे कानून का पालन करने (थाने जाने) के रास्ते में ही मौत के घाट उतार दिया गया। यह कानून और पुलिस के इकबाल को भी सीधी चुनौती है।
इस बर्बर हत्याकांड और समाज की इस तालिबानी सोच पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करें और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग उठाएं।

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