21/09/2026
श्री कुन्दकुन्द कहान दिगंबर जैन विद्यार्थी गृह, सोनगढ़ के विद्यार्थियों द्वारा दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर उत्तम संयम धर्म की आराधना के रूप में भावपूर्ण पूजन-विधान का आयोजन किया गया।
🌟 आज की मुख्य झलकियाँ (Highlights)
भक्तिमय वातावरण: विद्यार्थियों द्वारा सुमधुर भजनों और संगीतमय धुनों के साथ देव-शास्त्र-गुरु का पूजन किया गया।
अर्घ्य समर्पण: उत्तम संयम धर्म के स्वरूप को जीवन में अंगीकार करने के पवित्र संकल्प के साथ सामूहिक अर्घ्य समर्पित किए गए।
तत्त्व चर्चा व स्वाध्याय: पूजन के उपरांत गुरुदेवश्री के दिव्य संदेशों के आलोक में संयम धर्म के वास्तविक (निश्चय और व्यवहार) स्वरूप पर गहरी चर्चा की गई।
उत्तम संयम धर्म का संदेश"इन्द्रिय जनित सुखों से विरक्त होकर अपनी आत्मा के शुद्ध स्वरूप में लीन होना ही वास्तविक संयम है।" जब तक जीवन में कषायों का शमन और आत्म-अनुशासन नहीं आता, तब तक सच्ची सुख-शांति संभव नहीं है।विद्यार्थी गृह के इन युवा मुमुक्षुओं का यह पुरुषार्थ संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायी है।