पौराणिक कथा संग्रह

पौराणिक कथा संग्रह हिन्दू धर्म ,व्रत ,तीर्थ ,देवी -देवताओ ,?

02/11/2025

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05/10/2025

राम राम बंधुओं...

12/05/2025

न तो जिसने युद्ध चाहा ...
न जिसने रोका ...
शहीद वो हुआ जिसने युद्ध करा!

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सभी मित्रों से सविनय अनुरोध है ...इस वर्षाकाल में एक वृक्ष अवश्य रोपित करें !..क्योंकि,  अंत में वही साथ जाता है !🌾🌾🌾
01/07/2024

सभी मित्रों से सविनय अनुरोध है ...
इस वर्षाकाल में एक वृक्ष अवश्य रोपित करें !
..क्योंकि, अंत में वही साथ जाता है !🌾🌾🌾

02/01/2024

#भगवान_की_पूजा_क्यों_?

आज की युवा पीढ़ी जिस तरह भगवान के प्रति
भक्ति भाव रखती है
उनको किंचित ही यह आभास होगा ...
कि भगवान केवल मात्र पूजने हेतु नही है !
जिस भी भगवान को ईष्ट मानते हो, पूजा करते हो !
उन को केवल मात्र पूजा ही नहीं जाना नही चाहिए ,
बल्कि उनका या फिर उनके गुणों का अनुशरण करना चाहिए !
जिनको भी मानो कम से कम उन देवी देवता
का गुण ढूंढ कर जीवन में उतार लो !
वे अनेक अनेक गुण लिए होते है आप एक तो ले ही सकते है !

आज कल के समाज में नया चलन है,
वह तो वैदिक देवी देवता छोड़ कर ,
नए नए भगवान ही रच रहे है और समाज को भ्रमित कर रहे है !
यह सब कुचक्र चल रहा है ...
केवल मात्र धर्म के ढेकेदारो के द्वारा और
अपने ही धर्म के सही जानकारी न होने कारण ,
अपने आप को अगर अब तैयार न कर सका तो..
हिंदू समाज तो आने वाले वर्षो में शायद बहुत कुछ हम खो चुके होंगे !

☝️राम राम ☝️

पंचसंगम में से एक देवप्रयाग जहां मां अलकनंदा भागीरथी में स्वयं को विलीन कर अपनी यात्रा को समाप्त कर विश्राम लेती है !किं...
24/05/2023

पंचसंगम में से एक देवप्रयाग जहां मां अलकनंदा भागीरथी में स्वयं को विलीन कर अपनी यात्रा को समाप्त कर विश्राम लेती है !
किंतु मृत्युलोक के जीवों के कल्याण हेतु सतत् प्रवाहित रहती है !

सभी का कल्याण हो यही भाव लिए...
संगम के बाद आगे मां गंगा का स्वरूप ले कर कल्याण करती है !!

पुण्य देवभूमि दर्शन लाभ का आनंदित क्षण प्राप्त हो पाया !

सम्बन्धित कथा आगे प्रेषित करूंगा ...

भगवान श्री बद्रीविशाल  कृपा और आप सभी के आंशिक सहयोग के फलस्वरूप श्री बद्रीविशाल के दर्शन लाभ आनंदित क्षण प्राप्त हो पाय...
24/05/2023

भगवान श्री बद्रीविशाल कृपा और आप सभी के आंशिक सहयोग के फलस्वरूप श्री बद्रीविशाल के दर्शन लाभ आनंदित क्षण प्राप्त हो पाया !!

सम्बन्धित कथा आगे प्रेषित करूंगा ...

मोह और ममता में क्या अंतर है।राम राम जी, मोह और ममता में अंतर आसक्ति के (आकर्षण) विषय के आधार पर किया जाता है। 🙏मोह- जब ...
12/04/2020

मोह और ममता में क्या अंतर है।

राम राम जी,
मोह और ममता में अंतर आसक्ति के (आकर्षण) विषय के आधार पर किया जाता है।

🙏
मोह- जब किसि व्यक्ति की आसक्ति किसी भौतिक वस्तु, साधन, प्रतितात्मक विषय के प्रति होता है तो वो मोहगत भाव है। इसको हम किसी भी निर्जीव वस्तु या नश्वर विषयवस्तु प्रति आकर्षण को भी मोह कह सकते है या ये कहे कि जब व्यक्ति साधन विशेष को (जो वस्तु किसी साध्य या लक्ष्य को पाने के लिए प्रयोग की जाती है) महत्व देने लगे या उसमें ही आकर्षित होने लगें तो मोह में ग्रस्त है। मोहगत व्यक्ति अपने अंदर वास्तविक आनन्द को आनन्द न समझ कर, बाहरी वस्तुओं को ही आनन्द समझने लग जाता है। मोह लेना व इकठ्ठा करना सिखाता है। मोह के वसीभूत व्यक्ति, किसी भी वस्तु या प्रतीक को ही अपने जीवन का आधार बना लेता है, उस वस्तु को अपनी लत बना लेता है, और इसी लत या आसक्ति की वजह से, उस वस्तु या प्रतीक की कमी या न होने की स्तिथि में शोकग्रस्त होकर शारीरिक व मानसिक बल से टूटकर अशान्त व उदास होने लगता है। कोई भी व्यक्ति मोहगत वस्तुओं के बिना भी खुशी व आनन्द में रह सकता है।

🙏
ममता- जब किसी व्यक्ति की आसक्ति किसी साध्य, जीव, प्राणी या शाश्वत चीज के प्रति है तब वह ममता भाव है। सांसारिक ममता भाव, किसी जीवित या प्राणमय जीव के प्रति होता है। यह ममता किसी जीव, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, पुरूष-औरत से भी हो सकती है। सांसारिक ममता भी एक आसक्ति ही है, यही आसक्ति ही माया है। यह ममता वास्तव में भक्ति व प्रेम की पहली सीढ़ी है, मगर जब यही ममता विकसित होती है तब भक्तिमय बन कर ज्ञान व वैराग्य को जन्म देकर मोक्ष का कारण भी बनती है। यही ममता देना व लुटाना सिखाती है। ममता जब नश्वर विषय से उठकर शाश्वर सत्ता विषय की तरह बढ़ती है तब भौतिक मोह व शोक को खत्म कर सामने वाले में एक हो जाती है। तभी "वसुधैव कुटुम्बकम्" और "एकोहं बहुस्याम" जैसे उपनिषदीय महावाक्यों को उद्घोष होता है।

बस यही अंतर है मोह और ममता में, इसलिए मोह को वश में करके, ममता (प्रेम) के प्रसार पर बल दिया गया है।

#मोह_और_ममता_में_अंतर

अध्यात्म के रहस्य, सनातन धर्म के विज्ञान और साधना पथ के ज्ञान को समझने के लिए पेज को 👍Like करके जुड़ सकते है !

ॐ तत्सत.............

06/04/2019

🙏🙏🙏सिताराम🙏🙏🙏

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