05/04/2025
रच लो जीवन-गीत, कर्म की
कलम गहो हलधर !
सींचो क्यारी, भाव जगेंगे
बीज डाल दो, शब्द उगेंगे
जब आएगी फसल स्वर्ण सी
सारे सुर, लय-ताल बनेंगे।
किलकेगी कविता,
कण-कण से
पस्त न हो हलधर !
#हलधरनाग