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29/08/2023

अदभुत, केवल #हिंदी में ही है ऐसी विशेषता....!

एक बार एक कवि हलवाई की दुकान पहुँचे, जलेबी ली और वहीं खाने बैठ गये।
इतने में एक कौआ कहीं से आया और दही की परात में चोंच मारकर उड़ चला....

हलवाई को बड़ा गुस्सा आया उसने पत्थर उठाया और कौए को दे मारा।
कौए की किस्मत ख़राब, पत्थर सीधे उसे लगा और वो मर गया....

ये घटना देख कर कवि हृदय जगा। वो जलेबी खाने के बाद पानी पीने पहुँचे तो उन्होंने एक कोयले के टुकड़े से वहाँ एक पंक्ति लिख दी।
"काग दही पर जान गँवायो"

तभी वहाँ एक लेखपाल महोदय, जो कागजों में हेराफेरी की वजह से निलम्बित हो गये थे, पानी पीने आए।
कवि की लिखी पंक्तियों पर जब उनकी नजर पड़ी तो अनायास ही उनके मुँह से निकल पड़ा...

कितनी सही बात लिखी हैं ! क्योंकि उन्होंने उसे कुछ इस तरह पढ़ा :-
"कागद ही पर जान गँवायो"

तभी एक मजनू टाइप लड़का, पिटा-पिटाया सा वहाँ पानी पीने आया।
उसे भी लगा कितनी सच्ची बात लिखी हैं। काश उसे ये पहले पता होती, क्योंकि उसने उसे कुछ यूँ पढ़ा था :-
"का गदही पर जान गँवायो"

इसीलिए संत तुलसीदास जी ने बहुत पहले ही लिख दिया था :-

"जाकी रही भावना जैसी... प्रभु मूरत देखी तिन तैसी"

इतिहास में छुपाया गया एक सच ....वीर सावरकर जी ।45 साल के महात्मा गाँधी 1915 में भारत आते हैं, 2 दशक से भी ज्यादा दक्षिण ...
29/08/2023

इतिहास में छुपाया गया एक सच ....वीर सावरकर जी ।

45 साल के महात्मा गाँधी 1915 में भारत आते हैं, 2 दशक से भी ज्यादा दक्षिण अफ्रीका में बिता कर। इससे 4 साल पहले 28 वर्ष का एक युवक अंडमान में एक कालकोठरी में बन्द होता है। अंग्रेज उससे दिन भर कोल्हू में बैल की जगह हाँकते हुए तेल पेरवाते हैं, रस्सी बटवाते हैं और छिलके कूटवाते हैं। वो तमाम कैदियों को शिक्षित कर रहा होता है, उनमें राष्ट्रभक्ति की भावनाएँ प्रगाढ़ कर रहा होता है और साथ ही दीवालों कर कील, काँटों और नाखून से साहित्य की रचना कर रहा होता है। उसका नाम था- विनायक दामोदर सावरकर।

उन्हें कई बार आत्महत्या के ख्याल आते। उस खिड़की की ओर एकटक देखते रहते थे, जहाँ से अन्य कैदियों ने पहले आत्महत्या की थी। पीड़ा असह्य हो रही थी। यातनाओं की सीमा पार हो रही थी। अंधेरा उन कोठरियों में ही नहीं, दिलोदिमाग पर भी छाया हुआ था। दिन भर बैल की जगह कोल्हू घुमाते रहो, रात को करवट बदलते रहो। 11 साल ऐसे ही बीते। कैदी उनकी इतनी इज्जत करते थे कि मना करने पर भी उनके बर्तन, कपड़े वगैरह धो देते थे, उनके काम में मदद करते थे। सावरकर से अँग्रेज बाकी कैदियों को दूर रखने की कोशिश करते थे। अंत में बुद्धि को विजय हुई तो उन्होंने अन्य कैदियों को भी आत्महत्या से विमुख किया।
लेकिन नहीं, महा गँवारों का कहना है कि सावरकर ने मर्सी पेटिशन लिखा, सॉरी कहा, माफ़ी माँगी।
अरे मूर्खों, काकोरी कांड में फँसे क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल ने भी माफ़ी माँगी थी, तो? उन्हें भी 'डरपोक' करार दोगे? बताओ। उन्होंने भी माफ़ी माँगी थी अंग्रेजों से। क्या अब इस कसौटी पर क्रांतिकारियों को तौला जाएगा? शेर जब बड़ी छलाँग लगाता है तो कुछ कदम पीछे लेता ही है। उस समय उनके मन में क्या था, आगे की क्या रणनीति थी- ये आज कुछ लोग अपने घरों में बैठे-बैठे जान जाते हैं।
कौन ऐसा स्वतंत्रता सेनानी है जिसे 11 साल कालापानी की सज़ा मिली हो। नेहरू? गाँधी? .....कौन?
नानासाहब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई और वीर कुँवर सिंह जैसे कितने ही वीर इतिहास में दबे हुए थे। 1857 को सिपाही विद्रोह बताया गया था। तब इसके पर्दाफाश के लिए 20-22 साल का एक युवक लंदन की एक लाइब्रेरी का किसी तरह एक्सेस लेकर और दिन-रात लग कर अँग्रेजों के एक के बाद एक दस्तावेज पढ़ कर सच्चाई की तह तक जा रहा था, जो भारतवासियों से छिपाया गया था। उसने साबित कर दिया कि वो सैनिक विद्रोह नहीं, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। उसके सभी अमर बलिदानियों की गाथा उसने जन-जन तक पहुँचाई। भगत सिंह सरीखे क्रांतिकारियों ने मिल कर उसे पढ़ा, अनुवाद किया।
दुनिया में कौन सी ऐसी किताब है जिसे प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था? अँग्रेज कितने डरे हुए थे उससे कि हर वो इंतजाम किया गया, जिससे वो पुस्तक भारत न पहुँचे। जब किसी तरह पहुँची तो क्रांति की ज्वाला में घी की आहुति पड़ गई। कलम और दिमाग, दोनों से अँग्रेजों से लड़ने वाले सावरकर थे। दलितों के उत्थान के लिए काम करने वाले सावरकर थे। 11 साल कालकोठरी में बंद रहने वाले सावरकर थे। हिंदुत्व को पुनर्जीवित कर के राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले सावरकर थे। साहित्य की विधा में पारंगत योद्धा सावरकर थे।
आज़ादी के बाद क्या मिला उन्हें? अपमान नेहरू व मौलाना अबुल कलाम जैसों ने तो मलाई चाटी सत्ता की, सावरकर को गाँधी हत्या केस में फँसा दिया। गिरफ़्तार किया। पेंशन तक नहीं दिया। प्रताड़ित किया। 60 के दशक में उन्हें फिर गिरफ्तार किया, प्रतिबंध लगा दिया। उन्हें सार्वजनिक सभाओं में जाने से मना कर दिया गया। ये सब उसी भारत में हुआ, जिसकी स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना जीवन खपा दिया। आज़ादी के मतवाले से उसकी आज़ादी उसी देश में छीन ली गई, जिसे उसने आज़ाद करवाने में योगदान दिया था। शास्त्री जी PM बने तो उन्होंने पेंशन का जुगाड़ किया।
वो कालापानी में कैदियों को समझाते थे कि धीरज रखो, एक दिन आएगा जब ये जगह तीर्थस्थल बन जाएगी। आज भले ही हमारा पूरे विश्व में मजाक बन रहा हो, एक समय ऐसा होगा जब लोग कहेंगे कि देखो, इन्हीं कालकोठरियों में हिंदुस्तानी कैदी बन्द थे। सावरकर कहते थे कि तब उन्हीं कैदियों की यहाँ प्रतिमाएँ होंगी। आज आप अंडमान जाते हैं तो सीधा 'वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' पर उतरते हैं। सेल्युलर जेल में उनकी प्रतिमा लगी है। उस कमरे में प्रधानमंत्री भी जाकर ध्यान धरते हैं, जिसमें वीर सावरकर को रखा गया था।

नमन वीर सावरकर जी 🙏

आप सोचते होंगे कि फौजी को घर तक आने के लिए वारंट दिया जाता है या एयर फैसेलिटी लेकिन जब उसे अचानक छुट्टी निकलना है या 10-...
29/08/2023

आप सोचते होंगे कि फौजी को घर तक आने के लिए वारंट दिया जाता है या एयर फैसेलिटी लेकिन जब उसे अचानक छुट्टी निकलना है या 10-20 दिन पहले भी अपनी योजना बना भी ले तो जिस रेलवे में 120 दिन में भी वेटिंग टिकट मिलता है वहां भला 20 दिन पहले कन्फर्म टिकट..कैसे मिल सकता है ? एक फौजी घर से हजारों किलोमीटर दूर, 2 से 4 दिन का सफर बिना कन्फर्म टिकट के, लोगों को रात में चैन की नींद सोते देख मन ही मन विचलित सा हो जाता है, रेलवे का सड़ा हुआ खाना और उसे झकझोर देता है।
कभी कभी तो उसे टिकट चेकर से भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है क्योंकि लोग....जिस प्रकार फौज के लिए शब्द प्रयोग करते हैं या उसका नाजायज फायदा उठाने के लिए गुणगान करते हैं वैसे होते नहीं है। फौजी दिल और दिमाग से इतना भोला होता है कि सामने वाले की दिखावटी हमदर्दी पर विश्वास कर लेता है और वहां भी उसे धोखा ही मिलता है, राजनीतिक पार्टियां भी खूब मजे लेती है। हमारे एक फौजी भाई ने भी अपने अभी तक कि 8 साल के नौकरी में ऐसे बहुत सी यात्राएं की जिसमें अचानक छुट्टी आते समय वेटिंग टिकट, वर्तमान भारतीय रेलवे की खचा-खच भरी रेलगाड़ियां जिनमें पेर रखने की जगह नहीं वहां कैसे बीततीं है फूस की वो रातें।भारत सरकार से मेरा आग्रह है कि लम्बी दूरी की सभी ट्रेनों में भारतीय सैनिकों के लिए कम से कम एक बोगी रिजर्व रखा जाएं, ताकि किसी फौजी भाई को इस तरह से प्रताड़ित न होना पड़े।

मैंने ट्रेन के दरवाजे के पीछे लिखे नंबर पर कॉल लगाया,,,"आप रेनू जी बोल रहीं है"डरी ओर सहमी सी आवाज में रिप्लाई आया "जी ह...
29/08/2023

मैंने ट्रेन के दरवाजे के पीछे लिखे नंबर पर कॉल लगाया,,,"आप रेनू जी बोल रहीं है"
डरी ओर सहमी सी आवाज में रिप्लाई आया "जी हां, लेकिन आप कौन ओर आपको मेरा ये नंबर कहा से मिला"
"दरअसल वो ट्रेन,,,, दरअसल वो ट्रेन के डिब्बे में किसी ने आपका नंबर आपके नाम से लिख रखा है, शायद आपका कोई अच्छा दुश्मन या फिर कोई बुरा दोस्त होगा, जो भी हो, मुझे आपसे ये कहना था कि हो सके तो ये नंबर चेंज करवा लीजिये या फिर किसी अच्छे से जवाब के साथ तैयार रहिये, वैसे अब तक जितने कॉल्स आ गए, आ गए,,,,आज के बाद किसी का नही आएगा क्योंकि ये नंबर मैं डिलीट कर चुका हूं।
रेनू जी अब मैं फ़ोन रखता हूं अपना ख्याल रखियेगा।"
तब उसने मुझे बोला कि नए नए अनजाने नंबर और उनपे गंदे ओर भद्दे बातो की वजह से मैं बहुत परेशान थी,,आप जो भी हो आपने मेरी बहुत बड़ी हेल्प की है क्योंकि मुझे तो समझ ही नही आ रहा था कि ऐसे कॉल क्यों आ रहे है।
तभी से मुझे एक ओर दिशा मिली और मैं सार्वजनिक स्थानो पे लिखे ऐसे नंबर को मिटाने में लग गया हूं, ताकि किसी ना किसी को तो बचाया जा सके।
माना कि हम किसी बुराई की वजह नही है पर किसी अच्छाई की वजह तो बन ही सकते है।मेरा आप सभी से निवेदन है कि अगर आप कही भी इस तरह के नंबर ओर नाम देखो तो तुरंत मिटा दो ताकि एक अनजान खतरों से किसी की बहन बेटियो की हेल्प कर सको।
एक अकेले के साथ अगर लाखो का साथ मिल जाएगा तो स्थिती जल्दी बदलने लगेगी।
(साभार)

19/05/2022

My First Vlog- Assam to Delhi

01/05/2022

Tea 🌱 Garden 🪴 Vlog

विश्व प्रसिद्ध कामाख्या माता मंदिर कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 km दूर कामाख्या में है। काम...
01/05/2022

विश्व प्रसिद्ध कामाख्या माता मंदिर

कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 km दूर कामाख्या में है। कामाख्या से भी 10 km दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। इस मंदिर का महत् तांत्रिक महत्व है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है। यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। देश भर मे अनेकों सिद्ध स्थान है जहाँ माता सुक्ष्म स्वरूप मे निवास करती है। प्रमुख महाशक्तिपीठों मे माता कामाख्या का यह मंदिर सुशोभित है। हिंगलाज की भवानी, कांगड़ा की ज्वालामुखी, सहारनपुर की शाकम्भरी देवी, विन्ध्याचल की विन्ध्यावासिनी देवी आदि महान शक्तिपीठ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र एवं तंत्र- मंत्र, योग-साधना के सिद्ध स्थान है। यहाँ मान्यता है, कि जो भी बाहर से आये भक्तगण जीवन में तीन बार दर्शन कर लेते हैं उनके सांसारिक भव बंधन से मुक्ति मिल जाती है।

" या देवी सर्व भूतेषू मातृ रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।

गोलासन हनुमान जी मंदिरउपखंड मुख्यालय सांचौर की इस पवित्र धन्य धरा पर आस्था से जुडी दक्षिण दिशा की और गुजरात राज्य के नजद...
01/05/2022

गोलासन हनुमान जी मंदिर

उपखंड मुख्यालय सांचौर की इस पवित्र धन्य धरा पर आस्था से जुडी दक्षिण दिशा की और गुजरात राज्य के नजदीक 15 KM पर स्थित गोलासन गांव में स्वयंभू प्रकट हनुमानजी मंदिर हजारों लोगो की आस्था का केन्द्र है।

हकीकत दावे के साथ नही पर ऐसा माना जाता है कि पुराने समय में हजारों साल पूर्व में एक ग्वाला जोधाराम दहिया रबारी जो जंगल (गोचर ) में गाये चरा रहा था। अचानक जोरदार हवा के साथ तेज आकाश से गर्जना हुई और धरती को चीरते हुए जमीन के अन्दर से एक अलौकिक मूर्ति निकली।और आवाज तेज होने से गाये इधर-उधर भागने लगी तब गायो का ग्वाला जोधाराम ने “हो – हो” हो की आवाज लगाई तो हनुमान जी वहीं रूक गए । डरा हुआ जोधाराम भागता हुआ गांव में आया और लोगो को बात बताई। उस समय में गांव के वीरमाजी भोड ओपजी पुरोहित आदि लोग वहां गए और देखा कि ये तो हनुमान जी की मूर्ति स्वयं निकली है।

ये चमत्कार से कम नही है। तब से लोगो ने श्री हनुमान जी की
पुजा अर्चना की एवम् समयानुसार एक चौकी का निर्माण किया। उस समय श्री हनुमान जी जाल वृक्ष के नीचे विराजमान थे। हनुमान जी के आगे पाताल तक एक खड्डा (कुई) था। जो आज भी विधमान है। धीरे-धीरे हनुमान जी आस-पास के लोगो के आस्था के केन्द्र बन गए। आस-पास के सभी गांवो में ये चमत्कार फैल गया।

श्री हनुमान जी के आगे जो खड्डा (कुई) थी उसकी गहराई नापने के लिए गांव के ही पंडित स्व. हस्तीमल जी श्रीमाली एवम् लक्ष्मण चौधरी व अन्य लोगो ने मिलकर पांच खाट (चारपाई) की रस्सी लेकर आगे पत्थर बांध कर उस खड्डे (कुई ) में डाला लेकिन उस खड्डे का अंत नही आया।
और ये चमत्कार वर्तमान में भी मौजूद है। इस खड्डे में श्रीहनमान जी के भक्त तेल सिन्दर चढाते है वो उस खड्डे में ही जाता है लेकिन आज तक ये खड्डा नही भरा, यहां साधको की मनोकामना पूर्ण होती है, जो इस दरबार मे मन्नत मांगता है उसको फल अवश्य मिलता है श्री हनुमान जी के चमत्कार खूब है।
पूराने समय में यह क्षेत्र सघन जालों से आच्छादित था, रात्रि में एक चोर ने मंदिर से घण्टा चुराया लेकिन पूरी रात रास्ता खोजता रहा, रास्ता नही मिला और वह अंधा हो गया और प्रातःकाल अपने आप को हनुमान जी के दरबार में पाया।

उस समय से लगाकर आज तक हर महीने की पूर्णिमा को हजारों भक्त दर्शन के लिए आते है यहाँ पर हर पूर्णिमा एवं मंगलवार, शनिवार लोग पैदल दर्शन हेतु आते है। साधु महात्मा हनुमान पुरी, ओमपुरी जी, ऋषिगिरी नाथ जी महाराज, गणेशपुरी जी महाराज तथा श्री पूनमपुरी जी महाराज जैसे कई महान तापस्विओ की पुण्य स्थल रहा है, यहां पर श्री हनुमान जी के महान भक्त श्री गुलाबपूरी जी की जीवित समाधि भी है। यह स्थान प्राचीन मुगल शासकों के हमलों को भी सहन कर चुका है लेकिन बजरंगी की महिमा और चमत्कार के आगे सब धराशायी हुए।
वर्तमान में मठाधीश श्री श्री 1008 श्री पूनमपुरी जी महाराज है। मन्दिर की प्रतिष्ठा ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को आज से लगभग 20 वर्ष पूव हई। जिसके आचार्य विजयराम जी व्यास एवं पंडित ईश्वरलाल जी श्रीमाली जी गोलासन सहित विद्वद पंडित थे।

दक्षिणामुखी हनुमान जी दिव्य एवं अलौकिक है, इनके बायें पैर के नीचे शनि महाराज की मूर्ति है जिस पर श्रद्वालुओं द्वारा तेल सिंदूर का अभिषेक किया जाता है। कालांतर में विकास की गाथा को आगे बढ़ाने का कार्य हनुमान जी के परम भक्त ट्रस्ट के मानद सदस्य एवं पदाधिकारी तथा गोलासन ग्रामीण है जिन्होंने अभूत पूर्व मेहनत के द्वारा विकास करवाया जिससे
हजारो श्रद्वालुओं को सुविधा प्राप्त होती है। इच्छापूर्ण श्री हनुमान जी की मुर्ति लगभग हजारो साल पुरानी है। पास में नेशनल हाइवे आने के कारण यहां श्रद्वालुओं की आवक भी बढी है।

शरद पूर्णिमा को झलकता है आस्था का ज्वार -

इच्छापूर्ण हनूमान मन्दिर में शरद पूर्णिमा को हर साल विशाल भजन संध्या के साथ आस्था का ज्वार उमड़ता है बड़ी संख्या में भक्त श्री हनुमान जी के मन्दिर में भक्ति का आनंद लेते है, इस दौरान महिला मण्डल द्वारा भजन की प्रस्तुति की जाती है।

सूर्योदय के साथ इच्छापूर्ण हनुमान जी के दर्शन के लिए लोग आते है, अलसवेरे श्री हनुमान जी के दर्शन के बाद ही अन्य कार्य करते हैं।
इस प्रकार मन्दिर आस्था का केन्द्र बन गया है, वहीं मंगलवार व शनिवार को विशेष पूजा अर्चना के साथ हनुमान जी मन्दिर में सिंदूर तेल चढ़ाया जाता है। घी खोपरे का भोग लगाया जाता है।

              photography lover
28/04/2022

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28/04/2022

Shrivelli

28/04/2022

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