संस्कृत श्लोक (2)
सह नाववतु सह नौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विदविशावै ll
अर्थ -हम दोनों एक साथ आगे बढ़ें (अपनी पढ़ाई में, शिक्षक और छात्र),हम दोनों एक साथ (अपनी पढ़ाई में, शिक्षक और छात्र) आनंद लें,हम एक साथ मिलकर (अपनी पढ़ाई) जोश के साथ (गहरी एकाग्रता के साथ) करें,हमने जो अध्ययन किया है वह प्रतिभा (समझ की, ज्ञान की ओर ले जाने वाली) से भरा;(समझ की कमी के कारण) शत्रुता को जन्म न दे ।
Mukesh Kumar
Alll
संस्कृत श्लोक (1) 🌹🌹संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।
देवा भागं यथा पूर्वे सजानाना उपासते ।।🌹🌹
अर्थ — हम सब सदैव एक साथ चले, हम सब सदैव एक साथ बोले, हम सभी का मन एक जैसा हो। हमारे विचार समान हों, हम मिलकर रहें। हम सभी ज्ञानी बनें, विद्वान बनें। जिस प्रकार हमारे पूर्वज अपनी धन-संपदा का आपसी सहमति ओर परस्पर समानता के आधार पर वितरण किया करते थे, उसी तरह हम अपने पूर्वजों के समान आचरण करें। प्राचीन समय में देवताओं का आचरण बिल्कुल ऐसा ही रहा है, वे सदैव एक साथ मिलकर चलने वाले, एक समान आचरण करने वाले रहे हैं, इसीलिये देवतागण वंदनीय रहें है।
13/02/2026
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