Aqsa Faundition Academy

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जी दोस्तों! हम ऑनलाइन कुरान करीम पढ़ाते हैं। हमारे यहाँ तजवीद के साथ कुरान पढ़ना, सिखाया जाता है। हम सभी उम्र और स्तर के छात्रों को पढ़ाते हैं, चाहे आप बिल्कुल नए हों या पहले से कुछ जानते हों अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें!"

05/01/2026

मौलाना मुहम्मद अली जौहर (1878 - 1931) मशरिक (पूरब) की ज़मीन में पैदा हुए, लेकिन मग़रिब (पश्चिम) की आब व हवा से आपकी परवरिश हुई, मशरिक की मिट्टी में अपनी ज़िंदगी को परवान चढ़ाया लेकिन मग़रिब के हथियार से अपने जिस्म को सजाया, उन का दिमाग़ मग़रिबी था मगर दिल मशरिकी था, वो मशरिक की हिमायत मे बारहा मग़रिब के हथियार का इस्तेमाल करता रहे! वो मशरिक के आफ़ताब (सूरज) थे, ये आफ़ताब भी अगर मशरिक में तुलु (उदय) होकर मग़रिब में डूबा तो दुनिया का कोई नया वाक़िया नही हुआ; इस लिए हक़ था मशरिक और मग़रिब के बीच ओ बीच बैतुल मुक़द्दस ही आख़िरी आरामगाह बने, ऐ मशरिक व मग़रिब के मालिक अपनी रज़ामंदी के फूल से इस आफ़ताब का दामन भर दे़!
मौलाना मुहम्मद अली जौहर की यौम ए वफ़ात (4 जनवरी) पर खिराज ए अकीदत।

मौलाना मुहम्मद अली जौहर की आख़िरी तस्वीर, 4 जनवरी 1931 को आपका इंतक़ाल हुआ।

17/12/2025

*ملیشیا کے اک اجتماع میں حضرت جی مولانا پیر ذوالفقــؒار احمد صاحب نقشبندی مجددی نور اللہ مرقدہ نے سارے مجمع کو رلا دیا*

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09/12/2025

یہ جھگڑا وراثت کا نہیں ماں کی محبت کا تھا - دو بھائی عدالت میں ماں کی خدمت کے لئے آمنے سامنے

دنیا میں عام طور پر جب دو بھائی عدالت تک پہنچتے ہیں تو لوگ فوراً سمجھ لیتے ہیں کہ جھگڑا وراثت یا زمین کا ہوگا۔ مگر سعودی عرب کا یہ سچا واقعہ بتاتا ہے کہ کبھی کبھی عدالتوں میں بھی محبت، وفا اور خدمت کے جذبات اپنا مقدمہ لڑتے ہیں۔ ایک بوڑھا شخص حیزان الحربی اپنی کمزور ماں کی خدمت کا حق چھیننے نہیں بلکہ اسے برقرار رکھنے کے لیے عدالت میں کھڑا تھا۔

دوسری طرف اس کا چھوٹا بھائی بھی اسی جذبے کے ساتھ موجود تھا، مگر دونوں کی محبت ایک تھی-وہ اپنی ماں کو اپنے پاس رکھنا چاہتے تھے۔ حیزان الحربی نے بھرائی ہوئی آواز میں کہا کہ وہ برسوں سے ماں کا سہارا بنا ہوا ہے اور اس کی زندگی کا واحد سکون انہی قدموں میں ہے۔ چھوٹا بھائی لرزتی آواز میں بولا کہ حزام خود اب بہت بوڑھا ہوچکا ہے، اور وہ چاہتا ہے کہ ماں کی خدمت کا بوجھ وہ اپنے کندھوں پر اٹھائے، تاکہ بھائی آرام کر سکے۔ اس لمحے عدالت میں خاموشی نہیں، محبت کی گونج تھی۔

فیصلہ کرنا مشکل تھا۔ جج نے ماں کو بلایا اور پوچھا کہ وہ کس کے ساتھ رہنا چاہتی ہیں۔ ضعیف ماں نے لرزتے ہونٹوں اور نمی بھری آنکھوں کے ساتھ کہا: "میں کیسے انتخاب کروں؟

میرے دونوں بیٹے میری آنکھیں ہیں… ایک کو چنوں تو دوسری سے محروم ہو جاؤں گی۔" یہ جملہ سنتے ہی عدالت کا ماحول نم آنکھوں سے بھر گیا۔ ماں فیصلہ نہ کر سکی تو عدالت کو کرنا پڑا۔ جج نے چھوٹے بھائی کی بہتر صحت کو مدِنظر رکھتے ہوئے ماں کی کفالت اسے دے دی۔

فیصلہ سنایا گیا تو حیزان الحربی کے قدم ڈگمگا گئے۔ وہ عدالت میں ہی سسک پڑا۔ اس لیے نہیں کہ وہ مقدمہ ہار گیا تھا، بلکہ اس لیے کہ وہ اپنی ماں کے آخری دنوں کی خدمت کا قیمتی موقع ہار بیٹھا تھا۔

ماں کو کسی کے ساتھ بھیجنے کا نہیں، بلکہ دونوں کا ماں کے قدموں میں بچھ جانے کا یہ مقدمہ تھا-اور محبت کے اس فیصلے نے یہ ثابت کر دیا کہ کچھ ہاریں بھی جیت سے زیادہ عظیم ہوتی ہیں۔

29/11/2025

*`🍽 खाना और मुसलमान🍽`*

आज़ादी के बाद हर क़ौम ने अपना मक़सद और अपनी मंज़िल बना ली,
लेकिन हम मुसलमानों ने जैसे अपनी ज़िन्दगी का सिर्फ एक ही मक़सद तय कर लिया — खाना!

1. पैदाइश पर दावत
2. नया घर बनाए तो दावत
3. बर्थडे पर दावत
4. सगाई में दावत
5. मरने पर दावत
6. मरने के बाद भी दावत
7. दसवें में खाना
8. सवा महीने पर खाना
9. मस्जिद में खाना
10. महफ़िल में खाना
11, शादी के एक दिन पहले खाना
12, शादी वाली रात खाना
13, खुशी में खाना
14, ग़म में भी खाना
15, और यूँ ही हर मौके पर खाना!

*अब तो ये हाल है कि —*
📌 अगर खाना न हो तो दीन सुनने नहीं आएंगे
📌 खाना न हो तो फातिहा में शरीक नहीं होंगे
📌 खाना न हो तो सालों मुलाक़ात भी नहीं करेंगे

*फिर खाने में भी मुक़ाबला:*
🍗 किसका खाना ज़्यादा अच्छा
🥘 किसका खाना ज्यादा महंगा
🍽 किसका खाना अजीब और नया
⏰ दिन हो या रात — *बस खाना, खाना और खाना!*

हमारे बुजुर्ग पेट पर पथ्थर बांधकर फाका करके नफ़्स को मारते थे ओर भूखे रहकर सारी सारी रात अल्लाह की इबादत में गुजारते थे 🌹

ओर आज हमने सिर्फ खाने को ही अपना मक़सद बना लिया है 🔥

अल्लाह करीम भूखों पर रहम फरमाए 🤲

19/11/2025

हर नफ़स को मौत का जायका चखना है

19/11/2025

तंज़ानिया में, इस्माइल अज़ीज़ी का नाम के ये शख्स मौत को 6 बार धोखा दे चुका है लोगो को लगने लगा है शायद ये सच में अमर है इस्माइल को हर बार मृत घोषित किया गया लेकिन हर बार वह हैरतअंगेज़ तरीके से ज़िंदा हो उठा, जिससे लोग डर और सदमे में पड़ गए,

पहली घटना: काम के दौरान साइट पर उसे घातक चोट लगी असपताल पहुंचने पर डॉक्टर्स ने उसमे मृत घोषित कर सीधे मुर्दाघर भेज दिया गया। सबको लगा कहानी खत्म हो गई, लेकिन अचानक उसका शरीर हिला और वह उठकर मुर्दाघर से बाहर चला गया। डॉक्टर हैरान रह गए,

दूसरी बार: उसे मलेरिया हो गया और डॉक्टरों ने उसकी मौत की घोषणा कर दी। परिवार वालों ने तो उसे ताबूत में भी रख दिया था। लेकिन जैसे ही दफ़नाने का समय आया, उसने अपनी आँखें खोल दीं और जनाज़े शामिल लोग हैरानी से चीख उठे,

तीसरी बार: एक भयानक कार दुर्घटना ने उसकी जान ले ली — या ऐसा सबको लगा। वह गहरी कोमा में चला गया और उसकी मौत का आधिकारिक सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया। लेकिन कुछ समय बाद, वह फिर से होश में आ गया, जैसे मौत उसे अपने साथ ले जाने से झिझक रही हो,

चौथी बार: उसे एक ज़हरीले साँप ने काट लिया। उसका शव पूरे तीन दिन मुर्दाघर में रखा रहा। परिवार उसे लेने पहुँचा ताकि दफ़ना सके। लेकिन जैसे ही फ्रीज़र खोला गया, वह फिर से उठ खड़ा हुआ,

पाँचवीं बार: वह शौचालय के एक गहरे गड्ढे में गिर पड़ा और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। मौत फिर से घोषित कर दी गई। मगर कुछ देर बाद, वह फिर से ज़िंदा हो गया, जैसे ईश्वर उसकी कहानी का आख़िरी पन्ना बंद करने से इंकार कर रहे हों,

छठी बार: यह सबसे भयावह था। पड़ोसी, जो अब डर और शक से भर चुके थे, उन्होंने उसका घर जला दिया जबकि वह अंदर था, ताकि उसकी अजीबोगरीब कहानी का अंत हो जाए। लेकिन सब दंग रह गए जब वह आग की लपटों से बाहर निकला — कपड़े जलकर राख हो चुके थे, मगर वह अब भी ज़िंदा था,

उस दिन के बाद से, इस्माइल अज़ीज़ी अकेला रहने लगा। परिवार ने उससे दूरी बना ली, पड़ोसी भी उसे भूत की तरह समझने लगे। वह अब एक छोटे से खेत में काम करता है, अपना खाना खुद पकाता है और तन्हाई में दिन गुज़ारता है,

फिर भी, उसने अपनी इंसानियत नहीं खोई। वह धीमी और गहरी आवाज़ में कहता है:
"हमेशा ईश्वर को पहले रखो, अमन से जियो, और किसी को दुख मत पहुँचाओ। कुछ चीज़ें इंसानों के बस में नहीं होतीं, उनका मालिक सिर्फ़ अल्लाह है"

अगर किसी को यह कहानी झूठी लग लग रही हो तो वो इस्माइल अज़ीज़ी तंजानिया लिख कर गूगल पर सर्च करे।।

19/11/2025

*ذہنی سکون کے لئے خود _کو وضاحتوں سے دور رکھیں۔*

👈 اگر کوئی کہے آپ برے ہیں_
_تو مسکرا کر کہہ دیں *جی ہم برے ہیں*

👈اور اگر کوئی کہے کہ آپ اچھے ہیں ،

*تو مسکرا کر جزاک اللہ خیرا بول دیں۔_*
🥰🥰🥰🥰

19/11/2025

پڑوسیوں سے اپنے تعلقات خراب نہ کریں🫡
رشتے والے آپ کے بارے میں انفارمیشن اُنہیں سے لیتے ہیں

08/11/2025

فلسطینی مسلمانوں سے زیادہ جامعہ اور علی گڑھ کی ان مسلم لڑکیوں کو دعا کی زیادہ ضرورت ہے

07/11/2025

Koi bhi kaam karne se phle In-sha-Allah zaroor kahe!

05/11/2025

ذرا تصویر کو غور سے دیکھیں
صرف اڑنے کی خاطر میٹروں اور سکرینوں کی بڑی اور پیچیدہ تعداد کو دیکھیں!!
تصور کریں کہ پرندے، عقاب، کبوتر اور اُلّو کے دماغ کا ایک چھوٹا سا حصہ تربوز کے بیج کے برابر ہے، اور یہ تمام پیچیدہ حسابات اسی میں کیے جاتے ہیں!!
رفتار، اونچائی، پے لوڈ، وزن، سمت، کمپاس، اوقات، خوراک کی تلاش اور دشمنوں سے بچنے کے لیے ریڈار، لینڈنگ اور ٹیک آف میٹر، اونچی اور نیچی فلائٹ میٹر، اور یہ سب بغیر کسی کنٹرول ٹاور، ریڈیو، سیٹلائٹ، یا GPS!!!

اَوَ لَمۡ یَرَوۡا اِلَی الطَّیۡرِ فَوۡقَہُمۡ صٰٓفّٰتٍ وَّ یَقۡبِضۡنَ ؔۘؕ مَا یُمۡسِکُہُنَّ اِلَّا الرَّحۡمٰنُ ؕ اِنَّہٗ بِکُلِّ شَیۡءٍۭ بَصِیۡرٌ ﴿19﴾
ترجمہ:- . کیا اُنہوں نے پرندوں کو اپنے اوپر پر پھیلائے ہوئے اور (کبھی) پر سمیٹے ہوئے نہیں دیکھا؟ اُنہیں (فضا میں گرنے سے) کوئی نہیں روک سکتا سوائے رحمان کے (بنائے ہوئے قانون کے)، بے شک وہ ہر چیز کو خوب دیکھنے والا ہے۔
سورۃالملک آیت:19

Photos from Aqsa Faundition Academy's post 04/11/2025

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