Shilpa Sailesh v. Varun Sreenivasan (2023) में Supreme Court of India ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के Article 142 के तहत “Complete Justice” देने के लिए विवाह समाप्त कर सकता है, यदि विवाह पूरी तरह टूट चुका हो (Irretrievable Breakdown of Marriage)।
लेकिन क्या कोई भी व्यक्ति सीधे Supreme Court में तलाक की अर्जी दाखिल कर सकता है?
👉 नहीं। मामला पहले निचली अदालतों से होकर अपील या SLP के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट पहुँचना चाहिए।
इस वीडियो में जानिए:
✔️ Article 142 क्या है?
✔️ Irretrievable Breakdown का क्या अर्थ है?
✔️ क्या सीधे सुप्रीम कोर्ट में तलाक संभव है?
✔️ आम लोगों के लिए इस फैसले का महत्व
सरल भाषा में पूरा कानूनी विश्लेषण।
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Video Related Maintenance, dowry case, divorce, court marriage, protection, stay, आदि की प्रक्रिया क्या है और किस प्रकार यह पूर्ण की जाती है? व ड्राफ्ट कैसे तैयार होते हैं?
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार, यदि उपभोक्ता निर्धारित सुरक्षा राशि (Security Deposit) जमा नहीं करता है, तो बिजली वितरण कंपनी कनेक्शन देने से मना कर सकती है।
यह राशि उपभोक्ता के बिल भुगतान की गारंटी के रूप में ली जाती है।
अपने अधिकार और कर्तव्य जानें और जागरूक बनें। ⚖️⚡
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एफआईआर में इस्तेमाल उर्दू शब्दों के हिन्दी अर्थ की जानकारी
रामपुर में हुए अधिवक्ता हत्याकांड के विरोध में अधिवक्ताओं ने जिला मजिस्ट्रेट सहारनपुर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मुख्य रूप से आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और Advocate Protection Act लागू करने की मांग की गई।
अधिवक्ताओं का कहना है कि वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कानून और कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
यह वीडियो केवल सूचना और जनजागरूकता के उद्देश्य से है।
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सहारनपुर में हुए एडवोकेट हत्या कांड के विरोध में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की गई और जोरदार नारेबाज़ी भी की गई।
अधिवक्ताओं का कहना है कि कानून व्यवस्था को मजबूत किया जाए और वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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आप इस फैसले पर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।
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11/02/2026
डिवोर्स लेने की जरूरत किसे होती है? कमेंट में जरूर बताएं
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यदि कोई व्यक्ति मारपीट, हत्या के प्रयास, बलात्कार, एसिड अटैक, सड़क दुर्घटना या अन्य अपराध का शिकार हुआ है, तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
यह योजना CrPC की धारा 357A के अंतर्गत लागू है, जिसमें पीड़ित या उसके आश्रित मुआवज़े के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जानिए कौन पात्र है, कितना मुआवज़ा मिलता है और आवेदन की पूरी प्रक्रिया।
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हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 9 उस स्थिति में लागू होती है, जब पति या पत्नी बिना किसी उचित कारण के दूसरे जीवनसाथी का साथ छोड़ देता है।
इस धारा के तहत पीड़ित पक्ष न्यायालय से वैवाहिक सहवास की पुनर्स्थापना की मांग कर सकता है।
यदि अदालत को लगता है कि अलग रहने का कोई वैध कारण नहीं है, तो वह साथ रहने का आदेश दे सकती है।
यह प्रावधान विवाह को बचाने और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
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