24/06/2020
तिब्बत (Tibet)
* तिब्बत बड़ा विचित्र देश है उसे संसार की छत कहा जाता है वास्तव में है भी वह संसार का सबसे उंचा देश
* इतनी ऊँचाई पर बसा होने और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ो से घिरा होने के कारण वह सदा ही दुनिया से अलग-थलग रहा है
* वर्ष 1953 तक यह एक स्वंतत्र देश था, जिस पर चीन ने जबरन कब्जा कर रखा है
* तिब्बत दुनिया का सबसे ऊंचा पठार है समुद्र तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह प्रदेश अब चीन का एक महत्वपूर्ण राज्य है
* एक अरब से अधिक लोगों के लिए ताज़े पीने योग्य पानी का स्रोत्र है तिब्बत
* एशिया की छह बड़ी नदियां मेकाँग, ब्रहमपुत्र, सिन्धु, यांग्तज़े, सलवीन एवं ह्वांग हो का उदगम स्थल तिब्बत है, जो विश्व की बड़ी जनसंख्या का पोषण करती है
* आर्कटिक एवं अन्टार्टिक के बाद ताज़े पानी के विशालतम स्रोत तिब्बत को विश्व के तीसरे ध्रुव के नाम से जाना जाता है
* सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट नेपाल एवं तिब्बत की सीमा पर स्थित है
* तिब्बत चीन का सबसे बड़ा प्रदेश है, पर जनसंख्या के हिसाब से सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है
* अधिकांश तिब्बती नागरिक चरवाहे या पारम्परिक किसान हैं
* यहां ट्रेवल परमिट एवं चीन का वीजा अनिवार्य है
* तिब्बत में अकेले घूमना एवं ल्हासा तक की हवाई यात्रा पर पाबंदी है लेकिन आप परिवार या दोस्तों के समूह के साथ तिब्बत की यात्रा कर सकते हैं
* अजूबा पटोला पैलेस, यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है
* तिब्बत की राजधानी ल्हासा में, रेड माउंटेन से प्रेरित वर्ष 637 में निर्मित पटोला पैलेस है, जिसका विशाल भवन परिसर पैलेस ऑफ़ आर्ट भी कहलाता है
* बरखोर स्क्वायर, लहासा में स्थित जोखांग मंदिर में तिब्बती व्यक्तियों द्वारा पूजा अर्पण जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तिब्बतन बुद्धिज़्म में इस मंदिर का स्थान सर्वोच्च है। यहां चीनी टंग डायनेस्टी एवं इंडियन विहार फ्यूज़न पर आधारित वास्तुकला पर्यटकों को अचंभित कर देती है
* यहा के लोग अपनी प्राचीन मान्यताओं, परम्पराओ और प्रथाओं को ज्यो-त्यों अपनाए हुए है न तो उन पर आधुनिक सभ्यता का प्रभाव पड़ा है और न ही वे उस दिशा में उत्सुक दिखाई देते है
* तिब्बत के लोग अपने सदियों से चले आ रहे रीति-रिवाजो, शिष्टाचार की मर्यादाओं और औपचारिक बातो का कठोरता से पालन करते है
* छोटे बडो के साथ व्यवहार करने, परस्पर वार्तालाप के सम्बोधनों तथा उत्सवो एवं पर्वो पर पहनने की वस्तुओ आदि के बने नियमो और चले आ रहे व्यवहारों का पालन करना अब उनके धर्म का ही एक अंग बन गया है
* यदि किसी को पृथ्वी पर स्वर्ग देखना हो तो, लेक नम्त्सो यानि कि हेवेन लेक ही वह स्थान है
* यम्द्रोक लेक (जेड लेक) तिब्बत की सबसे पवित्र झीलों में से एक है
* यम्द्रोक झील के किनारे पर स्थित सम्डिंग मोनेस्ट्री, किसी महिला द्वारा संचालित तिब्बत की एकमात्र मोनेस्ट्री है
* अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि यार्लिंग त्संग्पो ग्रैंड कैनियन विश्व का सबसे गहरा खड्डा है। यह ग्रैंड कैनियन पृथ्वी पर किसी अन्य कैनियन से अधिक गहरा है, परन्तु इसकी अधिक खोज नहीं की गई है
* यहाँ के लोग बड़े धार्मिक है ये लोग बौद्ध धर्म को मानते है
* बड़े आश्चर्य की बात है कि यहाँ के लोगो की कुल संख्या के 90 प्रतिशत लोग लामा या पुजारी है
* लामाओं की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण तिब्बत को लामाओं का देश भी कहा जाता है
* लामा पीला टोप पहनते है और बाकी बचे हुए दस प्रतिशत लोगो में लाल टोप पहनने की प्रथा है
* तिब्बत के प्रत्येक परिवार के एक व्यक्ति को लामा जरुर बनना पड़ता है यह मठ में रहकर एकांत और शान्ति का जीवन व्यतीत करते है
* इन सभी लामाओ के एक नेता होता है जिसे दलाई लामा कहते है दलाई लामा तिब्बत का शासक तो होता ही है साथ ही यहाँ के लोग उसे ईश्वर की तरह पूजते है
* दलाई लामा अपने को अवलोकितेश्वर का अवतार मानता है
* दलाईलामा का चुनाव वंश के आधार पर नही किया जाता एक दलाई लामा अपने मरने से पूर्व बताता है कि अगले जन्म में वह कहा उत्पन्न होगा और अवलोकितेश्वर का अवतार होने के लिए उसमे कौन कौन से चिन्ह विद्यमान होंगे
* दलाईलामा के देहांत के बाद सारे देश में घूमकर यह देखा जाता है कि उस समय कौन कौन से नये बालको का जन्म हुआ है और उनमे ये चिन्ह विद्यमान है या नही जिस बालक में ये सभी या इनमे से अधिकाँश चिन्ह विद्यमान होते है उसे ही दलाईलामा चुन लिया जाता है कई बार तो इस चुनाव में कई वर्ष लग जाते है
* जो बालक दलाईलामा चुना जाता है उसके पिता को सर्वोच्च कुलीन श्रेणी में स्थान दिया जाता है उसके शिक्षा आदि की भी विशेष व्यवस्था की जाती है
* तिब्बत के साधारण लामाओ के लिए यह आवश्यक नही है कि वे अविवाहित ही रहे वे विवाह कर सकते है और गृहस्थ जीवन व्यतीत कर सकते है
* तिब्बत का एक छोटा सा शहर यांगबजिंग, पृथ्वी पर गरम पानी के झरनों की सबसे ऊंची जगह है
* तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद निष्काषित दलाई लामा धर्मशाला, भारत में निवास करते हैं
* ये लोग मूर्तिया और चित्र आदि बनाकर धनोपार्जन करते है
* अधिकांश लामा खेती, व्यापार, सेना आदि के प्रबंध में लगे हुए है कुछ लामा मठो में रहते है
* लुलांग वन पठार पर स्थित विश्व के सबसे खुबसूरत वनों में से हैं। पाइन, फर वृक्ष एवं बड़े झाड़ों वाले इस वन को ड्रैगन किंग वैली के नाम से जाना जाता है
* तिब्बत्ती मान्यताओं के मुताबिक हर झील में ड्रैगन का निवास है तथा हर पत्थर में आत्मा है
* तिब्बती बड़े धार्मिक होते है वे दिन में कई कई बार प्रार्थना करते है उनकी केवल एक प्रार्थना होती है सारे तिब्बत के लोग उसी एक प्रार्थना को करते है
* वहा के बड़ी विचित्र प्रथा प्रचलित है वहा के हर परिवार में कुछ यंत्र होते है वे यंत्र वहा के लोगो की ओर से भगवान से प्रार्थना करते है
* यह यंत्र एक गोल डिब्बे का बना होता है जिन पर प्रार्थना लिखी रहती है परिवार का सदस्य किसी डंडे या हैंडल के सहायता से उसे घुमाता रहता है जितनी बार डब्बा घूमता है समझा जाता है कि परिवार के उस सदस्य ने उतनी ही बार मन्त्र का उच्चारण कर लिया है
* यहाँ के भिक्षु ही नही , दुसरे सभी लोग भी एक माला रखते है इस माला में 108 मनके होते है यह माला इन लोगो के पास हर समय रहती है
* मध्य तिब्बत में स्थित माउंट कैलाश हिन्दू, जैन एवं बौद्ध अनुयायियों द्वारा पूज्य एवं पवित्र माना जाता है यहां लंबे समय से लोग जाते रहे हैं
* तिब्बती अपने मृतकों का अंतिम संस्कार स्काई ब्युरियल द्वारा करते हैं
* यहाँ के लोग भुत प्रेतों पर भी बड़ा विश्वास करते है और उनसे बचने के लिए ये हर समय प्रार्थना भी किया करते है
* तिब्बत के लोगो के मकान भी बड़े विचित्र होते है इन मकानों के निचले भाग में ये पशु बांधते है और उपर के भाग में खुद रहते है
* इनके मकानों में कोई खिड़की नही होती ये लोग कमरे की छत में एक सुराख कर देते है इसी सुराख़ से सूरज की रोशनी भीतर आती है और कमरे से धुँआ बाहर निकल जाता है
* यदि हम उन मकानों में जाकर रहे तो हमारा दम घुटने लगे , लेकिन वहां के लोग उनमे बड़े आराम से रहते है वास्तव में वहां इतनी तेज और ठंडी हवा चलती है ऐसे मकान बनाना आवश्यक हो जाता है
* यहाँ के लोग अथिति का बड़ा सत्कार करते है उनके यहाँ मेज , कुर्सी आदि कुछ नही होती इसलिए वे मेहमानों को आग के पास भेड़ की खाल या ऊनी कम्बल बिछाकर बिठाते है
* तिब्बती लोगो का भोजन बड़ा विचित्र होता है जिसे शाम्पा कहते है शाम्पा जौ को पीसकर बनाया जाता है
* विश्वप्रसिद्ध मक्खन चाय तिब्बती पेय है यह चाय पूरे संसार में अत्यंत लोकप्रिय है