Delhi Public School Runnisaidpur

Delhi Public School Runnisaidpur At DPS Runnisaidpur which essentially aims in the service and the reconstruction of the community with a basic component of academic development of its.

23/12/2025
May the bond of love and protection between brothers and sisters grow stronger and bring happiness to all."Happy Raksha ...
09/08/2025

May the bond of love and protection between brothers and sisters grow stronger and bring happiness to all."
Happy Raksha Bandhan

*जागरण गली क्रिकेट आज रुन्नीसैदपुर में, उत्साह चरम पर*जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी : बिहार में दैनिक जागरण के स्थापना के 25...
10/04/2025

*जागरण गली क्रिकेट आज रुन्नीसैदपुर में, उत्साह चरम पर*
जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी : बिहार में दैनिक जागरण के स्थापना के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में जागरण गली क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बल्ला उठाओ, मैदान सजाओ गली क्रिकेट का जोश बढ़ाओ, थीम के तहत सीतामढ़ी में मैच का चौथा आयोजन गुरुवार को रुन्नीसैदपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के ग्राउंड में किया गया । इसमें स्थानीय जिला पार्षद रूब्बी कुमारी, समाजसेवी ओम भारती के साथ प्रमुख समाजिक व्यक्ति भी भाग लेकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किए। विद्यालय के निदेशक मनीष रंजन ने बताया कि इस आयोजन को लेकर खिलाड़ियों एवं बच्चों में जबरदस्त उत्साह है। गली क्रिकेट में दो टीमों के बीच छह- छह ओवर का मुकाबला हुआ। विजेता व उपविजेता टीम को मेडल व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन को लेकर लोगों में गजब का उत्साह था।

Annual function 2025....!
06/04/2025

Annual function 2025....!

Annual function 2025 ( DPS,RunnisaidpurP)
06/04/2025

Annual function 2025 ( DPS,RunnisaidpurP)

Dear Parents, Students, and Well-wishers,We are thrilled to invite you to Delhi public school Annual Day 2025 – "Celebra...
03/04/2025

Dear Parents, Students, and Well-wishers,

We are thrilled to invite you to Delhi public school Annual Day 2025 – "Celebrating Excellence & Creativity!" 🌟

Join us for an evening of mesmerizing performances, cultural dances, inspiring speeches, and award ceremonies, showcasing the talents of our brilliant students.

Admission open 2025-2026
08/01/2025

Admission open 2025-2026

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25/12/2024

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अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में...
01/11/2024

अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही?
दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं?

इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते।आज की शब्दावली के अनुसार कुछ ‘लिबरर्ल्स लोग’ युवाओं और बच्चों के मस्तिष्क में यह प्रश्न डाल रहें हैं कि लक्ष्मी पूजन का औचित्य क्या है, जबकि दीपावली का उत्सव राम से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर वह बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं कि सनातन धर्म और सनातन त्यौहारों का आपस में कोई तारतम्य नहीं है।सनातन धर्म बेकार है।आप अपने बच्चों को इन प्रश्नों के सही उत्तर बतायें।

दीपावली का उत्सव दो युग, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मीजी का पूजन होता है। भगवान राम भी त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने घर घर दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है।अत: इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपों से जुड़ा है।

लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है
और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है?

लक्ष्मी जी सागरमन्थन में मिलीं, भगवान विष्णु ने उनसे विवाह किया और उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया। लक्ष्मी जी ने धन बाँटने के लिए कुबेर को अपने साथ रखा। कुबेर बड़े ही कंजूस थे, वे धन बाँटते ही नहीं थे।वे खुद धन के भंडारी बन कर बैठ गए। माता लक्ष्मी खिन्न हो गईं, उनकी सन्तानों को कृपा नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई। भगवान विष्णु ने कहा कि तुम कुबेर के स्थान पर किसी अन्य को धन बाँटने का काम सौंप दो। माँ लक्ष्मी बोली कि यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं उन्हें बुरा लगेगा।
तब भगवान विष्णु ने उन्हें गणेश जी की विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने गणेश जी को भी कुबेर के साथ बैठा दिया। गणेश जी ठहरे महाबुद्धिमान। वे बोले, माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊँगा , उस पर आप कृपा कर देना, कोई किंतु परन्तु नहीं। माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी।अब गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न, रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे।कुबेर भंडारी देखते रह गए, गणेश जी कुबेर के भंडार का द्वार खोलने वाले बन गए। गणेश जी की भक्तों के प्रति ममता कृपा देख माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्रीगणेश को आशीर्वाद दिया कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें।

दीवाली आती है कार्तिक अमावस्या को, भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं, वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद देव उठनी एकादशी को। माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में।इसलिए वे अपने सँग ले आती हैं अपने मानस पुत्र गणेश जी को।
इसलिए दीवाली को लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है।

यह कैसी विडंबना है कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नही है और जो वर्णन है वह अधूरा है।इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों और अपनी अगली पीढ़ी को भी बतायें। दूसरों के साथ साझा करना भी ना भूलेंI
जय श्री गणेश जी
जय महालक्ष्मी जी
जय जय श्री राम🙏🙏
🚩🚩🙏🙏

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Runnisaidpur
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