12/12/2018
बिना प्रधानाध्यापक के उच्च विद्यालय, दरिहट में प्रति 56 बच्चों को पढ़ाने के लिए हैं मात्र एक शिक्षक
डेहरी-नासरीगंज मार्ग में स्थित अशोक कुमार जैन उच्च विद्यालय दरिहट में कक्षाएं भले चलती हैं, किन्तु व्यवस्था नहीं चलती है। व्यवस्था का ही दोष है कि गत एक साल से इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद रिक्त है। प्रभारी के सहारे तब से यह विद्यालय चल रहा है। व्यवस्था इस समस्या को इग्नोर कर रही है। विद्यालय में कक्षाएं नियमित चलने का दावा प्रभारी प्रधानाध्यापक रामनाथ प्रसाद करते हैं, किन्तु विद्यालय पहुँचने पर कई शिक्षक धुप सेंकते देखे गए। बच्चे कम संख्या में उपस्थित थे। जो थे वे कक्षा से बाहर खेल रहे थे। पूछने पर प्रभारी ने कहा- कक्षाएं नियमित और सभी चलती हैं। अभी टिफिन हुआ है। बच्चे कक्षा से बाहर हैं। बताया कि प्रधानाध्यापक का पद करीब एक साल से रिक्त है। नामांकन कक्षा 09 वीं में 307 और 10 वीं में 309 बच्चों का है। दोनों क्लास में तीन-तीन सेक्शन चलता है। कुल 615 बच्चे नामांकित हैं। बताया गया कि कुल 11 शिक्षक हैं। इसमें कुल नौ नियोजित शिक्षक हैं। बताया कि माध्यमिक में सभी विषय के शिक्षक हैं। यूनिट के अनुसार। यदि 40:01 अनुपात के अनुसार शिक्षक चाहिए तो फिर हर विषय में एक एक शिक्षक और चाहिए होगा। वैसे उपस्थित बच्चों और शिक्षकों के अनुपात के अनुसार पढाई के लिए प्रयाप्त शिक्षक उपलब्ध हैं। विद्यालय की चाहरदीवारी ध्वस्त है। इस कारण कई समस्या आती है। स्कूल में बताया गया कि चहारदीवारी न रहने के कारण सुरक्षा शून्य है। पशुओं ने अपना चारागाह बना रखा है तो असामाजिक तत्वों ने अपना अड्डा। जब तब तोड़फोड़ का अकार्य ये तत्व करते रहते हैं। प्रभारी बोलते हैं कि विद्यालय की सबसे बड़ी समस्या ही तोड़फोड़ की है। कभी दरवाजे तोड़े जाते हैं, कभी खिड़कियाँ। चाहरदीवारी को मनरेगा से बनवाने की कोशिश जब शुरू हुई तो नापी की गयी और फिर बचे हुए दीवार को भी तोड़ दिया गया। कहा गया कि इस परिसर में स्टेडियम बनेगा, किन्तु अभी तक कुछ नहीं हो सका। न स्टेडियम बना न चाहरदीवारी बन रहा है। प्रभारी ने बताया कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से प्राप्त 50 हजार से खिड़की दरवाजे लगाए गए हैं। वर्ष 1947 में स्थापित इस उच्च विद्यालय में कमरा प्रयाप्त है। बताया गया कि कुल 18 कमरे हैं जिसमें से 06 कमरे जर्जर हैं। कई कमरों की दीवार ठीक है पर छत नहीं, वह जर्जर है। इसमें पढ़ाई नहीं होती है। दीवारों के रंग रोगन हुए दशकों बीत गए लगते हैं।
बिना प्रधानाध्यापक के उच्च विद्यालय, दरिहट में प्रति 56 बच्चों को पढ़ाने के लिए हैं मात्र एक शिक्षक | डेहरी-नासरीगंज .....