31/05/2026
श्रम से बनाएंगे मिट्टी को सोना,
जीवन बनेगा उपवन सलोना ,
मंगल सुमन खिलाएंगे हम बदलेंगे जमाना..
घर-घर अलख जगायेंगे हम बदलेंगे जमाना..
विद्यालय में यह अभियान गीत बच्चों के द्वारा गाया गया 30 मई 2026 को, अवसर था विद्यालय में यूथ एवं इको क्लब की कुछ गतिविधियों का, विद्यालय में एक लीची का पेड़ लगाया गया। गमले में लगाए गए विभिन्न प्रकार के औषधीय एवं अन्य गुणों वाले पौधों का प्रदर्शन किया गया । इन गतिविधियों में प्रधानाध्यापक के साथ मुख्य रूप से क्लब की नोडल शिक्षिका कुमारी शशिबाला सिंह कुशवाहा, छात्र कैप्टन पवन कुमार पटेल एवं अन्य छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रधानाध्यापक श्री जन्मेजय कुमार पांडेय द्वारा इको क्लब का उद्देश्य, इसके कार्य एवं इससे लाभ पर चर्चा की गई ।
#इको_क्लब_का_उद्देश्य
इको क्लब छात्रों का एक समूह होता है जो पर्यावरण के संरक्षण के लिए जागरूकता, समस्याओं को चिन्हित कर उनके निदान हेतु गतिविधियों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है । इस क्लब के गठन के अंतर्निहित उद्देश्यों में बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण के बीच ले जाना और पर्यावरण को कक्षा में पठन- पाठन पाठ्यक्रम और गतिविधियों में शामिल करना प्रमुख है । विद्यालय में इको क्लब पर्यावरण शिक्षा गतिविधियों का केंद्र होता है जो इको क्लब के सदस्यों, छात्रों में उनके समझ और कौशल को बढ़ाकर उन्हें आसपास के पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाता है।
#इको_क्लब_का_कार्य
> छात्रों को वृक्षारोपण द्वारा आसपास के पर्यावरण को हरा- भरा और स्वच्छ रखने के लिए प्रोत्साहित करना ।
> स्थानीय जानकारी के आधार पर जल संरक्षण की शुरुआत करना ।
> विद्यालय परिसर में बगीचा किचन गार्डन विकसित करना एवं उनकी सुरक्षा करना ।
> विद्यालय के किचन गार्डन में लगाए गए पौधों को संचित हेतु प्रयोग में ले जाने वाले वाटर चैनल का निर्माण करना ।
>जल संरक्षण की भावना को प्रोत्साहित करना तथा छात्रों को पानी की दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रेरित करना।
> इको क्लब के सदस्यों द्वारा अवशेष पदार्थों को गड्ढे में संग्रहण कर खाद बनाने में उपयोग करना।
> छात्र-छात्राओं को जागरूक करना तथा कचरे को जलाने से रोकने हेतु प्रेरित करना जो श्वास रोग का कारण बनता है।
> छात्र-छात्राओं को प्लास्टिक के बैग के उपयोग को कम करने एवं सार्वजनिक स्थानों पर न फेंकने के लिए संवेदनशील बनाना ताकि नल और सीवर का अवरोध होने से बचाया जा सके साथ ही मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करने से बचा जा सके ।
> प्रश्नोत्तरी, निबंध, पेंटिंग प्रतियोगिताएं रेलिया नुक्कड़ नाटक आदि जैसे जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करना जिसमें विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में शिक्षा दी जा सके और बच्चों को बेकार पड़े कचरे से उनका पुनः उपयोग और उससे उत्पन्न उत्पादों की तैयारी के बारे में सिखाया जा सके।