J D Convent English HIGH School Porsa

J D Convent English HIGH School Porsa our aim is not earn money. this year we are commencing dayboarding, compute

since 1992 we are providing better education to our students.We have students like an engineer and doctors .our purpose is to make our students self confident and self dependent.

10/06/2026

ट्रंप चचा के टेबल पर सिर्फ हमारी विदेश नीतियाँ ही तय नहीं हो रहीं, बल्कि हमारी घरेलू नीतियों का निर्धारण भी व्हाइट हाउस में हो रहा है। ईरान युद्ध में हमने हर वह काम किया, जो अमेरिका ने कहा। कुछ काम अपनी ओर से खरखाहीं में भी किया, ताकि ट्रंप चचा खुश हों। ठकुरसुहाती उतने भर पर नहीं रुकी हुई है। हमारी सरकार ट्रंप चचा का सहलाने के चक्कर में अपने देशवासियों का ही तेल निकालने में जुटी हुई है। कैसे? इसके लिए आगे तभी पढ़िये, जब दिमाग नयी बातें और नये दृष्टिकोण को स्वीकारने में सक्षम बचा हुआ हो। यदि आपके लिए कोई व्यक्ति या कोई विचारधारा या कोई पार्टी देश से ऊपर है, आपको आगे नहीं पढ़ने की सलाह दी जाती है।

अभी देश में एक बड़ा मुद्दा है इथेनॉल। नहीं है तो इसे होना चाहिए। समझने में आसानी के लिए पहले कुछ फैक्ट्स:-

1:- पूरे देश में ई20 अनिवार्य हो चुका है। ई20 का मतलब तेल में 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल। एक्सपी95 और पावर95 जैसे महँगे ऑप्शंस में भी 20% इथेनॉल है। इथेनॉल नहीं चाहिए तो एकमात्र विकल्प 100 ऑक्टेन वाला पेट्रोल (जैसे एक्सपी100) है, जो बहुत कम उपलब्ध है और 150-160 रुपये लीटर है।
2:- सरकार ने ई22, ई25, ई27 और ई30 के मानक जारी कर दिये हैं। अभी कुछ पेट्रोल पंपों को कहा गया है कि वे ई20 के साथ ये विकल्प भी रखें।
3:- सरकार ने ई85 लॉन्च कर दिया है। इसमें पेट्रोल बस 15% है। बाकी 85% इथेनॉल है। इस साल के अंत तक 500 पंप और अगले साल के अंत तक 5,000 पेट्रोल पंप पर यह उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसका दाम नॉर्मल पेट्रोल (मने 20% इथेनॉल वाले) से 20 रुपये कम है।
4:- सरकार ने डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की बात साफ कर दी है। पहले 5% की बात थी, फिर 10% की होने लगी, अब 15% की बात चल रही है। मतलब जैसे अभी नॉर्मल पेट्रोल में 20 इथेनॉल है, वैसे ही नॉर्मल डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिला रहेगा।
5:- अभी तक बाजार में जो कारें या बाइक बिक रही हैं, उनमें ई20 से ऊपर का कोई भी ऑप्शन नहीं डाल सकते। 20% से ऊपर इथेनॉल इंजन नहीं झेल पायेगा। आगे इस तरह की कारें-बाइकें आ सकती हैं। हीरो ने स्प्लेंडर का और मारुति ने वैगनआर का फ्लेक्स इंजन अभी अनवील किया है। हो सकता है 1-2 महीने में ये शोरूम पर दिखने लगें। हो सकता है आगे और भी मॉडल आ जायें। इनमें ई20 से लेकर ई100 तक कुछ भी डाल सकते हैं।

सरकार ने देश भर में ई20 पेट्रोल को अनिवार्य करने की समयसीमा 2030 तय की थी। यह एक अघोषित नियम है कि सरकारी समयसीमा हमेशा आगे खिसकती है। इथेनॉल के मामले में यह परिपाटी चमत्कार की तरह टूट गयी। सरकार ने समयसीमा से 5 साल पहले 2025 में ही यह काम कर लिया। मजेदार बात ये है कि भारत ऐसा अकेला देश है, जिसने पूरे देश में ई20 को अनिवार्य कर दिया है। दुनिया के कई देश पेट्रोल में इथेनॉल मिला रहे हैं, लेकिन कहीं भी मिनिमम 20% इथेनॉल का कैप नहीं है। ग्लोबल स्टैंडर्ड ई10 का है। इससे अधिक ब्लेंड वाले पेट्रोल भी हैं, लेकिन ऑप्शनल हैं, मैंडेटरी नहीं। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका जैसे विकसित देशों में कैप 10% इथेनॉल का है। इथेनॉल ब्लेंड में ब्राजील सबसे आगे था, लेकिन वहाँ भी कैप 18% का है। इससे ऊपर ई27 से ई85 तक ऑप्शनल है। मतलब कम से कम 20% की अनिवार्य ब्लेंडिंग सिर्फ और सिर्फ भारत में हो रही है। अब आगे की तैयारी है डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की। इसमें मजेदार बात है कि यह अब तक कोई देश नहीं कर रहा है। कहीं-कहीं ट्रायल चल रहे है। भारत में ट्रायल की जरूरत नहीं समझी जा रही है। सीधे 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की उसी तरह तैयारी है, जैसे पेट्रोल में 20% इथेनॉल हुआ है।

अब ये समझें हमलोग कि ये इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल है क्या चीज? इन्हें कहा जाता है बायोफ्यूल या जैव ईंधन। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन आदि कहे जाते हैं फॉसिल फ्यूल या जीवाश्म ईंधन। फॉसिल फ्यूल हजारों सालों में स्वत: बनते हैं। बायो फ्यूल की फैक्ट्री डाली जा सकती है। बायोफ्यूल अनाज, पराली आदि से बनाये जाते हैं। बायोगैस बनाने में गोबर यूज हो जाता है। भारत में अभी इथेनॉल बनाने में गन्ने के साथ मक्के और चावल के इस्तेमाल की भी मंजूरी दी जा चुकी है। आइसोब्यूटेनॉल में रॉ मटीरियल क्या होंगे, ये अभी सरकार ने अधिसूचित नहीं किया है, लेकिन संकेत से यही लग रहा है कि इथेनॉल की तरह इसमें भी गन्ने, मक्के और चावल की मंजूरी दे दी जायेगी।

यहाँ पर कुछ स्वाभाविक सवाल उठने चाहिए। क्या वजह है कि हम इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल की खपत बढ़ाने को लेकर बहुत जल्दी में हैं? जिस काम को 2030 तक करने का टारगेट लेकर हम चल रहे थे, हमने उसे 2025 में ही क्यों लागू कर दिया? न्यूनतम 20% इथेनॉल किसी ने नहीं किया, हमने क्यों किया? डीजल में आइसोब्यूटेनॉल अबतक किसी ने नहीं मिलाया, इसका रियल यूजकेस डेटा मामूली है, फिर भी हम डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल क्यों मिलाने जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब अबतक समझ आ रहे थे कि इसमें गन्नाकरी ब्रो के हित सध रहे हैं। ब्रो अपने लौंडों का बिजनेस चमकाने के लिए देश को चूल्हे में झोंक रहा है। लेकिन इस जवाब के बाद कई नये सवाल बन जाते हैं। क्या इस सरकार में गन्नाकरी ब्रो इतना ताकतवर है कि अपनी मर्जी चला सके और दूसरे मंत्रालयों के कार्यक्षेत्र में सीधा दखल डाल सके? मुझे ऐसा नहीं लगता।

जवाब हमें आगे मिलेंगे कुछ आँकड़ों में। अभी पिछले सप्ताह गन्नाकरी ब्रो और एप्सटीन फाइल वाले मंत्रीजी, दोनों ने फिर से दावा किया कि भारत में अभी जितनी खपत है, उससे ज्यादा इथेनॉल बनाने की क्षमता है। यह बात सही भी लग रही है। जबसे गन्ने के अलावा मक्के और चावल से भी इथेनॉल बनाने की मंजूरी मिली है, कई राज्यों के इथेनॉल प्लांट आफत में फंस गये हैं। कारण है कि हर राज्य से इथेनॉल खरीदने का कोटा है। जिन राज्यों पर सरकार की कृपा है, वहाँ बहुत ज्यादा उत्पादन के बाद भी पूरा इथेनॉल सरकारी कंपनियाँ खरीद ले रही हैं। कुछ राज्यों में उत्पादन बहुत ज्यादा नहीं है, फिर भी उनके प्लांट से इथेनॉल नहीं खरीदे जा रहे हैं। हमारा बिहार भी ऐसा ही एक राज्य है। मतलब सरकार की यह बात मानी जा सकती है कि हम खपत से ज्यादा इथेनॉल का उत्पादन कर रहे हैं। अब अगर यह बात सच है, फिर हम अमेरिका से इथेनॉल क्यों खरीद रहे हैं? अमेरिकी ऊर्जा मंत्रालय के आँकड़े कहते हैं कि पिछले साल हमने अमेरिका से इथेनॉल खरीदने का रिकॉर्ड बना दिया। जनवरी से सितंबर तक में ही हमने अमेरिका से 35,39,000 बैरल इथेनॉल खरीदा। मतलब हर महीने 3,93,000 बैरल। अपनी सरकार यहाँ सफाई देती है कि अमेरिका से आने वाले इथेनॉल का सिर्फ इंडस्ट्रियल यूज होता है। उसे हम पेट्रोल में नहीं मिलाते। सरकार की इस सफाई से हमारे सवाल का जवाब नहीं मिलता कि जब आप खपत से अधिक उत्पादन घर में करने का दावा कर रहे हो, फिर इंडस्ट्रियल यूज के लिए भी हम अमेरिका से इथेनॉल क्यों खरीद रहे हैं? वो भी महँगा? भारत में जो इथेनॉल बन रहा है, वह अमेरिका से सस्ता है। हमारी जितनी खपत है, उससे अधिक उत्पादन है। फिर अमेरिका से इथेनॉल खरीदना संदेहास्पद नहीं है?

अब पिछले साल फरवरी में चलते हैं। जनवरी 2025 में ट्रंप चचा के शपथ लेते ही हमारे अमृतलाल व्हाइट हाउस जाने के लिए छटपटाने लगे थे। आनन-फानन में फरवरी में अमेरिका पहुँच गये थे। ट्रंप चचा से भरपूर बेइज्जती करवाने के बाद अमृतलाल जी ने 56 इंच की छाती ठोकते हुए अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर की खरीद करने का वादा कर दिया था। अमृतलाल जी को लगा था इससे ट्रंप चचा खुश होंगे। चचा कितने खुश हुए, यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया ने देखा। लेकिन अमृतलाल की स्वामीभक्ति अप्रभावित है। हम सस्ता रूसी तेल छोड़कर महँगा अमेरिकी तेल खरीद रहे हैं। सस्ता रूसी गैस छोड़कर महँगा अमेरिकी गैस खरीद रहे हैं। हम बैंक से कर्जा लेकर इथेनॉल प्लांट लगाने वाले अपने उद्यमियों को उनके हाल पर छोड़कर अमेरिका से महँगा इथेनॉल खरीद रहे हैं। अमेरिका अभी आइसोब्यूटेनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक है। संभव है हम आगे आइसोब्यूटेनॉल भी अमेरिका से खरीदें।

भारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है, उसमें बायोफ्यूल एक बड़ा मुद्दा है। अमेरिका का दबाव है भारत ज्यादा से ज्यादा बायोफ्यूल खरीदे। अमेरिका में कृषि योग्य भूमि है 41 लाख वर्गकिलोमीटर। भारत का कुल क्षेत्रफल है 33 लाख वर्गकिलोमीटर। अमेरिका की आबादी है 35 करोड़। भारत की आबादी 150 करोड़। अमेरिका के पास खूब सारा सरप्लस अनाज है इथेनॉल-आइसोब्यूटेनॉल बनाने के लिए। भारत में इथेनॉल बनाने के लिए काफी सारा मक्का भी अमेरिका से आ रहा है। 2-4 साल पहले तक भारत मक्का एक्सपोर्ट करता था। इथेनॉल-आइसोब्यूटेनॉल बनाने में जिन फसलों का इस्तेमाल हो रहा है, तीनों पानी पीने के लिए कुख्यात हैं। हमारे पास दुनिया की करीब 20% आबादी है, लेकिन पीने-खेती करने लायक पानी सिर्फ 4%। जिस ब्राजील का उदाहरण बार-बार देते हैं उसकी आबादी है सिर्फ 22 करोड़ और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा वाटर रिसॉर्स है, करीब 12%। फिर भी उसे पानी के संकट सताने लगे हैं। भारत का क्या हो सकता है, ये जानने के लिए गूगल पर India Water Crisis सर्च कर लें।

लेकिन अमृतलाल को इन सबसे क्या! अमृतलाल वही काम करेगा, जिस काम के लिए उसे लाया और बनाया गया है। ट्रेड डील के बाद अब इथेनॉल पॉलिसी दूसरा ऐसा मुद्दा है, जिसकी तह में जाने पर मुझे राहुल गांधी की बात सही लग रही है- Our PM is compromised. गन्नाकरी ब्रो बस इस मौके का लाभ उठाकर पैसे बना रहा है। असली कलप्रिट हमारा अमृतलाल ही है।

(ट्रेड डील की बातें ऑफिशियली बाहर आने पर फिर से लिखूँगा इस विषय पर। डेढ़ किलोमीटर में लिखने के बाद भी बहुत बातें बची रह गयी हैं। इसे शेयर-कॉपी-पेस्ट करने की हमेशा की तरह खुली छूट रहेगी। विषय से बाहर की बकलोली करने या एआई से लिखवाकर स्पैम चिपकाने पर एंटरटेन करने की जगह ब्लॉक कर दिया जायेगा। पोस्ट का पोस्टर बनाया है चैटजीपीटी ब्रो ने।)

15/05/2026

यज्ञ = अंधविश्वास नहीं
यज्ञ = भारत की खोई हुई साइंस
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प्रमाण 1: हवा का डॉक्टर
शास्त्र कहते हैं - अथर्ववेद 19.38.4:
`यते अग्ने दिवो अर्चिरा अपो वि गाहतादिदम्। कृणुष्व दुष्टरं तमः`

सरल अर्थ: हे अग्नि, तुम्हारी लपटें हवा के जहरीले कीटाणु जला दे

विज्ञान कहता है - भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की 2018:
हवन करने के 1 घंटे बाद कमरे की हवा जांची गई। गंधक डाइऑक्साइड 48% कम, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड 60% कम। कुल 94% हानिकारक बैक्टीरिया मर गए।

रोचक बात: बाजार का सबसे महंगा हवा साफ करने वाला यंत्र 1 घंटे में 80% साफ करता है। यज्ञ 94% साफ करता है, वो भी सिर्फ 50 रुपये में।

प्रमाण 2: बादल बनाने की मशीन

शास्त्र कहते हैं - श्रीमद्भगवद्गीता 3.14:
`यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः`

सरल अर्थ: यज्ञ से बादल बनते हैं, बादल से बारिश
विज्ञान कहता है - वायुमंडल विज्ञान पत्रिका 2020:
अग्निहोत्र का धुआं बादल के बीज यानी `मेघ बीज` का काम करता है। ये धुआं ऊपर जाकर नमी को बूंद बनाता है।

रोचक बात: अरब देश बादल बनाने पर हर साल 800 करोड़ रुपये खर्च करते हैं। हमारे दादा-परदादा खेत में हवन करके मुफ्त में कर लेते थे।

प्रमाण 3: दिमाग की दवा

शास्त्र कहते हैं - सामवेद..
मंत्रो हि गुप्तो विज्ञानम्` - मंत्र छुपा हुआ विज्ञान है
विज्ञान कहता है - अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली:
गायत्री मंत्र की ध्वनि 110 हर्ट्ज की है। 10 मिनट जाप करने से दिमाग की अल्फा तरंग 40% बढ़ जाती है। तनाव का हार्मोन 67% घट जाता है।

रोचक बात: मन के डॉक्टर की एक बार की फीस 2000 रुपये है। गायत्री मंत्र का जाप बिल्कुल मुफ्त है।

प्रमाण 4: कीटाणु मारने का धुआं*

शास्त्र कहते हैं - चरक संहिता सूत्रस्थान 5.26:
`धूपनं रक्षोघ्नं जंतुघ्नं च कण्डूघ्नं चैव कीर्तितम्`
*सरल अर्थ:* धूप करना राक्षस, कीटाणु और खुजली तीनों को मारता है
विज्ञान कहता है - राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान लखनऊ:
गुग्गुल और घी के धुएं से स्टैफिलोकोकस, ई.कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया 89% तक मर गए।

रोचक बात: फिनाइल की बोतल 100 रुपये की आती है। यज्ञ का धुआं पूरे घर को फिनाइल कर देता है।

प्रमाण 5: फेफड़ों की कसरत

शास्त्र कहते हैं - यजुर्वेद 36.12:
`प्राणाय स्वाहा अपानाय स्वाहा व्यानाय स्वाहा`

सरल अर्थ: यज्ञ प्राण शक्ति यानी सांस की ताकत बढ़ाता है

विज्ञान कहता है - पतंजलि अनुसंधान संस्थान:
रोज 15 मिनट हवन करने वाले लोगों के फेफड़ों की ताकत 18% ज्यादा मिली। दमा के दौरे 60% कम हुए।

रोचक बात: जिम की फीस महीने की 1000 रुपये। प्राणायाम और यज्ञ से फेफड़े फ्री में मजबूत।

प्रमाण 6: घर की सकारात्मक ऊर्जा

शास्त्र कहते हैं - अथर्ववेद 12.1.12:
`यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म विश्वस्य भुवनस्य नाभिः`

सरल अर्थ: यज्ञ दुनिया का सबसे अच्छा काम, सृष्टि की नाभि है

विज्ञान कहता है - किरलियन फोटोग्राफी प्रयोग:
यज्ञ के बाद कमरे की जैविक ऊर्जा 300% ज्यादा चमकदार दिखी। नकारात्मक आयन 2000 प्रति घन सेंटीमीटर बढ़े।
*रोचक बात:* पहाड़ों पर नकारात्मक आयन 4000 होते हैं इसलिए मन शांत रहता है। यज्ञ आपके ड्राइंग रूम को पहाड़ बना देता है।

प्रमाण 7: खेत का देसी खाद
शास्त्र कहते हैं - ऋग्वेद 10.90.6:
`तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः संभृतं पृषदाज्यम्`

सरल अर्थ: यज्ञ से ही घी, अन्न, औषधि पवित्र होकर जीवन देते हैं

विज्ञान कहता है - हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार:
यज्ञ की राख में पोटाश 8% और फास्फोरस 5% मिला। ये सबसे अच्छी जैविक खाद है। गेहूं की पैदावार 22% बढ़ गई।
*रोचक बात:* रासायनिक खाद की बोरी 1400 रुपये की। यज्ञ की राख मुफ्त और जहर से मुक्त।

प्रमाण 8: विकिरण से बचाव

शास्त्र कहते हैं - यजुर्वेद 17.76:
`अग्निर्वै रक्षोहा` - अग्नि राक्षसों यानी खराब विकिरण को खा जाती है

विज्ञान कहता है - भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र:
हवन कुंड के 10 मीटर दायरे में गामा विकिरण 25% कम मिला। कपूर और घी आयन बनाकर विकिरण सोख लेते हैं।
*रोचक बात:* मोबाइल टावर के रेडिएशन से बचने का सबसे सस्ता तरीका घर में छोटा हवन करना है।

प्रमाण 9: दिल का सुकून

शास्त्र कहते हैं - शतपथ ब्राह्मण 14.3.2:
`यज्ञेन वै देवा अमृतत्वमानशुः` - यज्ञ से दिल को अमृत मिलता है

विज्ञान कहता है - हार्ट मैथ संस्थान अमेरिका:
समूह में मंत्र जाप करने से सब लोगों की दिल की धड़कन एक जैसी हो जाती है। रक्तचाप 10 अंक कम होता है।
*रोचक बात:* परिवार के साथ यज्ञ करना सबसे अच्छी पारिवारिक सलाह से बेहतर है।

प्रमाण 10: नींद की दवा

शास्त्र कहते हैं - तैत्तिरीय उपनिषद:
`यज्ञो वै सुषुप्तिः` - यज्ञ ही गहरी नींद है

विज्ञान कहता है - निमहांस बेंगलुरु:
सोने से पहले 5 मिनट कपूर और घी का धूप करने से नींद का हार्मोन मेलाटोनिन 30% बढ़ गया। 40 मिनट जल्दी नींद आई।

रोचक बात: नींद की 1 गोली 10 रुपये की। कपूर की 1 टिक्की 2 रुपये की।

प्रमाण 11: जवानी का राज

शास्त्र कहते हैं - मनुस्मृति 3.69:
`नित्यं स्वाध्याययज्ञं च नित्यं चातिथिपूजनम्` - रोज यज्ञ से शरीर शुद्ध रहता है

विज्ञान कहता है - एपिजेनेटिक्स रिसर्च 2022:
48 दिन तक रोज मंत्र और हवन करने से डीएनए के टेलोमीयर लंबे हुए। यानी बुढ़ापा धीमा हो गया। रोग प्रतिरोधक जीन चालू हो गए।

रोचक बात: झुर्रियां हटाने की क्रीम 5000 रुपये की। यज्ञ आपको अंदर से जवान बनाता है।

प्रमाण 12: लक्ष्मी का चुंबक

शास्त्र कहते हैं - अथर्ववेद 3.24.5:
`यज्ञेन कल्पन्तां मयि लक्ष्मीः` - यज्ञ से मेरे पास लक्ष्मी आए

विज्ञान कहता है - मनोविज्ञान पत्रिका:
साफ, खुशबूदार और शांत घर में इंसान के फैसले 34% बेहतर होते हैं। तनाव कम होने से व्यापार के नए विचार आते हैं।

रोचक बात: वास्तु शास्त्री 21 हजार रुपये लेते हैं। यज्ञ घर की ऊर्जा साफ करके लक्ष्मी का रास्ता खोल देता है।

कैप्शन - पूरा देसी अंदाज में

सुनो बहनों और भाइयों।
लड़ाई चल रही है।

एक तरफ: तनाव, बीमारी, कर्जा, लड़ाई-झगड़ा

दूसरी तरफ: हमारे पास 4000 साल पुराना हथियार था - यज्ञ

हमने क्या किया?
हथियार को पुराना कबाड़ समझकर स्टोर में डाल दिया।
और बोले `ये तो दकियानूसी है`

अब दुनिया क्या कर रही है देखो..

नासा: मंगल ग्रह पर अग्निहोत्र पर खोज कर रहा है

आईआईटी: हवन को कोरोना का इलाज बता रहा है

विश्व स्वास्थ्य संगठन: धुएं से इलाज पर किताब छाप रहा है

जर्मनी: यज्ञ की राख मंगवा रहा है खेती के लिए

और हम?
हम चुटकुले बना रहे हैं: `पंडित जी, जल्दी निपटाओ`

कोमल शास्त्री की खुली चुनौती:

आज से 21 दिन तक, रोज सिर्फ 5 मिनट।
एक कटोरी, एक कपूर, दो चम्मच घी, 11 बार गायत्री मंत्र।
22वें दिन इसी पोस्ट पर आकर बताना।
अगर घर में शांति, नींद, सेहत में फर्क ना पड़े तो कहना `कोमल झूठी है`

डर लगता है आजमाने में? ...

तो पहले सबूत पढ़ लो। ऊपर 12 लिखे हैं। श्लोक भी है, प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी है।
अब तुम तय करो: 4000 साल का ज्ञान सही या 40 साल की भागदौड़ वाली जिंदगी?

इस पोस्ट को फैलाओ।...
हो सकता है किसी की नींद की गोली छूट जाए। किसी का तनाव खत्म हो जाए। किसी के घर का झगड़ा बंद हो जाए।
पुण्य भी मिलेगा।

सनातन को अंधविश्वास मत मानो। सनातन को विज्ञान जानो।
*क्योंकि जानोगे तो मानोगे अपने आप🚩🚩🚩

तुम्हारी बहन, कोमल शास्त्री
`घर-घर यज्ञ, घर-घर विज्ञान`

#यज्ञके12प्रमाण #वैदिकविज्ञान #सनातनविज्ञान #आईआईटीसेवेदतक # संजय सिंह राठौर

09/05/2026
03/05/2026

देश में एक ऐसा वर्ग बन गया है जो कि #संस्कृत भाषा से तो शून्य हैं परंतु उनकी छद्म धारणा यह बन गयी है कि संस्कृत भाषा में जो कुछ भी लिखा है वे सब पूजा पाठ के मंत्र ही होंगे जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है।

देखते हैं -

*"चतुरस्रं मण्डलं चिकीर्षन्न् अक्षयार्धं मध्यात्प्राचीमभ्यापातयेत्।*
*यदतिशिष्यते तस्य सह तृतीयेन मण्डलं परिलिखेत्।"*

बौधायन ने उक्त श्लोक को लिखा है !
इसका अर्थ है -

यदि वर्ग की भुजा 2a हो
तो वृत्त की त्रिज्या r = [a+1/3(√2a – a)] = [1+1/3(√2 – 1)] a
ये क्या है ?

अरे ये तो कोई गणित या विज्ञान का सूत्र लगता है

शायद ईसा के जन्म से पूर्व पिंगल के छंद शास्त्र में एक श्लोक प्रकट हुआ था।हालायुध ने अपने ग्रंथ मृतसंजीवनी मे , जो पिंगल के छन्द शास्त्र पर भाष्य है ,
इस श्लोक का उल्लेख किया है -

*परे पूर्णमिति।*
*उपरिष्टादेकं चतुरस्रकोष्ठं लिखित्वा तस्याधस्तात् उभयतोर्धनिष्क्रान्तं कोष्ठद्वयं लिखेत्।*
*तस्याप्यधस्तात् त्रयं तस्याप्यधस्तात् चतुष्टयं यावदभिमतं स्थानमिति मेरुप्रस्तारः।*
*तस्य प्रथमे कोष्ठे एकसंख्यां व्यवस्थाप्य लक्षणमिदं प्रवर्तयेत्।*
*तत्र परे कोष्ठे यत् वृत्तसंख्याजातं तत् पूर्वकोष्ठयोः पूर्णं निवेशयेत्।*

शायद ही किसी आधुनिक शिक्षा में maths मे B. Sc. किये हुए भारतीय छात्र ने इसका नाम भी सुना हो , जबकि यह "मेरु प्रस्तार" है।
परंतु जब ये पाश्चात्य जगत से "पास्कल त्रिभुज" के नाम से भारत आया तो उन कथित सेकुलर भारतीयों को शर्म इस बात पर आने लगी कि भारत में ऐसे सिद्धांत क्यों नहीं दिये जाते।


*"चतुराधिकं शतमष्टगुणं द्वाषष्टिस्तथा सहस्राणाम्।*
*अयुतद्वयस्य विष्कम्भस्यासन्नो वृत्तपरिणाहः॥"*

ये भी कोई पूजा का मंत्र ही लगता है लेकिन ये किसी गोले के व्यास व परिध का अनुपात है। जब पाश्चात्य जगत से ये आया तो संक्षिप्त रुप लेकर आया ऐसा π जिसे 22/7 के रुप में डिकोड किया जाता है।

उक्त श्लोक को डिकोड करेंगे अंकों में तो कुछ इस तरह होगा-
(१०० + ४) * ८ + ६२०००/२०००० = ३.१४१६

*ऋगवेद में π का मान ३२ अंक तक शुद्ध है।*

*गोपीभाग्य मधुव्रातः श्रुंगशोदधि संधिगः |*
*खलजीवितखाताव गलहाला रसंधरः ||*

इस श्लोक को डीकोड करने पर ३२ अंको तक π का मान 3.1415926535897932384626433832792… आता है।


#चक्रीय_चतुर्भुज का क्षेत्रफल:

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त के गणिताध्याय के क्षेत्रव्यवहार के श्लोक १२.२१ में निम्नलिखित श्लोक वर्णित है-

*स्थूल-फलम् त्रि-चतुर्-भुज-बाहु-प्रतिबाहु-योग-दल-घातस् ।*
*भुज-योग-अर्ध-चतुष्टय-भुज-ऊन-घातात् पदम् सूक्ष्मम् ॥*

अर्थ:

त्रिभुज और चतुर्भुज का स्थूल (लगभग) क्षेत्रफल उसकी आमने-सामने की भुजाओं के योग के आधे के गुणनफल के बराबर होता है तथा सूक्ष्म (exact) क्षेत्रफल भुजाओं के योग के आधे में से भुजाओं की लम्बाई क्रमशः घटाकर और उनका गुणा करके वर्गमूल लेने से प्राप्त होता है।

#ब्रह्मगुप्त_प्रमेय:

चक्रीय चतुर्भुज के विकर्ण यदि लम्बवत हों तो उनके कटान बिन्दु से किसी भुजा पर डाला गया लम्ब सामने की भुजा को समद्विभाजित करता है।

ब्रह्मगुप्त ने श्लोक में कुछ इस प्रकार अभिव्यक्त किया है-

*त्रि-भ्जे भुजौ तु भूमिस् तद्-लम्बस् लम्बक-अधरम् खण्डम् ।*
*ऊर्ध्वम् अवलम्ब-खण्डम् लम्बक-योग-अर्धम् अधर-ऊनम् ॥*
(ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त, गणिताध्याय, क्षेत्रव्यवहार १२.३१)


#वर्ग_समीकरण का व्यापक सूत्र:

ब्रह्मगुप्त का सूत्र इस प्रकार है-

*वर्गचतुर्गुणितानां रुपाणां मध्यवर्गसहितानाम् ।*
*मूलं मध्येनोनं वर्गद्विगुणोद्धृतं मध्यः ॥*
ब्राह्मस्फुट-सिद्धांत - 18.44

अर्थात :

व्यक्त रुप (c) के साथ अव्यक्त वर्ग के चतुर्गुणित गुणांक (4ac) को अव्यक्त मध्य के गुणांक के वर्ग (b²) से सहित करें या जोड़ें। इसका वर्गमूल प्राप्त करें तथा इसमें से मध्य अर्थात b को घटावें।
पुनः इस संख्या को अज्ञात ञ वर्ग के गुणांक (a) के द्विगुणित संख्या से भाग देवें।
प्राप्त संख्या ही अज्ञात "त्र" राशि का मान है।

श्रीधराचार्य ने इस बहुमूल्य सूत्र को भास्कराचार्य का नाम लेकर अविकल रुप से उद्धृत किया —

*चतुराहतवर्गसमैः रुपैः पक्षद्वयं गुणयेत् ।*
*अव्यक्तवर्गरूपैर्युक्तौ पक्षौ ततो मूलम् ॥* -- भास्करीय बीजगणित, अव्यक्त-वर्गादि-समीकरण, पृ. - 221

अर्थात :-

प्रथम अव्यक्त वर्ग के चतुर्गुणित रूप या गुणांक (4a) से दोनों पक्षों के गुणांको को गुणित करके द्वितीय अव्यक्त गुणांक (b) के वर्गतुल्य रूप दोनों पक्षों में जोड़ें। पुनः द्वितीय पक्ष का वर्गमूल प्राप्त करें।

#आर्यभट्ट की ज्या (Sine) सारणी:

आर्यभटीय का निम्नांकित श्लोक ही आर्यभट की ज्या-सारणी को निरूपित करता है:

*मखि भखि फखि धखि णखि ञखि ङखि हस्झ स्ककि किष्ग श्घकि किघ्व ।*
*घ्लकि किग्र हक्य धकि किच स्ग झश ङ्व क्ल प्त फ छ कला-अर्ध-ज्यास् ॥*

#माधव की ज्या सारणी:

निम्नांकित श्लोक में माधव की ज्या सारणी दिखायी गयी है। जो चन्द्रकान्त राजू द्वारा लिखित *'कल्चरल फाउण्डेशन्स आफ मैथमेटिक्स'* नामक पुस्तक से लिया गया है।

*श्रेष्ठं नाम वरिष्ठानां हिमाद्रिर्वेदभावनः।*
*तपनो भानुसूक्तज्ञो मध्यमं विद्धि दोहनं।।*
*धिगाज्यो नाशनं कष्टं छत्रभोगाशयाम्बिका।*
*म्रिगाहारो नरेशोऽयं वीरोरनजयोत्सुकः।।*
*मूलं विशुद्धं नालस्य गानेषु विरला नराः।*
*अशुद्धिगुप्ताचोरश्रीः शंकुकर्णो नगेश्वरः।।*
*तनुजो गर्भजो मित्रं श्रीमानत्र सुखी सखे!।*
*शशी रात्रौ हिमाहारो वेगल्पः पथि सिन्धुरः।।*
*छायालयो गजो नीलो निर्मलो नास्ति सत्कुले।*
*रात्रौ दर्पणमभ्राङ्गं नागस्तुङ्गनखो बली।।*
*धीरो युवा कथालोलः पूज्यो नारीजरैर्भगः।*
*कन्यागारे नागवल्ली देवो विश्वस्थली भृगुः।।*
*तत्परादिकलान्तास्तु महाज्या माधवोदिताः।*
*स्वस्वपूर्वविशुद्धे तु शिष्टास्तत्खण्डमौर्विकाः।।*
(२.९.५)


#संख्या_रेखा की परिकल्पना (कॉन्सेप्ट्)

*"एकप्रभृत्यापरार्धसंख्यास्वरूपपरिज्ञानाय रेखाध्यारोपणं कृत्वा एकेयं रेखा दशेयं, शतेयं, सहस्रेयं इति ग्राहयति, अवगमयति, संख्यास्वरूम, केवलं, न तु संख्याया: रेखातत्त्वमेव।"*
Brhadaranyaka Aankarabhasya (4.4.25)

जिसका अर्थ है-

1 unit, 10 units, 100 units, 1000 units etc. up to parardha can be located in a number line. Now by using the number line one can do operations like addition, subtraction and so on.

ये तो कुछ नमूना हैं , जो ये दर्शाने के लिये दिया गया है कि संस्कृत ग्रंथो में केवल पूजा पाठ या आरती के मंत्र नहीं है बल्कि तमाम विज्ञान भरा पड़ा है।

दुर्भाग्य से कालांतर में व विदेशी आक्रांताओं के चलते संस्कृत का ह्रास होने के कारण हमारे पूर्वजों के ज्ञान का भावी पीढ़ी द्वारा विस्तार नहीं हो पाया और बहुत से ग्रंथ आक्रांताओं द्वारा नष्ट भ्रष्ट कर दिए गए ।
साभार --
*वन्दे संस्कृत मातरम्*

20/04/2026

एक फिजिक्स के प्रोफेसर ने कक्षा 6 से 12 NCERT की हिस्ट्री बुक्स के अध्ययन का निश्चय किया और उसने पाया कि लगभग 110 बातें ऐसी हैं जो संदिग्ध हैं...
NCERT की किताब में लिखा है कि दो सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्लतुतमिश ने वो मीनार बनवाया था। जिसे आज कुतुब मीनार कहा जाता है।
इस पर प्रोफेसर साहब ने RTI लगाया कि NCERT ने इस तथ्य को कहाँ से सत्यापित किया है? सत्यापित करने वाले लोग कौन थे?
इस पर NCERT की तरफ से उत्तर आया है कि, विभाग के पास कोई सत्यापित प्रति उपलब्ध नही है।
इस पुस्तक को प्रोफेसर मृणाल मिरी ने अनुमोदित किया था, जो नेशनल मोनिटरिंग कमेटी का हेड था।
मृणाल मीरी शिलांग का एक ईसाई है जिसे कांग्रेस ने 12 सालों तक राज्यसभा में नॉमिनेट किया था कांग्रेस राज के दौरान यह कई मलाईदार पदों पर था और कम्युनिस्ट चर्च के गठजोड़ से इसने भारतीय इतिहास में कई झूठे तथ्य जोड़ें जो आज भी बच्चों को पढ़ाएं जाते हैं जिसका कोई सुबूत किसी के पास नहीं है।

सोशल मीडिया पर दिन-रात, आठो प्रहर Narendra Modi से सवाल करने वाले #बौद्धिकों ने कभी National Council of Educational Research and Training - NCERT से सवाल किया? जीवन में कभी स्वयं #न्यायपालिका में संघर्ष किया?
पढ़िए! गुनिए!
एक फिजिक्स के प्रोफेसर ने कक्षा 6 से 12 NCERT की हिस्ट्री बुक्स के अध्ययन का निश्चय किया और उसने पाया कि लगभग 110 बातें ऐसी हैं जो संदिग्ध हैं...

NCERT की किताब में लिखा है कि दो सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्लतुतमिश ने वो मीनार बनवाया था। जिसे आज कुतुब मीनार कहा जाता है।

इस पर प्रोफेसर साहब ने RTI लगाया कि NCERT ने इस तथ्य को कहाँ से सत्यापित किया है? सत्यापित करने वाले लोग कौन थे?

इस पर NCERT की तरफ से उत्तर आया है कि, विभाग के पास कोई सत्यापित प्रति उपलब्ध नही है।

इस पुस्तक को प्रोफेसर मृणाल मिरी ने अनुमोदित किया था, जो नेशनल मोनिटरिंग कमेटी का हेड था।

मृणाल मीरी शिलांग का एक ईसाई है जिसे कांग्रेस ने 12 सालों तक राज्यसभा में नॉमिनेट किया था कांग्रेस राज के दौरान यह कई मलाईदार पदों पर था और कम्युनिस्ट चर्च के गठजोड़ से इसने भारतीय इतिहास में कई झूठे तथ्य जोड़ें जो आज भी बच्चों को पढ़ाएं जाते हैं जिसका कोई सुबूत किसी के पास नहीं है।

जैसे कक्षा 6, सामाजिक विज्ञान के पृष्ठ 46 पर ऋग्वेद के आधार पर भारत के बारे में लिखा है कि "आर्यों द्वारा कुछ लड़ाइयां मवेशी और जलस्रोतों की प्राप्ति के लिए लड़ी जाती थी। कुछ लड़ाइयां मनुष्यों को बंदी बनाकर बेचने खरीदने के लिए भी लड़ी जाती थीं।"

स्पष्ट है कि किताब लिखने वाला यह साबित करना चाहता है कि भारत में भी गुलाम प्रथा थी और मनुष्यों को खरीदने बेचने की जो बातें बाइबल और कुरान में हैं वे कोई नई नहीं हैं, बल्कि वैसा ही अमानवीय व्यवहार भारत में भी होता था।

ऐसे ही वे आगे लिखते हैं "युद्ध में जीते गये धन का एक बड़ा हिस्सा सरदार और पुरोहित रख लेते थे, शेष जनता में बांट दिया जाता था।" यहां भी मुहम्मद के गजवों को जस्टिफाई करने की भूमिका बनाई गई है।

आगे एक जगह लिखा है "पुरोहित यज्ञ करते थे और अग्नि में घी अन्न के साथ कभी कभी जानवरों की भी आहुति दी जाती थी।"

आगे पृष्ठ 60 पर लिखा है "खेती की कमरतोड़ मेहनत के लिए दास और दासी को उपयोग में लाया जाता था।"

तब उस प्रोफेसर ने पहले तो स्वयं अध्ययन किया, मेगस्थनीज की इंडिका आदि के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि ये सब मनगढ़ंत लिखा जा रहा है, तब उन्होंने NCERT में RTI डाली कि इन बातों का आधार क्या है? आप हिस्ट्री लिख रहे हैं, रेफरेंस कहाँ हैं? ऋग्वेद की सम्बंधित ऋचाएं, अनुवाद बताया जाए और यदि नहीं है तो खंडन या सुधार किया जाए।

जानकर आश्चर्य होगा कि NCERT ने सभी 110 प्रश्नों का एक ही जवाब दिया कि हमारे पास इसका कोई प्रूफ नहीं है। इसके अलावा जवाब टालने और लटकाने का रवैया रखा। कई वर्ष ऐसे ही बीत गए। हारकर वे पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में गये कि NCERT हमें इनका जवाब नहीं दे रही।

कोर्ट ने पिटीशन स्वीकार कर लिया और NCERT को जवाब देने के लिए कहा। तब NCERT ने कहा कि हमारी सभी पुस्तकों का लेखन जेएनयू के हिस्ट्री के प्रोफेसर ने किया है और हमने उन्हें जवाब के लिए कह दिया है। लगभग एक वर्ष बाद जेएनयू के लेखकों ने जवाब दिया कि हमने इन बातों के लिए ऋग्वेद के अनुवाद का सहारा लिया है।

ऋग्वेद में इंद्र को एक योद्धा बताया गया है और उसमें आये नरजित शब्द से यह साबित होता है कि वे लूटपाट करते थे और मनुष्यों को गुलाम बनाते थे।

इस पर इस प्रोफेसर ने संस्कृत के जानकारों को वे मंत्र बताए कि क्या इनका यही अर्थ होता है जो जेएनयू के प्रोफेसर ने किया है...

संस्कृत के विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि जेएनयू वालों का अर्थ मनमाना, कहीं कहीं तो मूल कथ्य से बिल्कुल उलटा है। इस पर कोर्ट ने इन्हें पूछा कि क्या आप संस्कृत जानते हैं? आपने यह अनुवाद कहाँ से उठाया?

तो जेएनयू के कथित इतिहासकारों ने कहा कि वे संस्कृत का स भी नहीं जानते, उन्होंने एक बहुत पुराने अंग्रेज लेखक के ऋग्वेद के अनुवाद का इस्तेमाल किया है।

कोर्ट: "और जो आपने लिखा है कि लूट के माल को ब्राह्मण आदि आपस में बांट लेते थे, उसका आधार क्या है?"

जेएनयू: "चूंकि ऋग्वेद में अग्नि का वर्णन है और अग्नि को पुरोहित कहा गया है तो इसका अर्थ यही है कि जो जो अग्नि को समर्पित किया जा रहा है मतलब पुरोहित आपस में बांट रहे हैं।"

अब जेएनयू के इतिहासकारों और NCERT के इन तर्कों पर माथा पीटने के सिवाय कोई चारा नहीं है और वे शायद यही चाहते हैं कि हम माथा पीटते रहें...

NCERT आगे कक्षा 11 की हिस्ट्री में लिखती हैं "गुलामी प्रथा यूरोप की एक सच्चाई थी और ईसा की चतुर्थ शताब्दी में जबकि रोमन साम्राज्य का राजधर्म भी ईसाई था, गुलामों के सुधार पर कुछ खास नहीं कर सका।"

यहां NCERT के लिखने के तरीके से छात्र यह समझते होंगे कि ईसाई धर्म गुलामी के खिलाफ है। जबकि सच्चाई यह है कि एक चौथाई बाइबल इन्हीं बातों से भरी हुई है कि गुलाम कैसे बनाने, उनके साथ कितना यौन व्यवहार करना, उन्हें कब कब मार सकते हैं, वगैरह वगैरह।

सच्चाई यह है कि NCERT के 2006 के पाठ्यक्रम का एक मात्र उद्देश्य था हिन्दू धर्म को जबरदस्ती बदनाम करना, यानि जो नहीं है उसे भी हिंदुओं से जोड़कर प्रस्तुत करना और ईसाइयों की बुराइयों पर पर्दा डालकर भारत में उसके प्रचार के अनुकूल वातावरण बनाना।

सोनिया गांधी की तत्कालीन मंडली ने पूरी साजिश कर उक्त पाठ्यक्रम की रचना की थी और आज विगत 16 वर्ष से वही पुस्तकें चल रही हैं, एक अक्षर तक नहीं बदला गया।

और हां, उन प्रोफेसर का नाम आदरणीय नीरज अत्रि (Neeraj Atri) है, जिन्होंने कोर्ट में यह पिटीशन डाली थी, वे यूट्यूब पर हैं।

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11/11/2024

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये
उसमें *ENO* डालिये

फिर *भटूरे* से फूले पेट को
पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये

*जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य*
*आप कभी नहीं समझ पायेंगे*

*पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को
*जीभ* से चाटकर *कैल्शियम* की
कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी
*लेकिन*
इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं
*विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!☺️

*पढ़ाई* का *तनाव* हमने
*पेन्सिल* का पिछला हिस्सा
चबाकर मिटाया था ...!!!😀

*पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती*
और *मोरपंख* रखने से हम
*होशियार* हो जाएंगे ...
ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था. 😀

*कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां*
जमाने का *विन्यास* हमारा
*रचनात्मक कौशल* था ...!!!☺️🙏🏻

हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते*
तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना
अपने जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!☺️

*माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की
कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई*
उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️💕
*सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के
*कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!😀

एक *दोस्त* को *साईकिल* के
बीच वाले *डंडे* पर और *दूसरे* को
*पीछे कैरियर* पर *बिठा* कर
हमने कितने रास्ते *नापें* हैं,
यह अब याद नहीं बस कुछ
*धुंधली* सी *स्मृतियां* हैं ...!!!💕

*स्कूल* में *पिटते* हुए और
*मुर्गा* बनते हमारा *ईगो*
हमें कभी *परेशान* नहीं करता था
दरअसल हम जानते ही नहीं थे
कि, *ईगो* होता क्या है❓️💕

*पिटाई* हमारे *दैनिक जीवन* की
*सहज सामान्य प्रक्रिया* थी😰😀
*पीटने वाला* और *पिटने वाला* दोनों *खुश* थे,
*पिटने वाला* इसलिए कि हम *कम पिटे*
*पीटने वाला* इसलिए *खुश* होता था
कि *हाथ साफ़* हुआ ...!!!😀

हम अपने *माता - पिता* को कभी नहीं बता पाए
कि हम उन्हें कितना *प्यार* करते हैं, क्योंकि
हमें *"आई लव यू"* कहना आता ही नहीं था ...!!!
😰😀💕
आज हम *गिरते- सम्भलते*, *संघर्ष*
करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं,
कुछ *मंजिल* पा गये हैं तो
कुछ न जाने *कहां खो* गए हैं ...!!!😰

हम दुनिया में कहीं भी हों
लेकिन यह सच है,
हमें *हकीकतों* ने *पाला* है,
हम सच की दुनियां में थे ...!!!
😰
*कपड़ों* को *सिलवटों* से बचाए रखना
और *रिश्तों* को *औपचारिकता* से
बनाए रखना हमें कभी आया ही नहीं ...
इस मामले में हम सदा *मूर्ख* ही रहे ...!!!
😰
अपना अपना *प्रारब्ध* झेलते हुए
हम आज भी *ख्वाब* बुन रहे हैं,
शायद *ख्वाब बुनना* ही
हमें *जिन्दा* रखे है वरना
जो *जीवन* हम *जीकर* आये हैं
उसके सामने यह *वर्तमान* कुछ भी नहीं ...!!!
😰
हम *अच्छे* थे या *बुरे* थे
पर हम सब साथ थे *काश*
वो समय फिर लौट आए ...!!!
😰😰
"एक बार फिर अपने *बचपन* के *पन्नों*
को पलटिये, सच में फिर से जी उठेंगे”...💕

और अंत में ...

हमारे *पिताजी* के समय में *दादाजी* गाते थे ...

*मेरा नाम करेगा रोशन*
*जग में मेरा राज दुलारा*💕

हमारे *ज़माने* में हमने गाया ...

*पापा कहते है बड़ा नाम करेगा*💕

अब *हमारे बच्चे* गा रहे हैं …

*बापू सेहत के लिए ...*
*तू तो हानिकारक है*। 😰😰

*सही* में हम
*कहाँ से कहाँ* आ गए ...???😰

एक बार मुड़ कर देखिये ...
और
मुस्करा दीजिए
क्यों कि
यह एक सत्य है आजकल शिक्षक बच्चों को कुछ बोले तो बच्चों का ईगो हर्ट हो जाता है उस से ज्यादा तो माता पिता का हर्ट हो जाता है l क्या बेहूदगी में जी रहे है आजकल के माता पिता
*Change Is Part Of Life.*
*Accept It Gracefully* 💓😌💓

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