10/06/2026
ट्रंप चचा के टेबल पर सिर्फ हमारी विदेश नीतियाँ ही तय नहीं हो रहीं, बल्कि हमारी घरेलू नीतियों का निर्धारण भी व्हाइट हाउस में हो रहा है। ईरान युद्ध में हमने हर वह काम किया, जो अमेरिका ने कहा। कुछ काम अपनी ओर से खरखाहीं में भी किया, ताकि ट्रंप चचा खुश हों। ठकुरसुहाती उतने भर पर नहीं रुकी हुई है। हमारी सरकार ट्रंप चचा का सहलाने के चक्कर में अपने देशवासियों का ही तेल निकालने में जुटी हुई है। कैसे? इसके लिए आगे तभी पढ़िये, जब दिमाग नयी बातें और नये दृष्टिकोण को स्वीकारने में सक्षम बचा हुआ हो। यदि आपके लिए कोई व्यक्ति या कोई विचारधारा या कोई पार्टी देश से ऊपर है, आपको आगे नहीं पढ़ने की सलाह दी जाती है।
अभी देश में एक बड़ा मुद्दा है इथेनॉल। नहीं है तो इसे होना चाहिए। समझने में आसानी के लिए पहले कुछ फैक्ट्स:-
1:- पूरे देश में ई20 अनिवार्य हो चुका है। ई20 का मतलब तेल में 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल। एक्सपी95 और पावर95 जैसे महँगे ऑप्शंस में भी 20% इथेनॉल है। इथेनॉल नहीं चाहिए तो एकमात्र विकल्प 100 ऑक्टेन वाला पेट्रोल (जैसे एक्सपी100) है, जो बहुत कम उपलब्ध है और 150-160 रुपये लीटर है।
2:- सरकार ने ई22, ई25, ई27 और ई30 के मानक जारी कर दिये हैं। अभी कुछ पेट्रोल पंपों को कहा गया है कि वे ई20 के साथ ये विकल्प भी रखें।
3:- सरकार ने ई85 लॉन्च कर दिया है। इसमें पेट्रोल बस 15% है। बाकी 85% इथेनॉल है। इस साल के अंत तक 500 पंप और अगले साल के अंत तक 5,000 पेट्रोल पंप पर यह उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसका दाम नॉर्मल पेट्रोल (मने 20% इथेनॉल वाले) से 20 रुपये कम है।
4:- सरकार ने डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की बात साफ कर दी है। पहले 5% की बात थी, फिर 10% की होने लगी, अब 15% की बात चल रही है। मतलब जैसे अभी नॉर्मल पेट्रोल में 20 इथेनॉल है, वैसे ही नॉर्मल डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिला रहेगा।
5:- अभी तक बाजार में जो कारें या बाइक बिक रही हैं, उनमें ई20 से ऊपर का कोई भी ऑप्शन नहीं डाल सकते। 20% से ऊपर इथेनॉल इंजन नहीं झेल पायेगा। आगे इस तरह की कारें-बाइकें आ सकती हैं। हीरो ने स्प्लेंडर का और मारुति ने वैगनआर का फ्लेक्स इंजन अभी अनवील किया है। हो सकता है 1-2 महीने में ये शोरूम पर दिखने लगें। हो सकता है आगे और भी मॉडल आ जायें। इनमें ई20 से लेकर ई100 तक कुछ भी डाल सकते हैं।
सरकार ने देश भर में ई20 पेट्रोल को अनिवार्य करने की समयसीमा 2030 तय की थी। यह एक अघोषित नियम है कि सरकारी समयसीमा हमेशा आगे खिसकती है। इथेनॉल के मामले में यह परिपाटी चमत्कार की तरह टूट गयी। सरकार ने समयसीमा से 5 साल पहले 2025 में ही यह काम कर लिया। मजेदार बात ये है कि भारत ऐसा अकेला देश है, जिसने पूरे देश में ई20 को अनिवार्य कर दिया है। दुनिया के कई देश पेट्रोल में इथेनॉल मिला रहे हैं, लेकिन कहीं भी मिनिमम 20% इथेनॉल का कैप नहीं है। ग्लोबल स्टैंडर्ड ई10 का है। इससे अधिक ब्लेंड वाले पेट्रोल भी हैं, लेकिन ऑप्शनल हैं, मैंडेटरी नहीं। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका जैसे विकसित देशों में कैप 10% इथेनॉल का है। इथेनॉल ब्लेंड में ब्राजील सबसे आगे था, लेकिन वहाँ भी कैप 18% का है। इससे ऊपर ई27 से ई85 तक ऑप्शनल है। मतलब कम से कम 20% की अनिवार्य ब्लेंडिंग सिर्फ और सिर्फ भारत में हो रही है। अब आगे की तैयारी है डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की। इसमें मजेदार बात है कि यह अब तक कोई देश नहीं कर रहा है। कहीं-कहीं ट्रायल चल रहे है। भारत में ट्रायल की जरूरत नहीं समझी जा रही है। सीधे 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की उसी तरह तैयारी है, जैसे पेट्रोल में 20% इथेनॉल हुआ है।
अब ये समझें हमलोग कि ये इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल है क्या चीज? इन्हें कहा जाता है बायोफ्यूल या जैव ईंधन। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन आदि कहे जाते हैं फॉसिल फ्यूल या जीवाश्म ईंधन। फॉसिल फ्यूल हजारों सालों में स्वत: बनते हैं। बायो फ्यूल की फैक्ट्री डाली जा सकती है। बायोफ्यूल अनाज, पराली आदि से बनाये जाते हैं। बायोगैस बनाने में गोबर यूज हो जाता है। भारत में अभी इथेनॉल बनाने में गन्ने के साथ मक्के और चावल के इस्तेमाल की भी मंजूरी दी जा चुकी है। आइसोब्यूटेनॉल में रॉ मटीरियल क्या होंगे, ये अभी सरकार ने अधिसूचित नहीं किया है, लेकिन संकेत से यही लग रहा है कि इथेनॉल की तरह इसमें भी गन्ने, मक्के और चावल की मंजूरी दे दी जायेगी।
यहाँ पर कुछ स्वाभाविक सवाल उठने चाहिए। क्या वजह है कि हम इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल की खपत बढ़ाने को लेकर बहुत जल्दी में हैं? जिस काम को 2030 तक करने का टारगेट लेकर हम चल रहे थे, हमने उसे 2025 में ही क्यों लागू कर दिया? न्यूनतम 20% इथेनॉल किसी ने नहीं किया, हमने क्यों किया? डीजल में आइसोब्यूटेनॉल अबतक किसी ने नहीं मिलाया, इसका रियल यूजकेस डेटा मामूली है, फिर भी हम डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल क्यों मिलाने जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब अबतक समझ आ रहे थे कि इसमें गन्नाकरी ब्रो के हित सध रहे हैं। ब्रो अपने लौंडों का बिजनेस चमकाने के लिए देश को चूल्हे में झोंक रहा है। लेकिन इस जवाब के बाद कई नये सवाल बन जाते हैं। क्या इस सरकार में गन्नाकरी ब्रो इतना ताकतवर है कि अपनी मर्जी चला सके और दूसरे मंत्रालयों के कार्यक्षेत्र में सीधा दखल डाल सके? मुझे ऐसा नहीं लगता।
जवाब हमें आगे मिलेंगे कुछ आँकड़ों में। अभी पिछले सप्ताह गन्नाकरी ब्रो और एप्सटीन फाइल वाले मंत्रीजी, दोनों ने फिर से दावा किया कि भारत में अभी जितनी खपत है, उससे ज्यादा इथेनॉल बनाने की क्षमता है। यह बात सही भी लग रही है। जबसे गन्ने के अलावा मक्के और चावल से भी इथेनॉल बनाने की मंजूरी मिली है, कई राज्यों के इथेनॉल प्लांट आफत में फंस गये हैं। कारण है कि हर राज्य से इथेनॉल खरीदने का कोटा है। जिन राज्यों पर सरकार की कृपा है, वहाँ बहुत ज्यादा उत्पादन के बाद भी पूरा इथेनॉल सरकारी कंपनियाँ खरीद ले रही हैं। कुछ राज्यों में उत्पादन बहुत ज्यादा नहीं है, फिर भी उनके प्लांट से इथेनॉल नहीं खरीदे जा रहे हैं। हमारा बिहार भी ऐसा ही एक राज्य है। मतलब सरकार की यह बात मानी जा सकती है कि हम खपत से ज्यादा इथेनॉल का उत्पादन कर रहे हैं। अब अगर यह बात सच है, फिर हम अमेरिका से इथेनॉल क्यों खरीद रहे हैं? अमेरिकी ऊर्जा मंत्रालय के आँकड़े कहते हैं कि पिछले साल हमने अमेरिका से इथेनॉल खरीदने का रिकॉर्ड बना दिया। जनवरी से सितंबर तक में ही हमने अमेरिका से 35,39,000 बैरल इथेनॉल खरीदा। मतलब हर महीने 3,93,000 बैरल। अपनी सरकार यहाँ सफाई देती है कि अमेरिका से आने वाले इथेनॉल का सिर्फ इंडस्ट्रियल यूज होता है। उसे हम पेट्रोल में नहीं मिलाते। सरकार की इस सफाई से हमारे सवाल का जवाब नहीं मिलता कि जब आप खपत से अधिक उत्पादन घर में करने का दावा कर रहे हो, फिर इंडस्ट्रियल यूज के लिए भी हम अमेरिका से इथेनॉल क्यों खरीद रहे हैं? वो भी महँगा? भारत में जो इथेनॉल बन रहा है, वह अमेरिका से सस्ता है। हमारी जितनी खपत है, उससे अधिक उत्पादन है। फिर अमेरिका से इथेनॉल खरीदना संदेहास्पद नहीं है?
अब पिछले साल फरवरी में चलते हैं। जनवरी 2025 में ट्रंप चचा के शपथ लेते ही हमारे अमृतलाल व्हाइट हाउस जाने के लिए छटपटाने लगे थे। आनन-फानन में फरवरी में अमेरिका पहुँच गये थे। ट्रंप चचा से भरपूर बेइज्जती करवाने के बाद अमृतलाल जी ने 56 इंच की छाती ठोकते हुए अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर की खरीद करने का वादा कर दिया था। अमृतलाल जी को लगा था इससे ट्रंप चचा खुश होंगे। चचा कितने खुश हुए, यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया ने देखा। लेकिन अमृतलाल की स्वामीभक्ति अप्रभावित है। हम सस्ता रूसी तेल छोड़कर महँगा अमेरिकी तेल खरीद रहे हैं। सस्ता रूसी गैस छोड़कर महँगा अमेरिकी गैस खरीद रहे हैं। हम बैंक से कर्जा लेकर इथेनॉल प्लांट लगाने वाले अपने उद्यमियों को उनके हाल पर छोड़कर अमेरिका से महँगा इथेनॉल खरीद रहे हैं। अमेरिका अभी आइसोब्यूटेनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक है। संभव है हम आगे आइसोब्यूटेनॉल भी अमेरिका से खरीदें।
भारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है, उसमें बायोफ्यूल एक बड़ा मुद्दा है। अमेरिका का दबाव है भारत ज्यादा से ज्यादा बायोफ्यूल खरीदे। अमेरिका में कृषि योग्य भूमि है 41 लाख वर्गकिलोमीटर। भारत का कुल क्षेत्रफल है 33 लाख वर्गकिलोमीटर। अमेरिका की आबादी है 35 करोड़। भारत की आबादी 150 करोड़। अमेरिका के पास खूब सारा सरप्लस अनाज है इथेनॉल-आइसोब्यूटेनॉल बनाने के लिए। भारत में इथेनॉल बनाने के लिए काफी सारा मक्का भी अमेरिका से आ रहा है। 2-4 साल पहले तक भारत मक्का एक्सपोर्ट करता था। इथेनॉल-आइसोब्यूटेनॉल बनाने में जिन फसलों का इस्तेमाल हो रहा है, तीनों पानी पीने के लिए कुख्यात हैं। हमारे पास दुनिया की करीब 20% आबादी है, लेकिन पीने-खेती करने लायक पानी सिर्फ 4%। जिस ब्राजील का उदाहरण बार-बार देते हैं उसकी आबादी है सिर्फ 22 करोड़ और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा वाटर रिसॉर्स है, करीब 12%। फिर भी उसे पानी के संकट सताने लगे हैं। भारत का क्या हो सकता है, ये जानने के लिए गूगल पर India Water Crisis सर्च कर लें।
लेकिन अमृतलाल को इन सबसे क्या! अमृतलाल वही काम करेगा, जिस काम के लिए उसे लाया और बनाया गया है। ट्रेड डील के बाद अब इथेनॉल पॉलिसी दूसरा ऐसा मुद्दा है, जिसकी तह में जाने पर मुझे राहुल गांधी की बात सही लग रही है- Our PM is compromised. गन्नाकरी ब्रो बस इस मौके का लाभ उठाकर पैसे बना रहा है। असली कलप्रिट हमारा अमृतलाल ही है।
(ट्रेड डील की बातें ऑफिशियली बाहर आने पर फिर से लिखूँगा इस विषय पर। डेढ़ किलोमीटर में लिखने के बाद भी बहुत बातें बची रह गयी हैं। इसे शेयर-कॉपी-पेस्ट करने की हमेशा की तरह खुली छूट रहेगी। विषय से बाहर की बकलोली करने या एआई से लिखवाकर स्पैम चिपकाने पर एंटरटेन करने की जगह ब्लॉक कर दिया जायेगा। पोस्ट का पोस्टर बनाया है चैटजीपीटी ब्रो ने।)