Active Teacher Creativities

Active Teacher Creativities Rajveer Singh
Assistant Teacher
Posted in
Model Primary School Bakainia Dixit
Block- Barkhera
District- Pilibhit (U.P.) Home District- Bulandshahr (U.P.)

इस बार विद्यालय में कुल नामांकन-71 है, जबकि प्रतिदिन 65 से अधिक छात्र उपस्थिति बनी हुई है। सब कुछ अच्छे से मैनेज हो जा र...
21/08/2026

इस बार विद्यालय में कुल नामांकन-71 है, जबकि प्रतिदिन 65 से अधिक छात्र उपस्थिति बनी हुई है। सब कुछ अच्छे से मैनेज हो जा रहा है। लेकिन मध्यान्ह भोजन के समय इन्हें व्यवस्थित तरीके से बिठाने में समस्या आती है। इस तरह आयताकार शेप में बिठायें तो बहुत पास-पास हो जाते हैं और बीच में एक पंक्ति और बनवाएं तो खाना सर्व करने में समस्या आती है।
लेकिन इनका समाधान भी जल्द ही निकलेगा।
अच्छा ये बताइए कि बच्चों की भोजन बैठक व्यवस्था कैसी लगी?
क्या आपके पास कोई उत्तम सुझाव है, यदि हो तो अवश्य साझा करें। धन्यवाद

21/08/2026

समस्या है तो उनका समाधान भी है...
समस्याओं को लेकर रोने से कोई फायदा नहीं, बल्कि समाधान खोजकर उसका निस्तारण करना समझदारी है।

सूरज की तरह चमकना है तो पहले उसकी तरह जलना सीखो...
21/08/2026

सूरज की तरह चमकना है तो पहले उसकी तरह जलना सीखो...

वाह रे वाह! अब ई गजब का फैशन चली गवा...सबको उनकी मनपसंद यानी स्पेशल डेट पर डिलीवरी चाहिए...प्रकृति से छेड़छाड़ करने कतई ठी...
20/08/2026

वाह रे वाह! अब ई गजब का फैशन चली गवा...
सबको उनकी मनपसंद यानी स्पेशल डेट पर डिलीवरी चाहिए...
प्रकृति से छेड़छाड़ करने कतई ठीक नहीं है, यह घातक भी सिद्ध हो सकता है...
ध्यान रहे! फैशन ज्यादा जरूरी नहीं बल्कि मां और बच्चजे का स्वास्थ्य जरूरी है..

20/08/2026

मेरे प्यारे वतन, तुझे शत शत नमन...
Dance video/ डांस वीडियो

20/08/2026

प्रधानाध्यापक के खिलाफ बच्चों व ग्रामीणों ने की नारेबाजी...
यह मामला जनपद कन्नौज के एक कम्पोजिट स्कूल का है जहाँ विद्यालय गुरगापुर के इंचार्ज प्रधानाध्यापक के खिलाफ विद्यालय के ही छात्र-छात्राओं ने जमकर नारेबाजी की। बच्चों ने स्कूल का बहिष्कार किया तथा मास्साब की गाड़ी को नहीं निकलने दिया। डीएम को बुलाने की जिद पर अड़े हुए हैं बच्चे।
क्या है पूरा मामला.. वीडियो में देखें...

अगर सच में सरकारी स्कूलों को ठीक करना है, तो एक बार यह सवाल भी पूछिये कि MDM व्यवस्था शिक्षकों के जिम्मे ही क्यों?शिक्षक...
20/08/2026

अगर सच में सरकारी स्कूलों को ठीक करना है, तो एक बार यह सवाल भी पूछिये कि MDM व्यवस्था शिक्षकों के जिम्मे ही क्यों?

शिक्षक का मूल कार्य है बच्चों को अध्यापन कराना, उनका सीखना सुनिश्चित करना और उनके भविष्य को सजाना और संवारना।

लेकिन जब शिक्षक को पढ़ाने के साथ-साथ MDM की खरीदारी, राशन, फल-सब्जी, भुगतान, हिसाब-किताब और तरह-तरह की व्यवस्थाओं में उलझा दिया जाता है, तो फिर उससे शत-प्रतिशत शिक्षण की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है?

कई बार तो महीनों तक MDM का आवंटन बहुत लेट आता है, फिर भी बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन सुचारू रूप से चलता रहे, इसलिए शिक्षक अपनी तरफ से व्यवस्था करने तक को मजबूर होते हैं।

और जब कोई कमी रह जाए तो कैमरा लेकर शिक्षक के पास पहुंचना सबसे आसान काम हो गया है आजकल। यह सोचने का विषय है, और सबसे बड़ी समस्या सिर्फ काम का बोझ नहीं है…

बल्कि MDM ने कई जगहों पर शिक्षक और प्रधान शिक्षक के बीच वह भरोसा भी कमजोर कर दिया है, जो एक अच्छे विद्यालय की सबसे बड़ी ताकत होता है।

किसी को लगता है—प्रधान शिक्षक ने क्या खरीदा?
किसी को लगता है—इतनी व्यवस्था कैसे हुई?
और कभी-कभी बिना पूरी सच्चाई जाने संदेह का माहौल भी बन जाता है।

जरा सोचिए…
जिस शिक्षक और प्रधान शिक्षक को मिलकर बच्चों का भविष्य बनाना है, अगर उनका समय और ऊर्जा एक-दूसरे पर संदेह करने में ही लग जाए तो शिक्षण कार्य कब होगा?

इसलिए बात बहुत सीधी सी है—

शिक्षकों को MDM की जिम्मेदारी से ही मुक्त कर देना चाहिए।

MDM की अन्य किसी के पास पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था होनी चाहिए।
शिक्षक को सिर्फ बच्चों की पढ़ाई और सीखने पर केंद्रित होने दीजिए।

अब आप बताइए 👇

क्या आपको भी लगता है कि MDM को शिक्षकों की जिम्मेदारी से अलग कर देना चाहिए?
क्या इससे विद्यालय में आपसी विश्वास और पढ़ाई दोनों बेहतर हो सकते हैं?

कमेंट में अपनी सच्ची राय जरूर लिखिए।

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19/08/2026

कक्षा-5 की छात्राएं श्वेता और शिवांशी की शानदार प्रस्तुति...
पापा क्यों अनजान शहर में....
बहुत ही मार्मिक गीत..

चौंकिएगा मत! यह भी सरकारी विद्यालय की ही तस्वीर हैं...हाँ, इतना जरूर है कि ये सभी तस्वीरें लगभग सात साल पुरानी हैं।लेकिन...
19/08/2026

चौंकिएगा मत! यह भी सरकारी विद्यालय की ही तस्वीर हैं...
हाँ, इतना जरूर है कि ये सभी तस्वीरें लगभग सात साल पुरानी हैं।
लेकिन साब! विद्यालय को ऐसा बनाने में कई वर्षों की मेहनत है।
यदि हम पूरे आत्मविश्वास के साथ ठान लें तो सब कुछ सम्भव है।
कोई भी सकारात्मक बदलाव एक दिन में तो नहीं लेकिन एक दिन अवश्य होता है।

18/08/2026

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