प्रीति भंडारी

प्रीति भंडारी नमस्ते! रोचक और मार्मिक कहानियों का लुत्फ़ उठाने हेतु मेरे साथ जुड़ें और कहानीओं 📖 की प्रभावशाली ✨ दुनिया में खो जाएँ।

नमस्ते! रोचक और मार्मिक कहानियों; मेरी यादों के झरोखे से निकले रोचक और मंजुल लघु-संस्मरणों; सदाबहार और नवीन पुस्तकों की समीक्षा और सारांश; प्रसिद्ध आत्मकथाओं की समीक्षा और सारांश; साहित्य, इतिहास, यात्रा इत्यादि से जुड़े विविध लेखों का लुत्फ़ उठाने हेतु मेरी वेबसाइट https://www.preetibhandari.com को एक्स्प्लोर करें।

नमस्ते! इस लघुकथा में, जंगल के राजा बब्बर शेर का गायों पर हमला करने और गायों का एकता के बल पर खुद का बचाव करने का एक रोच...
03/03/2024

नमस्ते! इस लघुकथा में, जंगल के राजा बब्बर शेर का गायों पर हमला करने और गायों का एकता के बल पर खुद का बचाव करने का एक रोचक चित्रण है। कहानी में एक बूढ़ी गाय नंदनी की समझदारी का साक्षी बनने हेतु मेरी ब्लॉग पोस्ट को एक्स्प्लोर करें।

इस लघुकथा में, जंगल के राजा बब्बर शेर का गायों पर हमला करने और गायों का एकता के बल पर खुद का बचाव करने का एक रोचक चित्.....

नमस्ते! यह लघु कथा दो चींटियों 🐜🐜, मिस्टी और मीठी, के माध्यम से मित्रता, देखभाल और करुणा जैसे विषयों का चित्रण करती है। ...
07/01/2024

नमस्ते! यह लघु कथा दो चींटियों 🐜🐜, मिस्टी और मीठी, के माध्यम से मित्रता, देखभाल और करुणा जैसे विषयों का चित्रण करती है। सर्द मौसम का एक आलसी चिंटी को सबक का साक्षी बनने हेतु मेरी ब्लॉग पोस्ट को एक्स्प्लोर करें।

यह लघु कथा दो चींटियों, मिस्टी और मीठी, के माध्यम से मित्रता, देखभाल और करुणा के विषयों पर प्रकाश डालती है। सर्द मौस.....

नमस्ते! “कफ़न” प्रेमचंद जी द्वारा रचित एक मशहूर लघु-कहानी है। जहाँ अमीर लोग गरीब को कुचल कर आराम से जीवन जी रहे हैं, वही...
31/12/2023

नमस्ते! “कफ़न” प्रेमचंद जी द्वारा रचित एक मशहूर लघु-कहानी है। जहाँ अमीर लोग गरीब को कुचल कर आराम से जीवन जी रहे हैं, वहीं गरीब अपना पेट भी नहीं भर पाते। गरीब जब पूरी ज़िंदगी बिना कपड़ों के गुजार देता है तो तब निर्दयी समाज को दया नहीं आती, परन्तु उसके मरने पर उसी समाज के लोग उसे कफ़न उड़ाने जरूर आ जाते हैं। कफ़न के माध्यम से अमीरी-गरीबी की खाई का एक मार्मिक चित्रण करती प्रेमचंद जी कृत इस कहानी की समीक्षा और सारांश 📖 का लुत्फ़ उठाने हेतु मेरी ब्लॉग पोस्ट को एक्स्प्लोर करें।

"कफ़न" प्रेमचंद जी द्वारा रचित एक मशहूर लघु-कहानी है। जहाँ अमीर लोग गरीब को कुचल कर आराम से जीवन जी रहे हैं, वहीं गरीब...

मानोबी जी की जीवनी हमारे खोखले समाज के लिए एक दर्पण है; यह दर्पण दिखता है कि समाज में अब भी किन्नरों के साथ भेदभाव हो रह...
18/06/2021

मानोबी जी की जीवनी हमारे खोखले समाज के लिए एक दर्पण है; यह दर्पण दिखता है कि समाज में अब भी किन्नरों के साथ भेदभाव हो रहा है। वे स्वतंत्र भारत में परतंत्रता की जिंदगी जी रहे हैं। जब हम दिल से "वसुधैव कुटुम्बकम्" को चरितार्थ करेंगे तब ही इस पराधीनता की बेड़ियाँ चकनाचूर होंगी...
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घर में रहें, स्वस्थ रहें!

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#किन्नर #साहित्य #हिंदी #लेखक #लेखिका

कॉलेज प्रिंसिपल के पद तक पहुँचने वाली पहली भारतीय ट्रांसजेंडर 'डॉ. मानोबी बंदोपाध्याय' की बेबाक आत्मकथा "पुरुष तन .....

रुक्मिणी का हृदय करुणा से भर गया और नेत्रों में ग्लानि छलकने लगी। वह रोते हुए भोलू के चरणों में गिर पड़ी...क्या आप इस कहा...
15/06/2021

रुक्मिणी का हृदय करुणा से भर गया और नेत्रों में ग्लानि छलकने लगी। वह रोते हुए भोलू के चरणों में गिर पड़ी...
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#कुत्ते #जानवर #गाँव #किसान #लघुकथा #कहानी #साहित्य #हिंदी #लेखक #लेखिका

इस मार्मिक कहानी में 'भोलू' नामक श्वान (डॉग) और 'आनंद' नामक बच्चे की अटूट-दोस्ती का चित्रण है। इस लघुकथा में इन दोनों स....

मैं श्री हरी विष्णु का दास राम जी की बात कहता हूँ,"अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते।जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गर...
13/06/2021

मैं श्री हरी विष्णु का दास राम जी की बात कहता हूँ,

"अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥"

अगर तुम लोगों को जाना हो, तुम जा सकते हो। मैं अपनी मातृभूमि को छोड़कर कहीं न जाऊँगा, मुआवजे में चाहे कोई मुझे सोने की इमारत ही क्यों न दे।
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घर में रहें, स्वस्थ रहें!

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#मातृभूमि #आंदोलन #पलायन #कहानी #साहित्य #हिंदी #लेखक #लेखिका

'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अपनी जन्मभूमि की रक्षा हेतु एक कस्बे के लोगों के के दृढ़ संकल्प और आंदोलन की .....

नमस्कार दोस्तों! "विश्व पर्यावरण दिवस" की आपको हार्दिक शुभकामनाएं! ⛈🌎🦚🌎🌳🌎🍃🌎☘️🌎एक सूखा जंगल : मन-वन-उपवन सब तरस रहे हैं —...
05/06/2021

नमस्कार दोस्तों!
"विश्व पर्यावरण दिवस" की आपको हार्दिक शुभकामनाएं!
⛈🌎🦚🌎🌳🌎🍃🌎☘️🌎

एक सूखा जंगल : मन-वन-उपवन सब तरस रहे हैं — लघु कथा :

एक दिन सूरज क्षितिज में छुप ही रहा था कि आसमाँ में बादलों का भवर मंडराने लगा। इस मंजुल दृश्य को देखकर पूरा वन एक स्वर में गाने लगा :

मन-वन-उपवन सब तरस रहे हैं,
अब, घन गरज कर बरस रहे हैं।
वृक्ष-नदी-पशु-पक्षी सब चहक रहे हैं,
अब, माटी की ख़ुशबू से सब महक रहे हैं।
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घर में रहें, स्वस्थ रहें!

प्रणाम!

⛈🌎🦚🌎🌳🌎🍃🌎☘️🌎
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यह लघु कथा एक सूखे जंगल को हरा-भरा करने के लिए जंगल के जीवों की एकता और उपायों का मार्मिक और प्रेरक चित्रण है। उनकी इ....

मेरी यादों के झरोखे से निकले इस लघु संस्मरण में कोरोना काल के दौरान दिल्ली से बेंगलुरु तक मेरी रेल यात्रा का एक रोचक और ...
03/06/2021

मेरी यादों के झरोखे से निकले इस लघु संस्मरण में कोरोना काल के दौरान दिल्ली से बेंगलुरु तक मेरी रेल यात्रा का एक रोचक और मार्मिक चित्रण है। मेरे साथ-साथ इस यात्रा पर चलने हेतु इस लेख पर जाएँ।

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मेरी यादों के झरोखे से निकले इस लघु संस्मरण में कोरोना काल के दौरान दिल्ली से बेंगलुरु तक रेल यात्रा का एक रोचक और म...

मेरी यादों के झरोखे से निकले इस लघु संस्मरण में देवभूमि उत्तराखंड स्थित श्री तुंगनाथ ट्रेक और मंदिर के सौंदर्य का चित्रण...
31/05/2021

मेरी यादों के झरोखे से निकले इस लघु संस्मरण में देवभूमि उत्तराखंड स्थित श्री तुंगनाथ ट्रेक और मंदिर के सौंदर्य का चित्रण है। मेरे साथ-साथ इस यात्रा का लुत्फ़ उठाने हेतु इस लेख पर जाएँ।

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मेरी यादों के झरोखे से निकले इस लघु संस्मरण में देवभूमि उत्तराखंड स्थित श्री तुंगनाथ ट्रेक और मंदिर के सौंदर्य का ...

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