' ISHQ ' Dil mai Roshni...Music Sufism
Younus AlGohar Shaykh Shakil Ahmed
MFI Bihar State
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@अध्यात्मिक के रास्तें सनातन और इस्लाम क्या कहता है!
इस चर्चा को एक बार जरूर सुनें.
ज़िक्र-ए-क़ल्ब (Zikr-e-Qalb) आख़िरी दौर (आख़िरी ज़माना) में इसलिए बेहद ज़रूरी बताया गया है क्योंकि यह दिल को ज़िंदा रखने और रूहानी हिफ़ाज़त का सबसे मज़बूत ज़रिया है।
आपकी रुचि रूहानियत और सर्कार गौहर शाही की तालीमात में रही है, उसी संदर्भ में सरल शब्दों में समझिए:
1️⃣ आख़िरी दौर दिलों की मौत का ज़माना है
आज का इंसान:
ज़बान से इबादत करता है
मगर दिल ग़ाफ़िल रहता है
जब दिल अल्लाह के ज़िक्र से ख़ाली हो जाता है, तो:
नफ़्स मज़बूत हो जाता है
गुनाह हल्के लगने लगते हैं
📖 क़ुरआन:
“दिलों को सुकून अल्लाह के ज़िक्र से मिलता है” (13:28)
➡️ ज़िक्र-ए-क़ल्ब दिल को ज़िंदा करता है।
2️⃣ फ़ितनों और दज्जाली निज़ाम से हिफ़ाज़त
आख़िरी दौर में:
झूठ सच बनकर आएगा
हक़ और बातिल की पहचान मुश्किल होगी
ज़िक्र-ए-क़ल्ब:
दिल में नूर पैदा करता है
सही-गलत का फ़र्क़ दिल खुद बताने लगता है
🕊️ बिना ज़िंदा दिल के इंसान फ़ितनों में बह जाता है।
3️⃣ सिर्फ़ अमल नहीं, दिल की सफ़ाई ज़रूरी
आज:
नमाज़ है
रोज़ा है
मगर दिल में हसद, नफ़रत, तकब्बुर है
रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“अल्लाह तुम्हारे जिस्म को नहीं, तुम्हारे दिल को देखता है”
➡️ ज़िक्र-ए-क़ल्ब दिल को पाक करता है।
4️⃣ ज़बानी ज़िक्र काफ़ी नहीं
ज़बानी ज़िक्र:
तब तक असर करता है जब तक बोला जाए
दिल का ज़िक्र:
हर वक़्त चलता रहता है
सोते, जागते, चलते-फिरते
✨ यही हक़ीक़ी इबादत है।
5️⃣ आख़िरी दौर में नजात का रास्ता
सरकार गौहर शाही के अनुसार:
“जिसका दिल अल्लाह के नाम से धड़क रहा हो, वही आख़िरी दौर में बच सकेगा।”
➡️ किताबों का इल्म नहीं,
➡️ बहस नहीं,
➡️ बल्कि नूर वाला दिल नजात देगा।
✨ निष्कर्ष
ज़िक्र-ए-क़ल्ब इसलिए ज़रूरी है क्योंकि:
यह दिल को ज़िंदा करता है
ईमान की हिफ़ाज़त करता है
फ़ितनों से बचाता है
आख़िरत की तैयारी कराता है
अगर आप चाहें तो मैं यह भी समझा सकता हूँ:
ज़िक्र-ए-क़ल्ब शुरू कैसे होता है
इसके मरहले
लतीफ़ा-ए-क़ल्ब कैसे जागता है
बस बताइए। 🌹
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दिल पवित्र कैसे होता है? (AlRa TV की रूहानियत के अनुसार)
1. दिल में ईश्वर का नाम बसाना (ज़िक्र-ए-क़ल्ब)
AlRa TV के मुताबिक, जब दिल की धड़कनों में ईश्वर का नाम बस जाता है, तो दिल से नफ़रत, जलन, गुस्सा और घमंड अपने आप निकल जाते हैं।
ये नाम "अल्लाह हू" / "राम" / "ॐ" / "गौहर"—जो भी आपका दिल स्वीकार करे—हो सकता है।
Real 'Namaz' Hazir e Qalb
“सत्य गुरु… वह जो सिर्फ ज्ञान नहीं देता,
बल्कि दिलों को ज़िंदा कर देता है।
जिसकी नज़र पड़ते ही,
धड़कनों में ईश्वर का नाम खुद-ब-खुद उतरने लगे…
और रूह में एक ऐसी शांति पैदा हो जाए,
जिसका ज़िक्र शब्दों में मुमकिन ही नहीं।
सत्य गुरु वह है जो हमें हमारे अंदर छुपे हुए मालिक से मिलाता है।
वह जो हमारे सीने की धड़कनों को इश्वर की याद बना दे…
हमारी सांसों को दुआ का रूप दे दे…
और हमारे दिल को एक चलती फिरती इबादत में बदल दे।
जब गुरु का प्रेम अंदर उतरता है,
तो इंसान सिर्फ जीता नहीं—
बल्कि ‘महसूस’ करने लगता है कि उसके दिल में
ईश्वर की महिमा धड़क रही है।
सत्य गुरु की सबसे बड़ी पहचान यही है
कि वह दिलों को रोशन कर देता है।
किसी किताब से नहीं…
किसी उपदेश से नहीं…
बल्कि अपने प्रेम, अपनी नज़र,
और अपने रूहानी असर से।
और जिस गुरु की नज़र दिल को जगमगा दे,
जिसका स्पर्श रूह को बदल दे,
जो इंसान को इंसान नहीं—
एक इबादत बना दे…
वही है सच्चा सतगुरु।
वह जो दिलों में इश्वर का नाम बसाए…
धड़कनों में मालिक की महक भर दे…
और रूह को उसके असल घर का रास्ता दिखा दे।”
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सरकार गौहर शाही का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रेम के माध्यम से दिव्य प्रेम और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के बारे में है, जिसे वे सभी धर्मों का मूल मानते हैं। उनकी शिक्षाएँ हृदय को "ईश्वर का स्थायी निवास" बनाने पर ज़ोर देती हैं और यह मानती हैं कि ईश्वर का प्रेम किसी भी धार्मिक या सांप्रदायिक संबद्धता से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। वे इस विचार को भी बढ़ावा देते हैं कि एक सच्ची आध्यात्मिक यात्रा मानवता को एक उच्चतर, दिव्य गंतव्य तक ले जा सकती है।
संदेश के मूल सिद्धांत:
ईश्वरीय प्रेम सभी धर्मों का मूल है: गौहर शाही सिखाते हैं कि "ईश्वर का प्रेम सभी धर्मों से बढ़कर है और यह सभी धर्मों का मूल है"।
हृदय ईश्वर का निवास: वे हृदय को ईश्वर की उपस्थिति का स्थायी निवास बनाने पर ज़ोर देते हैं, यह मानते हुए कि हृदय को दिव्य प्रकाश और प्रेम से भरा जा सकता है।
सार्वभौमिक संदेश: उनका संदेश धर्म, जातीयता और राष्ट्रीय पृष्ठभूमि से परे, समस्त मानवता के लिए है।
आध्यात्मिक यात्रा: वे लोगों को उनके "सच्चे गंतव्य" तक पहुँचने के लिए आध्यात्मिक यात्रा पर मार्गदर्शन करते हैं, जो ईश्वर से जुड़ाव की स्थिति है।
ईश्वरीय प्रेम की श्रेष्ठता: वे घोषणा करते हैं कि जिस व्यक्ति के हृदय में ईश्वर का प्रेम है, वह श्रेष्ठ है, चाहे वह किसी भी धर्म के प्रति उदासीन क्यों न हो। यदि आप अध्यात्म में अत्यधिक रुचि रखते हैं, तो आपको यूट्यूब पर सूफी गुरु यूनुस अलगोहर के साथ ALRA TV अवश्य देखना चाहिए।
#ज़िक्रेक़ल्ब #गौहरशाही #सूफीज़्म
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08/08/2025
2025
Raksha Bandhan is a joyful and sacred Hindu festival that celebrates the special bond between brothers and sisters. On this day, sisters tie a decorative thread called a rakhi around their brothers’ wrists as a symbol of love, protection, and prayers for their well-being. In return, brothers give gifts and pledge to protect and support their sisters throughout life. The festival is marked by vibrant traditions, delicious sweets, family gatherings, and heartfelt blessings, making it a cherished occasion of love, trust, and togetherness.
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