15/08/2020
•••एक सुखद बचपन का अंत •••
बात DAV के दिनों की है,
6th क्लास में हुआ करते थे,
उसी समय का बात है,
सर्दी का मौसम हल्का हल्का आ चुका था,
ये वो दौर था जब हम लोग को दिवाली और छठ की छुट्टी मिली थी ।
श्री लंका की टीम दौरे पर भारत पधारी थी,
और हमारे क्रिकेट कप्तान द्रविड़ हुआ करते थे,
उस समय राँची का वो लंबे बालों वाला लड़का आया और BAS के बैट से 183 नाबाद रहके मैच जीता गया,
फैन तो उसके उस समय भी थे जब उसने पाकिस्तान के खिलाफ 148 बनाया था लेकिन 183 वाला खास इसलिए था क्योंकि वो राँची का लड़का अब लाइमलाइट में आ चुका था और उसके उसी मैच वाले फोटो के उस समय कॉपी के कवर आने लगे थे बाज़ार में,
हम भी मम्मी दीदी से जिद्द करके वही कॉपी खरीदवाते थे,
कारण की धोनी हर उस लड़के का अपना था जो एक छोटे शहर से निकल के गया था।
उस समय के क्रिकेटर वाले बुक स्टिकर का भी यूँ क्रेज़ था की हर किताब पर धोनी सचिन सहवाग और गांगुली ही चिपकते थे,
मै धोनी के लिए ज्यादा उत्साहित रहता था और ज्यादा धोनी के स्टिकर ही रहते थे नये किताबों पर।
अब ना वो लंबे बाल रह गए,
न 183 बनाने वाला BAS का बैट रह गया,
रह गयी तो बस एक सुनहरी याद जो शायद अपने बच्चों को सुनाने लायक तो है ही की कैसे एक छोटे शहर का लड़का आया तो इस कदर छाया की सारे लोगों को अपना बना गया।
उस समय स्मार्टफोन नहीं आते थे की लोग अपने फ़ोन में वालपेपर लगाते,
उस टाइम तो बस RIM और Tata Indicom का कनेक्शन हुआ करता था जिससे हम अपने दोस्तों से पुछते थे की देखा धोनीया केतना मस्त खेला।
उस समय में धोनी का वालपेपर दिल और दिमाग में चिपकता था।
अब आधिकारिक रूप से अपना बचपन खत्म हो गया और खुशी इस बात की रहेगी की हमने अपने बचपन को खुल के बिताया और जिया है।
कैसे विश्वास करे की धोनी अब नहीं खेलेगा ब्लू जर्सी में।
कौन माँ बाप अपने बच्चों को टोकेगा खेलने के लिए और बोलेगा की खेल के धोनी बनेगा तुम??
आखिर अभी बहुत क्रिकेट बचा था माही.....
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