18/11/2025
मदरसा इस्लामिया अंजुमन मुफ़ीदुल इस्लाम, लोधी कटरा पटना सिटी के बच्चों को इस वर्ष हरिहर मेला सोनपुर घूमने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ। इस शैक्षणिक भ्रमण ने बच्चों के अंदर उत्साह और नई जानकारियाँ हासिल करने की प्रेरणा पैदा की।
मेले में पहुँचने के बाद बच्चों की मुलाकात बिहार स्टेट डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की सीनियर हेड सुंबुल अफरोज़ मैम से हुई। बच्चों ने उनसे आपदा प्रबंधन, सुरक्षा उपायों और जागरूकता से जुड़ी बातें सीखीं, जिससे वे काफी उत्साहित और ख़ुश हुए।
इसके बाद मेले में आयोजित कला प्रतियोगिता में बच्चों ने बड़ी दिलचस्पी के साथ भाग लिया और अपनी-अपनी कला, रचनात्मकता और प्रतिभाओं का सुंदर प्रदर्शन किया।
इस पूरे कार्यक्रम में मदरसा के
हेड मास्टर: मोहम्मद रागिब हुसैन,
नोडल टीचर: मोहम्मद इमरान,
असिस्टेंट टीचर: मोहम्मद असरार आलम
पूरी ज़िम्मेदारी और सहयोग के साथ बच्चों के साथ मौजूद रहे और कार्यक्रम को सफल बनाया।
11/11/2025
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर मदरसा इस्लामिया अंजुमन मोफ़िदुल इस्लाम, पटना में कार्यक्रम
दिनांक 11 नवम्बर 2025 को मदरसा इस्लामिया अंजुमन मोफ़िदुल इस्लाम, पटना में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। यह दिन भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई, जिसके बाद बच्चों ने एक से बढ़कर एक भाषण, नात, और कविताएँ प्रस्तुत कीं। विद्यार्थियों ने उर्दू और हिंदी – दोनों भाषाओं में अपनी प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया।
हिंदी भाषण में बच्चों ने मौलाना आज़ाद के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया और बताया कि शिक्षा ही राष्ट्र की सच्ची प्रगति का मार्ग है। उर्दू में पेश की गई नातों ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। वहीं, कविताओं ने बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास को उजागर किया।
मदरसे के शिक्षकों ने भी बच्चों का हौसला बढ़ाया और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।
यह दिन न सिर्फ शिक्षा के महत्व को याद दिलाने वाला था, बल्कि बच्चों में नए उत्साह और प्रेरणा का संचार करने वाला भी बना।
21/09/2025
विश्व अल्ज़ाइमर दिवस (World Alzheimer’s Day) के अवसर पर कार्यक्रम
दिनांक 21 सितम्बर 2025 को मदरसा इस्लामिया अंजुमन मुफ़ीदुल इस्लाम में विश्व अल्ज़ाइमर दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों को अल्ज़ाइमर रोग के बारे में जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि –
अल्ज़ाइमर रोग क्या है: यह एक मानसिक रोग है जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त कमज़ोर होने लगती है, सोचने-समझने की शक्ति घटने लगती है और व्यक्ति रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम भी भूलने लगता है।
इसके प्रमुख लक्षण:
1. बार-बार बातें भूल जाना।
2. समय और जगह की पहचान खो देना।
3. परिचित चेहरों और नामों को याद न रख पाना।
4. निर्णय लेने की क्षमता कम होना।
5. बार-बार एक ही सवाल पूछना या एक ही बात दोहराना।
इसके बाद बच्चों को यह भी बताया गया कि इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है:
हमेशा मानसिक रूप से सक्रिय रहें, पढ़ाई-लिखाई और नए काम करने की आदत डालें।
पौष्टिक भोजन करें जिसमें हरी सब्ज़ियाँ, फल और मेवे शामिल हों।
शारीरिक व्यायाम और खेल-कूद करते रहें ताकि दिमाग़ और शरीर दोनों स्वस्थ रहें।
नशे और हानिकारक आदतों से बचें।
बुजुर्गों का सम्मान करें और उनका ध्यान रखें, क्योंकि यह बीमारी प्रायः वृद्धावस्था में अधिक पाई जाती है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने बच्चों से अपील की कि वे अपने परिवार और समाज में भी अल्ज़ाइमर रोग के बारे में जागरूकता फैलाएँ और बुजुर्गों की सेवा करें।
इस तरह यह आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ और बच्चों ने बड़ी रुचि के साथ इसमें भाग लिया।
15/08/2025
आज दिनांक 15 अगस्त 2025 को मदरसा इस्लामिया अंजुमन मुफ़ीदुल इस्लाम में स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई, जिसे मदरसे के प्रबंधकों एवं शिक्षकों की उपस्थिति में अंजाम दिया गया। जैसे ही तिरंगा फहराया गया, पूरे प्रांगण में ‘जन गण मन’ की गूंज फैल गई और माहौल देशभक्ति से भर उठा।
इस अवसर पर मदरसे के नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राओं ने जोश और उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों ने अपने हुनर और सृजनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। कुछ बच्चों ने अत्यंत सुंदर और आकर्षक प्रोजेक्ट बनाकर स्वतंत्रता संग्राम, देश के महापुरुषों और विकास की कहानियों को जीवंत किया। वहीं, कुछ बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए पेंटिंग्स बनाई, जिनमें तिरंगा, स्वतंत्रता सेनानियों और एकता व भाईचारे के संदेश झलकते थे।
कार्यक्रम में बच्चों के सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, देशभक्ति गीतों और कविताओं ने सभी का मन मोह लिया। शिक्षकों ने बच्चों को स्वतंत्रता दिवस का महत्व समझाते हुए बताया कि आज का दिन सिर्फ जश्न मनाने का नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए संकल्प लेने का दिन भी है।
अंत में, विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और सभी को मिठाइयाँ वितरित की गईं। यह आयोजन न केवल बच्चों में देशभक्ति की भावना को प्रबल करने वाला रहा, बल्कि उनकी रचनात्मकता, टीम वर्क और आत्मविश्वास को भी नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ।
15/07/2025
मदरसा इस्लामिया अंजुमन मोफ़िदुल इस्लाम के बच्चों को आज पटना के पटेल भवन में शैक्षिक भ्रमण पर ले जाया गया।
इस खास मौके पर आपदा प्रबंधन कमेटी, बिहार की हेड सुम्बुल अफ़रोज़ मैम, मोइज खान सर और कई अन्य कई सर भी मौजूद रहे।
👦👧 बच्चों ने कंप्यूटर स्क्रीन पर मजेदार और इंटरैक्टिव गेम खेलकर सीखा कि आपदा के समय खुद को, अपने परिवार और अपने पालतू पशुओं को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। बच्चों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया।
🎮 खेलने के बाद बच्चों से फीडबैक भी लिया गया, और उनकी भागीदारी और सीखने की लगन को देखते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
💫 बच्चों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। यह अनुभव उनके कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम रहा।
🙏 सभी सर मैम और उनकी टीम का हार्दिक धन्यवाद जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाया!
10/07/2025
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20/05/2025
علم کی ضرورت و اہمیت : احادیث مبارکہ اور اقوال ائمہ دین کی روشنی میں۔
مگر وہ علم کے موتی، کتابیں اپنے آبا کی
جو دیکھیں ان کو یورپ میں دل ہوتا ہے سیپارہ
قرآن کے تقریباً 78 ہزار الفاظ میں سب سے پہلا لفظ جو اللہ عزوجل نے سیدی رسول اللہ (ﷺ) کے قلب اقدس پہ نازل فرمایا وہ ’’اِقْرَاْ‘‘ ہے، یعنی پڑھیئے-مزید قرآن پاک کی 6ہزار آیتوں میں سب سے پہلے جو 5 آیتیں نازل فرمائی گئیں ان سے بھی قلم کی اہمیت اور علم کی عظمت ظاہر ہوتی ہے- علم کی فضیلت و عظمت، ترغیب و تاکید مذہب اسلام میں جس بلیغ و دل آویز انداز میں پائی جاتی ہے اس کی نظیر اور کہیں نہیں ملتی، تعلیم و تربیت، درس وتدریس تو گویا اس دین برحق کا جزو لاینفک ہو- سیدی رسول اللہ (ﷺ) اپنے ماننے والوں کو ہمیشہ حصول ِ علم کی رغبت اور تلقین فرماتے، غزوہ بدر کے موقع پہ آپ (ﷺ( ہر اس اسیرکو جو مدینہ کے دس بچوں کو لکھنا پڑھنا سکھاتا تھا آزاد فرما دیتے تھے-اس عمل سے اسلام اور پیغمبر اسلام (ﷺ) کی نظر میں تعلیم کی اہمیت کا بخوبی اندازہ ہوتا ہے -