26/10/2025
भारत के प्रमुख भाषा परिवार
1
हिन्द-आर्य भाषा परिवार
हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, मराठी, नेपाली, बांग्ला, गुजराती, कश्मीरी आदि
76.87%
2
द्रविड़ भाषा परिवार
तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम आदि
20.82%
3
ऑस्ट्रो-एशियाई भाषा परिवार
संथाली, हो, मुंडारी, खड़िया आदि
1.11%
4
तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार
नागा, मिजो, मणिपुरी, तांगखुल, दफला आदि
1.0%
5
अंडमानी भाषा परिवार
ग्रेट अंडमानी, ओंग, जारवा आदि
डाटा अनुपलब्ध
Note-
इस तालिका से स्पष्ट है कि भारत की अधिकांश जनसंख्या हिन्द-आर्य और द्रविड़ भाषाएँ बोलती है।
26/10/2025
कंधारिया महादेव मंदिर की वास्तुशिल्प विशेषताएँ
परिचय
कंधारिया महादेव मंदिर, खजुराहो (मध्य प्रदेश) में स्थित, 11वीं सदी में चंदेल वंश द्वारा निर्मित नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह शिव को समर्पित मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और भारतीय मंदिर वास्तुकला की भव्यता को दर्शाता है। इसकी विशेषताएँ न केवल तकनीकी नवाचार दर्शाती हैं, बल्कि चंदेल समाज की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संरचना को भी प्रतिबिंबित करती हैं।
मुख्य भाग
कंधारिया महादेव की वास्तुशिल्प विशेषताएँ निम्नलिखित हैं, जिनका विश्लेषण नागर शैली की गहराई को उजागर करता है:
नागर शैली का शिखर: ऊँचा और घुमावदार शिखर (31 मीटर), अमलक और कलश के साथ, छोटे शिखरों (उरुश्रृंग) का समूह बनाता है। यह डिज़ाइन मंदिर को पर्वत जैसी भव्यता प्रदान करता है, जो हिंदू दर्शन में ब्रह्मांड की संरचना (मेरु पर्वत) का प्रतीक है, तथा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध संतुलन दर्शाता है।
संरचना और लेआउट: वर्गाकार गर्भगृह में शिवलिंग, सभा मंडप, भोग मंडप, और अर्ध मंडप शामिल हैं, ऊँचे जगति पर। पंचायतन शैली (चार छोटे मंदिरों के साथ) सामंजस्य दर्शाती है, जो चंदेलों की बहु-देव पूजा परंपरा को विश्लेषित करती है—यह धार्मिक समावेशिता का प्रमाण है।
मूर्तिकला और अलंकरण: बाहरी दीवारों पर 600+ मूर्तियाँ, जिनमें देवी-देवता, अप्सराएँ, और मिथुन (कामुक) चित्र शामिल हैं। ये मूर्तियाँ तांत्रिक दर्शन को दर्शाती हैं, जहाँ सांसारिक सुख आध्यात्मिक मुक्ति का माध्यम हैं; यह मध्यकालीन भारत में तंत्र और भक्ति के समन्वय को विश्लेषित करता है, तथा लिंग-समता के सामाजिक विचारों को प्रतिबिंबित करता है।
निर्माण तकनीक: बलुआ पत्थर से इंटरलॉकिंग विधि, बिना चूने के, जो पर्यावरण अनुकूलता और दीर्घायु दर्शाती है। यह चंदेलों की इंजीनियरिंग कौशल को उजागर करता है, जो आर्थिक समृद्धि और कारीगरों के सामाजिक योगदान से जुड़ा है।
निष्कर्ष
कंधारिया महादेव मंदिर नागर शैली की वास्तुशिल्प उत्कृष्टता का प्रतीक है, जो तकनीकी नवाचार से परे सांस्कृतिक समन्वय और धार्मिक गहराई को विश्लेषित करता है। इसकी विशेषताएँ भारत की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करती हैं, तथा समसामयिक संरक्षण प्रयासों (यूनेस्को) में पर्यटन और विरासत के महत्व को रेखांकित करती हैं।
12/03/2021
The end of the Second World War is a landmark in contemporary world politics. In 1945, the Allied Forces, led by the US, Soviet Union, Britain and France defeated the Axis Powers led by Germany, Italy and Japan, ending the Second World War (1939-1945). The war had involved almost all the major powers of the world and spread out to regions outside Europe including Southeast Asia, China, Burma (now Myanmar) and parts of India’s northeast. The war devastated the world in terms of loss of human lives and civilian property. The First World War had earlier shaken the world between 1914 and 1918. The end of the Second World War was also the beginning of the Cold War. The world war ended when the United States dropped two atomic bombs on the Japanese cities of Hiroshima and Nagasaki in August 1945, causing Japan to surrender. Critics of the US decision to drop the bombs have argued that the US knew that Japan was about to surrender and that it was unnecessary to drop the bombs. They suggest that the US action was intended to stop the Soviet Union from making military and political gains in Asia and elsewhere and to show Moscow that the United States was supreme. US supporters have argued that the dropping of the atomic bombs was necessary to end the war quickly and to stop further loss of American and Allied lives. Whatever the motives, the consequence of the end of the Second World War was the rise of two new powers on the global stage. With the defeat of Germany and Japan, the devastation of Europe and in many other parts of the world, the United States and the Soviet Union became the greatest powers in the world with the ability to influence events anywhere on earth. While the Cold War was an outcome of the emergence of the US and the USSR as two superpowers rival to each other, it was also rooted in the understanding that the destruction caused by the use of atom bombs is too costly for any country to bear. The logic is simple yet powerful.
18/09/2020
#उन्नीसवीं_शताब्दी_में_समाजिक_धार्मिक_आन्दोलन
19 वीं शताब्दी के दौरान भारतीय समाज के नवनिर्माण और धार्मिक विचारों को तर्कसंगत बनाने के लिए विभिन्न सुधार आन्दोलनों का दौर शुरू हुआ जिसमे पहले पहल इस तरह के आन्दोलन की शुरुआत राजा राम मोहन राय ने की थी।
राजाराम मोहन राय पहले भारतीय थे जिन्होने सर्वप्रथम भारतीय समाज मे प्रचलित मध्ययुगीन बुराईयों को खत्म करने का प्रयास किया।
धर्म सुधार आन्दोलन के शूत्रधार राजा राम मोहन राय को-
• भारत के नवजागरण का अग्रदूत
• सुधार आन्दोलन के प्रवर्तक
• अतीत और भविष्य के मध्य सेतु
• भारतीय राष्ट्रवाद के जनक
• आधुनिक भारत का पिता
• नव दिन प्रातः तारा
आदि नामों से पुकारा जाता है।
• राजा राम मोहन राय अरबी,फारसी,संस्कृत,अंग्रेजी और बंगाली भाषाओं के जानकार थे।इसके अलावे वह यूनानी,लैटिन तथा हिब्रू जैसी भाषाओं को भी जानते थे।
• 1803 मे उनकी पहली किताब फारसी भाषा मे "तुहफ़ात-उल-मुवाहिदीन " प्रकाशित हुआ।
• अपने विचारों को प्रेस के माध्यम से प्रचारित करने के लिए 1821 मे उन्होने बंग्ला भाषा की साप्ताहिक "संवाद कौमुदी" का प्रकाशन आरंभ किया।
• समाजिक क्षेत्र मे उनकी बहुत बडी उपलब्धि सती-प्रथा के विरुद्ध संघर्ष था।इनके प्रयास से ही गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बैन्टिक ने 04 दिसम्बर 1829 को कानून बनाकर सती-प्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया।
• 20 अगस्त 1828 को राजाराम मोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की जिसका उद्देश्य एकेश्वरवाद की उपासना पर बल देना था।
• ब्रिस्टल (इंग्लैंड) मे 27 दिसम्बर,1833 को राजाराम मोहन राय का मस्तिष्क ज्वर के कारण निधन हो गया।
10/09/2020
(मानव विकास सूचकांक)
मानव विकास सूचकांक एक वृहद सूचकांक है जो किसी देश की #अर्थवयवस्था के प्रदर्शन के आधार पर आकलन करता है।इस सूचकांक की शुरुआत #1990 मे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) से सम्बद्ध अर्थशास्त्री #महबूब_उल_हक तथा #अमर्त्य_सेन ने सम्मिलित रूप से किया ।यह तीन सूचकांको (शिक्षा सूचकांक,जीवन प्रत्याशा तथा सकल घरेलू उत्पाद सूचकांक) की मदद से अस्तित्व मे है- दूसरे शब्दो मे यह उपरोक्त तीनो सूचकांकों का औसत होता है।
मानव विकास सूचकांक =1/3 जीवन प्रत्याशा सूचकांक+शिक्षा सूचकांक+सकल घरेलू उत्पाद सूचकांक
23/08/2020
#कुछ_बात_Environment_and_Ecology_की
#पर्यावरण:-पर्यावरण परि और आवरण शब्दों की सन्धि करने से बनता है।पर्यावरण( संरक्षण) अधिनियम 1986 के अनुसार,"पर्यावरण किसी जीव के चारों तरफ घिरे भौतिक एवं जैविक दशाएँ एवं उनके साथ अंत:क्रिया को सम्मिलित करता है।"साधारण शाब्दों मे,हम जीवधारियों तथा वनस्पतियों के चारों ओर जो आवरण है उसे पर्यावरण कहते है।
#पर्यावरण_के_प्रकार(Types of Environment)
पर्यावरण को भौतिक और जैविक संकल्पना के आधार पर दो प्रमुख प्रकारों मे बाँटा जाता है-
1. भौतिक पर्यावरण
2. जैविक पर्यावरण
#भौतिक_पर्यावरण के पुनः तीन प्रकार होते हैं-
• स्थलमंडलीय पर्यावरण
• वायुमंडलीय पर्यावरण
• जलमंडलीय पर्यावरण
#जैविक_पर्यावरण भी पुनः दो भागों मे विभक्त होता है-
• वानस्पतिक पर्यावरण
• जन्तु पर्यावरण
22/08/2020
नेपोलियन बोनापार्ट विश्व इतिहास की एक ऐसी महान विभूति है जिसके जीवन का एक-एक पृष्ठ अदम्य उत्साह,अद्भूत साहस और वीरतापूर्ण कारनामों से भरा पड़ा है ।लगभग बीस वर्षों तक वह न केवल फ्रांस बल्कि समस्त यूरोपीय राज्यों को प्रभावित करता रहा।अपने उत्कर्ष के दस वर्षों मे उसने समस्त युरोप मे परिवर्तन लाकर उसके मूल मानचित्र को बदल डाला और यूरोपीय राज्य अपनी निरीह आंखों से उसके कारनामों को बेबस होकर देखते रहे ।अबतक विश्व इतिहास मे किसी एक व्यक्ति ने युरोप को इतना अधिक प्रभावित नही किया था जितना कि नेपोलियन ने किया।वह नेपोलियन ही था जिसने अपने निरंतर विजय अभियानों से फ्रांस के राष्ट्रीय गौरव मे वृद्धि की और उसके प्राकृतिक सीमाओं मे आमूल-चूल परिवर्तन लाया।वह नेपोलियन ही था जिसने आतंककालीन राज्य के बाद सुधारों के क्रमबद्ध कदम उठाकर फ्रांस के शासन को स्थिरता दी और विदेशी राज्यों से लड़ने के लिए फ्रांस को अपूर्व क्षमता प्रदान की।वह नेपोलियन ही था जिसने फ्रांस तथा युरोप के विभिन्न राज्यों मे राज्य क्रांति के महान सिद्धांतों (समानता,स्वतन्त्रता तथा बन्धुत्व) को कार्यरूप मे परिणत किया और उनसे प्रभावित होकर युरोप के सारे राज्य राष्ट्रीय भावना से उत्प्रेरित होने लगे।मृत नेपोलियन जीवित नेपोलियन से अधिक सशक्त निकला और एक शक्ति बनकर 1871 ई • तक समस्त युरोप को अनुप्राणित तथा आन्दोलित करता रहा।
वह व्यक्ति जो आगामी 15 वर्षों तक फ्राँस तथा युरोप के एक बडे भाग पर शासन करनेवाला था,मात्र 30 वर्ष का था जब वह प्रथम बार फ्राँस का कौन्सल बना।वह कोर्सिका का रहने वाला था किन्तु वह फ्राँस का नागरिक इसलिए बन गया कि उसके जन्म के कुछ ही दिन पूर्व कोर्सिका फ्राँस का अंग बन गया था।उसने एक तोपखाने अधिकारी के रूप मे फ्राँस के स्कूल मे शिक्षा पायी।सन 1793 मे उसने जैकोवियन विचार ग्रहण किया तथा उसने तुला नामक स्थान पर ब्रिटिश आक्रमण को विफल कर नाम तथा प्रतिष्ठा अर्जित की।उसने पहली बार एक बडी सफलता 1796-97 मे इटली अभियान मे विजय प्राप्त करके की।नेपोलियन फ्राँस के इतिहास मे 1796 मे इटली के आक्रमण के पश्चात अपने कैरियर का आरंभ किया तथा वाटर-लू की लड़ाई के साथ उसका अंत हो गया।
22/08/2020
#आश्रम_व्यवस्था
उत्तर वैदिक काल में आश्रम व्यवस्था स्थापित हुई।सर्वप्रथम #जबालो_उपनिषद मे चार आश्रमों की सूचना मिलती है।
01• ब्रह्मचर्य /छात्रावस्था- 0-25 वर्ष तक
02• गृहस्थ /गृहस्थ की अवस्था- 25-50 वर्ष तक
03• वान्प्रस्थ / वनवासावस्था- 50-75 वर्ष तक
04• सन्यास/सांसारिकता से दुर- 75-100 वर्ष तक