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सक्सेस स्टोरी: आईआईटी भिलाई में पढ़ते हुए आनंद ने स्टार्टअप कंपनी बनाई, 20 लाख का पैकेज छोड़ा, 6 बै 19/01/2021

सक्सेस स्टोरी: आईआईटी भिलाई में पढ़ते हुए आनंद ने स्टार्टअप कंपनी बनाई, 20 लाख का पैकेज छोड़ा, 6 बै फर्स्ट बैच से निकले छात्र आनंद पंचभाई की सक्सेस स्टोरी, जिसने सरकार से मिले ग्रांट को अवसर में बदला,कंपनी मलेरिया, ....

आज के स्टार्टअप्स हैं कल की मल्टीनेशनल कंपनियां, खेती से लेकर स्पेस क्षेत्र तक में बढ़ा इनका स् 03/01/2021

आज के स्टार्टअप्स हैं कल की मल्टीनेशनल कंपनियां, खेती से लेकर स्पेस क्षेत्र तक में बढ़ा इनका स् आज के स्टार्टअप्स कल की मल्टीनेशनल कंपनीज हैं। खेती से लेकर स्पेस क्षेत्र तक में स्टार्टअप्स के लिए स्कोप बढ़ रहा ...

16/10/2020

बाजर के प्रतिस्पर्धा में स्टार्टअप खुद को कैसे करे मजबूत ?

बड़े ब्रांड्स के साथ टाईट है फाईट तो कैसे करें मुकाबला आज के इस आर्टिकल में हम इन्हीं सब बातों पर चर्चा करेंगे । तो दोस्तों एक तो वैसे ही नए वेंचर्स का बाजार में सर्वाइवल मुश्किल होता है उस पर से कोविड-19 के वर्तमान हालात में जब एक एक कर बड़े-बड़े ब्रांड्स के शटर डाउन हो रहें है तो हम स्टार्टअप के सामने तो चुनौती और भी मुश्किल है । ऐसे में सीमित संसाधनों में अच्छा परफॉर्मेंस का दबाब और बढ़ जाता है जब बात बड़े ब्रांड से फाइट का हो क्योंकि बड़े ब्रांड के पास संसाधनों की कोई कमी नही रहती । जिसका फायदा उन्हें हमारे आपसे पहले मिलता है और वो बाजी मार जाते हैं । ऐसे में बाजर में अपने सर्वाइवल को ले कर हमारी क्या रणनीति हो अगर हमने इसपे अच्छे से होम वर्क कर लिया तो फिर सामने वाले से डरने या हतोउत्साहित के बजाय हम बाजर में बहुत बढ़िया से अपनी उपस्थिति दर्ज ना केवल करा सकते है बल्कि इन बड़े-बड़े ब्रांड के नाक के नीचे से बिजनेस ले सकते हैं । तो आइये बड़े ब्रांड के खिलाफ क्या हो हमारी रणनीति इसपे बात करते हैं ।

प्रतिस्पर्धा में बने रहना है तो बाजर से कुछ अलग यूनिक तरीके से काम करना होगा । किसी भी बिजनेस का आधार उसका यूनिक आइडिया ही होता अगर वह आपका खुद का जेनरेटेड आइडिया है किसी का नकल नही है तो आपके सफलता की संभावनाऐं काफी बढ़ जाती है । स्टार्टअप को इस बात का हमेशा ख्याल रखना चाहिए कि वह अपने कस्टमर्स तक अपनी रिच बढ़ाने के लिए अपने आइडिया पर ना केवल अमल करे बल्कि हमेशा बाजर से हट कर यूनिक प्रॉडक्ट कस्टमर के लिए ले कर आये ।

चूँकि आप बाजार में नए है तो आपकी सर्विस को लोग जाने ये काफी महत्वपूर्ण होता है । बड़े बजट के साथ बाजार में आई कंपनियां विज्ञापन या प्रचार-प्रसार के अन्य माध्यमों पर लाखों खर्च कर कस्टमर्स को अपने प्रॉडक्ट के बारे में बता देती हैं । पर जब बात सीमित संसाधनों वाले स्टार्टअप की आती है तो यहाँ मैं यही सलाह देना चाहूंगा कि आप व्यक्तिगत रूप से अपने कस्टमर से जुड़े उन्हें स्पेशल फील करायें उन्हें लगना चाहिए कि आप उनके लिए खास हैं । इस तरह से आपका जुड़ाव जब कसतमर से होता है तो कस्टमर आपके लिए खुद आगे बढ़ कर आपके प्रॉडक्ट का प्रमोशन करना शुरू कर देते हैं । जो कि किसी भी नए स्टार्टअप के लिए बहुत ज्यादा मददग़ार होता है क्योंकि ऐसा देखा गया है कि कोई कम्पनी से बाहर का व्यक्ति अगर आपके सर्विस को बेहतर कहता है तो लोग आसानी से आपसे जुड़ते हैं और आपका रिच बढ़ता है । अतः मेरा सलाह तो यही रहेगा कि कस्टमर से जुड़ने के लिए किसी भी तरह के रोबॉट्स, सॉफ्टवेयर या कोई अन्य ऑटोमेशन सिस्टम की मदद न लेकर आप डायरेक्ट अपने कस्टमर से जुड़े ताकि ज्यादा पैसा भी ना खर्च करना पड़े और रिजल्ट भी बढ़िया आये ।

बड़ी कंपनियों का अपना एक सिस्टम होता है वो किसी भी समस्या का समाधान उस सिस्टम के बाहर जा कर नही ढूंढते जबकि नए स्टार्टअप के साथ इस तरह की कोई बात नही होती । जिस कारण स्टार्टअप बड़े ब्रांड की तुलना में यहाँ मजबूत स्थिति में होते हैं जिसका फायदा स्टार्टअप को उठाना चाहिए । अपने कस्टमर की जरूरतों को ध्यान में रख नई सर्विस प्रोवाइड करना , छोटा सिस्टम होने के कारण क्विक डिजसिजन लेना , तुरत फुरत में बदलते सिचुएशन के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेना । ये सब कुछ से पॉइंट्स है जहां हम आसानी से बड़े ब्रांड्स से पहले बाजी मार सकते हैं । अतः हमारी स्लैग यही होगी कि स्टार्टअप का अपना जो मजबूत पक्ष है उसको किसी भी हालत में कमजोर ना बनने दे बल्कि उसे बेहतर , और बेहतर बल्कि सबसे बेहतर बनाये ।

15/10/2020

स्टार्टअप शुरू करने से पहले पार्टनर से खुल के करें बात -

गलतियों से बचा नही जा सकता पर इसे काफी हद तक कम तो कर ही सकते हैं । स्टार्टअप करते समय मे अक्सर कुछ ना कुछ ऐसी गलती हो ही जाती है जो स्टार्टअप के लिए बहुत अधिक नुकसानदेह होता है । पार्टनर से संबंधित मुद्दे पर होनी वाली गलती एक ऐसी ही गलती है । अतः जब कभी आप अपने दोस्तों या अन्य किसी के साथ मिलकर स्टार्टअप बिजनेस शुरू कर रहें हैं तो आप दोनों को अपने बिजनेस से रिलेटेड सभी पॉइंट पर गहराई से विचार-विमर्श कर लेना चाहिये, ताकि भविषयबमे किसी तरह की कोई समस्या नही आये । आज के इस आलेख के माध्यम से हम ऐसी तरह के कुछ सुझावों को आपसे साझा करेंगे । जिससे बिजनेस शुरू करने से पहले ही आप अपने अग्रीमेंट में इन सब बातों को शामिल कर भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बच सकते हैं -

✔️ को-फाउंडर के बीच शेयर या इक्विटी किस तरह विभाजित होगी ?

✔️ को-फाउंडर्स की कंपनी मे क्या भूमिका और जिम्मेदारी होगी ?

✔️ अगर किसी कारण से कंपनी से कोई को-फाउंडर कंपनी से अलग होता है तो क्या कंपनी या अन्य को-फाउंडर को उसके शेयर खरीदने का अधिकार होगा ? अगर हां तो किस मूल्य पर ?

✔️ हर को-फाउंडर बिजनेस को कितना समय देगा ? इसके अलावे बिजनेस से इतर जिम्मेदारियों पर किस प्रकार की रोक होगी ?

✔️ को-फाउंडर्स को अपने काम के लिए कितनी सैलरीज मिलेंगी ? सैलरी अमाउंट को किस आधार पर बदला जा सकता है ?

✔️ बिजनेस से रिलेटेड मुद्दे व रोज के कामों पर निर्णय किस प्रकार लिये जाएंगे ( वोटिंग या केवल CEO के द्वारा ) ?

✔️ किन परिस्थितियों में किसी को-फाउंडर को बिजनेस के एक एम्पलॉई के तौर पर हटाया जा सकता है ?

✔️ बिजनेस को किसी अन्य कंपनी को बेचने का निर्णय किस प्रकार लिया जाएगा ?

✔️ अगर कोई को-फाउंडर इस अग्रीमेंट को साईन करने के बाद इसके नियम एवं शर्तों का उलंघन करता है तो ऐसे में उनके खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे ?

इन छोटी-छोटी बातों पर अगर बिजनेस स्टार्ट करने से पहले ही पार्टनर्स के साथ बातचीत खुल के हो जाये तो ये स्टार्टअप के लिए और आपकी पार्टनरशिप दोनों के लिए अच्छा रहेगा ।

13/10/2020

स्टार्टअप में इकनॉमिक स्टैब्लिटी कैसे लाया जाय -

ऐसा देखा गया है कि स्टार्टअप का प्रॉडक्ट और सर्विस को बाजार में सफलता मिलने के बार भी स्टार्टअप को कैश क्रंच के दौर से गुजरना पड़ता है । इसके पीछे की कारण हो सकते है पर असली वजह फाइनेंशियल बैकअप ही होता है । ये बैकअप स्टार्टअप के लिए एक समय पर बाजार से एक्सलेटर्स या इनवेस्टर्स के द्वारा मिल भी जाता है । पर एक तय समय तक आपके स्टार्टअप में इकनॉमिक स्टैब्लिटी बनी रहे यह निहायत ही जरूरी है । यदि आप चाहते हैं कि आपके स्टार्टअप में इकनॉमिक फ्रीडम के अधिक से अधिक अवसर हों तो आपको मेरे द्वारा सुझाए गए कुछ टिप्स को अपने स्टार्टअप के हिसाब से फॉलो करने चाहिए -

1. को-वर्किंग स्पेस से करें शुरुआत - किसी भी अर्ली स्टेज स्टार्टअप के लिए ये निहायत ही जरूरी है कि वो अपने प्रतिदिन के खर्चों को कम कर सके । किसी भी न्यू स्टार्टअप के लिए कोई जगह रेंट पर लेकर फिर उसे ऑफिस के लिए डेवलप करना मुश्किल काम तो है ही पर तब काफी मुश्किल हो जाता है जब आपके पास एक लिमिटेड बजट हो । ऐसे में मैं को-वर्किंग स्पेस को इस्तेमाल करने की सलाह दूँगा । क्योंकि एक बिल्डिंग में ऑफिस सेटअप करना और ऑफिस मैनेजमेंट सबंधित डेली के खर्चों से बचने का इससे बेहतर उपाय स्टार्टअप के लिए कुछ नही हो सकता । यदि आप एक मेट्रो सिटी में हैं तो आपको कई सारे को-वर्किंग स्पेस के ऑप्शन मिल जायेंगे । जहाँ आप एक फिक्स्ड अमाउंट देकर ऑफिस स्पेस ले सकते हैं । इसके अलावे मेम्बरशिप का भी ऑप्शन अधिकतर को-वर्किंग स्पेस कंपनियां उपलब्ध कराती है, जो आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है ।

2. प्रॉफिट का इस्तेमाल तरीके से करें - जो स्टार्टअप तीन वर्ष से अधिक समय से चल रहे हैं उनमें प्रॉफिट आना शुरू हो जाता है, लेकिन अनुभव की कमी के कारण ज्यादातर स्टार्टअप अपने प्रॉफिट का सही उपयोग नही कर पाते और फाइनांशियल क्रंच में हमेशा घिरे रहते हैं । देश मे 30% से ज्यादा स्टार्टअप अपने पहले प्रॉफिट का इस्तेमाल गैर जरूरी खर्चों में करते हैं जिनमें बोनस, प्रॉडक्ट लॉन्च, पार्टी या ऑफिस इंटीरियर है । नतीजन आप प्रॉफिट के बाद भी नो प्रॉफिट-नो लॉस के सिचुएशन में पहुंच जाते हैं ।

3. समय-समय पर टारगेट रिव्यू नही करना - किसी भी स्टार्टअप के जरूरी है कि आप अपने द्वारा तय किये गए लक्ष्यों के समय-समय पर रिव्यू करते रहें । वर्तमान में आपके पास जितना फंड है, उसी को देखते हुवे फ्यूचर प्लानिंग करें । यदि जरूरत पड़े तो आप लक्ष्य में बदलाव भी ला सकते हैं । इन सबके अलावा अपने इंवेस्टर को भी अपने फ्यूचर प्लान के बारे में जानकारी देते रहें, जिससे कि उनका विश्वास आप पर और आपके प्रॉडक्ट पर बना रहे ।

4. अच्छा बजट बनायें - प्रॉफिट को मैनेज करने का सबसे अच्छा उपाय है एक बेहतर बजट बनाना । आप मार्केटिंग में अधिक फोकस करना चाहते हैं या सर्विस को अधिक बेहतर करने के लिए बदलाव करना चाहते हैं तो बजट बनाते समय संबंधित विभागों के एक्सपर्ट की राय अवश्य लें । जब प्रॉफिट से बजट का डिस्ट्रीब्यूशन करेंगे तो एक्सपर्ट की राय से आपको मदद मिलेगी और फायदा भी नजर आने लगेगा ।

11/10/2020

क्या आप न्यू स्टार्टअप हैं ? तो भूल कर भी ना करें ये गलतियाँ ।

आपका स्टार्टप आईडिया कितना भी बढ़िया क्यों नही हो, पर आपकी एक छोटी सी गलती आपके स्टार्टअप को सफलता से कोसों दूर ले जा सकती है । ऐसे में आपको अपने आईडिया को इम्प्लीमेंट करते वक़्त कुछ गलतियों से बचना चाहिये । आज के इस आलेख में अपने युवा साथियों को ऐसे ही कुछ छोटी-छोटी गलतियों के बारे में बताऊंगा जिससे की वो एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना सकें ।

एक रिसर्च के अनुसार देश मे करीब 45 प्रतिशत स्टार्टअप इसलिये फेल हो जाते हैं क्योकि उनका आईडिया मार्केट के हिसाब से फिट नही है । जबकि 25 प्रतिशत स्टार्टअप के फेल होने के पीछे सही टीम मैनेजमेंट का ना होना होता है । ऐसे में स्टार्टअप शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं । ऐसी ही कुछ गलतियाँ निम्न है -

1. दूसरों के आईडिया से प्रेरित आईडिया पर काम करना या दूसरे के आईडिया का नकल करना - कभी कभी हम अपने स्टार्टअप आईडिया को ले कर अपने परिचित, वेल विशर, दोस्त आदि से डिस्कस करते हैं जिन्हें की आपके आईडिया से जुड़ा कोई जमीनी अनुभव नही होता और वो ना आपके टीम के सदस्य होते हैं जो आपके बिजनेस को नजदीक से जान या समझ रहें होते हैं । ऐसे में मेरा मनाना है कि वे आपके कितने भी शुभचिंतक क्यों ना हो आप उनसे सलाह तो ले पर अमल से पहले किसी विषय विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें ।

दूसरी बात आप बाजार के प्रतिद्वंदियों पर नजर रखते हैं ये अच्छी बात है पर अपनी हर प्लानिंग उनके स्ट्रेटजी को आधार बना कर करना सही नही है । बल्कि आपके स्टार्टअप की प्लानिंग, स्ट्रेटजी बिल्कुल यूनिक हो तो सक्सेस के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं ।
[11/10, 2:53 pm] Rakesh Jha: 2. खराब लोकेशन - किसी भी स्टार्टअप के फेल होने का सबसे बड़ा कारणों में से एक कारण है खराब लोकेशन । जबकि किसी स्टार्टअप को अपना लोकेशन सेलेक्ट करने से पहले मार्केट साइज़, टारगेट कस्टमर्स तक पहुंच, कच्चा माल की प्राप्ति, सस्ता श्रम आदि बातों का ख्याल रखते हुवे अपने वर्क स्टेशन का लोकेशन का चुनाव करना चाहिए । अगर आप ये सोचते हैं कि शुरुआत कहीं से भी की जा सकती तो ठीक है पर सही लोकेशन से आपको अपने बिजनेस को बढ़ाने में काफी आसानी होती है ।

3. टीम पर भरोषा नही करना - कभी-कभी ऐसा होता है कि अपने बिजनेस के प्रति हद से ज्यादा लगाव या इनसिक्योर होने के कारण आप सबकुछ अकेले करने के चक्कर मे अपनी ऊर्जा और समय दोनों का सही उपयोग नही कर पाते जो कि आपके बिजनेस के लिए सही हैं । अतः आपको अपने टीम पर भरोषा अवश्य करना चाहिए और टीम के प्रत्येक सदस्य को उनके एक्सपर्टाइज और क्षमता के हिसाब से काम दे कर उनको समय समय पर मोटिवेट कर खुद की ऊर्जा और समय को तरीके से यूज करना चाहिये ताकि टीम में एक वर्क कल्चर डेवलप हो सके और बिजनेस स्मूथली रन कर सके ।

4. कभी कभी स्टार्टअप कंपनियों के द्वारा अपने उत्पाद को लेकर असुरक्षा की भावना के साथ कि क्या पता प्रॉडक्ट बाजार में बिकेगा की नही या हमारी सर्विस को लोक पसंद करेंगे कि नही । ये सोच आत्मविश्वास की कमी के कारण अपनी सेवाओं का मूल्य कम लागते हैं । जबकि वस्तु की कीमत इन सब बातों पर नहीं ये तो मार्केट रिसर्च, डिमांड और सप्लाई जैसे चीजों से निर्धारित होती है । अतः मैं यहाँ यही सलाह दूँगा की आप प्रॉपर मार्केट रिसर्च के आधार पर अपने उत्पाद या सेवाओं का मूल्य निर्धारण करें ।

5. फंडिंग की जल्दबाजी - ऐसा देखा गया है कि स्टार्टअप के द्वारा फंडिंग की बहुत जल्दबाजी होती है । इसके पीछे एक कारण यह भी है कि बाजार में किसी स्टार्टअप को फंड मिल जाना इंक्यूबेटर द्वारा उसके सफलता के रूप में प्रचारित किया गया है । जबकि होना ये चाहिए कि प्रारंभिक चरण में ही स्टार्टअप में फंड जुटाने की कवायद कभी-कभी गलत भी हो जाता है । क्योंकि एक बार मार्केट का पैसा आपके स्टार्टअप में इन्वेस्ट हो जाने पर परफॉर्मेंस को ले कर आप पर एक छोटा मोटा प्रेसर तो बन ही जाता है । अतः यहाँ हमारी सलाह रहेगी कि सबसे पहले आप अपने स्टार्टअप में खुद की सेविंग या फंड से काम लें तद्पश्चात जब आपका स्टार्टअप आईडिया बिजनेस करने लगेगा तो इंवेस्टर्स खुद आपके स्टार्टअप में इन्वेस्ट करने में रुचि लेने लगेंगे ।

6. जरूरत से ज्यादा तेज इम्प्लीमेंटेशन - हमर उद्यमी की ये चाहत होती है कि वो अपने स्टार्टअप को फ़ास्ट ग्रोइंग बनाए । एक हद तक ये सही भी है क्योकि आज के युग मे कस्टमर तक तेज सर्विस प्रोवाइड करना बिजनेस की खूबी है पर कुछ मामलों में निहायत सोच समझ कर प्रॉपर समय लेने की जरूरत होती है । अतः मेरा सलाह यही रहेगा कि आप अपना छोटा - छोटा टारगेट सेट करें । हर टारगेट पर पहुँचने में पूरी ताकत लगाए और फिर नेक्स्ट टारगेट के लिए विदा होने से पुर्व थोड़ा रुक कर अपने प्लान को रिवाइज कर आगे की योजना को ध्यान में रख आगे बढ़े । हमेशा स्पीड में रहना कभी कभी आपने बिजनेस को नुकसान पहुँचा सकता है । अतः समय समय पर स्व मूल्यांकन होते रहना चाहिए ।

7. वेबसाइ न होना - भले ही आप ऑनलाइन बिजनेस ना करते हों पर आज के इस टेक्नोलॉजी के युग मे आपके बिजनेस का एक वेबसाइट होना अत्यंत ही आवश्यक है । क्योंकि कोई भी कस्टमर आपकी सेवा खरीदने से पहले आपको जानना चाहता है ऐसे में आपके स्टार्टअप का वेबसाइ ना होना खुद में एक कमी होगी । अतः इस कमी को जितना जल्दी हो दूर कर लेना ही स्टार्टअप के हित में होगा ।

8. टीम चुनाव में जल्दबाजी - टीम के चुनाव में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी ना करें बल्कि मैं तो कहूँगा की डिग्री से ज्यादा काबलियत और वर्किंग एक्सपीरियंस को देख कर टीम हायर करना स्टार्टअप ज्यादा सही होता है । क्योंकि किसी भी स्टार्टअप के पास उतनी बड़ी पूँजी शुरुआत में नही होती कि वो बड़े-बड़े बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री वाले को हायर कर सके । ऐसे में अपने काम के प्रति प्यार और पैशन रखने वाले बन्दे को टीम में जगह दे डिग्री थोड़ी कमजोर भी रहेगा तो चलेगा ।

उपर्युक्त बातों को ध्यान में रख अगर आप अपने स्टार्टअप का संचालन करते है तो स्टार्टअप की सफलता की संभावना कई गुणा बढ़ जाती है ।

नोट- आपको आज का आलेख कैसा लगा ? हमें जरूर बताएँ । स्टार्टअप से संबंधित आपकी अगर कोई जिज्ञासा हो तो हमसे आप इस पेज के माध्यम से सम्पर्क कर सकते हैं ।

10/10/2020

स्टार्टअप के लिए कहाँ से आयेगा फंड ???

किसी भी नए स्टार्टअप में कोई भी निवेशक ऐसे तुरत में अपना पैसा नही लगा देता वो पैसा लगाने से पहले स्टार्टअप की भली भांति जाँच परख करता है कि उसको इन्वेस्ट करने से फायदा होगा या नुकसान । ऐसे में कोई भी स्टार्टअप बिजनेस स्टार्ट करने से पहले हमें सबसे पहले खुद की सेविंग के बदौलत ही उसे खड़ा होना पड़ता है । तद्पश्चात जब हमारा बिजनेस थोड़ा डेवलप हो जाता है तो हमें बाहरी फंडिंग जुटाने में आसानी होती है । तो आइये आज स्टार्टअप बिजनेस के कुछ फंडिंग प्लेटफॉर्म्स के बारे में जानते हैं -

इंक्यूबेटर और एक्सलेटर- किसी भी तरह के स्टार्टअप को शुरुआत में ही एक अच्छे इंक्यूबेटर की तलाश कर लेनी चाहिये । आजकल कई ऐसे प्राईवेट इंक्यूबेटर है जो स्टार्टअप को उनके स्टार्टिंग फेज से ही उसका ना केवल मार्गदर्शन करते हैं बल्कि स्टार्टअप की अन्य जरूरतों का भी ख्याल रखते हैं । जिसमे फंड उपलब्ध करवाना मुख्य होता है । इसके लिए इन इंक़यूबेटर द्वारा समय-समय पर एक्सलेटर्स को इन्वाइट कर उनसे आपको फंडिंग करवाया जाता है । इस तरह इंक्यूबेटर आपके आईडिया को ना केवल बिजनेस मॉडल में ढालने में, आपकी मदद करता है बल्कि एक्सलेटर्स की मदद से आपके बिजनेस की फाइनेंशियल जरूरतों को भी काफी पूरा करवाता है । अतः कोई भी स्टार्टप शुरू करने से पहले आपको हमारे हिसाब से किसी ना किसी इंक्यूबेटर के साथ खुद को जोड़ लेना चाहिए ।

सरकारी स्किम - देखा जाय तो ये कहने में बड़ा आसान है कि सरकार द्वारा विभिन्न तरह की योजनाओं के माध्यम से पढ़े लिखे युवाओं के द्वारा खुद के उद्यम के लिए बैंकों या अन्य फाइनेंशियल इंस्टीच्यूशन के द्वारा लोन प्रोवाइड करवाया जाता है । पर ये मात्र कहने सुनने में ही अच्छा लगता है । क्योंकि जब आप इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सरकारी दफ्तरों में जाएंगे तो आपको बहुत तरह की कागजी कार्यवाही में ही अपना समय खपा देना होगा । फिर भी अगर आपके पास कोई स्टैब्लिश बिजनेस मॉड्यूल है जिसपे आप सालों से काम कर रहे हैं तो आप भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम में अपना रजिस्ट्रेशन करके इस स्कीम का फायदा तो उठा ही सकते हैं । इस स्कीम के तहत क्या-क्या छूट आपको मिल सकती है । इस पर विस्तृत जानकारी हमने पहले के आलेख में दे दिया है ।

क्राउड फंडिंग - इस प्लेटफार्म का उपयोग सामान्यतः समाजिक कामों में ज्यादा देखने को मिलता है पर हाल के दिनों में इसके माध्यम से बिजनेस फंडिंग जुटाने का भी चलन आया है । क्राउड फंडिंग के कई सारे डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध है जहां आप अपने बिजनेस के लोए क्राउड फंडिंग कैम्पेन स्टार्ट कर आसानी से अपने स्टार्टअप के लिए फंड जुटा सकते हैं । फंडेबल, किकस्टार्टर, इंपेक्ट गुरु जैसे कई क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म की मदद इसके लिए ली जा सकती है । क्राउड फंडिंग पर एक विस्तृत आलेख मेरे द्वारा पहले दिया जा चुका है । जिसे आप इस पेज पर ही देख सकते हैं ।

बिजनेस लोन - लगभग सभी बैंक स्टार्टअप को बिजनेस लोन देते हैं । अगर आप बैंक से बिजनेस लोन लेना चाहते हैं तो आपकी कम्पनी का रजिस्ट्रेशन कम्पनी एक्ट या प्रोपराइटर शिप या एलएलपी के तहत होना चाहिए । कागजी खानापुर्ति के साथ-साथ आपको अपना बिजनेस प्लान भी बैंक के साथ साझा करना होगा । उस आधार पर बैंक आपको निर्णय करेगा कि आपको कितना बिजनेस लोन दिया जाना चाहिए ।

एफएफ इन्वेस्टर्स- भारतीय स्टार्टअप के लिए यह फंडिंग का सबसे प्रचलित तरीका है । जिसमें परिवार, दोस्त या आपके परिचित लोग आपके बिजनेस में इन्वेस्ट करते हैं । बस आपका बिजनेस आईडिया और प्लान क्लियर होना चाहिए । ताकि आप इन सबों को विश्वास में ले सके कि आप इन पैसों का उपयोग कहाँ और कैसे करेंगे जिससे कि आपका बिजनेस प्रॉफिट जेनरेट कर सके । किसी भी स्टार्टअप के लिए सीड फंडिंग का इससे बेहतर माध्यम कुछ और नही हो सकता । पर इसकी अपनी कुछ खामियाँ भी हैं जैसे अगर किसी अन्य कारणों से परिवारिक या आपसी संबंधों में खटास आती आती है तो इससे आपके बिजनेस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है । अतः हमारी सलाह है कि आप किसी तरह का कोई इन्वेस्ट जब अपने पारिवारिक सदस्यों से, या दोस्त एवं परिचितों से कराये तो उसका प्रॉपर प्रोफेशनल अग्रीमेंट जरूर करवाएं ।

एंजल इंवेस्टर- एंजल इंवेस्टर आपके बिजनेस में तभी इंवेस्ट करते हैं जब आप उन्हें अपने बिजनेस आईडिया, बिजनेस प्लान और रिटर्न्स प्लान से पूरी तरह संतुष्ट कर पाते हैं । ऐसे एंजल इंवेस्टर से आपको जोड़ने में बड़ी भूमिका इंक्यूयूबेटर का होता है । साथ ही समय समय पर बहुत सारे बिजनेस सेमिनार या आयोजन का आयोजन भी होता रहता है जहां ऐसे इंवेस्टर से आपकी मुलाकात होती है । अतः इन बिजनेस सेमिनार या आयोजन में जाने से आपको एक तरफ जहां अपने बिजनेस क्लाइंट को खोजने में, लीड जेनरेट करने में मदद मिलती है वहीं आपको बिजनेस संबंधी छोटी बड़ी बातों का ज्ञान भी मिलता है । अतः हमारी सलाह रहेगी कि आपको इस तरह के आयोजनों में भाग लेना चाहिए ।

उपर्युक्त आलेख लेखक के निजी विचार है । जिसका उद्देश्य मात्र इतना है कि आप कैसे अपने स्टार्टअप के लिए बेसिक तैयारी करें और उसे आगे बढ़ाएं । आपको हमरा ये आलेख कैसा लगा इस पर अपने विचार जरूर हमसे साझा करें । धन्यवाद

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