14/05/2026
BPSC MOCK INTERVIEW
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14/05/2026
19/01/2026
यदि आप SDM हों तो मौर्य/गुप्त/चोल प्रशासन से कौन-सी 3 बातें आज लागू करना चाहेंगे और क्यों?
सर,
यदि मैं एक SDM (Sub-Divisional Magistrate) होता, तो प्राचीन भारतीय प्रशासन की इन महान परंपराओं से प्रेरणा लेकर कुछ चुनिंदा तत्वों को आधुनिक संदर्भ में लागू करना चाहता। मैंने मौर्य, गुप्त और चोल प्रशासन से एक-एक प्रमुख बात चुनी है, जो आज के भारत में प्रशासनिक दक्षता, जनकल्याण और स्थानीय भागीदारी को मजबूत कर सकती हैं। नीचे मैं तीन बातें बता रहा हूं, साथ में कारण भी:-
1. मौर्य प्रशासन से: केंद्रीकृत निगरानी और जासूसी प्रणाली (जैसे चाणक्य की नीति में वर्णित)
मैं इसे लागू करना चाहता, लेकिन आधुनिक रूप में डिजिटल निगरानी और फीडबैक सिस्टम के रूप में। मौर्य काल में यह प्रणाली भ्रष्टाचार रोकने और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रभावी थी। आज, SDM स्तर पर इसे लागू करने से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर हो सकती, जैसे कि मनरेगा या PDS में लीकेज रोकना। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा, क्योंकि प्राचीन काल में यह राजा को सीधे सूचना देती थी—आज यह नागरिक ऐप्स या CCTV के माध्यम से हो सकता है।
2. गुप्त प्रशासन से: विकेंद्रीकृत स्थानीय स्वशासन और न्याय व्यवस्था
गुप्त काल में ग्राम सभाओं और स्थानीय अधिकारियों को काफी स्वायत्तता थी, जो निर्णय लेने में तेजी लाती थी। मैं इसे पंचायती राज को मजबूत करने के लिए लागू करना चाहता, जहां SDM के रूप में मैं स्थानीय पंचायतों को अधिक अधिकार देकर छोटे-मोटे विवादों का त्वरित निपटारा करूं। कारण: आज के भारत में केंद्रीय योजनाएं अक्सर स्थानीय जरूरतों से मेल नहीं खातीं; इससे विकास कार्य अधिक प्रभावी होंगे, जैसे जल संरक्षण या शिक्षा में। गुप्त युग की तरह, यह जनता की भागीदारी बढ़ाएगी और भ्रष्टाचार कम करेगी, क्योंकि स्थानीय लोग खुद जिम्मेदार होंगे।
3. चोल प्रशासन से: कुशल सिंचाई और जल प्रबंधन प्रणाली (जैसे ग्रैंड अनिकट सिस्टम)
चोलों की सिंचाई व्यवस्था (तालाब, नहरें और जलाशय) ने कृषि को मजबूत किया और सूखे से निपटने में मदद की। मैं इसे SDM के रूप में जल संरक्षण योजनाओं में लागू करना चाहता, जैसे रेनवाटर हार्वेस्टिंग या नदी लिंकिंग प्रोजेक्ट्स को स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहित करके। कारण: आज जल संकट एक बड़ी समस्या है, खासकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में; चोल मॉडल से प्रेरित होकर हम कृषि उत्पादकता बढ़ा सकते हैं और किसानों की आय दोगुनी कर सकते हैं। यह पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगा, जैसा कि चोल काल में मंदिरों के साथ जल प्रबंधन जुड़ा था—आज इसे MNREGA से जोड़कर लागू किया जा सकता है।
बिहार में बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियां और समाधान क्या हैं?
all-9555508870
सर,
निम्लिखित चुनौतियाँ हैं-
चुनौतियां:
1.नेपाल से आने वाली नदियां (कोसी, गंडक) – अंतरराष्ट्रीय समन्वय कम।
2.तटबंधों का खराब रखरखाव।
3.जलवायु परिवर्तन से अनियमित वर्षा।
4.जनसंख्या दबाव।
समाधान: -
कोसी बैराज और हाई डैम।
2.इंटीग्रेटेड फ्लड मैनेजमेंट (बाढ़ पूर्वानुमान, GIS)।
3.वनरोपण और तटबंध मजबूती।
4.बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और बीमा।
5.बिहार में बाढ़ प्रबंधन में केंद्र-राज्य-नेपाल सहयोग जरूरी।
भारत छोड़ो आंदोलन की सफलता थी या असफलता?
/call-9555508870
"सर/मैम,
भारत छोड़ो आंदोलन तात्कालिक रूप से असफल – दबा दिया गया, 10 लाख से ज्यादा गिरफ्तारियां, हजारों मारे गए।
दीर्घकालिक रूप से सफल – ब्रिटिशों को पता चला कि भारत अब शासित नहीं रहा जा सकता।
युद्ध के बाद लेबर पार्टी सरकार ने स्वतंत्रता प्रक्रिया तेज की।
जनता में राजनीतिक चेतना और आत्मविश्वास बढ़ा।
यह स्वतंत्रता का अंतिम बड़ा जनआंदोलन साबित हुआ।
इतिहास से हम वर्तमान की समस्याओं का समाधान कैसे सीख सकते हैं?
-9555508870
sir, इतिहास दोहराता नहीं, लेकिन शिक्षाएं देता है। उदाहरण:
1. हड़प्पा का पतन → पर्यावरण संरक्षण की जरूरत,
2. 1857 की असफलता → एकता की कमी → आज जाति-क्षेत्रवाद से बचना,
3. गांधीजी का चंपारण → शांतिपूर्ण आंदोलन से किसान मुद्दों का समाधान,
3. फ्रेंच क्रांति → असमानता से क्रांति का खतरा → समावेशी विकास जरूरी।
4. इतिहास का अध्ययन नीति-निर्माण को संतुलित बनाता है और हमें गलतियां दोहराने से रोकता है। एक प्रशासक के रूप में मैं इतिहास की इन शिक्षाओं को बिहार के विकास में लागू करना चाहूंगा।
ग्रेजुएशन के बाद आपने तुरंत जॉब या आगे की पढ़ाई क्यों नहीं की?
आंसर 1 (सबसे सुरक्षित – तैयारी पर फोकस):
"सर/मैम,
ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद मेरे सामने दो रास्ते थे – या तो तुरंत प्राइवेट जॉब या पोस्ट-ग्रेजुएशन करके एक निश्चित करियर चुन लूं, या अपना असली लक्ष्य – सिविल सेवा – पर पूरा फोकस करूं। मैं शुरू से ही बिहार/राजस्थान की समस्याओं जैसे गरीबी, शिक्षा की कमी, बाढ़, बेरोजगारी को प्रशासनिक स्तर से सुलझाने का सपना देखता था। प्राइवेट जॉब या सामान्य पोस्ट-ग्रेजुएशन मुझे व्यक्तिगत सफलता तो देता, लेकिन समाज पर इतना बड़ा प्रभाव नहीं डाल पाता। इसलिए मैंने तय किया कि इस कीमती समय को सिविल सेवा की मजबूत तैयारी में लगाऊंगा। इस दौरान मैंने घर पर ही अनुशासन के साथ सेल्फ-स्टडी शुरू की:NCERT की किताबें दोबारा पढ़ीं, रोज द हिंदू/प्रभात खबर/दैनिक जागरण पढ़ता और नोट्स बनाता, ऑनलाइन लेक्चर्स और पिछले साल के पेपर्स सॉल्व करता, साथ ही अपनी कम्युनिकेशन और एनालिटिकल स्किल्स सुधारने के लिए किताबें (जैसे भारत का संविधान, भारतीय अर्थव्यवस्था) गहराई से पढ़ीं।
मुझे लगता है कि यह समय व्यर्थ नहीं गया, बल्कि इसने मुझे ज्यादा परिपक्व, फोकस्ड और समाज की वास्तविकताओं को समझने वाला बनाया – जो एक अच्छे प्रशासक के लिए सबसे जरूरी है।"
आंसर 2 (अगर पार्ट-टाइम काम या सोशल एक्टिविटी की):
"सर,
ग्रेजुएशन के बाद मैंने सोचा कि अगर तुरंत जॉब या आगे की पढ़ाई करूंगा तो वह मुझे सिविल सेवा के लक्ष्य से दूर ले जाएगा। इसलिए मैंने इसे प्राथमिकता दी। हालांकि, समय का पूरा उपयोग करने के लिए मैंने:कुछ महीनों तक लोकल कोचिंग में बच्चों को पढ़ाया, जिससे मेरी खुद की पढ़ाई का रिवीजन होता रहा और कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हुई,
गांव/मोहल्ले में स्वच्छता अभियान या बच्चों को फ्री ट्यूशन जैसे छोटे सोशल वर्क में हिस्सा लिया,
बाकी समय पूरी तरह सेल्फ-स्टडी पर लगाया – स्टैंडर्ड बुक्स, मॉक टेस्ट और करंट अफेयर्स।
यह अनुभव मुझे किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक समझ दे रहा है, जो आगे प्रशासन में बहुत काम आएगा।"
आंसर 3 (अगर फैमिली या आर्थिक कारण थे – सावधानी से):
"सर,
ग्रेजुएशन के बाद घर की कुछ जिम्मेदारियां थीं, इसलिए फुल-टाइम जॉब या बाहर जाकर आगे की पढ़ाई तुरंत संभव नहीं थी। लेकिन मैंने इस समय को व्यर्थ नहीं जाने दिया। मैं घर पर ही रहकर सिविल सेवा की तैयारी पर फोकस किया – रोज 8-10 घंटे पढ़ाई, न्यूजपेपर, मैगजीन्स और ऑनलाइन रिसोर्सेज का इस्तेमाल। साथ ही घर की मदद करते हुए लोकल स्तर पर लोगों की समस्याएं (जैसे सरकारी योजनाओं की जानकारी न होना) करीब से देखीं और समझीं। यह अनुभव मुझे ग्राउंड रियलिटी की गहरी समझ दे रहा है, जो एक प्रशासक के लिए किताबों से ज्यादा मूल्यवान है।"
अगर इस बार भी सेलेक्शन नहीं होता तो क्या करेंगे?
Answer-1 (अगर यह आपका पहला/दूसरा अटेम्प्ट है)
"सर/मैम, सिविल सेवा मेरा सपना है और मैं इसे अपनी जिंदगी का मिशन मानता हूं। अगर इस बार सेलेक्शन नहीं होता, तो मैं निराश नहीं होंगा, बल्कि अपनी कमियों का विश्लेषण करूंगा – जैसे मेन्स की आंसर राइटिंग, इंटरव्यू की बॉडी लैंग्वेज या करंट अफेयर्स की गहराई। मैं फिर से पूरी तैयारी के साथ अगले अटेम्प्ट में बैठूंगा। साथ ही, तैयारी के paralel में कोई वैकल्पिक करियर ऑप्शन जैसे शिक्षण, सोशल वर्क या स्टेट PSC की अन्य परीक्षाएं भी देख सकता हूं, ताकि समय का सदुपयोग हो। लेकिन मेरा मुख्य फोकस सिविल सेवा पर ही रहेगा, क्योंकि मुझे विश्वास है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से सफलता जरूर मिलेगी।"
Answer-2 (अगर कई अटेम्प्ट दे चुके हैं):
"सर,
यह मेरा ...वां अटेम्प्ट है और हर बार मैंने खुद में सुधार देखा है। अगर इस बार भी नहीं होता, तो मैं इसे अंत नहीं मानूंगा। मैं अपनी गलतियों (जैसे टाइम मैनेजमेंट या स्पेसिफिक सब्जेक्ट) का गहराई से विश्लेषण करूंगा, मॉक इंटरव्यू और आंसर राइटिंग प्रैक्टिस बढ़ाऊंगा। मैं फिर कोशिश करता रहूंगा, क्योंकि सिविल सेवा सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम है। बैकअप के तौर पर मैं शिक्षण या NGO से जुड़ सकता हूं, जहां मैं समाज के लिए योगदान दे सकूं, लेकिन सिविल सेवा को कभी नहीं छोड़ूंगा। कई सफल अधिकारी जैसे ... (कोई उदाहरण, जैसे रोमन सैनी या टीना डाबी जो कई अटेम्प्ट बाद सफल हुए) ने भी कई कोशिशें कीं।"
Answer-3 (अगर बैकअप प्लान मजबूत है):
"सर,
सिविल सेवा मेरी पहली पसंद है क्योंकि मैं बिहार की समस्याओं (जैसे शिक्षा, गरीबी, बाढ़) को प्रशासनिक स्तर से सुलझाना चाहता हूं। अगर नहीं होता, तो मैं असफलता को सीख मानकर आगे बढ़ूंगा। मैं अपनी ग्रेजुएशन/स्किल्स का उपयोग करके शिक्षण (कोचिंग/स्कूल) या सोशल सेक्टर में काम कर सकता हूं, जहां भी समाज सेवा कर सकूं। लेकिन मैं नियमित रूप से BPSC/UPSC की तैयारी जारी रखूंगा, क्योंकि यह मेरा पैशन है।"
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