Jaspal Rajput

Jaspal Rajput एडवोकेट जसपाल राजपूत (jassu )writer

 #जन्मदिन_विशेष..भले मोदी से आपको लाख शिकायते हो !.भले मोदी से हजारों प्रश्न हो !.किन्तु मोदी एक ऐसी शख्सियत हैं ! जिसे ...
17/09/2025

#जन्मदिन_विशेष..

भले मोदी से आपको लाख शिकायते हो !.
भले मोदी से हजारों प्रश्न हो !.
किन्तु मोदी एक ऐसी शख्सियत हैं ! जिसे नजरअंदाज नही किया जा सकता !.

चाहे आप मोदीभक्त हो ! आलोचक हो या अन्धविरोधी !.
परन्तु केंद्र में आपके मोदी ही रहेंगे !.
यही इस "रहस्यमयी" शख्स की "पहचान" बन चुकी हैं !.
यही इस शख्स की ताकत है !.

मोदी हर बार चौकाते हैं वे आपको चुनोती देते हैं उन्हें समझने की. उनके अगले कदम की आहट को सुनने की.
किन्तु मोदी की चाल आपको समझ आये तब तक शह-मात हो चुकी होती है.

मोदी दो विचारधाराओं की शतरंज के वो खिलाड़ी है जो विरोधी को चाल चलने की पूर्ण स्वतंत्रता देते हैं.
किन्तु जब तक मोदी की चाल विरोधी को समझ आये तब तक खेल समाप्त हो चुका होता है.

चाहे वो नोटबन्दी जैसा विशाल ह्रदय वाला निर्णय हो, 370 जैसा 56 इंची फैसला, राममंदिर निर्माण जैसा स्वप्निय क्षण, CAA, चीन की आँख में आँख डालकर घर में घुसकर धमक देना, पाकिस्तान को उसी के घर में घुसकर मारना और अमेरिका को टैरिफ पर मुंहतोड़ जवाब देना.
ये सब उनके हिमालयीन व्यक्तित्व के विराट स्वरूप की गवाही देते है.

पूर्व सरकारों में जो 370, राममंदिर, नोटबन्दी, तीन तलाक, खुले से शौचमुक्त, CAA, पाकिस्तान में सर्जिकल/एयर स्ट्राइक, चीन की आंख में आंख डालना, अमेरिका को टक्कर देना, जापान को पछाड़कर चौथी अर्थव्यवस्था बनना जैसे कार्य असम्भव से लगते थे.
उन कार्यो को मोदी सरकार ने मात्र 11 वर्षो में पूर्ण कर दिया.

मोदी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत विरोधियों द्वारा फेंके गए पत्थरों से सीढ़ी बनाकर लक्ष्य तक पहुंच जाना है जो हर किसी के बस में नही होता.

मोदी के विराट व्यक्तित्व को समझने के लिए उनके 24 वर्षो के राजनीतिक सँघर्ष को समझना होगा. जिसे उन्होनें अकेले अपने दम पर लड़ा.
मुसाफिर अकेला चलता गया, कारवाँ जुड़ता गया.

2002 से "मोदी विरोधी नरेटिव" बनाकर विगत कई वर्षो तक टुकड़े गैंग(लिब्रल्स, अर्बन नक्सल, वामपंथी) मोदी के पीछे हाथ धोकर पड़ी रही.
कांग्रेस ने भी कोई कोर-कसर नही छोड़ी.
मोदी के ऊपर झूठे आरोप लगाकर प्रत्येक मंच से उनका बहिष्कार किया गया.

कौन भूल सकता है वह समय जब भारत के भीतर ही बैठे देशविरोधी मानसिकता वाली बुद्धिजीवी जमात ने अपने ही देश के मुख्यमंत्री को अमेरिका में बैन करने हेतु अमेरिका को चिट्ठी लिखी. मोदी अमेरिका में बैन भी हुए.

ऐसा कोई क्षेत्र, मोर्चा नही छोड़ा गया जहां मोदी का विरोध नही किया गया हो.
विरोधियों ने उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग कर गुजरात तक सीमित कर दिया.

चौतरफ़ा हमलों के विरूद्ध मोदी अकेले दम पर लड़ते रहे.
उस वक्त सोशल मीडिया नही था.
ये वो दौर था जब आपको पता भी नही था मोदी कितने कठिन दौर से गुजर रहे होंगे.

लेकिन जैसे मानो ये शख्स कुछ अलग ही मिट्टी का बना हुआ था.
सभी हमलों को झेलकर मोदी वैसे ही निखरकर सामने आ गए जैसे आग में तपकर कुंदन निखरता है.

आज मोदी का स्वागत वही अमेरिका व्हाइट हाउस में कर रहा है जिसने कभी उनपर बैन लगाया था.

मोदी का सम्मान दुनियाभर के मंच कर रहे है और मोदी को अलग-थलग करने का षड्यंत्र रचने वाले विरोधी खुद एक कोने में अलग-थलग पड़े कुंठा में जी रहे हैं.

आप भले मोदी को पसंद करें या नापसंद !.
आपको मोदी से लाख उम्मीदे हो या नाराज़गी !.
लेकिन आप इस शख्स को नजरअंदाज कतई नही कर सकते !.

हमें पूर्ण विश्वास है मोदी जी आगे भी प्रत्येक मोर्चो पर सफल रहेंगे !.
विशेषरूप से देश के अंदरूनी हालातों पर हमें उनसे कहीं अधिक आशाएं हैं !.

ईश्वर यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी को स्वस्थ्य रखे. लम्बी आयु प्रदान करें व सफल बनाए.

मोदी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं..

11/09/2025

कुछ लड़के बड़े अच्छे लगते हैं
जब मां से पूछते हैं ,
"आम का अचार है क्या ?"

कुछ लड़के जब कभी किसी लड़की को
कनखियों से देखने पर पकड़े जाते हैं,
तो शर्माकर, सकपकाकर , पकड़ने वाले से ही
पलटकर पूछते हैं "क्या हुआ ? कुछ भी तो नहीं !"
कसम से , अच्छे लगते हैं !

अच्छे लगते हैं वे सारे लड़के,
जो मंगलवार और शनिवार
मंदिर में प्रसाद चढ़ा,
मन ही मन सबकी राजी-खुशी
मांगा करते हैं , और मीठी बूंदी और पेड़े
घर -मुहल्ले में बिना नागा बाँटा करते हैं !

अच्छे लगते हैं वे सारे लड़के
जो चाकलेट, चिप्स के पैकेट खोलकर
कर देते हैं सबसे पहले
अपनी माँ और बहन के आगे,
और कहते हैं , "लो, आपका फेवरेट है न ये वाला !"

कुछ लड़के सचमुच अच्छे लगते हैं जब,
ऐमी.वाई.बंटाई के गानों से बेखबर ,
सुनते हैं किशोर कुमार और मोहम्मद रफी को,
और गुनगुनाते हैं, कहीं दूर जब दिन ढल जाए !

वे सारे लड़के सच में बहुत अच्छे लगते हैं,
जो अक्सर गोलगप्पे वाले से कहते हैं ,
"भैया मुझे अबकी मीठा पानी वाला देना !"

अच्छे लगते हैं ऐसे सारे लड़के ,
क्योंकि इनके व्यक्तित्व में कुछ न कुछ तो
ऐसा जरूर होता है , जो इन्हें भविष्य में
एक बेहतर पुरुष बनने में मदद करता है🌹❤️

हाल ही में चेतेश्वर पुजारा के रिटाइरमेंट पर विराट कोहली ने कहा कि पुजारा के होने से मुझे रिलीफ़ रहता था। इसपर पुजारा ने भ...
30/08/2025

हाल ही में चेतेश्वर पुजारा के रिटाइरमेंट पर विराट कोहली ने कहा कि पुजारा के होने से मुझे रिलीफ़ रहता था। इसपर पुजारा ने भी वापस पीठ खुजा दी कि विराट जैसा प्लेयर अगर ये बात कह रहा है तो सिर माथे, बाकी उसके होने से हमें आराम रहता था।

जबकि कड़वा सच तो यही है न कि पुजारा भाई को टेस्ट खेले 2 साल हो चुके थे। कोई उन्हें खिला ही नहीं रहा था तो रिटाइरमेंट लिया न लिया क्या फ़र्क पड़ा। और पुजारा ही क्यों, अपने यहाँ बड़े प्लेयर्स ऐसे ही रिटाइर होते हैं, धोनी साहब भी इंस्टाग्राम पर रिटाइर हुए ग्राउन्ड पर नहीं, रैना भी पीछे पीछे रिटाइर हो गए कोई खिला नहीं रहा था।

पर आर-आश्विन इन सबसे अलग रहे। उन्होंने बीच सीरीज़ में रिटाइरमेंट लिया कि ससुर मुझे रेगुलर नहीं खिलाओगे तो मैं बेंच पर बैठने के लिए नहीं हूँ। यही हाल उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स में भी देखा कि कुछ तो उनकी गेंदबाजी की पिटाई बहुत हुई, कुछ चेन्नई खुद ही केन्या की तरह खेली तो उन्होंने यहाँ से भी हाथ जोड़ लिया।

अब आश्विन का कहना है कि वह बाकी देशों की लीग्स में हाथ आजमाएंगे। हालाँकि यहाँ भी बात न बने तो आश्विन को कॉमेंट्री में घुस जाना चाहिए। उनके जैसा ब्लन्ट पर नालिजेबल कामन्टैटर अब नहीं मिलता। हाँ, हिन्दी थोड़ी इल्ले है, पर अंग्रेज़ी में धूम मचा सकते हैं।

इसमें भी मज़ा आए कि इंग्लैंड से सीरीज़ हो और नासिर हुसैन के साथ आर आश्विन कामन्टेरी करते मिलें, मुझे यकीन है कि आधे मैच पर पहुँचते पहुँचते ग्राउन्ड से ज़्यादा कॉममेंटरी बॉक्स में कैमरा दिखाई देगा।

खैर, मज़ाक से इतर, मुझे आश्विन हमेशा एक समझदार, चतुर चालाक गेंदबाज होने के साथ साथ अग्रेसिव और जुझारू खिलाड़ी लगे, ऐसे दमदार खिलाड़ी अब आने बंद हो गए हैं।

टेस्ट आंकड़ों में आश्विन हमेशा लिजेंड कहलायेंगे

#सहर

27/05/2025

सच कहूँ तो मुझे तेज प्रताप यादव कभी बुरे नहीं लगे। तेजप्रताप एक सम्पन्न परिवार में जन्मे और पले बढ़े सीधे सादे व्यक्ति हैं जिनकी रुचि कला में है, अभिनय में है, बांसुरी में है... वे मासूम हैं, राजनीति के लिए नहीं बने। राजनीति में होने या बने रहने के लिए जिस कुटिलता की जरूरत होती है, वह तेजप्रताप में नहीं है।
तेजू भइया विशुद्ध धार्मिक व्यक्ति हैं। मन्दिर मन्दिर घूमते रहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण में उनकी आस्था किसी से छिपी नहीं है। कभी कभी भगवान शिव या भगवान श्रीकृष्ण का गेटअप लेकर स्वांग करते भी दिख जाते हैं। एक बार राम मंदिर के सम्बंध में किसी पत्रकार ने पूछा तो उन्होंने डांटते हुए कहा था- "मन्दिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहां बनेगा जी? मन्दिर जरूर बनना चाहिए..." विपक्ष का कोई प्रभावशाली व्यक्ति शायद ही कभी ऐसे बोल पाया हो। और शायद यही कारण है कि वे कभी अपनी पार्टी में भी फिट नहीं बैठ सके... उनका विरोध तो होता ही रहा है।
पार्टी लाइन पर बने रहने के लिए भले उन्होंने दर्जनों बार उल्टे पुल्टे बयान दिए हों, पर वह सब बनावटी ही होता है और लगता भी है। राजनीति में होने की अपनी मजबूरियां भी हैं। खैर...
तेज प्रताप का ऐश्वर्या से जो विवाह हुआ वह बड़े घरों के उन पारंपरिक विवाहों की तरह ही था जिसमें बच्चों की मर्जी नहीं पूछी जाती थी। जिसमें केवल और केवल हैसियत देखी जाती थी। दोनों बड़े राजनैतिक परिवार थे, सो रिश्ता जोड़ लिया गया। हालांकि वह रिश्ता तब भी बेमेल था। ऐश्वर्या नए दौर की उच्च शिक्षित लड़की थीं और अपने तेजू भइया सीधे सादे... वह तेज प्रताप के साथ ठीक नहीं हुआ था। ठीक तो ऐश्वर्या के साथ भी नहीं हुआ था, और इसी के कारण दोनों का ही जीवन परेशानियों से भर गया। बेहतर होता कि दोनों परिवार साथ बैठ कर इस गलती को सुधारने का प्रयास करते, पर यह भी नहीं हुआ। बात वही है कि राजनीति की अपनी मजबूरियां होती हैं...
अब परिदृश्य में ऐश्वर्या की जगह पर अनुष्का हैं। यदि चार दिन में उपजी कड़ियों को जोड़ कर देखें तो यह सच ही लगता है कि इनका सम्बंध रहा है और शायद है भी... यदि ऐसा है तो इस रिश्ते को बहुत पहले ही पारिवारिक स्वीकृति मिल जानी चाहिये थी, क्योंकि वे कोई अपराध तो नहीं ही कर रहे हैं। ऐश्वर्या के साथ तो गृहस्ती की गाड़ी पटरी पर आने की संभावना थी नहीं, तो क्यों न लड़के की ही बात सुन ली गयी? लड़की स्वजातीय भी है। पर बात फिर वहीं अटकती है कि राजनीति की अपनी दिक्कतें हैं...
तेजू को पार्टी से निकालना तो विशुद्ध राजनैतिक निर्णय है, पर उस लड़के के व्यक्तिगत जीवन का क्या? माता पिता को कुछ निर्णय बच्चों की गृहस्थी को ध्यान में रख कर भी लेने चाहिए...
कुल मिला कर तेजप्रताप जी के साथ ठीक तो नहीं ही हो रहा। बाकी देखते हैं। हमारी तो कोई सुनेगा नहीं😊

 #लुबना_कुरैशी उस दिन सड़क पर इंतज़ार कर रही... अंधेरा घिर चुका था... चारों तरफ़ काफरों का इलाक़ा...लेकिन लुबना को अपने ताला...
27/05/2025

#लुबना_कुरैशी उस दिन सड़क पर इंतज़ार कर रही... अंधेरा घिर चुका था... चारों तरफ़ काफरों का इलाक़ा...
लेकिन लुबना को अपने ताला चाबी पर यक़ीन था... दीन की पक्की, पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ हो ही नहीं सकता था

तभी पास आकर एक बड़ी गाड़ी रुकी.... गाड़ी का कांच नीचे खिसका मनोहर सेठ ने पूछा... इलाक़ा सुनसान है... आप मोहतरमा अकेली... यहाँ रुकना ठीक नहीं... चलिए आपको जहाँ तक कहें, छोड़ देता हूँ...

लुबना हिचकिचाई... यूँ अंजान अकेले आदमी की गाड़ी में...

पर ताला चाबी साथ था...दीन की पक्की, पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ हो ही नहीं सकता था..

लुबना गाड़ी में बैठ गयी.... गाड़ी आगे बढ़ाते मनोहर ने गियर बदला और गलती से लुबना की जाँघ पर हाथ फिर गया.... शरीर में करंट सा लगा... अब्बू की हरकत याद आ गई...

बुर्के के भीतर आग दहक़ गयी... सहन न हुईं ये गर्मी तो लुबना ने बुर्क़ा उतार दिया....

मनोहर सेठ के सामने जो खूबसूरत नज़ारा था, उसकी ऑंखें फटी की फटी रह गयी.... और एक हल्की चर्र की आवाज के साथ पैंट की चैन खुद खुल गयी दबाव के चलते...

लुबना ये देख डर गयी...
पर ताला चाबी साथ था...

दीन की पक्की पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ हो ही नहीं सकता था....

मनोहर सेठ ने नीचे से ऊपर तक लुबना को घूरा और बोला... कमाल हो तुम... में तुम्हें पूरा देखना चाहता हूँ... सिर्फ दो मिनट को कपडे हटा दो 5000 तुम्हारे...

दो मिनट के पांच हज़ार....
कम न थे..

लुबना को बस गुनाह का डर था....

फिर सोचा.. रात है अंधेरा है.. गाड़ी के अंदर हूँ... इसे भी ढंग से न दिखेगा सब... खाली कपडे दो मिनट को हटा दोबारा पहन लुंगी... वैसे भी ताला चाबी साथ था...

दीन की पक्की पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ हो ही नहीं सकता था

लुबना ने जल्दी जल्दी कपडे उतारे... टांगो पर टांग चढ़ा शर्मगाह ढकी... तो हथेलियों से छातियाँ...
और बोली जल्दी से देख लो.. और 5000 दो..

मनोहर सेठ ने देखा तो एक आग भीतर दहक गयी
बिना देर किये बोल पड़ा... ए हुश्न परी, ए जान ए जहाँ, बस तुम्हारा संग ए मरमर बदन छू भर लेने दो.... रकम दोगुनी...

लुबना ने कुछ सोचा और बोली ठीक है..... मनोहर का हाथ लुबना को छूने लगा...

हाथों से ढके इलाके खोल दिए... तो टांगे फैला दी
पर लुबना को पता था ताला चाबी साथ था....

दीन की पक्की पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ हो ही नहीं सकता था

हाथों की जगह ज़ुबान ने ली.... और लुबना को चूमते मनोहर सेठ ने कहा "1 लाख... बस अब रोकना मत...."

लुबना ने फिर सोचा.... इस खेत का मालिक कुछ देर को ये बनना चाहता है... कीमत भी दे रहा है
भडुओं के चोए चचा और खाला के लोंडे तो निहारी खिला जोत लेते थे.... इस काफर की जेब खाली करना भी तो आखिर एक दीन का ही काम है....

और हाँ में सर हिलते ही मनोहर शुरू हो गया...

गाड़ी की कम जगह बार बार डिस्टर्ब कर रही थी....
मनोहर ने हौले से कहा.... हाईवे सुनसान है...

खुला आसमान है... हवा बड़ी सुहानी है... जोश में जवानी है.... आओ जरा इस सब का ताला चाबी की बनाई इस कायनात के बीच मज़ा लें...

लुबना ने फिर सोचा.... और फिर कार से बाहर निकल आयी...
ताला चाबी साथ था.....

दीन की पक्की पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ हो ही नहीं सकता था...

बस यहीं काफरों ने एक पर्दानशी को धोखा दे दिया
हाईवे पर कैमरे लगा रखे थे..

वर्ना

दीन की पक्की पर्दे की पाबंद लुबना... ऐसा वैसा कुछ कर ही नहीं सकती थी....

🤔🤔🤔

Ajai Singh Talk

"जिसकी खामोशी में भी गूंज होती है – नाम है महेंद्र सिंह धोनी"कभी रांची की गलियों में दौड़ते हुए एक लड़का अपने सपनों का प...
27/05/2025

"जिसकी खामोशी में भी गूंज होती है – नाम है महेंद्र सिंह धोनी"

कभी रांची की गलियों में दौड़ते हुए एक लड़का अपने सपनों का पीछा कर रहा था। कंधों पर ना तो कोई बड़ा नाम था, ना कोई भारी समर्थन… बस आँखों में विश्वास था और दिल में जुनून। तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि ये लड़का एक दिन उस मंच पर खड़ा होगा जहाँ पहुँचने का सपना देश के लाखों बच्चे देखते हैं।

जब उसने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा, तो नज़रों ने सवाल किया – "ये लंबे बालों वाला, ये अजीब शॉट्स खेलने वाला किस्म का खिलाड़ी है?" मगर उसके बल्ले ने हर सवाल का जवाब दिया।

श्रीलंका के खिलाफ जब 183 रन बनाकर नाबाद लौटा, तब दुनिया ने पहली बार महसूस किया – ये सिर्फ एक बल्लेबाज़ नहीं, ये एक चेतावनी है उन सभी को जो उसे हल्के में ले रहे थे। हर छक्के के साथ वो ये कह रहा था – "मैं आया हूँ, और अब यहीं रहूँगा।"

2007 में टीम इंडिया जब वर्ल्ड कप के पहले दौर में ही बाहर हो गई, तब देश का मन टूटा। और फिर वही लड़का कप्तान बना — जो न तो पारंपरिक था, न ही दिखावे में विश्वास रखता था। लेकिन जब उसी ने युवाओं से भरी टीम को लेकर टी-20 वर्ल्ड कप जीत लिया, तो पूरी दुनिया को समझ आ गया – धोनी कप्तान बनने नहीं आया, वो युग बदलने आया है।

कंधों पर बोझ नहीं, भरोसा होता था। वो कप्तान जो मुस्कुराकर मैदान में उतरता था, और शांति से सबको चौंका देता था।
वो विरोधी को हराता नहीं था, बल्कि सोचने पर मजबूर कर देता था।

ऑस्ट्रेलिया को उसी की ज़मीन पर हराकर 2008 की ट्राई सीरीज़ जीतना,
2011 में 28 साल का सूखा खत्म कर वर्ल्ड कप भारत लाना,
और फिर मैदान पर वो आखिरी छक्का…
वो सिर्फ एक शॉट नहीं था, वो एक युग का ताजपोशी थी।

धोनी की सबसे बड़ी खूबी यही थी – जब सब घबरा जाते थे, वो शांत रहता था।
जब सब चिल्लाते थे, वो सिर्फ आँखों से बोलता था।
वो जानता था कि कप्तानी सिर्फ फैसले लेने का नाम नहीं, सबको साथ लेकर चलने की कला है।

उसने कभी खुद को आगे नहीं रखा, वो टीम को आगे करता था।
बड़े फैसले लिए – कभी सीनियर को बैठाया, कभी युवाओं को मौका दिया। आलोचना हुई, लेकिन धोनी ने हमेशा वही किया जो टीम के लिए सही था।

वो कप्तान नहीं, एक सैनिक था – जो मैदान में चुपचाप लड़ता था।
गेंद को बिना देखे स्टंप कर देना, पलक झपकते ही बल्लेबाज़ को पवेलियन भेज देना – ये सिर्फ कौशल नहीं, ये धोनी होने की परिभाषा थी।

फिर वो समय भी आया, जब उसने खुद कप्तानी छोड़ दी। किसी शोर के बिना, किसी विदाई समारोह के बिना – क्योंकि उसे नाम नहीं, काम पसंद था।

आज वो मैच खत्म होने के बाद बेटी के साथ खेलता है, दर्शकों से मिलकर हँसता है, मैदान पर बैठकर बस खेल को महसूस करता है – जैसे कह रहा हो, “अब मैंने सब किया, अब तुम्हारी बारी है।”

जब भी मैदान में उतरता है, स्टेडियम खड़ा हो जाता है।
क्योंकि धोनी अब सिर्फ खिलाड़ी नहीं, एक एहसास बन चुका है।

उसने ना सिर्फ ट्रॉफियाँ दी, बल्कि एक टीम बनाई जो उसके बाद भी मजबूत खड़ी रहे।
उसने साबित किया कि लीडरशिप सिर्फ मैच जिताना नहीं, विरासत छोड़ जाना है।

एक दिन वो रिटायर होगा – शायद बिना शोर के। लेकिन उस दिन सिर्फ फैंस नहीं रोएंगे… वो बाइस गज की पट्टी, वो विकेट, वो बाउंड्री लाइन… सब खामोश हो जाएँगे।

क्योंकि धोनी के जाने का मतलब होगा – एक युग का अंत।

जब भी कोई विकेट के पीछे खड़ा होगा, जब भी कोई कप्तान शांत दिमाग से फैसला लेगा –
लोग याद करेंगे कि पहले एक माही था… जिसने सबकुछ सिखा दिया।

और तब दुनिया कहेगी —
क्रिकेट चलता रहेगा, लेकिन "धोनी" दोबारा नहीं आएगा।

27/05/2025

स्त्री के कमबैक के कई रास्ते हैं। ताकतवर मर्द से दोस्ती से लेकर बढ़िया स्नैपचैट फ़िल्टर लगाकर इमेज पोस्टिंग। हजारो उपलब्ध कंधे। इत्यादि।

मगर मर्द का कमबैक का एक ही रास्ता है पुरुषार्थ। कोई मर्द अगर एकबार गड्ढे में गिरा जाए तो कोई हाथ बढ़ाने नहीं आता।वहाँ से ऊपर उसका पुरुषार्थ ही वापस ला सकता है। अपनों के द्वारा दी हूई मानसिक पीड़ा से या
जब लगे की आप नशे की गिरफ्त में जा रहे हो या मानसिक तनाव, या अन्य व्यसनो की तरफ बढ़ रहे हो जब लोग ये सोचने लगे की अब आप खोखले हों चुके हों जब लगे की अब सफऱ ख़त्म हों चूका है 🌹बस यहीं से शुरु होता है आपके जीवन का सबसे महत्पूर्ण सफर उठिये खुद को महसूस कीजिये 🌹खुद को पहचानिये 🌹और जगाइये अपने पुरुषार्थ को आप नशे के लिए नहीं बने, आप मानसिक तनाव के लिए नहीं बने, आप किसी के हाथ के खिलौने होने के लिए नहीं बने आप खुद को यूँ धीरे धीरे ख़त्म करने के लिए नहीं बने 🌹इसीलिए मेरे यारा अपने अंदर छुपे हुए पुरुषार्थ को जगाइये ये जीवन जो सिर्फ एक बार मिला है उसे जीवंत कीजिये सफल होइए अनंत काल के लिए 🌹jassu

I have reached 100 followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉
07/10/2023

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