08/09/2025
हमारे असली रोल मॉडल
हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िंदगी का असल मक़सद अल्लाह की तौहीद (एक खुदा की बंदगी, इबादत के पैगाम) को पूरी इंसानियत तक पहुँचाना और इंसानों की ज़िंदगी को सही रास्ते पर लगाना था, क़ुरआन और हदीस से हमें साफ़ मालूम होता है कि आपके मक़सद-ए-हयात के कुछ अहम पहलू ये हैं।
अल्लाह की तौहीद की दावत
इंसान को shirk (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) से बचाकर अल्लाह की इबादत पर लाना। “और हमने हर उम्मत में एक रसूल भेजा कि अल्लाह की इबादत करो और ताग़ूत से बचो।” (सूरह नहल 36)
इंसानियत की रहनुमाई
सही और गलत का फर्क सिखाना,लोगों को अंधेरों (जाहिलियत, गुमराही, नाइंसाफी) से निकालकर रोशनी (इल्म, इमान, इंसाफ़) की तरफ़ लाना।
“तुम्हारे लिए किताब उतारी ताकि तुम लोगों को अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ़ लाओ।” (सूरह इब्राहीम: 1)
अख़लाक़ की तकमील (Character Building)
आपने फ़रमाया: मुझे सिर्फ़ अच्छे अख़लाक़ की तकमील के लिए भेजा गया है।
(हदीस, मुअत्ता मालिक)
यानि आपकी ज़िंदगी का बड़ा मक़सद इंसानों के अंदर इंसानियत, सच्चाई, रहम, इंसाफ़ और अदब पैदा करना था।
रहमत बनकर आना
कुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया: हमने आपको सारे जहानों के लिए रहमत बनाकर भेजा। (सूरह अल अंबिया 36)
यानि आपकी ज़िंदगी सिर्फ़ मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहमत है।
नाइंसाफी मिटाना और इंसाफ़ क़ायम करना
ज़ुल्म, जहालत, और इंसानी तफरीक़ (जात-पात, रंग, नस्ल) को मिटाना और सबको बराबरी का पैग़ाम देना।
आख़िरी ख़ुत्बे (हुज्जतुल विदा) में आपने साफ़ फ़रमाया:
“किसी अरबी को अजमी़ पर, न गोरे को काले पर कोई फ़ज़ीलत नहीं, सिवाए तक़्वा के।
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िंदगी का मक़सद इंसान को अल्लाह की पहचान दिलाना, अच्छे अख़लाक़ सिखाना, रहमत और इंसाफ़ का पैग़ाम देना, और इंसानियत को कामयाबी की तरफ़ ले जाना था।
हम अपने अंदर झांक कर देखें कि हमने अपने प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताए हुए रास्ते पर कितना अमल किया है और कर रहे हैं और हमारी जिंदगी कितनी उनके बताए हुए तरीकों पर गुज़र रही है।
🖋️ मोहम्मद साहिब हसन
छात्र- दारुल उलूम नदवतुल उलेमा लखनऊ उत्तर प्रदेश