HAPPY Childhood

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TV Serial-Show: HAPPY CHILDHOOD {Only for Kids Education…}

ABOUT US: The First Part of TV Serial/ Show, “SHIKSHA KE STAMBH” at Diary of SLCPL Productions!

At Kuldeep Singh Rajput with SLCPL FAN CLUB TV Show: HAPPY KIDS at Childhood {Only for Kids Education…}
ABOUT US: The 1st Part of TV Serial-Show, “SHIKSHA KE STAMBH” at Diary of SLCPL Productions! By : Kuldeep Singh Rajput {https://www.facebook.com/kuldeepsinghrajputonline}

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HAPPY CHILDHOOD

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Mission Behaviorism मिशन व्यावहारिकता

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ॐ सनातन ॐ OM Sanatan
4 Mission Behaviorism मिशन व्यावहारिकता

बच्चों से माता पिता का व्यवहार कैसा हो ?
पीस इन द होम लीग नामक एक संगठन बना कर शिकागो में कुछ बच्चों ने निश्चय किया है कि वे अपने घरों में शान्ति का वातावरण बनाये रखने के लिए प्रयत्न और आवश्यकतानुसार सत्याग्रह करेंगे। बच्चों के इस प्रकार के संगठन और उनके इस संकल्प को बाल स्वभाव कहकर उपेक्षा की जा सकती है किन्तु मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया जाय तो पता चलेगा कि इस तरह के प्रयत्न के पीछे बच्चों की कौन सी आन्तरिक पीड़ा उद्भासित हो रही है।

बात यह है कि इन दिनों यूरोप के अन्य भागों की तरह शिकागो में भी चमक दमक, रूप- सज्जा, वासना विलासिक जीवन में इस तरह ओछापन बढ़ता जाता है, तो उससे पारिवारिक बन्धन, दाम्पत्य प्रेम और परस्पर आत्मीयता के भाव नष्ट होने लगते हैं, स्वार्थ के साथ कलह, कपट, कुविचार और दुष्कर्मों का प्रवाह बढ़ जाता है। कहना न होगा कि इसका सबसे कटु प्रभाव सौम्य एवं सुकोमल चित्त बालकों पर ही पड़ता है। वे अपने माता- पिता के प्रति ही नहीं समाज के प्रति भी उदासीन होने लगते है, यही वृत्ति धीरे- धीरे उद्दण्डता और अपराध में परिवर्तित हो जाती है।
इस प्रकार के प्रयास का मूल संकल्प ऐसे ही कारणों से भोले- भाले बच्चों के मन में पैदा हुआ। इस लीग के प्रधान १४ वर्षीय बालक हीदर ग्रे ने बताया कि हमारे माता- पिता आपस में झगड़ते हैं या अपने अपने स्वार्थ को लेकर कलह और मनोमालिन्य उत्पन्न करते है तो घर में जो क्षोभ और दुराशा का वातावरण बनता है उससे हमें घुटन अनुभव होती है। यदि एक का पक्ष ले तो दूसरे के कड़ुवे बने, जबकि दोनों ही बाहें अपनी हैं। माँ से बिछुड़े तो पिता के स्नेह, प्रेम और आदर से वंचित, पिता से हृदय जोड़ कर रखे तो माँ के वात्सल्य सौम्यता और दुलार को खोये। हमारे लिए दोनों ही स्थितियाँ कष्टकारक हैं इसलिए अब बुराई के विरुद्ध सत्याग्रह करने का निश्चय किया है।

हीदर ग्रे जब अपने परिवार और बालकों की इस मनोदशा का वर्णन कर रहा था तो भावातिरेक से बार बार उसके आँसू भर आते थे, गला रुँध जाता था। इससे पता चलता था, बच्चों के लिए प्रेम स्नेह, शान्ति और सौम्यतापूर्ण व्यवहार का कितना अधिक महत्त्व है, इन रस भरी भावनाओं का आकर्षण हो तो बच्चों को महान व्यक्तित्व बड़ी सुगमता से प्रदान किया जा सकता है।

पारिवारिक जीवन में दुराग्रहों, दुष्प्रवृत्तियों के बढ़ने की यह स्थिति कितनी चिन्ताजनक है और उस दिशा में अभिभावकों की कितनी जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए, इसका अनुमान इस समाचार से होगा। बच्चों ने निश्चय किया है कि झगड़ालू माता- पिताओं को यह दण्ड देंगे कि उनके बच्चे उनके प्रत्येक झगड़े के बाद एक सप्ताह तक बात नहीं करेंगे। यह दण्ड यद्यपि बालकों की आत्म पवित्रता के अनुरूप ही है, पर इससे उन अभिभावकों पर कितना प्रभाव पड़ेगा कहा नहीं जा सकता, यदि वे स्वयं स्थिति की गम्भीरता को नहीं अनुभव करते और अपनी मनोवृत्तियाँ बदलने के लिए स्वेच्छा से राजी नहीं होते।

यदि पति- पत्नी एक समझौता कर ले कि अपने बच्चों को पोषण, विकास और उन्हें सज्जन, उदार, सद्गुणी बनाने के लिए वे परस्पर अत्यधिक प्रेम, सौजन्यता, उदारता और आत्मीयता का जीवन जियेंगे और भोग- वासना आदि कलह बढ़ाने वाले, प्रेम शृंखलित करने वाले कारणों को जन्म नहीं देंगे तब तो बच्चों का यह सत्याग्रह भी सफल हो सकता है अन्यथा बालक तो बालक ही हैं, इससे अधिक बेचारे और क्या कर सकते हैं ?

यह बात सुनने में तो जरूर कुछ अटपटी सी लगेगी कि कुछ अभिभावक प्रेम के नाम पर बच्चों से दुश्मनी करते हैं। अर्थात् उनका प्रेम प्रदर्शन कुछ इस प्रकार का होता है जिससे कि उन्हें बड़ी हानि होती है |

कुछ अभिभावकों का स्वभाव होता है कि वे बच्चों के खाने पीने का बड़ा ध्यान रखते हैं। ध्यान इस माने में नहीं कि उसने ठीक समय पर खाना खाया है या नहीं। वह कोई ऐसी चीजें तो नहीं खा- पी रहा है जो उसके स्वास्थ्य के लिए अहितकर हो। ध्यान इस बात का रखते है कि क्या बात है कि बच्चे ने आज ठीक से नहीं खाया, क्या कुछ पसन्द नहीं आया? न हो तो कुछ अच्छी चीज बनवा दी जाये या बाजार से ही कुछ बढ़िया चीज ले दी जाये।

ऐसा करने से बच्चे चटोरे और तरह- तरह की चीजें खाने के आदी हो जाते हैं। उनको स्वास्थ्य और अस्वास्थ्य की चीजों का ज्ञान नहीं रहता वे अपव्ययी और बाजारू हो जाते हैं, जिससे उन्हें घर की बनी सामान्य और साधारण चीजें अरुचिकर हो जाती हैं।
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/folder/Bal_nirman/Balko_se_mata_pita_ka_vaywhar

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