21/04/2025
🕊️ एक युग का अंत, करुणा की विरासत की शुरुआत।
88 वर्ष की आयु में दुनिया के पहले लैटिन-अमेरिकी पोप फ्रांसिस का निधन — लेकिन उनका संदेश अब भी जीवित है।
LGBTQIA+ अधिकारों, जलवायु परिवर्तन और शरणार्थी मुद्दों पर खुलकर बोले,
उन्होंने चर्च को सिर्फ बदला नहीं, उसे और मानवीय बना दिया।
स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उनका संघर्ष और सेवा अभूतपूर्व रहा।
13 मार्च 2013 को 266वें पोंटिफ़ बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया।
🙏 चलिए उनकी स्मृति और उनके अद्वितीय योगदान को साझा करें।
उनके विचारों को आगे बढ़ाएं — करुणा, सुधार और समर्पण की भावना के साथ। 🌍