14/09/2025
⚖️ दिल्ली उच्च न्यायालय: 'सप्तपदी' समारोह के प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में वैध हिंदू विवाह की धारणा कम नहीं होती।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि वैध विवाह स्थापित करने के लिए हर मामले में सप्तपदी का अनुष्ठान अनिवार्य नहीं है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना है कि 'सप्तपदी' समारोह के प्रत्यक्ष साक्ष्य के अभाव मात्र से वैध हिंदू विवाह की धारणा कम नहीं हो जाती।
"यह स्वीकार किया जाता है कि पक्षकार एक साथ रह रहे थे, हालाँकि अलगाव की तिथि विवादित है, और पक्षकारों के यहाँ एक बच्चा भी हुआ था। जब ऐसे दंपत्ति के यहाँ एक बच्चा पैदा होता है, तो यह प्रबल धारणा बनती है कि विवाह वैध है...। चूँकि यह साबित करने का दायित्व अपीलकर्ता का है कि कोई सप्तपदी नहीं की गई थी, इसलिए प्रतिवादी के विरुद्ध विवाह समारोहों को प्रदर्शित करने वाली विवाह पुस्तिका प्रस्तुत न करने के लिए प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यह मानते हुए भी कि ऐसी पुस्तिका प्रस्तुत की गई थी, यह निर्णायक रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता कि सप्तपदी की गई थी या नहीं," न्यायालय ने कहा।
तदनुसार, अपील खारिज कर दी गई।
वाद शीर्षक: विनोद कुमार बनाम सुश्री गीता (2025)
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