MD Raqeeb Ansari

  • Home
  • MD Raqeeb Ansari

MD Raqeeb Ansari this pase made for educational purpose and updated the political scenario in the country Thai is India.

With Samsher Diwana – I just got recognized as one of their rising star 🎉💫🌟🎊
07/10/2025

With Samsher Diwana – I just got recognized as one of their rising star 🎉💫🌟🎊

09/09/2025

What amazing possibilities await?
02/09/2025

What amazing possibilities await?

मोहम्मद शाहीन के टाइम लाइन से साभार-मैंने भी पढ़ा !! आप भी पढ़ें।। किसी साथी ने लिखा है-----------महान शासक औरंगजेब द्वा...
21/02/2025

मोहम्मद शाहीन के टाइम लाइन से साभार-

मैंने भी पढ़ा !! आप भी पढ़ें।। किसी साथी ने लिखा है-----------

महान शासक औरंगजेब द्वारा किया गया एक ऐसा इन्साफ , जिसे देश की जनता से छुपाया गया l

औरंगज़ेब काशी बनारस की एक ऐतिहासिक मस्जिद (धनेडा की मस्जिद) यह एक ऐसा इतिहास है जिसे पन्नो से तो हटा दिया गया है लेकिन निष्पक्ष इन्सान और हक़ परस्त लोगों के दिलो से (चाहे वो किसी भी कौम का इन्सान हो) मिटाया नहीं जा सकता, और क़यामत तक मिटाया नहीं जा सकेगा…।औरंगजेब आलमगीर की हुकूमत में काशी बनारस में एक पंडित की लड़की थी जिसका नाम शकुंतला था,

उस लड़की को एक मुसलमान जाहिल सेनापति ने अपनी हवस का शिकार बनाना चाहा, और उसके बाप से कहा के तेरी बेटी को डोली में सजा कर मेरे महल पे 7 दिन में भेज देना…. पंडित ने यह बात अपनी बेटी से कही, उनके पास कोई रास्ता नहीं था और पंडित से बेटी ने कहा के 1 महीने का वक़्त ले लो कोई भी रास्ता निकल जायेगा…।

पंडित ने सेनापति से जाकर कहा कि, “मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं के मैं 7 दिन में सजाकर लड़की को भेज सकूँ, मुझे महीने का वक़्त दो.” सेनापति ने कहा “ठीक है! ठीक महीने के बाद भेज देना” पंडित ने अपनी लड़की से जाकर कहा “वक़्त मिल गया है अब?”लड़की ने मुग़ल सहजादे का लिबास पहना और अपनी सवारी को लेकर दिल्ली की तरफ़ निकल गई, कुछ दिनों के बाद दिल्ली पहुँची, वो दिन जुमे का दिन था,

और जुमे के दिन औरंगजेब आलमगीर नमाज़ के बाद जब मस्जिद से बहार निकलते तो लोग अपनी फरियाद एक चिट्ठी में लिख कर मस्जिद की सीढियों के दोनों तरफ़ खड़े रहते, और हज़रत औरंगजेब आलमगीर वो चिट्ठियाँ उनके हाथ से लेते जाते, और फिर कुछ दिनों में फैसला (इंसाफ) फरमाते, वो लड़की (शकुंतला) भी इस क़तार में जाकर खड़ी हो गयी,

उसके चहरे पे नकाब था, और लड़के का लिबास (ड्रेस) पहना हुआ था, जब उसके हाथ से चिट्ठी लेने की बारी आई तब हज़रत औरंगजेब आलमगीर ने अपने हाथ पर एक कपडा डालकर उसके हाथ से चिट्ठी ली… तब वो बोली महाराज! मेरे साथ यह नाइंसाफी क्यों? सब लोगों से आपने सीधे तरीके से चिट्ठी ली और मेरे पास से हाथों पर कपडा रख कर ???

तब औरंगजेब आलमगीर ने फ़रमाया के इस्लाम में ग़ैर मेहरम (पराई औरतों) को हाथ लगाना भी हराम है… और मैं जानता हूँ तू लड़का नहीं लड़की है…शकुंतला बादशाह के साथ कुछ दिन तक ठहरी, और अपनी फरियाद सुनाई, बादशाह हज़रत औरंगजेब आलमगीर ने उससे कहा “बेटी! तू लौट जा तेरी डोली सेनापति के महल पहुँचेगी अपने वक़्त पर…” शकुंतला सोच में पड गयी के यह क्या?

वो अपने घर लौटी और उसके बाप पंडित ने पूछा क्या हुआ बेटी? तो वो बोली एक ही रास्ता था मै हिन्दोस्तान के बादशाह के पास गयी थी, लेकिन उन्होंने भी ऐसा ही कहा कि डोली उठेगी, लेकिन मेरे दिल में एक उम्मीद की किरण है, वो ये है के मैं जितने दिन वहाँ रुकी बादशाह ने मुझे 15 बार बेटी कह कर पुकारा था… और एक बाप अपनी बेटी की इज्ज़त नीलाम नहीं होने देगा…।

फिर वह दिन आया जिस दिन शकुंतला की डोली सजधज के सेनापति के महल पहुँची, सेनापति ने डोली देख के अपनी अय्याशी की ख़ुशी फकीरों को पैसे लुटाना शुरू किया…। जब पैसे लुटा रहा था तब एक कम्बल-पोश फ़क़ीर जिसने अपने चेहरे पे कम्बल ओढ रखी थी… उसने कहा “मैं ऐसा-वैसा फकीर नहीं हूँ, मेरे हाथ में पैसे दे”,

उसने हाथ में पैसे दिए और उन्होंने अपने मुह से कम्बल हटा तो सेनापति देखकर हक्का बक्का रह गया क्योंकि उस कंबल में कोई फ़क़ीर नहीं बल्कि औरंगजेब आलमगीर खुद थे…। उन्होंने कहा के तेरा एक पंडित की लड़की की इज्ज़त पे हाथ डालना मुसलमान हुकूमत पे दाग लगा सकता है, और औरंगजेब आलमगीर ने इंसाफ फ़रमाया 4 हाथी मंगवाकर सेनापति के दोनों हाथ और पैर बाँध कर अलग अलग दिशा में हाथियों को दौड़ा दिया गय
और सेनापति को चीर दिया गया… फिर आपने पंडित के घर पर एक चबूतरा था उस चबूतरे के पास दो रकात नमाज़ नफिल शुक्राने की अदा की, और दुआ कि के, “ऐ अल्लाह! मैं तेरा शुक्रगुजार हूँ, के तूने मुझे एक ग़ैर इस्लामिक लड़की की इज्ज़त बचाने के लिए, इंसाफ करने के लिए चुना…। फिर औरंगजेब आलमगीर ने कहा “बेटी! ग्लास पानी लाना!”
लड़की पानी लेकर आई, तब आपने फ़रमाया कि:“जिस दिन दिल्ली में मैंने तेरी फरियाद सुनी थी उस दिन से मैंने क़सम खायी थी के जब तक तेरे साथ इंसाफ नहीं होगा पानी नहीं पिऊंगा…। ”तब शकुंतला के बाप (पंडित जी) और काशी बनारस के दूसरे हिन्दू भाइयों ने उस चबूतरे के पास एक मस्जिद तामीर की, जिसका नाम “धनेडा की मस्जिद” रखा गया… और पंडितों ने ऐलान किया के ये बादशाह औरंगजेब आलमगीर के इंसाफ की ख़ुशी में हमारी तरफ़ से इनाम है… और सेनापति को जो सजा दी गई वो इंसाफ़ एक सोने की तख़्त पर लिखा गया था जो आज भी धनेडा की मस्जिद में मौजूद है।

19/02/2025

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार द्वारा गुटखा और पान मसाले पर लगाया गया बैन एक साहसिक कदम माना जा सकता है। यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि तंबाकू और पान मसाले के सेवन से कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि, इस तरह के प्रतिबंध अक्सर व्यावसायिक हितों और अवैध व्यापार को लेकर विवादों में घिर जाते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले को कितनी सख्ती से लागू किया जाता है और क्या इससे राज्य में तंबाकू उत्पादों के उपभोग में वास्तविक गिरावट आती है।

16/02/2025

अकबर और राणाप्रताप की लड़ाई का इतिहास हमे ऐसे पढ़ाया जाता है जैसे कि अकबर और प्रताप आमने सामने लड़ रहे थे। राणा प्रताप के साथ लड़ाई हल्दी घाटी में हुई थी जहाँ अकबर कभी गया ही नही। अकबर की ओर से मान सिंह लड़ रहे थे, उनकी सेना में राजपूत सिपाही थे और शहजादा सलीम की पठान सेना भी थी। राणा प्रताप के फ़ौज़ की कमान हकीम खान सूर के हाथ में थी जिनकी सेना में पठान और राजपूत दोनों थे। .. तो क्या इस लड़ाई को हिन्दू और मुसलमान की लड़ाई कहां जा सकता हैं जैसा की हमे बताने की कोशिश की जाती है?

अकबर अपने राज्य का विस्तार कर रहे थे जिसमे सभी छोटी रियासते शामिल हो रही थी, ये कोई प्रेमसंबंध जैसा नही था बल्कि फौजी ताकात से किया जा रहा था। अकबर आपने मातहत राजाओं को पद भी देता था, राणा प्रताप को पांच हजारी का पद ऑफर किया गया था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था लेकिन जब उनके पुत्र राणा अमर सिंह को अकबर के पुत्र जहांगीर ने दस हजारी का ओहदा दिया तो वे मुग़ल साम्राज्य में शामिल हो गए।
अब सोचिये की प्रताप को राष्ट्रीय हीरो, राष्ट्र का प्रतीक और हिंदुत्व का प्रतीक बनाने का क्या औचित्य है ?

Dr-Salman Arshad की वाल से

25/08/2024

बाबर और राणा सांगा

1. इब्राहिम लोदी के खिलाफ लड़ने के लिए राणा सांगा ने अपने दोस्त बाबर से मदद मांगी
2. दोस्ती के नाते बाबर तैयार हो गया और लोदी को हराकर वापस लौट जानेवाला था
3. पर अंतिम समय पर सांगा ने मक्कारी दिखाई और लड़ने ही नहीं आया
4. बाबर ने चिढ़कर हिन्दुस्तान से न लौटने का फैसला लिया और राणा को उसकी धोखेबाजी का मज़ा चखाया

बाबर 'बाबरनामा' में साफ लिखता है कि राणा सांगा ने उसे आमंत्रित किया और धोखा दिया
और क्या सबूत चाहिए देशद्रोह का
बाबर झूठ क्यों बोलेगा!

खानवा जंग में बाबर से हारने के बाद राणा सांगा जख़्मी हालत में निकलने में सफल हुए, जंग में मुग़लों से तो बच गए लेकिन राणा सांगा को उनके ही राजपूत सामंतों ने ज़हर देकर मार डाला।

राणा सांगा की मौत के बाद उनके पत्नी रानी कर्णावती ने बेटे उदय सिंह को गद्दी पर बैठाकर सत्ता संभालने की कोशिश की लेकिन ज़्यादा दिन शासन नही कर सकीं राजपूत सामन्तों ने रानी कर्णावती को सत्ता से हटाने के लिए गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह को निमन्त्रण भेजा। सुल्तान बहादुर शाह चित्तोड़ पर हमले के निकल पड़ा, ये ख़बर रानी कर्णवती को भी पहुच गयी।

रानी कर्णावती ने राखी भेजकर मुग़ल बादशाह हुमायूं से मदद मांगी, चिट्ठी मिलते ही हुमायूं ने अपना बंगाल अभियान अधूरा छोड़कर चित्तोड़ का रुख किया। वह जमाना हाथी-घोड़ों की सवारी का था सेना को साथ लेकर सैकड़ों किमी की दूरी तय करना आसान नहीं था और उसमें वक्त लगना लाज़मी भी था।

हुमायूं चित्तौड़ पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 8 मार्च 1535 में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने चित्तौड़गढ़ के किले पर हमला कर दिया था। रानी कर्णवती ने जौहर कर आग में समा चुकी थीं। जब यह खबर बादशाह हुमायूं तक पहुंची तो उन्हें रानी कर्णावती को न बचा पाने का बहुत दुख हुआ। हुमायूं ने बहादुर शाह पर हमला किया फ़तह हासिल की और पूरा शासन रानी कर्णवती के उत्तराधिकारी विक्रमजीत सिंह को सौंप दिया।

******
पृथ्वी के सबसे निकट जिस ग्रह पर जीवन की सम्भावना है अगर वहाँ उन्नत सभ्यता है तो वह इस समय खानवा का युद्ध देख रही होगी

कैसे तोमरों ने राणा सांगा का बीच युद्ध में साथ छोड़ा और जीतता हुआ राणा हार गया।
हारता हुआ बाबर जीत गया।
*****
बड़प्पन यह है कि आप दुश्मन की भी प्रशंसा करें
'बाबरनामा' में बाबर लिखता है, "मैंने राणा सांगा जैसा वीर योद्धा जीवन में नहीें देखा, वह अद्भुत वीर योद्धा है"

लेकिन कुछ वक़्त के बाद फिर से राजपूत सामन्तों जिसमे राणा सांगा के भाई बनवीर सिंह भी शामिल थे उन्होंने अपने भतीजे विक्रमादित्य सिंह का क़त्ल कर दिया।

लेकिन कुछ वक़्त के बाद फिर से राजपूत सामन्तों जिसमे राणा सांगा के भाई बनवीर सिंह भी शामिल थे उन्होंने अपने भतीजे विक्रमादित्य सिंह का क़त्ल कर दिया।

इस ऐतिहासिक घटना में आखिर कौन देशभक्त, कौन वफादार, कौन दुश्मन, कौन जेहादी?...

कौन लुटेरा, कौन गद्दार और कौन आतंकी ?

प्रमाणित इतिहास तो यही है। वाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के इतिहास के विद्यार्थी नोट कर सकते हैं।।

en.m.wikipedia.org/wiki/Battle_of…

12/03/2024

धर्म के आधार भेदभाव करता है और इस तरह यह असंवैधानिक है. धर्म के आधार पर नौकरी और आरक्षण नहीं मिल सकता तो नागरिकता कैसे मिल सकती है? यह कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.
कानून बनाने के बाद 4 साल तक सरकार क्या कर रही थी? चुनाव के ठीक पहले नियम बनाकर सरकार ध्रुवीकरण करना चाहती है और चुनाव में फायदा उठाना चाहती है. कोई urgency नहीं थी नियम बनाने की.
हमारा विरोध कल था, आज है और कल भी रहेगा.

06/02/2024

चार कदम चोर से, 14 कदम लतखोर से और 74 कदम चुगलखोर से हमेशा दूरी बनाकर रखें।

13/01/2024

क्रोनोलॉजी समझिए! यह नया भारत है। इस नए भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ अपराध के तरीक़े भी नए हैं। पहले कोई 'धार्मिक यात्रा' मुस्लिम मौहल्लों से निकालने का रूट तैयार किया जाता है, फिर उस में बरंगदल जैसे संगठनों से प्रशिक्षण प्राप्त 'धर्म रक्षक' घुसा दिए जाते हैं। यात्रा शूरू होती है। ज़ोर-ज़ोर से डीजे बजता है और उस पर भड़काऊ नारेबाज़ी होती है, यात्रा मुस्लिम मौहल्लों में पहुंचती है, भड़काऊ नारेबाज़ी आपत्तिजनक 'गानों' के शोर से मुसलमानों को उकसाने का षडयंत्र होता है। विवाद होता है, फिर वह विवाद झड़प में तब्दील होकर बात पत्थरबाज़ी तक पहुंचता है। उसके बाद कर्फ्यू! 'धार्मिक यात्री' सकुशल अपने घर पहुंच जाते हैं।

अब यहां से मुसलमानों के ख़िलाफ प्रशासनिक अपराध का सिलसिला शुरू होता है। जहां विवाद हुआ उसके आस-पास मुख्य मार्ग पर बने ठीक-ठाक घरों को पहले ही चिन्हित कर लिया जाता है। फिर उस घर के किसी सदस्य पर उपद्रव करने या उपद्रवियों को 'शरण' देने का आरोप लगाकर जेल भेजा जाता है, और उस मकान को 'अवैध' बताकर उस पर बुलडोज़र चला दिया जाता है। इस तरह तलवार लहराते हुए भड़काऊ नारेबाज़ी करते 'धर्म रक्षक' दंगों के आरोप में मुकदमों में फंसने से बचे रहते हैं, और 'दूसरे' संप्रदाय के लोग उपद्रव के आरोप में मुक़दमों में जेल जाते हैं, उनकी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा पुलिस, कचहरी वकीलों की फीस में खर्च होता है, और यदि मकान पर बुलडोज़र चल गया है तो फिर ज़िंदगी को पटरी पर लाने का सवाल उनके सामने आकर खड़ा हो जाता है। इस तरह 'नए भारत' का नारा देने वाले दल की सरकार द्वारा प्रशासन के हाथ में थमाई गई लाठी से 'सांप' भी मर रहा है और 'लाठी' भी 'सलामत' है। बुलडोज़र का 'न्याय' इस नए भारत में मुसलमानों को आतंकित करने का नया तरीक़ा है। अभी तक 'धार्मिक यात्राओं' के दौरान जितने भी उपद्रव हुए हैं, उनमें गिरफ्तारियों से लेकर बुलडोज़र तक की कार्रावाई 'दूसरे' संप्रदाय के लोगों पर ही हुई है। क्या ऐसा संभव है कि सबकुछ एकतरफा ही हो?

ताजा मामल मध्य प्रदेश के शाजापुर का है, जहां आठ जनवरी को धार्मिक यात्रा निकाली गई थी, आरोप है कि जब यात्रा मस्जिद के पास पहुंची तो उस पर पथराव हो गया था। इसके बाद भाजपा विधायक अरुण भीमावद अपने समर्थकों के साथ पुलिस थाने के सामने इकट्ठा हुए और भाषण देते हुए बुलडोजर चलाने का भरोसा दिलाया, फिर क्या था। सत्ताधारी दल का विधायक बुलडोज़र चलवाने का भरोसा दिलाए प्रशासन बुलडोज़र ना चलाए, यह भला कैसे संभव है! प्रशासन ने विधायक के 'आदेश' को अमल में लाते हुए रहीम पटेल के घर को 'अवैध' बताकर गिरा दिया। विधायक भी खुश, उन्हें चुनने वाली जनता भी खुश और 'धर्म रक्षक' भी खुश! विधायक को कौन बताए कि वो विधानसभा क्षेत्र की समस्त जनता का विधायक है, प्रशासन को संविधान का पाठ कौन पढ़ाए? अधिकारियों को कौन याद दिलाए कि उन्होने पदभार संभालने से पहले अनुराग एंव द्वेष के बिना कार्य करने की शपथ भी ली हुई है! जब 'दूसरे' समाज को आतंकित करना ही तरक्की की सीढ़ी बन जाए तब कैसी शपथ और कैसा संविधान! मालूम नहीं कब समझेगा बुलडोज़र 'रहीम' के घर पर ज़रूर चल रहा है लेकिन बुनियाद अदालत की कमज़ोर हो रही है। _copy

Address


Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when MD Raqeeb Ansari posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

  • Want your school to be the top-listed School/college?

Share