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Lakshmi Mani Shastri
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यह संस्था अनंत श्री विभूषित परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष् एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के द्वारा संस्थापित और संरक्षित है।
05/09/2021
परम पूज्य गुरुदेव भगवान जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष् एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के पावन प्राकट्योत्सव के शुभ अवसर पर साप्ताहिक उत्सव के द्वितीय दिवस पर महाराज श्री के सानिध्य में हिंगलाज सेना का सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें आज महाराज श्री ने सभी कार्यकर्ताओं को आदेश दिया है कि सेना के अन्य उद्देश्यों को पूर्ण करने के साथ साथ जैसे- *भारत नशा मुक्त हो* *भारतीय संस्कृति सुरक्षित हो* इसके साथ ही हमें यह भी संकल्प लेना है कि भारत में दहेज़ की कुप्रथा का उन्मूलन होना चाहिए।
भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए जगह जगह शिविर लगाए जांय।
18/07/2021
16 जुलाई 2021 को लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन और राष्ट्रीय अध्यक्ष समाज वादी पार्टी माननीय श्री अखिलेश यादव जी मिलना हुआ जिसमें परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष् एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर परम पूज्य गुरुदेव भगवान द्वारा संस्थापित और संरक्षित हिंगलाज सेना के मुख्य उद्देश्य(भारत नशा मुक्त हो) के विषय में चर्चा हुई।इस दौरान उत्तर प्रदेश को नशा मुक्त करने के लिए विशेष रूप से अध्यक्ष जी का ध्यान आकर्षित किया गया।सकारात्मक भेंट हुई।
*लक्ष्मी मणि शास्त्री*
राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंगलाज सेना
*अतुलितबलधामं*
*हेमशैलाभदेहम्*
आज हनुमज्जयंती है।और इसके साथ ही एक अतिशय सुन्दर सुयोग है कि आज मंगलवार भी है।क्यूंकि श्री हनुमान जी महाराज का अवतार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ।वायुपुराण के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी भी श्री हनुमज्जयंती के रूप में मनाई जाती है।
*कार्तिकस्यातSसितेपक्षे*
*चतुर्दशीं भौमवासरे*।
*मेषलग्नेSन्जनागर्भात्*,
*स्वयं जात:हर:शिव:*।।
कल्पभेद से दोनों ही हम सभी के लिए मान्य है।स्वयं भगवान शंकर ही श्री हनुमान जी महाराज के रूप में सेवक धर्म की महिमा को प्रकट करने के लिए प्रादुर्भूत हुए हैं। श्री हनुमान जी महाराज के गुणगणों का गान करना मुझ जैसे अल्पज्ञ के लिए अत्यंत कठिन है क्यूंकि सागर में गोता लगाने के लिए कुशल गोताखोर की आवश्यकता होती है।श्री आंजनेय का परम पावन चरित्र सागर के समान है।
*जय हनुमान ज्ञान गुन सागर*
उनका सौंदर्य, माधुर्य, औदार्य, भक्त वत्सलता,पराक्रम और श्री राघव के प्रति अनन्य प्रेम जैसे अनेक गुण ऐसे हैं जिनमें एक एक की चर्चा करें तो- *लघु मति मोर चरित अवगाहा* के अनुसार कठिन है। अतः आज इस अवसर पर मैं परम कारुणिक, भक्त वत्सल, श्री किशोरी जी के बबुआ, श्री राघव के दुलरुआ श्री हनुमान जी महाराज के पावन जन्मोत्सव पर उनके श्री चरणों में अनंत अनंत प्रणाम निवेदन करती हूं।और आप सभी भक्तों को श्री हनुमज्जयंती की बहुत बहुत बधाइयां।
*मइया अंजना तोहार बजरंगी*
*बड़ा जोरदार रामरंगी*
परम पूज्य गुरुदेव भगवान के श्री चरणों में श्री राम जन्मोत्सव के गीत की प्रस्तुति के साथ सुश्री नीलमणि जी और सुश्री लक्ष्मी मणि जी।
गीत की रचनाकार श्रीमती गीता पण्डेय हैं।
21/04/2021
श्री राम जन्मोत्सव
आज श्री राम नवमी है। आज से नौ लाख वर्ष पूर्व त्रेतायुग में आज ही दिन समस्त ग्रह तिथि वार आदि की अनुकूल स्थिति आने पर अथवा यूं कहें कि जिस प्रकार का कार्य उन्हें करना था उसके अनुकूल योग ग्रह आदि के एकत्रित होने पर अखिल ब्रह्माण्ड नायक पूर्णतम पुरुषोत्तम ने श्री अवध धाम में माता कौशल्या की गोद में महाराज चक्रवर्ती नरेन्द्र श्री दशरथ जी के महल में अपने अंशों के साथ चार रूपों में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत,और शत्रुघ्न के रूप में अवतार लिया।
नौमी तिथि मधुमास पुनीता
शुकल पक्ष अभिजित हरिप्रीता
तिथि वार आदि तो अनुकूल हुए ही देश,काल परिस्थिति सब अनुकूल हो गए।और उसी समय-
भए प्रकट कृपाला
प्रभु श्रीराम प्रकट हो गए।कुछ महानुभावों को ऐसी जिज्ञासा होती है कि ईश्वर का अवतार क्यूँ होता है??
जीव का जन्म तो प्रारब्ध के कारण होता है।लेकिन भगवान इस धरती पर क्यूँ आते हैं??जिनके एक संकेत मात्र से पृथ्वी, जल, सूर्य, चन्द्र मण्डल,नक्षत्र मण्डल सब नाचते रहते हैं।जिनके भय से वायु चलती है, जिनके भय से सूर्य तपता है।
सूर्यस्तपति मद्भयात्
सारे ग्रह नक्षत्र अपनी अपनी कक्षाओं में ही भ्रमण करते हैं कोई भी किसी की कक्षा का अतिक्रमण नहीं करता।भला उन परम पुरुष को इस धरती पर आकर अनेक प्रकार के कष्टों को सहन करने की क्या आवश्यकता है।इस संदर्भ में हमारे पूज्य गुरुदेव भगवान द्वि पीठाधीश्वर श्री शंकराचार्य जी महाराज कहते हैं कि भगवान का अवतार भी प्रारब्ध के कारण ही होता है।अंतर इतना ही है कि जीव का प्रारब्ध उसके अपने कर्मों के अनुसार बनता है और उसी आधार पर उसका जन्म होता है लेकिन भगवान का अवतार भक्तों के प्रारब्ध के अनुसार होता है।जैसे- महाराज मनू और शतरूपा जी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उनके पुत्र के रूप में आने का वरदान दिया तो उसके अनुसार भगवान को आना पड़ा।बहुत से ऋषि मुनि भगवत्साक्षात्कार के लिए तपस्या कर रहे थे उनका प्रारब्ध, साथ ही में रावण का प्रारब्ध। इन तमाम भक्तों और दुष्टों के प्रारब्धानुसार उन्हें सद्गति प्रदान करने के लिए ही भगवान अवतार ग्रहण करते हैं।और श्री राम के अवतार के पूर्व भी धर्म था,लेकिन वेदों और शास्त्रों में था परन्तु श्रीराम के अवतार के पश्चात वह धर्म साकार हो गया।अगर धर्म को प्रत्यक्ष रूप से कोई देखना चाहता हो तो वह श्री राम को देख ले उसे धर्म का दर्शन हो जाएगा।
रामो विग्रह वान धर्म:
धर्म ही मूर्तिमान होकर श्रीराम के रूप में लोक कल्याण की भावना से इस धराधाम पर आता है और अनेक प्रकार की लीलाओं के द्वारा लोक कल्याण करते हैं।
अब लेखनी को विराम देने से पूर्व
राम नौमी अवध की सुहावन लगे।
अवध नगरी बड़ी मनभावन लगे।।
इसके साथ ही आप सभी को श्री राम नौमी की हार्दिक बधाई।
लक्ष्मी मणि शास्त्री
राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंगलाज सेना
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